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भारत बना Apple का ग्लोबल एक्सपोर्ट हब: iPhone निर्यात पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार

PLI स्कीम, सप्लाई चेन में विविधता और भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी ने Apple के लिए भारत को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बना दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

एप्प्ल (Apple) के लिए भारत अब सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि एक मजबूत ग्लोबल एक्सपोर्ट बेस बनता जा रहा है. साल 2021 में भारत में iPhone उत्पादन शुरू होने के बाद 2025 में पहली बार देश से iPhone का निर्यात ₹2 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है. उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI). सप्लाई चेन का चीन से भारत की ओर शिफ्ट होना और भारतीय कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे की प्रमुख वजहें हैं.

2025 में रिकॉर्ड iPhone निर्यात

Apple के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत से iPhone का निर्यात 23 अरब डॉलर यानी करीब ₹2.03 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले लगभग 85 फीसदी ज्यादा है और Apple के भारत ऑपरेशंस के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है.

PLI स्कीम ने बदली Apple की रणनीति

भारत में लागू उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत Apple का फोकस घरेलू बिक्री के बजाय निर्यात बढ़ाने पर रहा है. इसका असर यह रहा कि कंपनी का iPhone निर्यात हर साल तेजी से बढ़ता गया. 2021 में जहां निर्यात ₹8,800 करोड़ था. वहीं 2022 में यह ₹36,234 करोड़ पहुंच गया. 2023 में यह आंकड़ा ₹74,000 करोड़ हो गया और 2024 में निर्यात ₹1.1 लाख करोड़ तक पहुंच गया.

2021 में शुरू हुआ था भारत में iPhone उत्पादन

PLI योजना की घोषणा के बाद 2020 में Apple ने अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन के साथ भारत में एंट्री की थी. हालांकि, कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा तनाव के चलते उत्पादन शुरू होने में देरी हुई. आखिरकार 2021 में भारत में iPhone का उत्पादन शुरू हुआ. जिसका बड़ा हिस्सा शुरुआत से ही निर्यात बाजार के लिए था.

चीन से भारत की ओर शिफ्ट होती सप्लाई चेन

2020 के बाद जब Apple ने चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई. तब भारत को एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा गया. सरकार ने प्रेस नोट 3 के तहत सख्त नियमों के बावजूद चीन की 14 कंपनियों को भारत में निवेश की मंजूरी दी. इसके साथ ही Apple ने 2023 से भारतीय कंपनियों को भी अपनी सप्लाई चेन में शामिल करना शुरू किया.

भारतीय MSME सेक्टर को मिला बड़ा फायदा

सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं था. लेकिन इसका फायदा भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मिला. खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (MSME) को तकनीक हस्तांतरण, गुणवत्ता मानकों और स्किल डेवलपमेंट का अवसर मिला, जिससे घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत हुई.

टाटा ग्रुप की एंट्री से बदली तस्वीर

Apple के भारतीय इकोसिस्टम में टाटा समूह पहला बड़ा घरेलू कॉरपोरेट बना. टाटा ने 2023 में कर्नाटक में विस्ट्रॉन का iPhone प्लांट खरीदा और इसके बाद तमिलनाडु में पेगाट्रॉन की फैक्टरी में बहुलांश हिस्सेदारी हासिल की. इससे भारत में Apple की मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी और मजबूत हुई.

भारतीय कंपनियों की बढ़ती भागीदारी

2024 के दौरान कई भारतीय कंपनियां Apple की सप्लाई चेन में कलपुर्जा और सब-असेंबली सप्लायर के रूप में शामिल हुईं. इनमें मदरसन, हिंडाल्को, विप्रो पारी, जैबिल, एक्वस, एसएफओ टेक्नोलॉजीज और भारत फोर्ज प्रमुख हैं. फिलहाल Apple के सप्लायर्स भारत के आठ राज्यों में फैले हुए हैं.

स्मार्टफोन वैल्यू एडिशन में तेज बढ़ोतरी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में वैल्यू एडिशन बढ़कर 2025 तक 19 फीसदी हो गया है. यह उस 40–45 फीसदी वैल्यू एडिशन का करीब आधा है. जिसे चीन ने लगभग 18 वर्षों में हासिल किया था.

पुर्जा विनिर्माण योजना से और बढ़ेगी रफ्तार

सरकार द्वारा शुरू की गई नई इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जा विनिर्माण योजना को इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. इससे अगले चार वर्षों में वैल्यू एडिशन में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है. इस योजना में Apple के कई सप्लायर्स हिस्सा ले रहे हैं. जिससे न केवल स्मार्टफोन बल्कि इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.


 


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