ईरान युद्ध और तेल संकट ने वैश्विक निवेश माहौल को झटका दिया है. भारत जैसे उभरते बाजारों में इसका सबसे बड़ा असर FPIs की भारी बिकवाली और बाजार की कमजोरी के रूप में देखने को मिल रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी संकट के बीच वैश्विक बाजारों से विदेशी निवेशकों (FPIs) की भारी निकासी देखने को मिली है. बढ़ती तेल कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स से दूर कर दिया, जिसके चलते भारत सहित उभरते बाजारों में जोरदार बिकवाली दर्ज की गई है.
4 महीनों में रिकॉर्ड बिकवाली
2026 की शुरुआत से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹1.68 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है. यह पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है. इस बिकवाली का सबसे बड़ा हिस्सा मार्च में हुआ, जब अकेले एक महीने में FPIs ने लगभग ₹1.1 लाख करोड़ के शेयर बेच दिए.
ईरान युद्ध और तेल कीमतों ने बिगाड़ा माहौल
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई, जब ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 22% की तेजी दर्ज की गई और यह 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के चलते वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है.
भारत पर सबसे ज्यादा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतों ने अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि राजकोषीय घाटा और ग्रोथ आउटलुक भी प्रभावित हो रहा है. इसका असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा है, जहां इस साल अब तक बाजार में कमजोरी दर्ज की गई है.
उभरते बाजारों में भी निकासी का रुझान
FPIs की बिकवाली सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अन्य उभरते बाजारों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है. हालांकि भारत में निकासी का स्तर कई प्रतिस्पर्धी बाजारों से ज्यादा रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में भी भारी आउटफ्लो दर्ज हुआ है.
मूल्यांकन और कमाई पर दबाव
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में ऊंचा वैल्यूएशन और कमजोर कमाई ग्रोथ निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही है. उनका कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों ने लगभग हर सेक्टर पर दबाव डाला है, जिससे प्रॉफिट ग्रोथ आउटलुक कमजोर हुआ है.
रुपये में गिरावट से बढ़ा नुकसान
विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर रुपये की कमजोरी ने भी असर डाला है. इस साल अब तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 3.5% कमजोर हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों का रिटर्न और घट गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान संकट का समाधान नहीं होता और Strait of Hormuz से जुड़े जोखिम कम नहीं होते, तब तक FPIs की वापसी मुश्किल है. यदि तेल की कीमतें स्थिर होकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आती हैं, तभी बाजार में विदेशी निवेश का प्रवाह फिर से बढ़ सकता है.
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 26.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,520.30 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी 11.30 अंक चढ़कर 24,364.85 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त अस्थिरता देखने को मिली. शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने दिन के दौरान वापसी की, लेकिन निवेशकों में सतर्कता साफ नजर आई. दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, जो बाजार की अनिश्चित दिशा को दर्शाता है.
कारोबार की शुरुआत कमजोर रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स करीब 248 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 60 अंकों से ज्यादा टूट गया. शुरुआती घंटे में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रहा. हालांकि, दोपहर के बाद खरीदारी लौटी और बाजार हरे निशान में पहुंच गया. दिन के अंत में सेंसेक्स 26.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,520.30 पर और निफ्टी 11.30 अंक चढ़कर 24,364.85 पर बंद हुआ.
होर्मुज संकट और महंगे तेल से बढ़ी चिंता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, Strait of Hormuz में संभावित नाकेबंदी की खबरों ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है. यह मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई का अहम हिस्सा है. इसी बीच Brent Crude की कीमत फिर 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम उल्लंघन के आरोपों ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है, जिसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा.
आज इन शेयरों पर रहेगा खास फोकस
आज के कारोबार में तिमाही नतीजों, डील्स और कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते कई शेयर चर्चा में रह सकते हैं. HCL Technologies, Nestle India, Tata Elxsi, Persistent Systems और 360 ONE WAM आज अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिससे इन स्टॉक्स में तेज हलचल संभव है. वहीं TVS Motor Company ने Hyundai Motor के साथ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में साझेदारी की है, जबकि JSW Steel ने POSCO के साथ ओडिशा में बड़े स्टील प्रोजेक्ट के लिए जॉइंट वेंचर किया है. इसके अलावा AU Small Finance Bank 27 अप्रैल को फंड जुटाने और डिविडेंड पर विचार करेगा, Vedanta की डीमर्जर योजना 1 मई से लागू होगी, Ind-Swift Laboratories में बड़ी हिस्सेदारी बिक्री निवेशकों के लिए अहम संकेत है और RPP Infra Projects ने नए CEO की नियुक्ति की है, जिससे इन शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का संकट कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है. भारतीय शेयर बाजार फिलहाल बाहरी कारकों के दबाव में है. हालांकि घरेलू स्तर पर मजबूत संकेत मिल रहे हैं, लेकिन वैश्विक तनाव के चलते निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कैसे ₹5,000 करोड़ के वित्तीय जाल ने अमिताभ झुनझुनवाला को प्रवर्तन निदेशालय के बढ़ते शिकंजे में खींच लिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
प्रवर्तन फाइलों की घनी, प्रक्रियात्मक भाषा में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जब कहानी थोड़ी फिसलती है, इतना कि वह एक सामान्य वित्तीय जांच से कहीं अधिक असहज सच्चाई को उजागर कर दे. मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत अनिल अंबानी के पूर्व सहयोगी और रिलायंस कैपिटल के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी के लिए दर्ज “विश्वास करने के कारण” ऐसा ही एक दस्तावेज है.
प्रवर्तन निदेशालय ने एक ऐसा मामला तैयार किया है जो कागज पर बेहद बड़ा दिखता है: कई एफआईआर, कई बैंक, हजारों करोड़ रुपये. और अब, एक शीर्ष कार्यकारी की गिरफ्तारी. लेकिन आरोपों के इस पैमाने के नीचे एक अधिक कठिन सवाल छिपा है, एक ऐसा सवाल जिसका जवाब एजेंसी को अंततः अदालत में देना होगा, न कि प्रेस ब्रीफिंग में: क्या वह वास्तव में साबित कर सकती है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग था, या फिर खराब बैंकिंग फैसलों की एक श्रृंखला जिसे आपराधिक साजिश के रूप में पेश किया गया है?
यही अंतर तय करेगा कि यह मामला टिकेगा या ढह जाएगा.
शुरुआत कैसे हुई
जांच की उत्पत्ति विवादित नहीं है. 2017 से 2019 के बीच, यस बैंक ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड में ₹2,045 करोड़ और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड में ₹2,965 करोड़ का निवेश संरचित ऋण साधनों के माध्यम से किया. 2019 के अंत तक, इन एक्सपोजर का बड़ा हिस्सा गैर-निष्पादित हो चुका था.
इस स्तर के नुकसान गंभीर होते हैं. लेकिन वे अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं हैं. बैंक ऋण देते हैं. कॉरपोरेट डिफॉल्ट करते हैं. परिसंपत्तियां खराब हो जाती हैं. यही वित्तीय प्रणाली का मूल जोखिम है.
लेकिन इसे मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत एक मामले में बदलने के लिए, प्रवर्तन निदेशालय को कहीं अधिक विशिष्ट बात स्थापित करनी होगी: कि मूल लेनदेन केवल अविवेकपूर्ण नहीं थे, बल्कि शुरू से ही बेईमान थे, और इसमें शामिल धन “अपराध की आय” है.
अब तक, एजेंसी की रणनीति पैमाना बढ़ाने की रही है.
2022 में दर्ज प्रारंभिक एफआईआर के बाद मामला तेजी से आगे नहीं बढ़ा. यह फैलता गया. जुलाई 2025 तक, ईडी ने हस्तक्षेप किया. उसके बाद से, जांच परिशिष्टों के माध्यम से बढ़ती गई, हर बार एक नया बैंक, एक नई शिकायत, एक नया एक्सपोज़र जुड़ता गया. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने ₹450 करोड़ की क्रेडिट सुविधाओं का उल्लेख किया. बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने उसका अनुसरण किया. एक्सिस बैंक ने अपनी शिकायत जोड़ी. फिर आया समेकन.
पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों को उसी एफआईआर ढांचे में मिला दिया गया. जो अलग-अलग संस्थानों के स्वतंत्र ऋण निर्णय थे, उन्हें अब एक ही जांच कथा का हिस्सा माना जा रहा है. यही वह बिंदु है जहां ईडी का मामला मजबूत भी होता है—और अधिक कमजोर भी.
मजबूत इसलिए, क्योंकि आंकड़े बढ़ते हैं. पैमाना नजरअंदाज करना कठिन हो जाता है. अधिक कमजोर इसलिए, क्योंकि समेकन प्रमाण नहीं होता.
शिकायतों को मिलाने से यह स्वतः स्थापित नहीं होता कि लेनदेन इरादे में जुड़े हुए थे, या वे किसी समन्वित योजना का हिस्सा थे. हर ऋण, हर निवेश, हर मंजूरी को अभी भी अपने-अपने आधार पर जांचना होगा. और यहीं साक्ष्य का बोझ काफी बढ़ जाता है.
“गिरफ्तारी के आधार” इस तनाव को दर्शाते हैं.
वे किसी एक निर्णायक लेनदेन या स्पष्ट रूप से परिभाषित मनी लॉन्ड्रिंग ट्रेल की ओर संकेत नहीं करते. इसके बजाय, वे कई एफआईआर, कई बैंकों और कॉरपोरेट संरचनाओं में व्यक्तियों की ओवरलैपिंग भूमिकाओं के संचयी भार पर निर्भर करते हैं.
यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है: क्या मामला मनी लॉन्ड्रिंग के विशिष्ट कृत्यों पर आधारित है, या वित्तीय एक्सपोज़र के पैमाने पर? क्योंकि कानून पहले की मांग करता है.
अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
उनका नाम मार्च 2026 में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर में सामने आता है, जिसने जांच के दायरे को कई समूह कंपनियों, अधिकारियों और कथित लाभार्थियों तक काफी विस्तृत कर दिया. लेकिन विस्तारित एफआईआर में शामिल होना अपने आप में दोष का प्रमाण नहीं है.
अपने मामले को टिकाए रखने के लिए, ईडी को झुनझुनवाला और कथित अपराध की आय के बीच स्पष्ट संबंध दिखाना होगा, पैसा कैसे चला, कहां मोड़ा गया, और कैसे उसे इस तरह परतों में बांटा या समाहित किया गया कि वह कानून के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आए. यह नुकसान होने को साबित करने की तुलना में कहीं अधिक कठोर मानक है.
यह मामला एक गहरे संस्थागत प्रश्न को भी उठाता है. पीएमएलए के तहत ईडी की शक्तियां उसे अपने आंतरिक “विश्वास करने के कारण” के आधार पर गिरफ्तारी की अनुमति देती हैं. यह सीमा दोषसिद्धि के लिए आवश्यक मानक से काफी कम है. उच्च-प्रोफाइल वित्तीय मामलों में, यह अक्सर प्रवर्तन कार्रवाई की तात्कालिकता और अदालत में साक्ष्य की अंतिम परीक्षा के बीच एक अंतर पैदा करता है.
यही अंतर धारणा को आकार देता है. गिरफ्तारी निश्चितता का संकेत देती है. लेकिन मुकदमा प्रमाण की मांग करता है. और हजारों करोड़ और कई संस्थानों से जुड़े जटिल वित्तीय मामलों में, यह प्रमाण शायद ही कभी सीधा होता है, जैसा कि कोई भी विधि विशेषज्ञ बताएगा.
फिर भी, इससे आरोपों की गंभीरता कम नहीं होती, लेकिन यह बोझ वहीं रखता है जहां होना चाहिए. जांच एजेंसी पर, क्योंकि यदि मामला, जैसा प्रस्तुत किया गया है, बैंकों और संस्थाओं में फैली एक समन्वित वित्तीय योजना है, तो ईडी को समन्वय दिखाना होगा, केवल संयोग नहीं; इरादा दिखाना होगा, केवल परिणाम नहीं. यदि वह ऐसा नहीं कर पाती, तो जोखिम यह है कि जो अभी एक बड़े पैमाने के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वह अंततः कुछ और ही माना जाए: एक प्रणालीगत ऋण विफलता, जिसे बाद में आपराधिक बना दिया गया.
फिलहाल, अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी ईडी द्वारा एक निर्णायक कदम को दर्शाती है. यह जवाबदेही की शुरुआत है या कथा का चरम यह इस पर निर्भर करेगा कि न्यायिक जांच में क्या टिकता है. और यह वह परीक्षा है जिसका सामना ईडी ने अभी तक नहीं किया है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
ग्रीनप्लाई में पांडेय को ग्रोथ मार्केटिंग का नेतृत्व करने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज में लगभग पांच वर्षों तक कार्य करने के बाद कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) यातनेश पांडेय अब अपने पद से आगे बढ़ने जा रहे हैं. उनका यह कार्यकाल कंपनी के लिए ब्रांड निर्माण, डिजिटल विस्तार और कैटेगरी-आधारित विकास के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जा रहा है.
ग्रीनप्लाई में पांडेय को ग्रोथ मार्केटिंग का नेतृत्व करने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था. यह वह समय था जब होम डेकोर और इंटीरियर्स सेक्टर तेजी से प्रतिस्पर्धी और खंडित होता जा रहा था, साथ ही उपभोक्ताओं का व्यवहार भी ओम्नीचैनल की ओर बढ़ रहा था.
ग्रीनप्लाई में उनकी भूमिका पारंपरिक ब्रांड कम्युनिकेशन से डेटा-आधारित और डिजिटल रूप से सक्षम ग्रोथ मार्केटिंग की ओर बदलाव को भी दर्शाती है. उन्होंने “ग्रीनप्लाई: हर जरूरत का रिप्लाई” जैसी इंटीग्रेटेड ब्रांड पोजिशनिंग पेश की, जिसने ब्रांड को रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया. इसके साथ ही उन्होंने आईपीएल में एलएसजी टीम के साथ ब्रांड की मौजूदगी दर्ज कराई और एमडीएफ कैटेगरी में ‘एआई-पावर्ड Prod IQ’ के साथ कंपनी के प्रवेश को नई पहचान दी.
पांडेय का काम केवल उपभोक्ता अभियानों तक सीमित नहीं रहा. ‘हिंदुस्तान की शान, जो ठेकेदारों के लिए भारत का पहला अवॉर्ड प्लेटफॉर्म है. उनकी ही परिकल्पना थी. यह पहल एक बड़े आंदोलन में बदल गई, जिसमें एक लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और उन पेशेवरों को सम्मानित किया गया जो ब्रांड के वादों को जमीन पर साकार करते हैं.
उनकी मार्केटिंग रणनीतियों में स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) एक प्रमुख तत्व रही है. इससे पहले उन्होंने नेरोलैक में ‘पेंट द चेंज’ जैसी पहल की थी और ग्रीनप्लाई में ‘ग्रीनराइज’ के जरिए पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को ब्रांड स्तर पर मजबूत किया.
आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र और दो दशकों से अधिक के मार्केटिंग अनुभव के साथ, यातनेश पांडेय ने खुद को एक ऐसे मार्केटियर के रूप में स्थापित किया है जो कम प्रसिद्ध ब्रांड्स और कैटेगरी को मुख्यधारा के उपभोक्ता तक पहुंचाने में सक्षम हैं. उद्योग के जानकारों का मानना है कि उनका अगला कदम इसी मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड का विस्तार हो सकता है.
आशीष मिश्रा के इस्तीफे को कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी आगे किस दिशा में बढ़ती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गरिमा सिंह, BW रिपोर्ट्स
डिजिटल बीमा कंपनी एको के मुख्य विपणन अधिकारी आशीष मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. करीब छह साल तक कंपनी के साथ जुड़े रहने के बाद वह जुलाई की शुरुआत में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे.
जानकारी के अनुसार, आशीष मिश्रा का आखिरी कार्यदिवस 2 जुलाई होगा. उन्होंने अगस्त 2020 से अप्रैल 2026 तक इस पद पर काम किया. इस दौरान वह बेंगलुरु में कार्यरत रहे. अभी यह साफ नहीं है कि वह आगे क्या करेंगे.
पहले बैंकिंग क्षेत्र में किया काम
एको में आने से पहले, आशीष मिश्रा ने एक अंतरराष्ट्रीय बैंक में 10 साल से ज्यादा समय तक काम किया. वहां उन्होंने विपणन से जुड़े कई बड़े पद संभाले. उन्होंने कार्ड, ऋण और गृह ऋण के लिए विपणन का काम देखा, साथ ही मीडिया और विदेशी मुद्रा से जुड़े कार्य भी संभाले.
विज्ञापन कंपनियों में भी अनुभव
अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने विज्ञापन कंपनियों में काम किया, जहां उन्हें ब्रांड और प्रचार से जुड़ा अच्छा अनुभव मिला.
एको में ब्रांड को बनाया मजबूत
एको में रहते हुए आशीष मिश्रा ने कंपनी की पहचान मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई. डिजिटल बीमा के क्षेत्र में उन्होंने कंपनी को आगे बढ़ाने में योगदान दिया. हाल के समय में, वह कंपनी की ऐसी सोच से जुड़े थे, जिसमें बीमा को सिर्फ सुरक्षा के रूप में पेश किया गया, न कि निवेश के साथ जोड़ा गया.
नई तकनीक पर दिया जोर
उन्होंने विपणन में नई तकनीक, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा दिया. साथ ही, कंपनी में नए और आधुनिक तरीके अपनाने पर भी जोर दिया.
राष्ट्रपति ली ने क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. उनका मानना है कि कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व रिफाइनिंग सेक्टर के मेल से एक मजबूत और स्थिर सप्लाई नेटवर्क तैयार किया जा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अहम मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं. इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल सप्लाई, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा.
राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में हुई इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापक मुद्दों पर चर्चा की. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने पौधारोपण कर साझेदारी के प्रतीकात्मक संदेश भी दिए. इससे पहले राष्ट्रपति ली ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी श्रद्धांजलि अर्पित की. राष्ट्रपति ली का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रापदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने उनका अभिनंदन किया. तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए ली रविवार को अपनी पत्नी किम हे-क्युंग के साथ नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका स्वागत केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया.
कूटनीतिक रिश्तों में ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’
मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के अनुसार यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है. दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते उच्च-स्तरीय संपर्क इस रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं.
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन पर फोकस
राष्ट्रपति ली ने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए स्ट्रेट ऑफ हार्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही कच्चे तेल और गैस के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, ऐसे में सुरक्षित सप्लाई चेन बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देश ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए मिलकर काम करेंगे.
क्रिटिकल मिनरल और इंडस्ट्रियल साझेदारी
राष्ट्रपति ली ने क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. उनका मानना है कि कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व रिफाइनिंग सेक्टर के मेल से एक मजबूत और स्थिर सप्लाई नेटवर्क तैयार किया जा सकता है. यह सहयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों के लिए अहम साबित हो सकता है.
AI, डिफेंस और टेक्नोलॉजी में नए मौके
दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, शिपिंग, शिपबिल्डिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. यह साझेदारी न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि रणनीतिक तालमेल को भी नई ऊंचाई देगी.
पहले भी हो चुकी हैं अहम मुलाकातें
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली की यह तीसरी आमने-सामने की बैठक है. इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात G20 समिट 2025 जोहनस्बर्ग और G7 समिट 2025 कनाडा के दौरान हो चुकी है. लगातार हो रही इन बैठकों से दोनों देशों के रिश्तों में गहराई और भरोसा बढ़ा है.
बहुआयामी साझेदारी की ओर कदम
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच रिश्तों पर भी आधारित हैं. यह दौरा इस बात का संकेत है कि दोनों देश न सिर्फ मौजूदा सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि नए क्षेत्रों में भी साझेदारी का विस्तार करने के लिए तैयार हैं.
अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा में एंट्री की है. कंपनी ने ‘कोस्टल-महा एटॉमिक एनर्जी’ नाम से नई सहायक कंपनी बनाई है, जो न्यूक्लियर पावर के उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर काम करेगी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पावर सेक्टर में इन दिनों जबरदस्त हलचल है और इस दौड़ में गैतम अडानी की कंपनी अडानी पावर (Adani Power) ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. कंपनी की न्यूक्लियर एनर्जी में एंट्री और बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में संभावित उछाल ने इसके शेयर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और खरीदारी तेज हो गई है.
शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड
सप्ताह की शुरुआत में अडानी पावर के शेयर में जोरदार तेजी देखने को मिली. सोमरा को खबर लिखे जाने तक कंपनी का स्टॉक 2.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 203.49 रुपये पर कारोबार कर रहा था. वहीं, एक कारोबार के दौरान शेयर एक समय पर 3 प्रतिशत की तेजी के साथ 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया. पिछले एक महीने में शेयर करीब 35% और एक हफ्ते में लगभग 13% तक उछल चुका है, जो बाजार में इसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है.
न्यूक्लियर एनर्जी में ‘बड़ा दांव’
अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा में एंट्री की है. कंपनी ने ‘कोस्टल-महा एटॉमिक एनर्जी’ नाम से नई सहायक कंपनी बनाई है, जो न्यूक्लियर पावर के उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर काम करेगी. यह कदम कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें साफ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों पर फोकस बढ़ाया जा रहा है. इस घोषणा ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है.
गर्मी बढ़ाएगी बिजली की मांग
आने वाले महीनों में भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है, जिससे बिजली की खपत में तेज बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. हाल के मौसम बदलाव के बाद अब तापमान तेजी से बढ़ने का अनुमान है. गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल में वृद्धि होगी, जिसका सीधा फायदा पावर कंपनियों को मिलेगा.
एल नीनो और डिमांड का कनेक्शन
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘एल नीनो’ वाले वर्षों में बिजली की मांग सामान्य से अधिक बढ़ती है. पहले भी ऐसे समय में पीक पावर डिमांड में 5% से 9% तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है. इस बार भी इसी तरह के हालात बनने की संभावना है, जिससे पावर सेक्टर की कंपनियों के लिए कमाई के नए अवसर पैदा होंगे.
किन कंपनियों को होगा फायदा
सूखे जैसे हालात में हाइड्रो पावर उत्पादन घट सकता है, जिससे कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ेगी. इसका सीधा लाभ अडानी पावर और NTPC जैसी कंपनियों को मिल सकता है. बिजली की बढ़ती मांग के कारण कीमतें भी ऊंची रह सकती हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन में सुधार होगा.
बाजार में मौजूदा तेजी यह संकेत देती है कि पावर सेक्टर, खासकर अडानी पावर, आने वाले समय में मजबूत प्रदर्शन कर सकता है. हालांकि, विशेषज्ञ निवेश से पहले सावधानी और सलाह लेने की सलाह देते हैं.
रिटेल और टेलीकॉम क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक कंपनियों से टक्कर और बदलते नियामक ढांचे के बीच रिलायंस लगातार अपनी रणनीतियों को परिष्कृत कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुकेश अंबानी ने अपने 69वें जन्मदिन के साथ एक बार फिर यह संकेत दिया है कि रिलायंस (Reliance Industries) अब विकास के नए चरण में प्रवेश कर रही है. कंपनी डिजिटल विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा निवेश और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के सहारे आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है.
देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस अब पारंपरिक पेट्रोकेमिकल और रिफाइनिंग व्यवसाय से आगे बढ़कर तकनीक और स्थिरता-आधारित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है. यह बदलाव कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य के उद्योगों में मजबूत पकड़ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.
वैश्विक स्तर पर अंबानी की मजबूत स्थिति
ब्लूमबर्ग (Bloomberg Billionaires Index) के अनुसार, मुकेश अंबानी दुनिया के शीर्ष 20 सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल हैं. विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब समूह अपने पारंपरिक कारोबार और उभरते अवसरों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
विरासत से वैश्विक साम्राज्य तक का सफर
मुकेश अंबानी ने अपने पिता धीरूभाई अंबानी से एक बढ़ते हुए कारोबार को विरासत में पाया, जिसकी शुरुआत टेक्सटाइल क्षेत्र से हुई थी. समय के साथ उन्होंने इसे एक विविधीकृत वैश्विक समूह में बदल दिया. यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था के उस परिवर्तन को भी दर्शाता है, जहां विनिर्माण आधारित विकास से डिजिटल और उपभोक्ता-आधारित मॉडल की ओर रुख हुआ है.
जामनगर से उपभोक्ता तक मजबूत पकड़
गुजरात के जामनगर में स्थित विशाल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स कंपनी की औद्योगिक ताकत का आधार बना हुआ है. वहीं, उपभोक्ता-केन्द्रित कारोबारों के विस्तार ने कंपनी को करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ दिया है.
2002 के बाद का निर्णायक दौर
2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद रिलायंस समूह का विभाजन मुकेश अंबानी और उनके भाई अनिल अंबानी के बीच हुआ. इस विभाजन के बाद मुकेश अंबानी ने ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल व्यवसाय अपने पास रखा, जो आगे चलकर कंपनी की स्थिर वृद्धि का आधार बना.
Jio और रिटेल ने बदली तस्वीर
हाल के वर्षों में कंपनी ने आक्रामक विविधीकरण किया है. Jio Platforms के लॉन्च ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाया और डेटा को सस्ता व सुलभ बनाया. वहीं Reliance Retail देश के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क्स में से एक बनकर उभरा है.
नए क्षेत्रों में विस्तार और भविष्य की तैयारी
Reliance ने मीडिया, टेक्नोलॉजी और खेल जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की है. Mumbai Indians की मालिकाना हिस्सेदारी इसके व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें कंटेंट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी का एकीकरण शामिल है.
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश कंपनी के भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है.
चुनौतियों के बीच संतुलन की रणनीति
रिटेल और टेलीकॉम क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक कंपनियों से टक्कर और बदलते नियामक ढांचे के बीच रिलायंस लगातार अपनी रणनीतियों को परिष्कृत कर रही है. इसके बावजूद कंपनी ने स्थिरता और ऊर्जा संक्रमण जैसे वैश्विक मुद्दों के साथ खुद को जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.
डिजिटल और ग्रीन एनर्जी पर फोकस*
जैसे-जैसे मुकेश अंबानी अपने 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, कंपनी का फोकस पारंपरिक ताकत और नए अवसरों के बीच संतुलन बनाने पर है. डिजिटल सेवाओं और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता झुकाव रिलायंस के अगले विकास चरण को परिभाषित कर सकता है, जबकि इसके मुख्य व्यवसाय स्थिरता बनाए रखेंगे.
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार दर्ज किया गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.40 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल यह 1.67 प्रतिशत था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल ICICI Bank ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस बार बैंक ने मुनाफे में स्थिर वृद्धि दर्ज की है, जबकि एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. साथ ही, बैंक ने शेयरधारकों के लिए ₹12 प्रति शेयर के डिविडेंड को मंजूरी दी है.
मुनाफे में 8.5% की बढ़ोतरी
मार्च 2026 तिमाही में ICICI Bank का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 13,701.68 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की समान तिमाही के 12,629.58 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है. बैंक की कुल आय भी 2 प्रतिशत बढ़कर 50,584.38 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 49,690.87 करोड़ रुपये थी.
कुल ब्याज आय बढ़कर 43,275.39 करोड़ रुपये रही. वहीं शुद्ध ब्याज आय 8.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,979.2 करोड़ रुपये दर्ज की गई. इस तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 4.32 प्रतिशत रहा, जो इसके मजबूत फंडामेंटल्स को दर्शाता है.
एसेट क्वालिटी में सुधार, NPA में गिरावट
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार दर्ज किया गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.40 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल यह 1.67 प्रतिशत था. इसी तरह नेट NPA रेशियो भी घटकर 0.33 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष 0.39 प्रतिशत था. यह गिरावट बताती है कि बैंक ने खराब कर्जों पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया है.
डिपॉजिट और लोन ग्रोथ में मजबूती
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 17.94 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले साल यह 16.10 लाख करोड़ रुपये थे. इसी तरह एडवांसेज (लोन बुक) भी बढ़कर 15.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 13.41 लाख करोड़ रुपये थी. यह बैंक के मजबूत विस्तार और बढ़ते ग्राहक आधार को दर्शाता है.
₹12 प्रति शेयर डिविडेंड को मंजूरी
बैंक के बोर्ड ने 18 अप्रैल की बैठक में वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड को मंजूरी दी है. हालांकि अभी इसकी रिकॉर्ड डेट तय नहीं की गई है. इस डिविडेंड पर अंतिम मंजूरी बैंक की वार्षिक आम बैठक में दी जाएगी. रिकॉर्ड डेट तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे इस लाभ के पात्र होंगे.
वित्त वर्ष 2026 का कुल प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2026 में ICICI Bank की कुल स्टैंडअलोन आय 2,00,703.68 करोड़ रुपये रही, जबकि शुद्ध मुनाफा 50,146.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह बैंक के मजबूत और स्थिर वार्षिक प्रदर्शन को दर्शाता है.
शेयर बाजार में प्रदर्शन
सुबह खबर लिखे जाने तक बैंक का शेयर करीब 1.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,361.00 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैप 9.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. पिछले दो हफ्तों में शेयर लगभग 11 प्रतिशत मजबूत हुआ है. नतीजों के बाद आने वाले सत्रों में इस स्टॉक पर बाजार की नजर बनी रह सकती है.
सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के बैंकिंग सेक्टर में साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के दौरान कर्ज वितरण में स्थिर लेकिन मजबूत वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं. उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मांग के चलते बैंकों द्वारा 9-13% तक लोन ग्रोथ दर्ज की जा सकती है. यह रुझान आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निवेश चक्र की वापसी की ओर इशारा करता है.
औद्योगिक कर्ज में सुधार के संकेत
फिक्की-आईबीए सर्वे के मुताबिक, औद्योगिक कर्ज में 9-13% की वृद्धि संभव है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में तेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विस्तार और बाजार में मांग बढ़ने से समर्थित होगी. हालांकि, इसमें तेज उछाल के बजाय क्रमिक और स्थिर वृद्धि की संभावना जताई गई है.
अलग-अलग बैंकों की अलग रणनीति
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs): इन बैंकों में सबसे ज्यादा आशावाद दिख रहा है. बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन में सुधार के चलते 11-13% या उससे अधिक ग्रोथ की उम्मीद है.
निजी बैंक: निजी बैंकों का प्रदर्शन मिश्रित रहने की संभावना है, लेकिन अधिकतर 11-13% की ग्रोथ रेंज में रह सकते हैं. मजबूत रिटेल पोर्टफोलियो, MSME लोन और संतुलित कॉरपोरेट एक्सपोजर उनकी रणनीति का हिस्सा हैं.
छोटे वित्त और सहकारी बैंक: ये बैंक अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. बड़े उद्योगों में सीमित जोखिम और रिटेल व MSME पर फोकस के चलते इनकी लोन ग्रोथ 7-9% रहने का अनुमान है.
विदेशी बैंकों का संतुलित रुख
विदेशी बैंकों के लिए 11-13% की मध्यम वृद्धि का अनुमान है. इनकी रणनीति वैश्विक तरलता, पूंजी आवंटन और भारतीय कॉरपोरेट बाजार में सीमित लेकिन रणनीतिक भागीदारी पर आधारित है.
रिटेल और कृषि क्षेत्र में मजबूत उम्मीद
सर्वे के अनुसार, रिटेल लोन सेगमेंट में उच्च दोहरे अंकों की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. वहीं, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी 9-13% की वृद्धि का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाता है.
कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर 2026 की पहली छमाही में संतुलित और टिकाऊ कर्ज वृद्धि की ओर बढ़ रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, कैपेक्स रिकवरी और मजबूत मांग इस ग्रोथ के प्रमुख चालक होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 31.05 लाख करोड़ रुपये हो गए. पिछले साल यह 27.14 लाख करोड़ रुपये थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस बार बैंक ने स्थिर आय के बीच मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की है और एसेट क्वालिटी में सुधार भी देखने को मिला है. साथ ही, शेयरधारकों के लिए ₹13 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की गई है.
मुनाफे में 9% की बढ़ोतरी
मार्च 2026 तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 19,221.05 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की समान तिमाही के 17,616.14 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत अधिक है. हालांकि कुल आय लगभग स्थिर रही और 89,808.90 करोड़ रुपये पर पहुंची, जबकि एक साल पहले यह 89,487.99 करोड़ रुपये थी. इस दौरान कुल ब्याज आय 76,610.02 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कम दर्ज हुई, जबकि शुद्ध ब्याज आय 3.8 प्रतिशत बढ़कर 33,281.5 करोड़ रुपये हो गई.
NPA में सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही सुधार देखा गया है. ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.15 प्रतिशत पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 1.33 प्रतिशत था. नेट NPA रेशियो भी घटकर 0.38 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 0.43 प्रतिशत था. यह दिखाता है कि बैंक ने खराब कर्जों पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया है और जोखिम प्रबंधन मजबूत हुआ है.
डिपॉजिट और लोन बुक में मजबूती
मार्च 2026 के अंत तक बैंक के कुल डिपॉजिट बढ़कर 31.05 लाख करोड़ रुपये हो गए. पिछले साल यह 27.14 लाख करोड़ रुपये थे. इसी तरह, एडवांसेज यानी लोन बुक भी बढ़कर 29.37 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष 26.19 लाख करोड़ रुपये थी. इससे बैंक के कारोबार विस्तार और ग्राहक आधार में मजबूती दिखाई देती है.
₹13 फाइनल डिविडेंड घोषित*
बैंक के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹13 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड को मंजूरी दी है. इसके लिए 19 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे इस डिविडेंड के पात्र होंगे. इससे पहले बैंक ₹2.50 प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड भी घोषित कर चुका है.
वित्त वर्ष 2026 का कुल प्रदर्शन
पूरे वित्त वर्ष 2026 में बैंक की कुल स्टैंडअलोन आय 3,70,054.65 करोड़ रुपये रही और शुद्ध मुनाफा 74,671.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यह बैंक के स्थिर और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है. वहीं, BSE पर बैंक का शेयर लगभग 799.90 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. इसका मार्केट कैप 12.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. हालांकि पिछले छह महीनों में शेयर लगभग 20 प्रतिशत गिर चुका है, लेकिन तिमाही नतीजों के बाद इसमें बाजार की हलचल बनी रह सकती है.