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ईरान-इजरायल संघर्ष का असर भारत के बासमती निर्यात पर, समंदर में अटके लाखों टन चावल
छह लाख टन से अधिक बासमती चावल के फंसने से वित्तीय नुकसान और मूल्य अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं. इसके समाधान के लिए वैश्विक व्यापार मार्ग और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने खाड़ी देशों में व्यापार को पूरी तरह प्रभावित किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से न केवल क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की आपूर्ति रुक गई है, बल्कि भारत से खाड़ी देशों को होने वाला बासमती चावल का निर्यात भी बाधित हो गया है. इससे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े पैमाने पर चिंता पैदा हो गई है.
समंदर में फंसे छह लाख टन बासमती
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के अनुसार, भारत से खाड़ी देशों को भेजा जाने वाला चावल का ट्रांजिट समय लगभग 40 दिन का होता है. इसमें भारतीय बंदरगाह पर लगने वाला समय, जहाजों पर रहने का समय और डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाह पर लगने वाला समय शामिल है. फिलहाल एक्सपोर्ट रोक दिया गया है, लेकिन इससे पहले भेजा गया करीब छह लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों, समंदर या डेस्टिनेशन कंट्री के पोर्ट पर अटका हुआ है.
निर्यातकों के नुकसान और उत्पादन का रुख
विजय सेतिया ने बताया कि इस समय अटके भारतीय बासमती चावल का मूल्य पांच से छह हजार करोड़ रुपये के बीच है. इतना बड़ा माल अटक जाने से निर्यातकों ने नए कंशाइनमेंट की पैकिंग और बैगिंग का काम पूरी तरह रोक दिया है. हालात सुधरने पर ही यह काम फिर से शुरू होगा.
भारत से हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है, जिसमें लगभग 70 फीसदी खाड़ी देशों को जाता है. इसका मतलब है कि करीब 45 लाख टन चावल खाड़ी देशों को भेजा जाता है, जिसमें से छह से सात लाख टन ईरान को निर्यात होता रहा है. ईरान को निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन का है. युद्ध के कारण अब खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो सकता है.
पिछले साल का निर्यात और उत्पादन
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 60.65 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया, जिसकी वैल्यू रुपये में 50,312 करोड़ और डॉलर में 5.94 अरब थी. भारत में 2024-25 में कुल 15.01 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था, जिसमें बासमती चावल का उत्पादन 70 से 75 लाख टन था. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर तक खाड़ी देशों को 32 लाख टन से अधिक बासमती चावल का निर्यात किया जा चुका है.
चावल के दामों पर असर
विजय सेतिया का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर जल्द ही भारत में बासमती चावल की कीमतों पर दिख सकता है. फिलहाल दाम गिरने की संभावना है. निर्यातक पैकिंग और शिपमेंट रोककर ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं.
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