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FY25 में भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में 3.4% की बढ़ोतरी, आय में 7% की गिरावट

FY25 में भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में मात्रा के स्तर पर मजबूती देखने को मिली है, लेकिन कमजोर वैश्विक कीमतों ने निर्यात आय पर दबाव बनाए रखा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में मात्रा के लिहाज से 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक निर्यात वॉल्यूम बढ़कर 64.7 मिलियन टन हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 62.6 मिलियन टन था. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरम कीमतों के चलते निर्यात से होने वाली कमाई में गिरावट आई है.

निर्यात मूल्य में लगभग 7% की कमी

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, FY25 में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मूल्य घटकर 44.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि FY24 में यह 47.7 अरब डॉलर था. यानी सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट वैश्विक बाजार में कीमतों के दबाव को दर्शाती है, भले ही निर्यात की भौतिक मात्रा बढ़ी हो.

किन उत्पादों से बढ़ा निर्यात वॉल्यूम

निर्यात मात्रा में इजाफा मुख्य रूप से मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), पेट्रोलियम कोक और फ्यूल ऑयल की मजबूत विदेशी मांग के कारण हुआ. मार्च महीने में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 5.7 मिलियन टन रहा, जो साल-दर-साल लगभग स्थिर रहा. हालांकि, इसी महीने निर्यात मूल्य में 9 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 3.9 अरब डॉलर पर आ गया, जिससे कमजोर कीमतों का असर साफ दिखता है.

यूएई बना सबसे बड़ा खरीदार

वैश्विक एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक, मार्च में भारत से पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा. इसके बाद सिंगापुर और नीदरलैंड्स का स्थान रहा.

आयात और घरेलू मांग मजबूत

आयात के मोर्चे पर, FY25 में भारत का रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात 4.9 प्रतिशत बढ़कर 51.1 मिलियन टन हो गया, जो एक साल पहले 48.7 मिलियन टन था. आयात बिल भी 4.3 प्रतिशत बढ़कर 23.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मजबूत मांग और अधिक वॉल्यूम को दर्शाता है.

ईंधन खपत में इजाफा, एविएशन फ्यूल सबसे आगे

घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत भी मजबूत बनी रही. FY25 में कुल ईंधन मांग बढ़कर 239.2 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 234.3 मिलियन टन थी. सबसे तेज बढ़त एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) में देखी गई, जिसमें 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे हवाई यात्रा में तेजी का समर्थन मिला. वहीं, पेट्रोल (मोटर स्पिरिट) और एलपीजी की खपत क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि डीजल की मांग में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

FY26 में रिकॉर्ड खपत का अनुमान

आगे देखते हुए, FY26 में भारत की पेट्रोलियम उत्पाद खपत के 252.9 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी रह सकती है.

रिफाइनरियों में मेंटेनेंस, लेकिन निर्यात रहेगा मजबूत

Kpler का अनुमान है कि 2025 की दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की प्रोसेसिंग में लगभग 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन की अस्थायी कमी आ सकती है. यह कमी रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स जैसी कंपनियों में प्रस्तावित मेंटेनेंस के कारण होगी. हालांकि, इसके बावजूद भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात वॉल्यूम मजबूत बने रहने की उम्मीद है.

 


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