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RBI की स्वैप सुविधा का असर, भारतीय बैंकों ने विदेशी बाजार से जुटाए 12 अरब डॉलर

2026 में अब तक भारत से जुटाए गए कुल 17 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज में 12 अरब डॉलर की हिस्सेदारी भारतीय बैंकों की है. RBI की विशेष स्वैप सुविधा और विदेशी निवेशकों के मजबूत भरोसे से बैंकिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारतीय बैंकों ने 2026 में अब तक विदेशी बाजारों से करीब 12 अरब डॉलर जुटाए हैं. देश से जुटाए गए कुल 17 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज में बैंकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. इस रिकॉर्ड फंड जुटाने के पीछे भारतीय बैंकों की मजबूत साख के साथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की विशेष स्वैप सुविधा भी बड़ी वजह मानी जा रही है.

विदेशी बाजार से जुटाई गई इस पूंजी से बैंकों की विदेशी मुद्रा लिक्विडिटी मजबूत होगी. इससे उन्हें कारोबारियों और ग्राहकों को कर्ज देने तथा अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. खास बात यह है कि 5 जून को RBI की विशेष स्वैप सुविधा की घोषणा के बाद बैंकों ने करीब 10 अरब डॉलर जुटाए हैं.

विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों की मजबूत पकड़

2026 में अब तक भारत से कुल 17 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज जुटाया गया है. इसमें अकेले भारतीय बैंकों की हिस्सेदारी 12 अरब डॉलर है, जबकि बाकी रकम अन्य कंपनियों ने जुटाई है. अगर फंड जुटाने की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो इस साल का आंकड़ा 2021 के 22 अरब डॉलर के रिकॉर्ड को पार कर सकता है. 2025 में भारत से विदेशी बाजारों के जरिए महज 5 अरब डॉलर जुटाए गए थे.

हाल के दिनों में विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों की गतिविधियां और तेज हुई हैं. ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक, HDFC बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने मिलकर हालिया सप्ताह में 4.4 अरब डॉलर जुटाए हैं.

RBI की स्वैप सुविधा बनी बड़ी वजह

विदेशी बाजार से फंड जुटाने में RBI की वन-टाइम स्वैप सुविधा ने अहम भूमिका निभाई है. FCNR-B जमा के लिए 31 अगस्त की समयसीमा तय की गई है. इस तारीख तक बुक किए गए डिपॉजिट पर स्वैप सपोर्ट का लाभ मिलेगा.

RBI ने 5 जून को इस विशेष सुविधा का ऐलान किया था. इसके बाद बैंकों ने तेजी से विदेशी फंड जुटाना शुरू किया. 2026 में बैंकों द्वारा जुटाए गए कुल 12 अरब डॉलर में से करीब 10 अरब डॉलर की रकम 5 जून के बाद जुटाई गई है.

HDFC बैंक ने बनाया रिकॉर्ड

विदेशी बाजार से फंड जुटाने में HDFC बैंक सबसे आगे रहा है. बैंक ने गुरुवार को 1.75 अरब डॉलर जुटाए, जो किसी भारतीय बैंक द्वारा अब तक का सबसे बड़ा इश्यू है. इससे पहले जून में भी HDFC बैंक ने 75 करोड़ डॉलर जुटाए थे.

HDFC बैंक के ट्रेजरी हेड अरूप रक्षित के मुताबिक, जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल ग्राहकों को बेहतर वित्तीय सुविधाएं देने के साथ विदेशों में मौजूद ग्राहकों की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा. उनके अनुसार, इतनी बड़ी रकम जुटाना भारतीय बैंकिंग सिस्टम और बैंक की क्रेडिट क्वालिटी पर निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. इसी क्रम में IDFC फर्स्ट बैंक ने 10 करोड़ डॉलर और बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने पुराने इश्यू में 40 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी की है.

निवेशकों ने जमकर लगाया पैसा

विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों के बॉन्ड की मांग काफी मजबूत रही है. आमतौर पर एक साथ बड़ी मात्रा में बॉन्ड जारी होने पर कर्ज की लागत बढ़ सकती है, लेकिन भारतीय बैंकों के मामले में ऐसा नहीं हुआ.

HSBC इंडिया के विनोद वेंकटेश के मुताबिक, भारी सप्लाई के बावजूद स्प्रेड साल की शुरुआत की तुलना में केवल 5 बेसिस पॉइंट बढ़ा है. वहीं, MUFG के गौरव भगत के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है. भारतीय बैंकों के बॉन्ड इश्यू औसतन 2.89 गुना अधिक सब्सक्राइब हुए हैं.

साल के अंत तक और फंड आने की उम्मीद

जानकारों का मानना है कि विदेशी बाजार से फंड जुटाने का सिलसिला अभी जारी रह सकता है. साल के अंत तक 5 से 7.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी जुटाए जाने की उम्मीद है. हालांकि, 31 अगस्त को स्वैप विंडो बंद होने के बाद बैंकों की ओर से विदेशी बॉन्ड की सप्लाई कुछ कम हो सकती है. कम अवधि के लिए फंड जुटाने वाले बैंक बाद में रिफाइनेंसिंग के लिए बाजार में लौट सकते हैं. इसके अलावा 1.5% की एक अन्य स्वैप विंडो दिसंबर तक खुली है. कॉरपोरेट कंपनियों और NBFC की ओर से भी विदेशी बाजार में बॉन्ड जारी किए जाने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है.
 


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