होम / बिजनेस / पश्चिम एशिया संकट का असर: भारत की उर्वरक आपूर्ति पर बढ़ा दबाव, ICRIER की रिपोर्ट में चेतावनी
पश्चिम एशिया संकट का असर: भारत की उर्वरक आपूर्ति पर बढ़ा दबाव, ICRIER की रिपोर्ट में चेतावनी
ICRIER ने कहा है कि उर्वरक उत्पादन को बिना बाधा जारी रखने के लिए रणनीतिक भंडार और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता की लगातार निगरानी जरूरी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर शोध करने वाली संस्था ICRIER (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार में व्यवधान पैदा हुआ है, जिससे भारत में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है.
आयात पर निर्भरता बढ़ने का जोखिम
रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने उर्वरकों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल और तैयार उत्पादों का आयात करता है. खास तौर पर यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है. इजराइल और ईरान जैसे देशों में जारी संकट के कारण वैश्विक शिपिंग मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर उर्वरकों के उत्पादन और परिवहन लागत पर पड़ रहा है.
किसानों और सरकार दोनों पर बढ़ेगा दबाव
ICRIER के मुताबिक इन व्यवधानों के कारण उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर किसानों पर पड़ेगा. साथ ही सरकार के लिए उर्वरक सब्सिडी पर खर्च भी बढ़ सकता है. भारत सरकार किसानों को उर्वरक सस्ते दामों पर उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता देती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ रहा है.
सरकार उठा रही कई कदम
रिपोर्ट में बताया गया है कि आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है. इसमें मौजूदा उर्वरक भंडार का प्रबंधन, राज्यों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना और फसलों की जरूरत के आधार पर वितरण को प्राथमिकता देना शामिल है. इसके साथ ही यूरिया और जटिल उर्वरकों के घरेलू उत्पादन को भी जारी रखा गया है ताकि आयात के साथ मिलकर राष्ट्रीय मांग को पूरा किया जा सके.
रणनीतिक भंडार और गैस आपूर्ति पर नजर
ICRIER ने कहा है कि उर्वरक उत्पादन को बिना बाधा जारी रखने के लिए रणनीतिक भंडार और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता की लगातार निगरानी जरूरी है. केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उर्वरक की खेप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक पहुंचे और बुवाई के समय किसानों को पर्याप्त आपूर्ति मिल सके.
सब्सिडी सुधार की जरूरत
रिपोर्ट में उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया है. ICRIER के अनुसार अधिक लक्षित वितरण प्रणाली अपनाने से सब्सिडी का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे उपायों को और प्रभावी बनाने की सलाह दी गई है.
आयात के स्रोतों में विविधता जरूरी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उर्वरकों के आयात के स्रोतों में विविधता लाना जोखिम कम करने के लिए जरूरी है. यदि भारत कई देशों के साथ कच्चे माल और तैयार उर्वरकों की आपूर्ति के लिए समझौते करता है तो आपूर्ति श्रृंखला अधिक स्थिर रह सकती है.
आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर जोर
ICRIER के अनुसार पश्चिम एशिया संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत के उर्वरक क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टॉक प्रबंधन, घरेलू उत्पादन, लक्षित सब्सिडी वितरण और आयात के विविध स्रोत जैसे उपाय आने वाले बुवाई सीजन में उर्वरकों की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करने और देश की कृषि उत्पादकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
टैग्स