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मई 2025 में उपभोक्ता भावना 1.6 अंक गिरी, नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ी : Ipsos
Ipsos द्वारा अपने ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन सर्वे प्लेटफॉर्म और भारत में अपने इंडियाबस प्लेटफॉर्म पर संचालित 30 देशों के मासिक सर्वेक्षण पर आधारित हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
LSEG-Ipsos PCSI इंडिया के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में भारत में उपभोक्ता भावना में 1.6 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई है. इसके पीछे अमेरिका की ट्रंप सरकार की व्यापार नीतियों, वैश्विक आर्थिक मंदी, युद्ध जैसे वैश्विक कारकों और बड़ी कंपनियों में हो रही नौकरियों में कटौती को जिम्मेदार माना जा रहा है.
हालांकि, इस निराशाजनक स्थिति के बीच एक सकारात्मक संकेत यह है कि नई कर प्रणाली के लागू होने के बाद भारत में व्यक्तिगत वित्त और निवेश को लेकर उपभोक्ता भावना में सुधार देखा गया है. इससे करदाताओं और वेतनभोगियों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे बचत और बड़े खर्चों में वृद्धि देखी गई है. भारत में कंपनियों द्वारा दिए गए वेतन वृद्धि ने भी इस सकारात्मक बदलाव में योगदान दिया है.
राष्ट्रीय सूचकांक में भारत तीसरे स्थान पर
कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत राष्ट्रीय उपभोक्ता भावना सूचकांक में तीसरे स्थान पर बना हुआ है. यह सूचकांक 30 देशों के बीच तुलना के आधार पर तैयार किया गया है.
उप-सूचकांक का मिला-जुला प्रदर्शन
1.आर्थिक अपेक्षाएं उप-सूचकांक में 4.2 प्रतिशत अंकों की गिरावट
2. रोजगार विश्वास उप-सूचकांक में 2.6 प्रतिशत अंकों की गिरावट
3. वर्तमान व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति उप-सूचकांक में 0.1 प्रतिशत अंकों की वृद्धि
4. निवेश माहौल उप-सूचकांक* में 0.4 प्रतिशत अंकों की सुधार
इप्सोस इंडिया के सीईओ अमित आदारकर ने कहा "भारत ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच जबरदस्त लचीलापन दिखाया है. ट्रंप प्रशासन द्वारा व्यापार युद्ध और नौकरियों में कटौती की धमकियों ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर किया, वहीं भारत में 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे सैन्य घटनाक्रमों ने भी बाजारों पर अस्थायी प्रभाव डाला. हालांकि, नई कर नीति और वेतनवृद्धि ने व्यक्तिगत वित्तीय स्थितियों में सुधार लाया है. यह एक विचित्र विरोधाभास है जहां एक ओर कुछ क्षेत्रों में वेतन में वृद्धि हो रही है, वहीं कई कंपनियों में छंटनी देखने को मिल रही है. आगामी मानसून और खाद्य मुद्रास्फीति में कमी से अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है."
30 देशों में भारत की स्थिति
मलेशिया (59.5) इस महीने सबसे ऊंचे राष्ट्रीय सूचकांक स्कोर के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत (56.2) तीसरे स्थान पर है. केवल तीन देशों - तुर्किए (35.0), जापान (34.5), और हंगरी (34.0) का स्कोर 40 से नीचे रहा. पिछले साल की तुलना में 15 देशों में उपभोक्ता भावना में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि केवल 6 देशों में सुधार हुआ है, जिसमें मलेशिया (+12.3) सबसे आगे है. ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स को अब 30 देशों में मापा जा रहा है, जिसमें इस बार आयरलैंड को भी शामिल किया गया है. यह सर्वेक्षण 25 अप्रैल से 9 मई 2025 के बीच 21,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ किया गया है.
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