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रेपो रेट बढ़ते ही महंगे हुए लोन, ICICI Bank, PNB ने बढ़ाई ब्याज दरें

रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करके इसे 5.40 परसेंट कर दिया है. अब रेपो रेट महामारी के पहले वाले स्तर पर पहुंच चुकी हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को रेपो रेट में 0.50 परसेंट का इजाफा कर दिया, तो जाहिर है इसका असर आपकी पॉकेट पर पड़ेगा, क्योंकि बैंक्स भी होम लोन, कार लोन और दूसरे सभी रिटेल लोन महंगा कर देंगे. रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करके इसे 5.40 परसेंट कर दिया है. अब रेपो रेट महामारी के पहले वाले स्तर पर पहुंच चुकी हैं. रेपो रेट वो दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है. 

ICICI Bank, PNB का लोन महंगा

रेपो रेट बढ़ने के साथ ही लोगों के लिए महंगे लोन का सिलसिला शुरू हो चुका है. प्राइवेट सेक्टर के बैंक ICICI Bank और सरकारी बैंक PNB ने ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है. 
ICICI Bank के मुताबिक उसका एक्सटर्नल बेंचमार्ट लेंडिंग रेट (I-EBLR) 9.10 परसेंट सालाना  प्रति माह देय  (pa.p.m.) हो गया है. एक्सटर्नल बेंचमार्ट लेंडिंग रेट रिजर्व बैंक के रेपो रेट से लिंक होता है. ICICI Bank की बढ़ी हुई दरें 5 अगस्त से लागू हो जाएंगी. इसके अलावा सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने भी दर में बढ़ोतरी की जानकारी दी है, रिजर्व बैंक के रेपो दर बढ़ाने के बाद एक्टर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट को 7.40 परसेंट से बढ़ाकर 7.90 परसेंट कर दिया है. PNB की बढ़ी हुई दरें 8 अगस्ते से प्रभावी होंगी. ये आपको बता दें कि इस महीने के पहले ICICI Bank ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स यानी MCLR को भी परसेंट बढ़ाया था. 

एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट क्या होता है
रिजर्व बैंक ने 1 अक्टूबर 2019 से फ्लोटिंग रेट (Floating Interest) वाले सभी नए रिटेल लोन (Retail Loan) और पर्सनल लोन को एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य कर दिया था. दरअसल साल 2017 में रिजर्व बैंक को लगा कि इंटरनल बेंचमार्क रेट जैसे की बेस रेट या MCLR मॉनिटरी पॉलिसी दरों को प्रभावी रूप से प्रसारित नहीं कर रहे हैं. आसान भाषा में कहें कि अगर रिजर्व बैंक ब्याज दरें घटाता है तो बैंक उतना फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाते जितना पहुंचना चाहिए. इसलिए एक ऐसे सिस्टम की जरूरत थी जो ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी और साइंटिफिक हो. इसलिए रिजर्व बैंक ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट का लागू किया. 

बैंकों के पास एक्सटर्नल बेंचमार्क के तौर चुनने के लिए कई विकल्प हैं. रिजर्व बैंक के रेपो रेट को एक्सटर्नल बेंचमार्क के तौर पर ले सकते हैं. सरकारक के ट्रेजरी बिल बेस्ड यील्ड जो कि Financial Benchmarks India Private Ltd (FBIL) में पब्लिश हो उसे ले सकते हैं. या फिर दूसरे बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट्स जो कि FBIL में पब्लिश हो ले सकते हैं. रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक एक्सटर्नल बेंचमार्क को हर तीन महीने में रीसेट करना या उसमें कोई बदलाव करना अनिवार्य है.

 


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