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भारत और अर्जेंटीना के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीक पर समझौता, तीन साल का कार्ययोजना पैक्ट साइन
भारत और अर्जेंटीना के बीच यह समझौता कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, टिकाऊ विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत और अर्जेंटीना ने कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई मजबूती देने के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2025 से 2027 तक की तीन वर्षीय द्विपक्षीय कार्ययोजना को औपचारिक रूप दिया है. यह समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अर्जेंटीना के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी (INTA) के बीच हुआ. इस मौके पर आयोजित समारोह में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया. इस समझौते का आदान-प्रदान भारत के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउसिनो के बीच हुआ. यह साझेदारी 2025 की शुरुआत में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत पर आधारित है.
टिकाऊ खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर पर फोकस
कार्ययोजना के तहत टिकाऊ और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर सहयोग किया जाएगा. इसमें प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, फसल और पशु जैव प्रौद्योगिकी, और खेती की दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल कृषि उपकरणों का विकास प्रमुख रूप से शामिल है.
जर्मप्लाज्म एक्सचेंज और ऑयलसीड्स पर सहयोग
समझौते का एक अहम हिस्सा पौधों के आनुवंशिक संसाधनों यानी जर्मप्लाज्म के आदान-प्रदान से जुड़ा है. इसके तहत सोयाबीन, सूरजमुखी, मक्का और विभिन्न फलों की किस्मों पर सहयोग किया जाएगा. साथ ही ऑयलसीड्स और दलहन वैल्यू चेन को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
आधुनिक मशीनरी और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम
दोनों देश कृषि मशीनीकरण के क्षेत्र में भी साथ काम करेंगे. इसमें जीरो टिलेज, ड्रोन के इस्तेमाल और बागवानी से जुड़ी बुनियादी संरचना के विकास को शामिल किया गया है. इसका मकसद खेती को अधिक आधुनिक और लागत प्रभावी बनाना है.
रिसर्च, ट्रेनिंग और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान
इस साझेदारी को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए संयुक्त शोध परियोजनाएं, विशेषज्ञ स्तर की बातचीत और संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे. ग्रीनहाउस उत्पादन, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, प्रिसीजन लाइवस्टॉक फार्मिंग और वेटरनरी डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण पर जोर दिया जाएगा.
पशु और पौध स्वास्थ्य पर भी सहयोग
कार्ययोजना में पशु और पौध स्वास्थ्य को लेकर भी ठोस कदम शामिल हैं. दोनों देश फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के उन्मूलन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियों पर काम करेंगे. इसके अलावा टिड्डी निगरानी को मजबूत करने के लिए भी साझा अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिस अपनाई जाएंगी.
हर साल होगी प्रगति की समीक्षा
समझौते को प्रभावी बनाने के लिए दोनों पक्षों ने तय किया है कि सभी गतिविधियों की सालाना निगरानी और समीक्षा की जाएगी. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सहयोग केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी ठोस नतीजे सामने आएं.
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