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इन Telecom Companies की बढ़ी मुश्किलें, सपेक्ट्रम शुल्क के साथ अब चुकाना होगा GST
Telecom Companies को स्पेक्ट्रम 20 साल के लिए आवंटित किया जाएगा. 6 जून को 5जी के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी का अलगा दौर शुरू होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
जियो (JIO), एयरटेल (Airtel), वोडा-आईडिया (Voda-Idea) जैसी दूरसंचार कंपनियों (Telecom Companies) को 5जी स्पेक्ट्रम शुल्क के भुगतान के साथ-साथ जीएसटी (GST) का भी भुगतान करना होगा. स्पेक्ट्रम 20 साल के लिए आवंटित किया जाएगा और सफल बोलीदाताओं को आगामी 'मेगा' नीलामी में 20 समान वार्षिक किस्तों में भुगतान करने की अनुमति दी जाएगी.
क्या है स्पैक्ट्रल नीलामी?
उदाहरण के लिए जैसे पहले हम रेडियो का इस्तेमाल करते थे. इनमें एएम, मीडियम वेव और एफएम होता था. उसमें लिखा होता था कि हम कितने मेगाहर्ट्स या किलोहर्ट्स पर जा सकते हैं. यानी हम अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर अलग अलग चीजों को सुन सकते हैं. इसी तरह 2जी, 3जी, 4जी और 5जी के लिए अलग अलग फ्रीक्वेंसी होती हैं. स्पेक्ट्रम फ्रिक्वेंसी की एक रेंज है जिसका इस्तेमाल मोबाइल कम्यूनीकेशन के लिए किया जाता है. किसी भी नेटवर्क को अलग-अलग स्पेक्ट्रम बैंड में बांटा जाता है. 5जी नेटवर्क के साथ भी ऐसा ही है. इसे लो, हाई और मिड बैंड में बांटा गया है और अब सरकार इसकी नीलामी करने का जा रही है. इस बार सरकार 8 गीगाहर्ट्स के स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी.
करना होगा 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान
सूत्रों के अनुसार दूरसंचार कंपनियों को प्रत्येक किस्त के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना होगा. दूरसंचार विभाग (डीओटी) मोबाइल फोन सेवाओं के लिए 8 स्पेक्ट्रम बैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी का अगला दौर 6 जून को आयोजित करेगा.
जीएसटी परिषद स्पष्ट करेगी भुगतान की प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार जीएसटी परिषद अपनी अगली बैठक में स्पेक्ट्रम नीलामी के दौरान बोली जीतने वाली कंपनियों द्वारा जीएसटी भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट कर सकती है. स्पष्टीकरण से नीलामी प्रक्रिया में जीएसटी संग्रह की विधि के संबंध में क्षेत्रीय अधिकारियों के बीच भ्रम समाप्त हो जाएगा.
इतना होगा फ्रीक्वेंसी मूल्य
800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1,800 मेगाहर्ट्ज, 2,100 मेगाहर्ट्ज, 2,300 मेगाहर्ट्ज, 2,500 मेगाहर्ट्ज, 3,300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में सभी उपलब्ध स्पेक्ट्रम नीलामी का हिस्सा हैं. नीलामी की जा रही कुल ‘फ्रीक्वेंसी’ का मूल्य 96,317 करोड़ रुपये है.
क्यों लिया जा रहा 18 प्रतिशत जीएसटी?
जीएसटी कानून के तहत स्पेक्ट्रम भुगतान अन्य प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के अधिकार के लिए लाइसेंसिंग सेवाओं के अंतर्गत आता है, जिस पर 18 प्रतिशत कर लगाया जाता है. उन्होंने कहा है कि स्पेक्ट्रम शुल्क एक निश्चित अवधि में चरणबद्ध तरीके से अदा करना होता है. इस प्रकार कर भुगतान भी अलग-अलग होगा. निदेशक मंडल को इस संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए, ताकि इस संबंध में किसी भी मुकदमेबाजी से बचा जा सके.
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