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2026 में कीमत और बहुपयोगिता बनेगी आधार, भारतीय फैशन इंडस्ट्री को लेकर संतुलिोत उम्मीद
उपभोक्ताओं की ओर से बेहतर मूल्य, तेज़ डिलीवरी और लगातार गुणवत्ता की मांग के बीच, सफलता ऑपरेशनल फुर्ती, सोच-समझकर की गई प्राइसिंग और सभी चैनलों पर प्रासंगिक कलेक्शंस पर निर्भर करेगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
किशन सिंह
जैसा कि 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय फैशन की खरीदारी में एक बुनियादी बदलाव आ चुका है, जहां आवेग और अतिरिक्त खर्च की जगह बहुपयोगिता और आराम को प्राथमिकता दी जा रही है, वैसे में भारत का परिधान और फैशन सेक्टर 2026 में संतुलित आशावाद के साथ प्रवेश कर रहा है. समझदार उपभोक्ताओं, तेज ट्रेंड साइकिल और मूल्य व ऑपरेशनल अनुशासन की ओर स्पष्ट झुकाव के साथ, आगे की वृद्धि उत्साही उपभोग से कम और सटीक रिटेलिंग, सप्लाई-चेन फुर्ती और प्रासंगिकता-आधारित कलेक्शंस से अधिक संचालित होगी.
आराम-प्रधान कपड़े, मिड-प्रीमियम फैशन, फास्ट-रिफ्रेश स्टाइल्स और रोज़मर्रा के उपयोगी परिधान जब मुख्य वॉर्डरोब स्टेपल बन रहे हैं, तो फैशन का स्टेटस सिंबल के रूप में महत्व अब अनुभव-आधारित खर्च को रास्ता दे रहा है. ब्रांड्स अब गति, स्टोरीटेलिंग, प्राइसिंग अनुशासन और ओम्नीचैनल एग्ज़िक्यूशन जैसे पहलुओं पर बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.
हालांकि, इस सेक्टर को लागत में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और बढ़ती सर्विस अपेक्षाओं से भी जूझना होगा. 2,500 रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और एग्ज़िक्यूशन में गलती की बेहद कम गुंजाइश के बीच, आने वाला साल ऑपरेशनल मजबूती और ब्रांड प्रासंगिकता दोनों की कड़ी परीक्षा लेगा.
कैंटाबिल रिटेल इंडिया के होल-टाइम डायरेक्टर दीपक बंसल ने कहा, “2026 में हमें उम्मीद है कि उपभोक्ता आराम-प्रधान कपड़ों, प्रीमियम बेसिक्स और टिकाऊ वॉर्डरोब एसेंशियल्स को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे. टियर-2 और टियर-3 बाजार आकांक्षात्मक खर्च बढ़ने के कारण सबसे बड़े ग्रोथ इंजन बने रहेंगे. हाइब्रिड वर्कवियर, विंटरवियर और फंक्शनल रोज़मर्रा के फैशन को और गहराई से अपनाया जाएगा.”
बीता हुआ साल
2025 में उपभोग अनुशासन के साथ लौटा, जहां उपभोक्ताओं ने अधिक बार खरीदारी की, लेकिन बेहतर मूल्य, तेज़ डिलीवरी और अधिक प्रासंगिकता की मांग की. नॉन-मेट्रो बाजार ऑफलाइन विस्तार और ओम्नीचैनल के सहारे प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभरे. Gen Z ने खुद को एक गंभीर खर्च करने वाले वर्ग के रूप में स्थापित किया, खासकर प्रीमियम स्ट्रीटवियर और ट्रेंड-आधारित कैटेगरीज में.
सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में वृद्धि और चयनात्मक रिकवरी दिखाई दी. आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (H1FY26) में कुल आय 3,931 करोड़ रुपये दर्ज की, जो एक साल पहले 3,500 करोड़ रुपये थी, जबकि कैंटाबिल रिटेल ने राजस्व में साल-दर-साल 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 334.7 करोड़ रुपये दर्ज किए. रेमंड लाइफस्टाइल ने H1FY26 में 12 प्रतिशत की आय वृद्धि दर्ज की, जबकि वेदांत फैशंस ने मार्जिन दबाव के बावजूद 7.2 प्रतिशत राजस्व वृद्धि हासिल की.
अरविंद फैशंस में निरंतर परिचालन से होने वाला मुनाफा 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ा. स्टोर विस्तार खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूत बना रहा, जिससे कन्वर्जन और ब्रांड ट्रस्ट में फिजिकल रिटेल की भूमिका और पुख्ता हुई. नीतिगत समर्थन से भी अतिरिक्त मदद मिली, क्योंकि अधिकांश टेक्सटाइल इनपुट्स पर GST दरों को 5 प्रतिशत पर मानकीकृत करने से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसी पुरानी संरचनात्मक समस्याओं को कम करने में मदद मिली. निर्यात मांग में भी स्थिरता के शुरुआती संकेत दिखे.
मूल्य और लचीलापन की ओर झुकाव
खरीदार अब बिना सोचे-समझे फैशन के पीछे नहीं भाग रहे हैं, और खरीदारी का व्यवहार तेजी से मूल्य, उपयोगिता और लचीलेपन पर आधारित हो गया है. इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि आराम-प्रधान, बहुपयोगी परिधानों और मिड-प्रीमियम प्राइस पॉइंट्स की ओर एक स्पष्ट झुकाव देखा जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में वृद्धि चयनात्मक और अनुशासित रहने की उम्मीद है, जहां वही ब्रांड आगे बढ़ेंगे जो गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रासंगिकता के जरिए कीमत को सही ठहरा सकें.
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) के चीफ मेंटर राहुल मेहता ने कहा, “उपभोक्ता न केवल कीमत बल्कि सेवा के मामले में भी पहले से कहीं अधिक मांग करने वाले हो गए हैं. पिछले साल ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय उपभोक्ता एक साथ कीमत के प्रति संवेदनशील भी हैं और गुणवत्ता को लेकर बेहद सजग भी. वे हर प्राइस पॉइंट पर बेहतर मूल्य चाहते हैं, लेकिन साथ ही तेज डिलीवरी, आसान रिटर्न, सटीक साइजिंग और जवाबदेह कस्टमर केयर को एक बुनियादी अपेक्षा मानते हैं.”
लिबास के लिए, एथनिक वियर, फास्ट फैशन और प्रीमियम-लेकिन-सुलभ सेगमेंट, खासकर 2,500 रुपये से कम कीमत वाले महिलाओं के फ्यूज़न और अवसर-विशेष स्टाइल्स, मजबूत अवसर के रूप में उभर रहे हैं, जो मुख्य रूप से इम्पल्स बाइंग से प्रेरित हैं, न कि उच्च प्रीमियम की ओर किसी बदलाव से.
लिबास के फाउंडर और सीईओ सिद्धांत केशवानी ने कहा, “2026 की ओर देखते हुए हमें उम्मीद है कि फास्ट फैशन और एथनिक वियर में गति और तेज़ होगी, जिसे अधिक शादियों, अनुकूल मानसून और Gen Z के ट्रेंड प्रभाव से बल मिलेगा. हम इम्पल्स बाइंग और पॉकेट-फ्रेंडली फैशन में भी वृद्धि देख रहे हैं, जहां ग्राहक अब एक्सेसरीज़ और फुटवियर सहित पूरे लुक में निवेश कर रहे हैं. कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच यह तेज प्राइसिंग के महत्व को और बढ़ाता है.”
मार्केट का स्वीट स्पॉट और ओम्नीचैनल मौजूदगी
मार्केट का स्वीट स्पॉट स्पष्ट रूप से मिड-प्रीमियम, रोजमर्रा का फैशन है. मिड-प्रीमियम परिधान ब्रांड्स के लिए सबसे मजबूत अवसर बनते जा रहे हैं, क्योंकि ग्राहक सुलभ कीमतों पर गुणवत्ता चाहते हैं. पुरुषों के कैज़ुअल वियर, विंटरवियर और महिलाओं के वेस्टर्न वियर जैसी कैटेगरीज कैंटाबिल के लिए लगातार वृद्धि दिखा रही हैं.
स्निच में परफॉर्मेंस-प्रेरित कैज़ुअलवियर और रोज़मर्रा के एसेंशियल्स सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कैटेगरीज के रूप में उभर रही हैं, क्योंकि उपभोक्ता आराम के साथ उन्नत स्टाइल चाहते हैं. मेहता ने यह भी नोट किया कि पिछले कुछ वर्षों में कैज़ुअल वियर के प्रभुत्व के बाद फॉर्मल वियर की ओर हल्का झुकाव लौट रहा है. डेनिम जींस की गति भी इसी तरह धीमी हो रही है और उसकी जगह कुछ प्रतिशत लाइक्रा के साथ चिनोज ले रही हैं.
जहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खोज के लिए अहम बने हुए हैं, वहीं ऑफलाइन रिटेल खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और वेडिंग मार्केट्स में फिर से उभर रहा है. हालांकि फैशन स्पेस में क्विक कॉमर्स अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन कई प्रसिद्ध ब्रांड 10-मिनट डिलीवरी के लाभ उठाते हुए इसमें लगातार प्रगति कर रहे हैं.
स्निच के फाउंडर और सीईओ सिद्धार्थ डुंगरवाल ने कहा, “स्थानीय पहचान की ओर एक मजबूत झुकाव उभरेगा, क्योंकि घरेलू ब्रांड्स और क्षेत्रीय प्रेरणा से बनी डिज़ाइन कहानियां गति पकड़ेंगी. उपभोक्ता तेज़ डिलीवरी, इमर्सिव स्टोर अनुभव और सहज ओम्नीचैनल जर्नी की उम्मीद करेंगे. टियर-2 और टियर-3 बाजार स्टाइल अपनाने की रफ्तार बढ़ाएंगे.”
केशवानी ने जोड़ा कि ई-कॉमर्स, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, वृद्धि का नेतृत्व करता रहेगा, जबकि सुविधा-आधारित फैशन खरीद के लिए क्विक कॉमर्स की प्रासंगिकता बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि वेडिंग सीज़न के दौरान ऑफलाइन स्टोर्स ने अपने अनुभवात्मक लाभ के कारण बेहतरीन प्रदर्शन किया. डुंगरवाल ने भी यही भावना दोहराई और कहा कि हाइब्रिड रिटेल व्यवहार तेज़ हुआ है, जहां ऑनलाइन खोज और त्वरित कन्वर्ज़न को बढ़ावा देता है, जबकि ऑफलाइन भरोसा बनाता है और समृद्ध अनुभव प्रदान करता है.
न्यूमेरो उनो की चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर मंजुला गांधी ने कहा, “एक्टिव और लाइफस्टाइल सेगमेंट, जिसमें स्पोर्ट्सवियर और एथलीज़र शामिल हैं, लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि खासकर युवा उपभोक्ताओं और शहरी प्रोफेशनल्स में हेल्थ और वेलनेस कल्चर फैल रहा है. जो ब्रांड इस कैटेगरी का विस्तार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करेंगे, उन्हें लाभ मिलने की संभावना है.”
गति और ऑपरेशनल अनुशासन
इंडस्ट्री लीडर्स 2026 में भी फिट्स, रंगों और फैब्रिक्स में बदलाव के प्रति फुर्ती और तेज़ प्रतिक्रिया की बढ़ती अहमियत को साथ लेकर चल रहे हैं. ऑपरेशनल और क्रिएटिव दोनों स्तरों पर गति अब एक वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बन चुकी है. फुर्तीली सप्लाई चेन, स्मार्ट इन्वेंट्री प्लेसमेंट और तेज़ डिज़ाइन ड्रॉप्स में निवेश ब्रांड्स के लिए प्रमुख डिफरेंशिएटर बन रहे हैं.
लीडर्स ने बताया कि ट्रेंड अब पहले से कहीं अधिक तेज़ी से बदलते हैं, जहां किसी खास स्टाइल की मांग में अचानक उछाल तेज़ डिज़ाइन और रीप्लेनिशमेंट साइकिल की मांग करता है. एक और अहम इनसाइट यह रही कि महिला उपभोक्ता अपने फेस्टिव वॉर्डरोब की योजना पहले से बनाने लगी हैं, जहां श्राद्ध के तुरंत बाद खरीदारी शुरू हो जाती है और नवरात्रि, करवा चौथ और दिवाली तक चलती है.
फैबइंडिया के प्रेसिडेंट–अपैरल सुमित अरोड़ा ने कहा, “परिधान में लोगों ने समारोह-आधारित स्टाइलिंग को अपनाया, जहां प्राकृतिक फैब्रिक्स, समृद्ध टेक्सचर और हस्तनिर्मित डिटेल्स को चुना गया, जो आराम और उन्नत एलिगेंस के बीच संतुलन बनाते हैं. पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सिलुएट्स के साथ मिलाने की स्पष्ट प्रवृत्ति दिखी, और परिवारों ने ऐसे कोऑर्डिनेटेड ड्रेसिंग को प्राथमिकता दी जो व्यक्तिगत और सामंजस्यपूर्ण लगे.”
कई फायदे, लेकिन जोखिम भी बरकरार
बाहरी मोर्चे पर, प्रमुख निर्यात बाजारों में टैरिफ दबाव और व्यापारिक तनाव एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिससे निर्माताओं और ब्रांड्स को प्राइसिंग रणनीतियों पर पुनर्विचार करना, लागत को और सख्ती से नियंत्रित करना और लाभप्रदता बचाने के लिए बाजारों में विविधता लानी पड़ रही है. मांग में उतार-चढ़ाव भी एक और बाधा है, जिसने फोरकास्टिंग और इन्वेंट्री प्लानिंग को अधिक जटिल बना दिया है.
विशाल फैब्रिक्स के सीईओ सुकेतु शाह ने कहा, “2026 की ओर देखते हुए कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता, भू-राजनीतिक व्यवधान और मांग की अनिश्चितता टेक्सटाइल सेक्टर के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे. हालांकि, बाजार विविधीकरण, प्रीमियमाइजेशन और सस्टेनेबल सोर्सिंग के जरिए अवसर भी उभर रहे हैं. भारत के पैमाने, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक हब्स से परे विविध सोर्सिंग की तलाश कर रहे वैश्विक ब्रांड्स के समर्थन से सेक्टर का आउटलुक संतुलित रूप से आशावादी बना हुआ है.”
हालांकि, निर्यात मांग में स्थिरता के संकेत मिले हैं. बेहतर प्रदर्शन दर्ज करते हुए, भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात, जिसमें हस्तशिल्प भी शामिल हैं, नवंबर 2025 में 2,855.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहे, जो नवंबर 2024 के 2,601.5 मिलियन डॉलर की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि है.
इसके अलावा, अपैरल सेक्टर को वस्तु एवं सेवा कर यानी GST के मोर्चे पर अधिक स्पष्टता से भी लाभ मिलने की संभावना है. 2026 में उपभोक्ता प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरेंगे, क्योंकि कम GST दरों से टेक्सटाइल वैल्यू चेन में लागत कम हुई है. GST में कमी ने कंपनियों को उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचाने और अपने मार्जिन मजबूत करने के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद की है.
हालांकि, मेहता ने चेतावनी दी कि घरेलू उद्योग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 2,500 रुपये से अधिक कीमत वाले उत्पादों पर GST का 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो जाना है, क्योंकि अधिकांश विंटर क्लोदिंग और फेस्टिव या वेडिंग गारमेंट्स 2,500 रुपये से ऊपर आते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा, “कहने की जरूरत नहीं है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ निर्यात सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं.”
व्यापार मोर्चे पर, 24 जुलाई को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को विकास की राह पर ले जाने के लिए तैयार है. यह समझौता अगले दो से तीन वर्षों में यूके बाजार में निर्यात को दोगुना करने का अवसर प्रस्तुत करता है, बशर्ते अनुपालन जैसे अन्य पहलुओं का भी ध्यान रखा जाए. भारत कई अन्य देशों के साथ भी FTA वार्ताओं को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है, जैसा कि उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी एक कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक टेक्सटाइल और अपैरल बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारत को अपने FTA नेटवर्क का तत्काल विस्तार करने की जरूरत है.
उपभोक्ताओं की ओर से बेहतर मूल्य, तेज़ टाइम-टू-मार्केट और लगातार गुणवत्ता की मांग के बीच, सफलता ऑपरेशनल फुर्ती, सोच-समझकर की गई प्राइसिंग और सभी चैनलों पर प्रासंगिक कलेक्शंस पर निर्भर करेगी. जैसे-जैसे इंडस्ट्री 2026 में कदम रख रही है, प्लेबुक साफ है. वृद्धि उन्हीं ब्रांड्स के हिस्से आएगी जो किसी भी कीमत पर स्केल के पीछे भागने के बजाय अनुशासन के साथ एग्जिक्यूशन करेंगे.
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