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यात्री संख्या में सुधार के बावजूद बढ़ता घाटा, भारतीय एविएशन सेक्टर पर लागत का भारी दबाव

ICRA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार यात्री मांग में सुधार के बावजूद लागत दबाव और परिचालन चुनौतियां भारतीय विमानन उद्योग की लाभप्रदता पर भारी पड़ती दिख रही हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारतीय विमानन उद्योग में यात्री ट्रैफिक में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत, परिचालन बाधाएं और रुपये की कमजोरी के चलते वित्त वर्ष 2026 (FY2026) में घाटा और बढ़ने की आशंका है. रेटिंग एजेंसी ICRA की फरवरी रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग को चालू वित्त वर्ष में अपेक्षा से कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

FY2026 में 1.7-1.8 लाख करोड़ रुपये का संभावित घाटा

ICRA का अनुमान है कि FY2026 में विमानन उद्योग का शुद्ध घाटा 170-180 अरब रुपये (17,000-18,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है, जबकि FY2025 में यह 56 अरब रुपये था. इससे पहले एजेंसी ने FY2026 के लिए 95-105 अरब रुपये के घाटे का अनुमान लगाया था, जिसे अब काफी बढ़ा दिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से InterGlobe Aviation (जो IndiGo का संचालन करती है) में बढ़ते नुकसान के कारण है. दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानों की रद्दीकरण और यात्रियों को रिफंड देने से कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा.

रुपये की कमजोरी और विदेशी मुद्रा नुकसान

FY2026 की दूसरी और तीसरी तिमाही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण विदेशी मुद्रा में उल्लेखनीय नुकसान हुआ. हालांकि इनका एक बड़ा हिस्सा अभी अवास्तविक (अनरियलाइज्ड) है, लेकिन इससे बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ा है. विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च का 35-50 प्रतिशत हिस्सा डॉलर में होता है, जिसमें ईंधन, विमान लीज रेंटल और रखरखाव लागत शामिल हैं. इससे विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है.

यात्री ट्रैफिक में सुधार, लेकिन वृद्धि सीमित

जनवरी 2026 में घरेलू हवाई यात्री संख्या 5.6 प्रतिशत बढ़कर 154.4 लाख रही, जो पिछले साल जनवरी में 146.1 लाख थी. दिसंबर 2025 के मुकाबले यह 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है, जिससे परिचालन व्यवधानों के बाद सुधार के संकेत मिलते हैं. पहले 10 महीनों में घरेलू यात्री संख्या 1,391.8 लाख रही, जो सालाना आधार पर 1.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि है. हालांकि लोड फैक्टर जनवरी 2026 में बढ़कर 94.5 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 89.2 प्रतिशत था, फिर भी ICRA ने FY2026 के लिए घरेलू यात्री वृद्धि का अनुमान घटाकर 0-3 प्रतिशत कर दिया है. अब कुल यात्री संख्या 165-170 मिलियन रहने की उम्मीद है.

अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक अनुमान भी घटा

भारतीय एयरलाइनों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्री वृद्धि अनुमान को भी घटाकर 7-9 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पहले 13-15 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान था. सीमा-पार तनाव, जून 2025 में हुए विमान हादसे, अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित बिजनेस ट्रैवल और दिसंबर 2025 में इंडिगो के परिचालन व्यवधान जैसे कारकों ने मांग को प्रभावित किया.

ईंधन कीमतों में राहत, लेकिन दबाव कायम

फरवरी 2026 में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत और मासिक आधार पर 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. FY2025 में औसत ATF कीमत 95,181 रुपये प्रति किलोलीटर रही, जो सालाना 8 प्रतिशत कम थी. इसके बावजूद ईंधन अभी भी एयरलाइनों की कुल परिचालन लागत का 30-40 प्रतिशत हिस्सा है, जिससे लाभप्रदता पर दबाव बना हुआ है.

सप्लाई चेन और इंजन समस्याओं का असर

Pratt & Whitney के इंजनों से लैस विमानों को इंजन फेल्योर और तकनीकी खामियों के कारण ग्राउंड करना पड़ा. 31 मार्च 2025 तक उद्योग के कुल बेड़े का 15-17 प्रतिशत, यानी करीब 133 विमान, विभिन्न एयरलाइनों में सेवा से बाहर थे. इससे लीज रेंटल बढ़ा, पुराने विमानों को वेट लीज पर लेना पड़ा और रखरखाव लागत भी बढ़ी, जिससे मार्जिन प्रभावित हुआ.

इंडिगो पर नियामकीय दबाव

दिसंबर 2025 में इंडिगो को सख्त फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों, खराब मौसम और तकनीकी चुनौतियों के कारण भारी व्यवधान झेलना पड़ा. 5 दिसंबर को ही लगभग 1,600 उड़ानें रद्द हुईं, जो उसके दैनिक संचालन का करीब 70 प्रतिशत था.

बाद में विमानन नियामक ने 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी, लेकिन पूर्ण अनुपालन अनिवार्य कर दिया गया. जनवरी 2026 में संशोधित नियमों का पालन न करने पर एयरलाइन पर 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया.

FY2027 में आंशिक सुधार की उम्मीद

ICRA के अनुसार, FY2026 में उद्योग का ब्याज कवरेज अनुपात 0.7-0.9 गुना रहने की संभावना है, जो वित्तीय दबाव को दर्शाता है. हालांकि FY2027 में घरेलू यात्री ट्रैफिक 6-8 प्रतिशत बढ़कर 175-182 मिलियन तक पहुंच सकता है, लेकिन यह भी पहले के अनुमानों से कम है.

 


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