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IAF ने फाइटर जेट खरीदने के अपने प्लान में किया बदलाव, जानें क्या होगा असर
भारतीय वायुसेना को अपने बेड़े में 114 फाइटर शामिल करने हैं. अब इस योजना में थोड़ा बदलाव किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारतीय वायुसेना द्वारा 114 फाइटर जेट्स खरीदने के लिए अपने 20 बिलियन डॉलर के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम को विभिन्न खरीद मॉडल के तहत दो भागों में विभाजित किया जा रहा है. उच्च स्तरीय सैन्य सूत्रों ने यह जानकारी BW बिज़नेस वर्ल्ड को दी है.
फ्लाईवे कंडीशन में मिलेंगे 18
संशोधित योजना के तहत, MRFA के पहले चरण में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) की बाय ग्लोबल (भारत में निर्मित) श्रेणी के तहत 54 विदेशी जेट की खरीद शामिल होगी, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट एक विदेशी OEM को दिया जाएगा. इनमें से 18 फ्लाईवे कंडीशन यानी कि उड़ने के लिए तैयार अवस्था में खरीदे जाएंगे, जबकि 36 का निर्माण OEM द्वारा चुने गए स्थानीय पार्टनर द्वारा भारत में किया जाएगा. यह पार्टनर प्राइवेट सेक्टर से होगा.
फेज-2 का बाय मॉडल
IAF रक्षा अधिग्रहण परिषद से चरण- I के लिए Acceptance of Necessity (AON) पर जोर दे रही है और उसका लक्ष्य 2022 के अंत तक RFP जारी करने का है. सूत्रों के अनुसार, MRFA के चरण-2 को अभी प्रोग्राम नहीं बल्कि कांसेप्ट यानी अवधारणा कहना सही रहेगा. इसमें चरण-1 के लिए ओईएम द्वारा चुने गए इंडियन प्रोडक्शन पार्टनर से 60 जेट्स की खरीद शामिल है. चरण-2 का खरीद मॉडल बाय इंडियन होगा, जिसमें भारतीय उत्पादन एजेंसी कॉन्ट्रैक्ट जारी करने के लिए प्रमुख होगी.
ये कंपनियों पूल में
आधिकारिक सूत्रों ने अनिश्चितता और अस्पष्टता को स्वीकार करते हुए कहा कि चरण- 2 एक कांसेप्ट है जो सात या आठ साल बाद प्रोग्राम में तब्दील हो सकता है. IAF ने खरीद प्रक्रिया की योजना में संशोधन किया है. जेट्स की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यूएस के बोइंग और लॉकहीड मार्टिन, फ्रांस के डसॉल्ट, यूरोप के यूरोफाइटर कंसोर्टियम, स्वीडन के साब और रूस के सुखोई और मिग IAF को सिलेक्शन पूल में रखा गया है.
OEMs में नहीं उत्साह
जिस OEM से BW ने बात की वो चरण-2 को लेकर ज्यादा उत्साहजनक नहीं है. OEM के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'फेज़-2 को लेकर अनिश्चितता है, जिसका मतलब है कि भारत में असेंबली लाइन स्थापित करने की लागत की भरपाई 114 के बजाये केवल 54 एयरक्राफ्ट से ही करनी होगी, उसमें से भी केवल 36 ही भारत में बनाए जाएंगे. इसकी वजह से लागत काफी बढ़ जाएगी और भारत में MRFA बेहद महंगा हो जाएगा. बिज़नेस की संभावना केवल चरण 1 में ही है, इसलिए 114 के बजाये हमें केवल 54 जेट्स के बारे में ही सोचना होगा’.
MRFA प्रोग्राम में दूसरा बदलाव
MRFA प्रोग्राम में दूसरा बड़ा बदलाव है IAF द्वारा स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (SP) मॉडल को नामंजूर करना. इसका सबसे बड़ा कारण है SP मॉडल के अंतर्गत किए गए नेवल यूटिलिटी हेलीकाप्टर (NUH) प्रोग्राम और प्रोजेक्ट 75 सबमरीन प्रोजेक्ट का असंतोषजनक अनुभव. NUH को लेकर अनुभव इसलिए अच्छा नहीं रहा क्योंकि लम्बे समय तक सरकार ये तय नहीं कर पाई कि जो मॉडल मिलिट्री प्लेटफ़ॉर्म के लिए प्राइवेट निर्माताओं के लिए बनाया गया था उसमें पब्लिक सेक्टर को आने देना चाहिए या नहीं. वहीं, प्रोजेक्ट 75 में OEM द्वारा इंडियन स्ट्रेटेजिक पार्टनर को टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर करने में हिचकिचाहट दिखाई गई थी.
कई गुना बढ़ेगी कॉस्ट
एक दूसरे OEM ने कहा, ‘IAF अभी भी अपनी आवश्यकताओं को ठीक से परिभाषित नहीं कर पाई है और अपने ऑपरेटिंग मॉडल को तय करने में भी उसे परेशानी हो रही है. इसकी वजह से एक बिज़नेस मॉडल बनाने में अनिश्चितता का माहौल है’. उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता को विभाजित करके, और पहले चरण के बाद की अस्पष्टता की वजह से भारत के लिए इन जेट्स की लागत कई गुना बढ़ सकती है.
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