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Ind-Ra की चेतावनी: FY26 में ऊर्जा मांग की रफ्तार धीमी, लेकिन मध्यम अवधि में ग्रोथ के संकेत बरकरार

पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा, दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास ही आने वाले वर्षों में सेक्टर की स्थिरता तय करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 27 के लिए भारत के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर अपना आउटलुक न्यूट्रल बनाए रखा है. एजेंसी का कहना है कि FY26 में मांग की रफ्तार भले ही धीमी रही हो, लेकिन मध्यम अवधि में क्षमता विस्तार और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के चलते सेक्टर में मजबूत वृद्धि की संभावना बनी हुई है.

FY26 में ऊर्जा मांग की गति घटी

Ind-Ra के मुताबिक, लंबे मॉनसून और औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती के चलते FY26 में ऊर्जा मांग की वृद्धि घटकर 2% रह गई. यह FY25 में 4.1% और FY24 में 7.4% थी. हालांकि एजेंसी का अनुमान है कि मध्यम अवधि में ऊर्जा मांग सालाना आधार पर 5–7% की दर से बढ़ सकती है.

थर्मल पावर की पकड़ बनी रहेगी मजबूत

रिपोर्ट के अनुसार, थर्मल पावर का दबदबा आगे भी बना रहेगा. FY27 में थर्मल प्लांट लोड फैक्टर (PLF) 65–68% रहने का अनुमान है, जबकि FY26 के पहले आठ महीनों में यह 63% और FY25 में 69% था. Ind-Ra का कहना है कि थर्मल पावर में नई क्षमता जोड़ने की रफ्तार तेज हो रही है, क्योंकि पावर परचेज अवॉर्ड्स में तेजी आई है.

रिन्यूएबल एनर्जी के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

Ind-Ra ने चेताया कि सोलर और विंड एनर्जी के विकास में कुछ अहम बाधाएं बनी हुई हैं. इनमें ट्रांसमिशन कॉरिडोर में देरी, अपर्याप्त स्टोरेज क्षमता, उम्मीद से कम विंड PLF और सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं.

Ind-Ra के एसोसिएट डायरेक्टर समंतकुमार झा ने कहा कि 9MFY26 में सोलर और विंड की संयुक्त क्षमता वृद्धि 34GW रही है और पूरे साल में यह 40GW तक पहुंच सकती है. हालांकि राजस्थान, गुजरात और दक्षिण भारत में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से प्रोजेक्ट स्तर पर कैश फ्लो और रिटर्न प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सोलर एनर्जी की पूरी खपत के लिए खासतौर पर बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स का कमीशन होना बेहद जरूरी है.

उत्पादन क्षमता में मजबूत इजाफा

भारत ने 9MFY26 में कुल 42.5GW की नई उत्पादन क्षमता जोड़ी. इसमें 30.2GW सोलर, 4.5GW विंड, 4GW थर्मल, 3.2GW बड़े हाइड्रो और 0.6GW न्यूक्लियर शामिल हैं. Ind-Ra का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष में थर्मल क्षमता 8–10GW और नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता 40–45GW तक बढ़ सकती है.

सोलर, विंड और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स पर स्थिर आउटलुक

एजेंसी ने सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए रेटिंग आउटलुक स्थिर रखा है. इसके पीछे मजबूत उत्पादन, समय पर भुगतान और बेहतर लिक्विडिटी को वजह बताया गया है. मार्च 2025 के बाद से सोलर क्षमता में 28.5% की वृद्धि दर्ज की गई है और पूरे साल में 35–40GW नई सोलर इंस्टॉलेशन का अनुमान है. वहीं विंड एनर्जी में शुद्ध क्षमता वृद्धि 5–6GW रहने की संभावना है, जिससे दिसंबर 2025 तक कुल क्षमता 54.5GW हो जाएगी.

थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स को भी स्थिर माना गया है, जिन्हें दीर्घकालिक PPA, बेहतर PLF, कोयले की लागत पास-थ्रू व्यवस्था और 58GW की निर्माणाधीन क्षमता से समर्थन मिल रहा है.

स्मार्ट मीटरिंग और ट्रांसमिशन में देरी

ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में उपलब्धता 98% से ऊपर और कलेक्शन रेशियो 95% से ज्यादा रहने के कारण आउटलुक स्थिर रखा गया है. FY26 और FY27 में ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स के लिए सालाना 600–800 अरब रुपये के अवॉर्ड मिलने का अनुमान है.

वहीं स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स में प्रगति अपेक्षा से धीमी है. स्वीकृत 195 मिलियन मीटरों में से अब तक सिर्फ 35 मिलियन मीटर लगाए जा सके हैं, जो कुल लक्ष्य का 18% है. देरी की वजह डिस्कॉम्स की सीमित क्षमता, अनुमोदन में देरी, राज्य चुनाव, भारी बारिश और उपभोक्ता विरोध बताए गए हैं. अब इंस्टॉलेशन की समयसीमा मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है.

 


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