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महिलाओं की निवेश भागीदारी से 40 लाख करोड़ रुपये तक GDP बढ़ोतरी संभव : रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, कई संरचनात्मक कारक महिलाओं के वित्तीय परिणामों को सीमित कर रहे हैं. महिलाएं पुरुषों की तुलना में लगभग 73 रुपये प्रति 100 रुपये कम कमा रही हैं, जबकि 60% से अधिक महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम कर रही हैं, जहाँ आय अस्थिर होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

भारत लगभग 40 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त GDP क्षमता खोल सकता है अगर महिलाएं लंबी अवधि के वित्तीय निवेश में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाएँ, यह निष्कर्ष Lxme और EY इंडिया की नई रिपोर्ट में सामने आया है.

रिपोर्ट का शीर्षक है “Unlocking Her Wealth: The Untapped Economy – Redesigning Financial Systems for Women from Inclusion Metrics to Ownership Outcomes”. इसमें भारत का पहला Women’s Financial Prosperity Index (WFPI) पेश किया गया है, जिसमें भारत को 100 में से 28.1 अंक मिले हैं. यह बताता है कि वित्तीय समावेशन में तेजी के बावजूद महिलाएं लंबी अवधि की संपत्ति सृजन की दिशा में अभी भी काफी पीछे हैं.

वित्तीय पहुंच बढ़ी, लेकिन संपत्ति निर्माण पीछे

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से वित्तीय समावेशन विस्तार किया है. वर्तमान में 89% से अधिक महिलाएं बैंक खाताधारक हैं और डिजिटल भुगतान रोज़मर्रा के वित्तीय लेन-देन में तेजी से शामिल हो रहे हैं. हालांकि, वित्तीय प्रणाली तक पहुंच और अर्थव्यवस्था में सार्थक भागीदारी के बीच एक अंतर मौजूद है. महिलाएं अधिक वित्तीय प्रणाली में शामिल हो रही हैं, लेकिन यह पहुंच लंबी अवधि की संपत्ति निर्माण या वित्तीय स्वामित्व में तब्दील नहीं हुई है.

रिपोर्ट के निष्कर्ष राष्ट्रीय डेटा, वैश्विक बेंचमार्क, EY द्वारा 1,033 उत्तरदाताओं पर किए गए सर्वे और Lxme के एक मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं के प्लेटफॉर्म डेटा पर आधारित हैं.

संरचनात्मक बाधाएँ महिलाओं की भागीदारी को सीमित करती हैं

रिपोर्ट के अनुसार, कई संरचनात्मक कारक महिलाओं के वित्तीय परिणामों को सीमित कर रहे हैं. महिलाएं पुरुषों की तुलना में लगभग 73 रुपये प्रति 100 रुपये कम कमा रही हैं, जबकि 60% से अधिक महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम कर रही हैं, जहाँ आय अस्थिर होती है.

महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 41.7% है, जबकि पुरुषों की यह दर 78.8% है. निवेश में भी अंतर है: केवल 8.6% महिलाएं म्यूचुअल फंड या इक्विटी में निवेश करती हैं, जबकि पुरुषों की यह दर 22.3% है. महिलाएं म्यूचुअल फंड फोलियो में सिर्फ 25% हिस्सेदारी रखती हैं और निवेश शुरू करने की उम्र पुरुषों की तुलना में लगभग पांच साल बाद होती है.

पेंशन और भविष्य निधि में भी अंतर है. केवल 14.2% महिलाएं पेंशन या PF खाता रखती हैं, जबकि पुरुषों की यह दर 32.8% है. परिणामस्वरूप महिलाएं पुरुषों द्वारा अर्जित सेवानिवृत्ति संपत्ति का केवल 60% ही रखती हैं.

वित्तीय साक्षरता भी चुनौती बनी हुई है, केवल 21% महिलाएं वित्तीय रूप से साक्षर मानी जाती हैं.

बड़ा आर्थिक अवसर

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि महिलाओं की लंबी अवधि के निवेश में अधिक भागीदारी से लगभग 40 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक अवसर पैदा हो सकता है. यह वृद्धि पूंजी बाजार में गहरी भागीदारी, उच्च घरेलू बचत और सतत लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से आएगी.

Lxme की सह-संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता ने कहा कि भारत ने मजबूत वित्तीय समावेशन संरचना बनाई है, लेकिन केवल समावेशन पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को सही माहौल, आत्मविश्वास, समुदाय और उनकी जरूरतों के अनुरूप उत्पाद दिए जाते हैं, तो वे वित्तीय बाजार में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं और संपत्ति सृजन में योगदान देती हैं.

EY इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज पार्टनर सौरभ चंद्र ने कहा कि निष्कर्ष दिखाते हैं कि महिलाओं की आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय प्रणाली और नीतियों की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं का वित्तीय सशक्तिकरण भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि रणनीति का एक अहम हिस्सा होना चाहिए.

समावेशन से स्वामित्व तक

रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि वित्तीय पहुंच और वित्तीय स्वामित्व के बीच अंतर को पाटने के लिए रेगुलेटर्स, वित्तीय संस्थान, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म और नीति निर्माताओं के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं.

महिलाओं की आय पैटर्न, करियर चक्र और निवेश व्यवहार को ध्यान में रखते हुए वित्तीय उत्पाद और प्रणाली डिजाइन करना महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की वित्तीय क्षमता को अनलॉक करना केवल लिंग समावेशन का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए रणनीतिक प्राथमिकता है.


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