✕

होम / बिजनेस / प्याज ने सरकारों के निकाले हैं खूब आंसू, क्या अब Modi सरकार की बारी है?

प्याज ने सरकारों के निकाले हैं खूब आंसू, क्या अब Modi सरकार की बारी है?

प्याज पर सियासी संग्राम का पुराना इतिहास है. कुछ सरकारें तो प्याज के चलते गिर भी चुकी हैं. अब प्याज मोदी सरकार की परेशानी बन सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

नई-नवेली मोदी सरकार के लिए आने वाले दिनों में प्याज मुसीबत बन सकती है. प्याज के दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. महाराष्ट्र के लासलगांव मंडी में प्याज के होलेसेल दामों में 30 से 50 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है. कीमतों में तेजी की वजह डिमांड और सप्लाई के बीच बढ़ते अंतर को बताया जा रहा है. खाने का स्वाद बढ़ाने वाली प्याज भारतीय राजनीति में ऊबाल लाने की क्षमता रखती है. प्याज पर सियासी संग्राम का पुराना इतिहास है. 1977 से 1980 तक जनता पार्टी की सरकार में भी प्याज बड़ा मुद्दा बन गई थी. तत्कालीन यूपीए सरकार के आंखों में भी प्याज आंसू ले आई थी और वाजपेयी सरकार को भी इसने खूब परेशान किया था. 

डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम
प्याज का इतिहास देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने चढ़ती कीमतों को जल्द थामने के प्रयास नहीं किए, तो वो उसकी आंखों में भी आंसू की वजह बन सकती है. मौजूदा समय में मंडियों में जरूरत के हिसाब से प्याज की सप्लाई नहीं हो रही है, जिसके चलते इसके दाम बढ़ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के कुछ दिनों में प्याज की कीमतों में 30 से 50% तक की वृद्धि हुई है. लासलगांव मंडी में आज प्याज की औसतन कीमत 2130 रुपए प्रति क्विंटल है और 15 जून तक कीमतें बढ़कर 2250 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं. 

टमाटर भी हो रहे लाल
मंडियों में प्याज की आवक घटने की वजह से इसकी कीमतें प्रभावित हो रही हैं. पहले 12 से 15,000 क्विंटल प्याज रोजाना लासलगांव मंडी में आता था, जोकि अब घटकर 6000 क्विंटल तक रह गया है. वहीं, प्याज के साथ ही टमाटर और आलू की कीमतों में भी इजाफा हुआ है. तेज गर्मी और बे-मौसम बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. बता दें कि भारत में प्याज की बढ़ती कीमतों को देखकर मोदी सरकार ने पिछले साल दिसंबर में प्याज के निर्यात पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था. यह बैन मार्च 2024 तक के लिए था. लेकिन हालात को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया था. 4 मई को प्याज के निर्यात पर बैन को हटाने का निर्णय लिया गया था.

इंदिरा ने पहनी थी प्याज की माला
प्याज भारतीय राजनीति में अहम् मुद्दा रही है. सबसे पहली बार 1980 में प्याज की कीमतें चुनावी मुद्दा बनी थीं. उस समय केंद्र में जनता पार्टी की सरकार थी. चढ़ती कीमतों के विरोध में उस समय कांग्रेस लीडर इंदिरा गांधी चुनाव प्रचार के दौरान प्याज की माला पहनकर घूमीं थीं. विपक्ष ने 'जिस सरकार का कीमत पर जोर नहीं, उसे देश चलाने का अधिकार नहीं' नारे पर वोट मांगे थे. सरकार प्याज के दाम नियंत्रित करने में नाकाम रही और आम चुनावों में जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. 

BJP को CM तक बदलने पड़े  
इसी तरह, भाजपा को प्याज के चलते दिल्ली की सत्ता से हाथ धोना पड़ा था. 1998 में दिल्ली की सत्ता भाजपा के पास थी और मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे थे. प्याज की चढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया. इसके बाद आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल के लिए खुराना को हटाकर साहिब सिंह वर्मा को CM बनाया. लेकिम वर्मा भी कीमतों में नीचे लाने में नाकाम रहे. इसके बाद भाजपा ने सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया. सुषमा स्वराज ने प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन असफल रहीं. आखिरकार प्याज इतना बड़ा मुद्दा बन गई कि चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा.

प्याज ने गिराई शीला सरकार
प्याज को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस की सरकार भी प्याज की चढ़ती कीमतों के चलती गिरी थी. प्याज ने दिल्ली की शीला दीक्षित की सरकार के भी आंसू निकाल दिए थे. दरअसल, 2013 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले प्याज की कीमतें काफी बढ़ गईं थीं. जनता से कनेक्ट करने के लिए उन दिनों शीला दीक्षित ने भावुक होकर कहा था कि हफ्तों बाद मैंने भिंडी के साथ प्याज खाई. लेकिन जनता का दिल इससे नहीं पसीजा और चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को पटखनी दे डाली. दिसंबर 2013 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्याज के चलते 15 साल बाद हार का सामना करना पड़ा था. बता दें कि देश के प्याज उत्पादक राज्यो में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश गुजरात, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश और बिहार प्रमुख हैं. ऐसे में महाराष्ट्र की मंदी में प्याज के महंगा होने का मतलब है कि पूरे देश में इसका असर पड़ेगा. 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

रुपये को सहारा देने वाले RBI के नए नियमों पर बैंकों को राहत की मांग, 20% कैश जमा की जगह शुल्क लगाने का प्रस्ताव

विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.

1 hour ago

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 और FY28 में 7% वृद्धि की उम्मीद

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.

1 hour ago

सेंसेक्स में 547 अंक की गिरावट के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों में दिखेगी हलचल

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

1 hour ago

भारत का असली बॉस, JIO ने IPO का आकार घटाकर ₹30,000 करोड़ किया

JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.

11 hours ago

YAAP Digital के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राज नायक ने दिया इस्तीफा

नायक ने इस इस्तीफे के पीछे पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की व्यस्तताओं और अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा का हवाला दिया है.

17 hours ago


बड़ी खबरें

सेंसेक्स में 547 अंक की गिरावट के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों में दिखेगी हलचल

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

1 hour ago

रुपये को सहारा देने वाले RBI के नए नियमों पर बैंकों को राहत की मांग, 20% कैश जमा की जगह शुल्क लगाने का प्रस्ताव

विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.

1 hour ago

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 और FY28 में 7% वृद्धि की उम्मीद

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.

1 hour ago

भारत का असली बॉस, JIO ने IPO का आकार घटाकर ₹30,000 करोड़ किया

JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.

11 hours ago

महंगाई 7% तक पहुंचने का खतरा, RBI रेपो रेट में फिर कर सकता है 150 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए वास्तविक ब्याज दर कम से कम 1 फीसदी बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5-7 फीसदी तक करना पड़ सकता है.

17 hours ago