केमिकल सेक्टर में FY27 के दौरान स्थिर लेकिन अस्थिर (volatile) ग्रोथ देखने को मिल सकती है. कंपनियों के लिए मजबूत लिक्विडिटी और बेहतर वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए केमिकल सेक्टर को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा है. एजेंसी के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे माल की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन में बदलाव के चलते इस सेक्टर में तेज उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिल सकता है, हालांकि धीरे-धीरे मुनाफे में सुधार की उम्मीद भी बनी हुई है.
केमिकल सेक्टर पर ‘न्यूट्रल आउटलुक’ बरकरार
Ind-Ra ने पूरे केमिकल सेक्टर पर न्यूट्रल आउटलुक और FY27 के लिए स्थिर क्रेडिट रेटिंग दृष्टिकोण बनाए रखा है. एजेंसी का कहना है कि सेक्टर में रिकवरी जारी रहेगी, लेकिन इसकी गति पिछली रिकवरी साइकल की तुलना में धीमी होगी.
कीमतों में तेजी के बाद अब अस्थिरता
मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद केमिकल कीमतों में 40% से 50% तक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. हालांकि अप्रैल 2026 तक इनमें 5% से 10% की गिरावट आई, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
मुनाफे पर दबाव, मार्जिन स्थिर लेकिन सीमित
एजेंसी के अनुसार सेक्टर के मार्जिन 13% से 15% के बीच रह सकते हैं, जो ऐतिहासिक औसत से कम है. अलग-अलग उत्पादों में प्रदर्शन भी काफी अलग रहेगा, जिससे कंपनियों के नतीजों में असमानता देखने को मिलेगी.
ग्लोबल सप्लाई और ओवरकैपेसिटी का असर
Ind-Ra ने चेतावनी दी है कि चीन में लगातार ओवरकैपेसिटी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारतीय केमिकल सेक्टर के लिए संरचनात्मक जोखिम बनी रहेगी. हालांकि अमेरिका द्वारा टैरिफ में राहत से भारतीय एक्सपोर्टर्स की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है.
घरेलू मांग मजबूत बनी हुई
भारत में केमिकल्स की घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, खासकर कंजम्पशन-ड्रिवन सेक्टर्स से सपोर्ट मिल रहा है. हालांकि FY27 की शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में डिमांड टेम्पररी तौर पर कमजोर रह सकती है.
अमेरिका के बाजार में भारतीय केमिकल्स की स्थिति बेहतर हुई है, जहां देश का करीब 15% निर्यात जाता है. टैरिफ में बदलाव के बाद भारतीय कंपनियों को कॉस्ट एडवांटेज मिला है, जिससे एक्सपोर्ट मार्जिन में सुधार हुआ है.
वर्किंग कैपिटल और लिक्विडिटी सबसे बड़ा रिस्क
Ind-Ra ने कहा है कि FY27 में लिक्विडिटी मैनेजमेंट सबसे अहम फैक्टर होगा.
- कच्चे माल की ऊंची कीमतें
- बढ़ता इन्वेंटरी स्तर
- लंबा सप्लाई साइकल
इन सभी कारणों से वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ सकती है.
कंपनियों की बैलेंस शीट स्थिति
लगभग 60% बड़ी केमिकल कंपनियों का नेट लेवरेज 2.5 गुना से नीचे है, जो स्थिर स्थिति को दर्शाता है. हालांकि करीब 20% कंपनियां एक्सपोर्ट एक्सपोजर और कैश फ्लो दबाव के कारण जोखिम में बनी हुई हैं.
Ind-Ra के मुताबिक FY27 में केमिकल सेक्टर की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक स्थिरता, कच्चे तेल और फीडस्टॉक की कीमतें, चीन की सप्लाई स्ट्रेटजी और ग्लोबल डिमांड रिकवरी जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करेगी.
वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत से iPhone का निर्यात करीब ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. यह उपलब्धि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के अंतिम वर्ष में हासिल हुई, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई गति दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत अब वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. वित्त वर्ष 2026 में iPhone निर्यात ने रिकॉर्ड स्तर छूते हुए देश को एक बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित कर दिया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है.
iPhone निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत से iPhone का निर्यात करीब ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. यह उपलब्धि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के अंतिम वर्ष में हासिल हुई, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई गति दी.
स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में iPhone का दबदबा
पूरे वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल स्मार्टफोन निर्यात लगभग ₹2.6 लाख करोड़ रहा, जिसमें iPhone का योगदान 75% से अधिक रहा. इस प्रदर्शन के साथ iPhone भारत का सबसे बड़ा ब्रांडेड निर्यात उत्पाद बनकर उभरा है.
अन्य सेक्टर्स से आगे निकला iPhone
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्यात के लिहाज से iPhone ने कई पारंपरिक सेक्टर्स को पीछे छोड़ दिया. डीजल वाहन, हीरा, दवाएं और पेट्रोल जैसी प्रमुख निर्यात श्रेणियां iPhone के मुकाबले काफी पीछे रहीं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की बढ़ती ताकत साफ नजर आती है.
PLI योजना से मिली बड़ी बढ़त
PLI योजना शुरू होने के बाद भारत से iPhone निर्यात लगभग शून्य से बढ़कर 5 साल में ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गया.
- FY22: ₹9,351 करोड़
- FY23: ₹44,269 करोड़
- FY24: ₹85,013 करोड़
- FY25: ₹1.5 लाख करोड़
- FY26: ₹2 लाख करोड़
यह तेज वृद्धि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिला रही है.
टाटा और फॉक्सकॉन की अहम भूमिका
iPhone मैन्युफैक्चरिंग में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन ने प्रमुख भूमिका निभाई. दोनों कंपनियों का निर्यात में लगभग समान योगदान रहा और उन्होंने देश में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित कीं.
रोजगार और सप्लाई चेन का विस्तार
Apple के सप्लाई इकोसिस्टम में 40 से अधिक घरेलू कंपनियां शामिल हैं, जबकि कुल मिलाकर करीब 2.5 लाख लोगों को रोजगार मिला है. खास बात यह है कि इस कार्यबल में 70% से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बदलाव का संकेत देता है.
वैश्विक रणनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
Apple ने भारत में अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करते हुए गैर-चीनी आपूर्तिकर्ताओं पर फोकस किया है. जापान और ताइवान की कंपनियों के साथ मिलकर भारत को एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बनाया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में और बड़ी भूमिका निभा सकता है. iPhone की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन और निर्यात केंद्र भी बन चुका है.
RBI ने मौजूदा पात्र NBFCs को 31 दिसंबर 2026 तक अपना पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन करने का अवसर दिया है. यह आवेदन RBI के ‘प्रवाह’ पोर्टल के माध्यम से करना होगा. नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नया नियामकीय ढांचा पेश किया है. इसके तहत सीमित आकार और सीमित गतिविधियों वाली कंपनियों को पंजीकरण से छूट दी जाएगी, हालांकि इसके साथ सख्त शर्तें और अनुपालन नियम भी लागू रहेंगे.
छोटी NBFCs के लिए नई राहत
RBI द्वारा जारी अंतिम दिशानिर्देशों के अनुसार, वे NBFCs जिनकी कुल परिसंपत्ति ₹1,000 करोड़ से कम है, जो सार्वजनिक जमा (public funds) का उपयोग नहीं करतीं और जिनका ग्राहकों से सीधा संपर्क (user interface) नहीं है, उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट मिलेगी. ऐसी कंपनियों को ‘गैर-पंजीकृत टाइप 1 NBFC’ की श्रेणी में रखा जाएगा.
शर्तों के साथ मिलेगी छूट
हालांकि यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है. संबंधित कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भविष्य में भी सार्वजनिक धन या ग्राहकों से सीधे संपर्क में नहीं आएंगी. इसके लिए कंपनी के बोर्ड को औपचारिक प्रस्ताव पारित करना होगा और वैधानिक ऑडिटर को भी इसकी पुष्टि करनी होगी.
31 दिसंबर 2026 तक आवेदन का मौका
RBI ने मौजूदा पात्र NBFCs को 31 दिसंबर 2026 तक अपना पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन करने का अवसर दिया है. यह आवेदन RBI के ‘प्रवाह’ पोर्टल के माध्यम से करना होगा. नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
पंजीकरण रद्द कराने के लिए कंपनियों को पिछले तीन वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय विवरण, सार्वजनिक निधि और ग्राहक संपर्क की अनुपस्थिति का प्रमाण पत्र तथा भविष्य में इन शर्तों का पालन करने का बोर्ड संकल्प प्रस्तुत करना होगा.
RBI के पास रहेगा अंतिम अधिकार
RBI ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी आवेदन को अस्वीकार करने का अधिकार रखता है, यदि उसे लगे कि कंपनी वास्तव में इस श्रेणी के मानकों पर खरी नहीं उतरती. साथ ही ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक परिसंपत्ति वाली NBFCs को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा और वे नियामकीय दायरे में रहेंगी.
समूह कंपनियों पर भी सख्ती
अगर किसी समूह की कई NBFCs की कुल परिसंपत्ति ₹1,000 करोड़ से अधिक है, तो सभी संस्थाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा. RBI ने यह कदम नियामकीय खामियों का फायदा उठाने से रोकने के लिए उठाया है.
नियमों को और किया सख्त
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक निधियों तक परोक्ष पहुंच (जैसे समूह कंपनियों के जरिए) को भी सार्वजनिक निधि ही माना जाएगा. इसके अलावा ऑडिटरों को अधिक जिम्मेदारी दी गई है और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें सीधे RBI को रिपोर्ट करना होगा.
विदेशी निवेश पर भी शर्तें
गैर-पंजीकृत टाइप 1 NBFCs यदि विदेश में वित्तीय सेवाओं में निवेश करना चाहती हैं, तो उन्हें पहले RBI से पंजीकरण और पूर्व स्वीकृति लेनी होगी. इसके बाद ही वे मौजूदा विदेशी निवेश नियमों के तहत आगे बढ़ सकेंगी.
बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 609.45 अंक यानी 0.79% की बढ़त के साथ 77,496.36 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 181.95 अंक यानी 0.76% उछलकर 24,177.65 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया, जिसके चलते गुरुवार को बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया. वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत, अमेरिकी फेड के फैसले और सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के बीच आज घरेलू शेयर बाजार में हलचल भरा कारोबार देखने को मिल सकता है. पिछले सत्र की तेजी के बाद निवेशक आज सतर्क नजर आ सकते हैं, जबकि चुनिंदा शेयरों में कॉरपोरेट अपडेट्स और तिमाही नतीजों के चलते इंट्रा-डे में तेज मूवमेंट की संभावना है.
बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूत बंद
कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई सेंसेक्स ने 1,000 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाई. हालांकि दिन के अंत में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली. जिसके बाद सेंसेक्स 609.45 अंक यानी 0.79% की बढ़त के साथ 77,496.36 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 181.95 अंक यानी 0.76% उछलकर 24,177.65 पर बंद हुआ और दिन में 24,300 के स्तर को भी पार कर गया.
रुपये में कमजोरी, रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद भारतीय मुद्रा दबाव में रही. डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3% की गिरावट के साथ 94.8450 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. जो आयात लागत और महंगाई की चिंता बढ़ा सकता है.
इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा उछाल आईटीसी में देखने को मिला. जो 3.83% चढ़ा. इसके अलावा टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, सन फार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में 1% से 3% तक की तेजी दर्ज की गई.
इन शेयरों में गिरावट का दबाव
दूसरी ओर. कुछ शेयरों में बिकवाली हावी रही. इंडिगो, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और एचडीएफसी बैंक जैसे स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए. ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो यहां निवेशकों का रुख मिश्रित रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.07% गिरा, निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.65% चढ़ गया. सेक्टोरल आधार पर एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में खरीदारी दिखी. जबकि कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल और मीडिया सेक्टर दबाव में रहे.
कच्चे तेल में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3.04% बढ़कर 114.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आगे चलकर बाजार और महंगाई पर असर डाल सकती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार की दिशा आगे वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी. साथ ही. कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
आज इंट्रा-डे ट्रेडिंग में बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और वेदांता जैसे शेयरों में कॉरपोरेट गतिविधियों के चलते तेज हलचल देखने को मिल सकती है. इसके अलावा आज कई बड़ी कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, आईडीबीआई बैंक, इंडियामार्ट, डॉ लाल पैथलैब्स और अन्य अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिससे स्टॉक-विशेष में मूवमेंट बढ़ सकता है. हाल के नतीजों में बजाज फाइनेंस का मुनाफा 22% बढ़ा है, जबकि कुछ कंपनियों में मुनाफे में गिरावट भी दर्ज की गई है. कॉरपोरेट अपडेट्स की बात करें तो एलएंडटी ने हैदराबाद मेट्रो में अपनी हिस्सेदारी बेचने का समझौता किया है, वहीं अन्य कंपनियों को नए प्रोजेक्ट और ऑर्डर मिले हैं. इसके अलावा बाजार में बल्क डील्स, आईपीओ लिस्टिंग और एक्स-डिविडेंड जैसे फैक्टर्स भी निवेशकों के फोकस में रहेंगे, जिससे आज का कारोबार काफी एक्शन से भरपूर रहने की उम्मीद है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
यह लॉन्च दिखाता है कि भारत में प्रीमियम कैफे बाजार तेजी से बढ़ रहा है. उपभोक्ता अब सिर्फ कॉफी नहीं, बल्कि माहौल, कनेक्शन, कहानी और व्यक्तिगत अनुभव खरीदना चाहते हैं.
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रितु राणा
दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्रतिष्ठित हैमिल्टन हाउस में टाटा समूह और स्टारबक्स ने राजधानी का पहला स्टारबक्स रिजर्व (Starbucks Reserve) स्टोर लॉन्च किया है. दरअसल, स्टारबक्स ने हैमिल्टन हाउस में अपने फ्लैगशिप स्टोर को पुनः डिजाइन किया है और इसे स्टारबक्स रिजर्व® स्टोर के रूप में विकसित किया है. यह देश में तीसरा स्टारबक्स रिजर्व आउटलेट है, जो भारत में प्रीमियम कॉफी अनुभव और एक्सपीरियंस-बेस्ड रिटेल की बढ़ती मांग को दर्शाता है. यह नया स्टोर केवल कॉफी शॉप नहीं, बल्कि विरासत, डिजाइन, संस्कृति और वैश्विक कॉफी शिल्प का संगम बनकर उभरा है. कंपनी इसे दिल्ली के ग्राहकों के लिए एक अलग और उन्नत कॉफी अनुभव के रूप में पेश कर रही है.
दिल्ली में प्रीमियम ग्राहकों पर फोकस
कंपनी के अनुसार, राजधानी में यह पहला रिजर्व स्टोर उपभोक्ताओं को एक्सक्लूसिव कॉफी ब्लेंड्स, सीमित संस्करण बीन्स, विशेष पेय पदार्थों और कस्टमाइज्ड ब्रूइंग अनुभव का अवसर देगा. स्टारबक्स का कहना है कि दिल्ली जैसे महानगर में युवा और प्रीमियम ग्राहक अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि अनुभव की तलाश में हैं. इसी रणनीति के तहत रिजर्व फॉर्मेट को राजधानी में लाया गया है.
दुर्लभ कॉफी वैरायटीज की पेशकश
स्टारबक्स रिजर्व ग्राहकों को कॉफी और उसके शिल्प से गहराई से जोड़ता है. रिजर्व बार पर ग्राहक दुर्लभ कॉफी वैरायटीज को खोज सकते हैं, विभिन्न ब्रूइंग मेथड्स को समझ सकते हैं और हर कप के पीछे की कला का अनुभव कर सकते हैं. स्टोर में अत्याधुनिक ब्लैक ईगल एस्प्रेसो मशीन भी मौजूद है, जो कॉफी मास्टर्स को ब्रूइंग और एक्सट्रैक्शन पर बेहतर नियंत्रण देती है, जिससे कॉफी का शानदार स्वाद सामने आता है. ये सभी तत्व मिलकर एक समृद्ध और सूक्ष्म कॉफी अनुभव तैयार करते हैं, जो नए और अनुभवी दोनों तरह के कॉफी प्रेमियों को कॉफी के साथ सीखने, समझने और जुड़ने का अवसर देता है.
कंपनी के एक्सपर्ट पार्टनर्स ने कहा कि स्टारबक्स रिजर्व में पेश की जाने वाली कॉफी बेहद प्रीमियम और चुनिंदा किस्मों की होती है, जिन्हें अन्य स्टोर्स पर उपलब्ध नहीं कराया जाता. इसके लिए कंपनी के कॉफी खरीदार 40 से अधिक देशों की यात्रा कर सीमित मात्रा में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी बीन्स का चयन करते हैं. उन्होंने बताया कि रिजर्व फॉर्मेट का फोकस केवल बेहतरीन हस्तनिर्मित पेय पदार्थ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्राहकों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव और विशिष्ट अनुभव तैयार करना भी है. उन्होंने कहा कि प्रीमियम कॉफी, शिल्पकारी और पर्सनल कनेक्शन का यह संयोजन ही स्टारबक्स रिजर्व एक्सपीरियंस को अलग पहचान देता है.
हैमिल्टन हाउस की विरासत से जुड़ा नया अनुभव
स्टोर को कनॉट प्लेस के ऐतिहासिक हैमिल्टन हाउस में स्थापित किया गया है, जो दिल्ली की औपनिवेशिक वास्तुकला और व्यापारिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंपनी ने स्टोर डिजाइन में इस विरासत को आधुनिक कॉफी संस्कृति के साथ जोड़ने की कोशिश की है. स्टोर के भीतर लगाए गए म्यूरल्स, इंटीरियर डिजाइन और सजावट में दिल्ली की जीवंत संस्कृति, भारतीय आतिथ्य और कॉफी की फॉर्म-टू-कप (farm-to-cup) यात्रा को दर्शाया गया है.
BW हिंदी से बातचीत के दौरान टाटा स्टारबक्स रिजर्व की हेड ऑफ प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग मिताली माहेश्वरी ने बताया कि राजधानी के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित यह स्टोर भारत में ब्रांड के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां विरासत वास्तुकला को आधुनिक इमर्सिव डिजाइन और कॉफी शिल्प कौशल के साथ जोड़ा गया है, ताकि दिल्ली को स्टारबक्स रिजर्व अनुभव का एक नया आयाम दिया जा सके.
मार्केटिंग से ज्यादा भरोसा एक्सपीरियंस पर
मिताली माहेश्वरी ने बताया, हम लगातार अपने स्टोर्स को ग्राहकों के लिए और अधिक जीवंत और प्रासंगिक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. हैमिल्टन हाउस स्थित हमारे फ्लैगशिप स्टोर को स्टारबक्स रिजर्व में बदलना इसी सोच का हिस्सा है, जहां हम अधिक इमर्सिव और सार्थक अनुभव देने पर फोकस कर रहे हैं. हमारे कॉफी मास्टर्स और एक्सपर्ट पार्टनर्स इस स्टोर के केंद्र में हैं, जिनके माध्यम से हम कॉफी को लेकर गहरी बातचीत को बढ़ावा देना चाहते हैं और ‘थर्ड-प्लेस’ अनुभव को और मजबूत करना चाहते हैं, एक ऐसा स्थान, जहां ग्राहक जुड़ सकें, नए अनुभव खोज सकें और अधिक अर्थपूर्ण तरीके से सहभागिता कर सकें.
उन्होंने आगे बताया कि इस रिजर्व स्टोर के लिए फिलहाल कोई बड़ी विज्ञापन मुहिम नहीं चलाई गई है. कंपनी का मानना है कि शानदार अनुभव, सोशल मीडिया शेयरिंग और ग्राहकों की प्रतिक्रिया खुद इस स्टोर की सबसे बड़ी मार्केटिंग बनेगी. आज के युवा उपभोक्ता नई जगहों और प्रीमियम अनुभवों को तेजी से अपनाते हैं, जिससे ऑर्गेनिक ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ती है.
भारत में विस्तार की तैयारी
मिताली ने जानकारी दी है कि, मुंबई और दिल्ली के बाद अब इसी साल जल्द ही स्टारबक्स रिजर्व फॉर्मेट को अन्य शहरों में भी विस्तार दिया जाएगा, हालांकि अगले शहरों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है.
यह लॉन्च दिखाता है कि भारत में प्रीमियम कैफे बाजार तेजी से बढ़ रहा है. उपभोक्ता अब सिर्फ कॉफी नहीं, बल्कि माहौल, कनेक्शन, कहानी और व्यक्तिगत अनुभव खरीदना चाहते हैं. स्टारबक्स रिजर्व के जरिए टाटा-स्टारबक्स भारत के हाई-वैल्यू शहरी ग्राहकों को लक्षित कर रहा है, जहां प्रति ग्राहक खर्च और ब्रांड लॉयल्टी दोनों अधिक होती हैं.
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन का एक बड़ा इंजन बनकर उभर रहा है. यह परियोजना उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट को एक साथ गति देकर पूरे राज्य की विकास कहानी को नई दिशा दे रही है.
by
रितु राणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन किया. उत्तर प्रदेश के विकास में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, यह परिवर्तनकारी बुनियादी ढांचा परियोजना कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगी और पूरे उत्तर प्रदेश में प्रगति को गति देगी. बता दें, मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों को जोड़ते हुए यात्रा समय को 10–12 घंटे से घटाकर लगभग 6–7 घंटे कर देगा. इस परियोजना से राज्य में कनेक्टिविटी, उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
गाजियाबाद बना नया विकास केंद्र
बेहतर कनेक्टिविटी के चलते गाजियाबाद अब केवल एनसीआर का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक हब के रूप में उभर रहा है. कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा, “गाजियाबाद आज जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर के प्रवेश द्वार से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का एक मजबूत केंद्र बन रहा है, वह इस बात का संकेत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह किसी शहर की दिशा बदल सकता है. नमो भारत, मेट्रो और एक्सप्रेसवे जैसे आधुनिक कनेक्टिविटी नेटवर्क ने यहां रियल एस्टेट और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार दिया है. अब गंगा एक्सप्रेसवे इस विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा. यह कॉरिडोर राजनगर एक्सटेंशन और एनएच-24 जैसे क्षेत्रों को सीधे प्रयागराज और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े बाजारों से जोड़ देगा, जिससे अगले 5 से 10 वर्षों में पूरे क्षेत्र की आर्थिक और शहरी तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है.”
व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को फायदा
मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों में माल ढुलाई तेज होगी और नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होंगे. इससे रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा.
किसानों और छोटे शहरों को बड़ा लाभ
कृषि आधारित जिलों में अब किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने का अवसर मिलेगा. गन्ना, आम और आंवला जैसे उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत होगी. छोटे शहरों में औद्योगिक विकास और शहरीकरण की गति भी बढ़ेगी.
रियल एस्टेट में तेज उछाल
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ, संतोष अग्रवाल ने कहा, “गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. लगभग ₹36,000 करोड़ के निवेश से बना यह 594 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर यात्रा समय को घटाकर लगभग 5–6 घंटे तक सीमित करने की क्षमता रखता है. 12 जिलों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे नए माइक्रो-मार्केट्स को जन्म दे रहा है, जहां रियल एस्टेट विकास, निवेश और एंड-यूज़र डिमांड तेजी से बढ़ेगी. मेरठ जैसे शहरों में इसे एक सैटेलाइट हब के रूप में विकसित होते देखना इस क्षेत्र की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को दर्शाता है.”
रिहायशी कीमतों में 20-30% की तेजी
ओमैक्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल कहते हैं गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ प्रयागराज कॉरिडोर में प्रॉपर्टी की कीमतों में शुरुआती मजबूती के संकेत दिखने लगे हैं. इसकी वजह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक प्रमुख धार्मिक शहर के रूप में इसकी पहचान है, सरकार द्वारा मंदिर शहरों के विकास के लिए प्रस्तावित 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से पर्यटन और नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा, जिससे रियल एस्टेट की मांग और मजबूत होने की उम्मीद है. फिलहाल प्रयागराज के प्रमुख इलाकों में रिहायशी कीमतें करीब 7,900 से 8,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के आसपास हैं. कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ अगले 3 से 5 साल में इसमें 20–30% तक बढ़ोतरी की उम्मीद है, खासकर उन इलाकों में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने कहा, “टियर-2 शहर आज रिहायशी विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं और जमीन के सौदों में बढ़ोतरी इसका स्पष्ट संकेत है. गंगा एक्सप्रेसवे के कारण नए डेवलपमेंट कॉरिडोर खुल रहे हैं, जिससे मेरठ जैसे शहरों में संगठित रियल एस्टेट गतिविधियां तेज हो रही हैं. फिलहाल मेरठ में कीमतें लगभग 6,400 से 6,600 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित मांग बढ़ने पर मध्यम अवधि में 25–35% तक कीमतों में वृद्धि की संभावना बन सकती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे हैं.”
निवेश और सप्लाई चेन होगी मजबूत
जे इंफ्राटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित जांदू ने कहा, “गंगा एक्सप्रेसवे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स की दक्षता को बढ़ाकर आर्थिक गतिविधियों को गति देगा. इसके साथ ही निवेश का दायरा भी बढ़ेगा और सप्लाई चेन अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी.”
एसीई (एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड) के सीईओ-क्रेन्स, मनीष माथुर ने कहा, “यह परियोजना भारत के अगली पीढ़ी के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है, जिसमें गति, तकनीक और दक्षता को प्राथमिकता दी गई है. एक्सेस-कंट्रोल्ड डिजाइन और बेहतर टोलिंग सिस्टम यात्रा को अधिक सुरक्षित और पूर्वानुमानित बनाएंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास दोनों को लाभ मिलेगा.”
विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन का एक बड़ा इंजन बनकर उभर रहा है. यह परियोजना उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट को एक साथ गति देकर पूरे राज्य की विकास कहानी को नई दिशा दे रही है.
यह लॉन्च भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को OTP आधारित प्रक्रिया से आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह पहल सुरक्षित, तेज और आधुनिक भुगतान प्रणाली की ओर देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को मजबूत करती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फ्लिपकार्ट (Flipkart), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और पेयू (PayU) ने मिलकर भारत में कार्ड पेमेंट्स के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम लॉन्च किया है. यह पहल डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित, तेज और आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
बायोमेट्रिक से अब बिना OTP के पेमेंट
इस नई सुविधा के तहत ग्राहक अब अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन को फेस आईडी या फिंगरप्रिंट के जरिए अप्रूव कर सकते हैं. इससे OTP (वन टाइम पासवर्ड) की जरूरत खत्म हो जाएगी और ट्रांजैक्शन में होने वाली देरी और फेलियर कम होंगे. यह सुविधा सबसे पहले एक्सिस बैंक कार्डधारकों के लिए उपलब्ध कराई गई है.
सुरक्षा और फ्रॉड प्रोटेक्शन में बड़ा सुधार
यह बायोमेट्रिक सिस्टम डिवाइस बाइंडिंग और एडवांस सिक्योरिटी चेक्स पर आधारित है, जिससे SIM स्वैप और OTP फ्रॉड जैसे जोखिम कम होंगे. यह तकनीक स्मार्टफोन यूजर्स के लिए पहले से परिचित फेस आईडी और फिंगरप्रिंट सिस्टम का उपयोग करती है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और आसान हो जाती है.
डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में सहयोग
इस साझेदारी के तहत PayU मर्चेंट साइड इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी फ्लो मैनेज करेगा, Wibmo (PayU की कंपनी) issuer साइड पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सपोर्ट करेगी और Flipkart इस फीचर को अपने प्लेटफॉर्म पर लागू कर रहा है.
भारत में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर समाधान
रिपोर्ट्स के अनुसार FY 2024 में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड ₹1,400 करोड़ से अधिक पहुंच गया था. ऐसे में भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी 2025 में बायोमेट्रिक और रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन को बढ़ावा देने की सिफारिश की थी. यह नया सिस्टम RBI के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करेगा.
फ्लिपकार्ट पेमेंट एंड सुपरकॉइन्स के वाइस प्रेजिडेंट गौरव अरोड़ा ने कहा कि कंपनी का फोकस कंज्यूमर ट्रस्ट और सेफ्टी पर है. उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से भुगतान अनुभव तेज, आसान और अधिक सुरक्षित होगा.
एक्सिस पेमेंट एंड वेल्थ मैनेजमेंट की प्रेजिडेंट और हेड अर्निका दीक्षित ने कहा कि ग्राहक अब सरल और सुरक्षित भुगतान अनुभव की उम्मीद करते हैं. बायोमेट्रिक सिस्टम एक “वन-टच सिक्योर अप्रूवल” अनुभव देता है, जिससे डिजिटल पेमेंट्स और बेहतर बनते हैं.
पेयू पेमेंट्स के चीफ बिजनेस ऑफिसर हेमांग दत्तानी ने कहा कि OTP आधारित सिस्टम में मौजूद जटिलताओं को दूर करना जरूरी था. बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से भुगतान प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और फ्रिक्शन-फ्री बनेगी.
यह अधिग्रहण भारत में पेस्ट कंट्रोल सेवाओं के क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और वैश्विक मानकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अग्रणी पेस्ट कंट्रोल और हाइजीन सेवा प्रदाता कंपनी रेंटोकिल पीसीआई (Rentokil PCI) ने आज पेकॉप पेस्ट कंट्रोल सर्विसेज (Pecopp Pest Control Services Pvt Ltd) के सफल अधिग्रहण की घोषणा की है. यह अधिग्रहण विशेष रूप से पश्चिमी भारत में ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को मजबूत करेगा और पेस्ट मैनेजमेंट उद्योग में नए मानक स्थापित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगा.
रणनीतिक विस्तार और सेवा क्षमता में वृद्धि
इस अधिग्रहण के तहत पेकॉप का ग्राहक पोर्टफोलियो, अनुभवी कार्यबल और परिचालन संपत्तियां अब रेंटोकिल पीसीआई नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगी. यह विलय दो ऐसी संस्थाओं को एक साथ लाता है जो नवाचार, उत्कृष्ट सेवा और सतत विकास के साझा दृष्टिकोण से प्रेरित हैं.
मजबूत स्थानीय विरासत और वैश्विक संसाधनों का मेल
मुंबई में स्थापित पेकॉप ने पिछले कई दशकों में एक मजबूत प्रतिष्ठा बनाई है. कंपनी ने प्रोफेशनल सर्विसेज, लक्ज़री हॉस्पिटैलिटी और प्रीमियम एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रतिष्ठित ग्राहकों को सेवाएं दी हैं. अब रेंटोकिल पीसीआई के साथ जुड़ने के बाद पेकॉप को वैश्विक संसाधनों, उन्नत रिसर्च एंड डेवलपमेंट और विस्तृत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा, जिससे उसकी सेवा गुणवत्ता और भी बेहतर होगी.
रेंटोकिल पीसीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड लुईस ने कहा कि पेकॉप को रेंटोकिल पीसीआई परिवार में शामिल करना भारत में सेवा गुणवत्ता को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी ग्राहकों को विश्व स्तरीय, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान प्रदान करेगी.
पेकॉप के मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ बलवानी ने कहा कि पेकॉप की स्थानीय विशेषज्ञता और रेंटोकिल पीसीआई की वैश्विक नेतृत्व क्षमता मिलकर ग्राहकों को अत्याधुनिक समाधान प्रदान करेगी. उन्होंने इसे कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया.
डिजिटल नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीति
यह अधिग्रहण रेंटोकिल पीसीआई की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें वह उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं देने के लिए डिजिटल रणनीतियों और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है. कंपनी का फोकस सेवा मानकों को लगातार बेहतर बनाने पर है.
बैंक के एमडी और सीईओ स्वरूप साहा ने बताया कि बोर्ड ने ₹3000 करोड़ तक पूंजी जुटाने को मंजूरी दे दी है. इसके लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति भी कर दी गई है और जल्द ही निवेशकों के साथ बातचीत शुरू होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank) ने पूंजी आधार मजबूत करने और सरकार की हिस्सेदारी घटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने ₹3000 करोड़ तक इक्विटी पूंजी जुटाने के लिए योग्य संस्थागत प्लेसमेंट (QIP) की तैयारी शुरू कर दी है. इसके साथ ही बैंक ने चालू वित्त वर्ष में शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) सुधारने, आंतरिक आईटी सिस्टम मजबूत करने और वेंडर जोखिम कम करने पर भी जोर दिया है.
QIP के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी
बैंक के एमडी और सीईओ स्वरूप साहा ने बताया कि बोर्ड ने ₹3000 करोड़ तक पूंजी जुटाने को मंजूरी दे दी है. इसके लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति भी कर दी गई है और जल्द ही निवेशकों के साथ बातचीत शुरू होगी. उन्होंने कहा कि पूंजी जुटाने की समयसीमा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. यह फंड जुटाव QIP के माध्यम से किया जाएगा.
सरकार की हिस्सेदारी घटाने की रणनीति
फिलहाल बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 93.85 प्रतिशत है, जिसे काफी ऊंचा माना जाता है. बैंक प्रबंधन के अनुसार पिछले वर्ष हिस्सेदारी में करीब 3 से 3.5 प्रतिशत की कमी लाई गई थी. अब QIP के साथ-साथ सरकार द्वारा संभावित ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए भी हिस्सेदारी घटाने की योजना पर काम किया जा सकता है. इससे बैंक में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ेगी.
NIM में सुधार की उम्मीद
बैंक ने माना कि वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध ब्याज मार्जिन दबाव में रहा. इसकी एक बड़ी वजह बैंक का कम CASA बेस और ब्याज दरों में बदलाव रहा. प्रबंधन का कहना है कि बैंक की करीब 50 प्रतिशत लोन बुक बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है. इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष मार्च 2027 तक NIM बढ़कर 2.65 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है.
रिकॉर्ड मुनाफे के बाद बढ़ा डिविडेंड
बैंक ने प्रति शेयर 39 पैसे का लाभांश घोषित किया है, जो हाल के वर्षों में बेहतर स्तर माना जा रहा है. प्रबंधन के अनुसार बैंक की कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देना संभव हुआ. बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 में ₹1,322 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया, जो बैंक के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मुनाफा है.
साइबर जोखिम कम करने पर बोर्ड का फोकस
तेजी से बढ़ते डिजिटल बैंकिंग माहौल के बीच बैंक ने साइबर सुरक्षा और आईटी ढांचे को मजबूत करने का फैसला किया है. बोर्ड स्तर पर वेंडर जोखिम प्रबंधन के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार किया गया है.
बैंक का लक्ष्य बाहरी विक्रेताओं पर निर्भरता कम कर आंतरिक तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना है. हालांकि प्रबंधन ने माना कि वेंडर पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन इसे सीमित किया जाएगा.
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े जियो-पॉलिटिकल तनाव तेजी से बढ़ रहे हैं. UAE, OPEC+ समूह का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश रहा है, जिसमें रूस जैसे सहयोगी देश भी शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य में संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका लगा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ गठबंधन से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. इस फैसले से पहले ही दबाव में चल रहे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है.
OPEC को बड़ा झटका
तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब UAE ने संगठन से अलग होने का फैसला किया. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े जियो-पॉलिटिकल तनाव तेजी से बढ़ रहे हैं. UAE, OPEC+ समूह का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश रहा है, जिसमें रूस जैसे सहयोगी देश भी शामिल हैं. यह गठबंधन पहले वैश्विक तेल उत्पादन का करीब आधा हिस्सा नियंत्रित करता था.
ऊर्जा रणनीति के तहत लिया गया फैसला
UAE के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल मजुरी ने बताया कि यह फैसला देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और उत्पादन लक्ष्यों की समीक्षा के बाद लिया गया है. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक नीतिगत निर्णय है, जिसे मौजूदा और भविष्य की उत्पादन नीतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
हार्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) में लगातार तनाव बना हुआ है. यह दुनिया का एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से करीब 20% वैश्विक कच्चे तेल और LNG की सप्लाई गुजरती है. ईरान की ओर से जहाजों पर हमलों और धमकियों के कारण खाड़ी देशों के लिए तेल निर्यात करना मुश्किल हो गया है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.
बाजार पर असर और तेल की कीमतें
UAE के इस फैसले के बाद तेल कीमतों में शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन सप्लाई को लेकर चिंता के चलते ब्रेंट क्रूड अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि असली चिंता OPEC से बाहर निकलना नहीं, बल्कि हार्मुज जलडमरूमध्य में जारी बाधाएं हैं, जो सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं.
OPEC+ की पकड़ कमजोर
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, वैश्विक तेल उत्पादन में OPEC+ की हिस्सेदारी फरवरी के करीब 48% से घटकर मार्च में 44% रह गई है. आने वाले समय में यह और कम हो सकती है क्योंकि सप्लाई बाधाएं बढ़ रही हैं.
खाड़ी देशों में बढ़ते मतभेद
UAE का यह कदम खाड़ी देशों के बीच बढ़ती दरार को भी दर्शाता है. ईरान के साथ जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति दोनों को प्रभावित किया है.
अमेरिका से बढ़ती नजदीकी
इस फैसले को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए कूटनीतिक बढ़त के रूप में भी देखा जा रहा है, जो लंबे समय से OPEC की ऊंची तेल कीमतों की नीति की आलोचना करते रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में UAE ने अमेरिका और इजराइल के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, खासकर 2020 के अब्राहम समझौते के बाद.
विश्लेषकों का मानना है कि OPEC से बाहर होकर UAE अपने सस्ते तेल भंडार से अधिकतम उत्पादन कर सकता है. ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता सीमित है, यह कदम UAE को रणनीतिक बढ़त दे सकता है. कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ OPEC के लिए झटका है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और जियो-पॉलिटिकल समीकरणों को भी नए सिरे से बदल सकता है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 में IIP ग्रोथ 3.9% थी, जो इस साल बढ़कर 4.1% हो गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से राहत देने वाली खबर आई है. मार्च 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन (IIP) बढ़कर 4.1% पर पहुंच गया है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर की मजबूत प्रदर्शन से सहारा मिला. हालांकि यह ग्रोथ पांच महीने के निचले स्तर पर है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले सुधार निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है.
इंडस्ट्रियल ग्रोथ में सुधार, लेकिन रफ्तार सीमित
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 में IIP ग्रोथ 3.9% थी, जो इस साल बढ़कर 4.1% हो गई. हालांकि, यह पिछले पांच महीनों का सबसे निचला स्तर भी है, जिससे संकेत मिलता है कि ग्रोथ बनी हुई है लेकिन रफ्तार अभी स्थिर नहीं है. वहीं, फरवरी 2026 के आंकड़ों में भी हल्का संशोधन किया गया है, जहां पहले अनुमानित 5.2% की ग्रोथ को घटाकर 5.1% कर दिया गया.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का आधार
मार्च 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 4.3% की ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले साल के 4% से थोड़ी बेहतर है. खास बात यह रही कि 23 में से 14 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई.
इनमें सबसे ज्यादा योगदान देने वाले सेक्टर रहे:
1. मूल धातुओं का निर्माण: 8.6%
2. मोटर व्हीकल्स, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर: 18.1%
3. मशीनरी और उपकरण: 11.2%
स्टील और धातु से जुड़े उत्पादों जैसे MS स्लैब, अलॉय स्टील और HR कॉइल्स ने इस ग्रोथ को मजबूत आधार दिया.
माइनिंग में जबरदस्त उछाल, बिजली सेक्टर सुस्त
माइनिंग सेक्टर ने इस बार सबसे ज्यादा चौंकाया और 5.5% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले साल 1.2% थी. वहीं, बिजली उत्पादन में सिर्फ 0.8% की मामूली बढ़त दर्ज हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7.5% की दर से बढ़ा था. इससे साफ है कि पावर सेक्टर की सुस्ती कुल ग्रोथ को सीमित कर रही है.
कैपिटल गुड्स और इंफ्रा में मजबूती
यूजेस-बेस्ड क्लासिफिकेशन के अनुसार, कैपिटल गुड्स में 14.6% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई, जो निवेश गतिविधियों में तेजी का संकेत है. इसके अलावा बेसिक इंफ्रा और कंस्ट्रक्शन मटीरियल्स 6.7%, इंटरमिडिएट गुड्स 3.3%, कंज्यूमर गुड्स 5.3% और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में 1.1% की ग्रोथ दर्ज हुई. ये आंकड़े बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश से जुड़े सेक्टर अर्थव्यवस्था को सपोर्ट दे रहे हैं, जबकि उपभोक्ता मांग अभी मिश्रित बनी हुई है.
पूरे वित्त वर्ष में स्थिर रही ग्रोथ
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान औद्योगिक उत्पादन वृद्धि लगभग स्थिर रही और 4.1% पर बनी रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 4% के करीब है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स में मजबूती भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है. हालांकि, बिजली सेक्टर की धीमी रफ्तार और वैश्विक अनिश्चितताएं आगे की ग्रोथ पर असर डाल सकती हैं. कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़े यह बताते हैं कि चुनौतियों के बावजूद भारत की औद्योगिक गतिविधियों में स्थिरता बनी हुई है और ग्रोथ का आधार मजबूत हो रहा है.