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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: रूबियो बोले, भारत और अमेरिका के बीच होगा टिकाऊ और फायदेमंद ट्रेड समझौता
इस समझौते से व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं. साथ ही दोनों देशों के बीच कारोबारी माहौल और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 50 minutes ago
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश जल्द ही एक बड़ी ट्रेड डील को अंतिम रूप दे सकते हैं. नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद रूबियो ने कहा कि प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ साबित होगा. हालांकि दूसरी ओर टैरिफ विवाद और अमेरिकी व्यापार नियमों में बदलाव को लेकर 500 बिलियन डॉलर के संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल भी उठने लगे हैं. बता दें, इन दिनों रूबियो भारत दौरे पर आए हैं और रविवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.
रविवार को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.
व्यापार से लेकर रक्षा तक कई मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. रूबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में “जबरदस्त प्रगति” हुई है और अब ऐसा समझौता तैयार करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है, जो दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को मजबूत करेगा.
जल्द भारत आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
अमेरिकी विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि बहुत जल्द एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा. इस दौरान प्रस्तावित ट्रेड डील को आगे बढ़ाने और अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी. इस बयान को दोनों देशों के बीच तेज होती बातचीत और समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
भारत को बताया अहम व्यापारिक साझेदार
रूबियो ने भारत को अमेरिका का बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बताया. उन्होंने कहा कि भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के साथ मजबूत और संतुलित व्यापारिक संबंध बनाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसे ट्रेड एग्रीमेंट चाहता है, जिनसे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिले.
500 बिलियन डॉलर ट्रेड डील पर नई बहस
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित 500 बिलियन डॉलर के ट्रेड और खरीद समझौते को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है. रूबियो ने दावा किया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खरीदारी कर सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. यह खरीद मुख्य रूप से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और एग्रीकल्चर सेक्टर पर केंद्रित हो सकती है.
टैरिफ विवाद से बढ़ी चिंता
हालांकि ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने इस प्रस्तावित समझौते को लेकर चिंता जताई है. संस्था का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ नियमों में हालिया बदलाव के बाद इस डील की बुनियाद कमजोर पड़ सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर दोनों देशों के बीच टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर सहमति नहीं बनती, तो प्रस्तावित समझौते को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
ट्रंप प्रशासन की नीति पर क्या बोले रूबियो?
संयुक्त प्रेस वार्ता में रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी व्यापार व्यवस्था को फिर से संतुलित करना चाहता है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक फायदा मिल सके. रूबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को नए तरीके से मजबूत और संतुलित करने की दिशा में काम कर रहा है.
क्या हो सकता है ट्रेड डील का असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारत और अमेरिका के बीच यह संभावित ट्रेड डील सफल होती है, तो इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है. इस समझौते से व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं. साथ ही दोनों देशों के बीच कारोबारी माहौल और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
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