वॉटर प्यूरीफायर की दुनिया के जाने-पहचाने नाम Pureit को अब नया मालिक मिल गया है. हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने अपने इस कारोबार को बेच दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने अपने वॉटर प्यूरीफायर कारोबार को बेच दिया है. HUL ने 600 करोड़ रुपए में अपने ब्रैंड प्योरइट (Pureit) का सौदा एओ स्मिथ इंडिया वॉटर प्रोडक्ट्स के साथ किया है. यह डील एचयूएल की पैरेंट कंपनी यूनिलीवर के वैश्विक लेनदेन का हिस्सा है. इसी साल मार्च में यह खबर आई थी कि HUL वॉटर प्यूरीफायर कारोबार को बेचने की संभावना तलाश रही है. उसने प्राइवेट इक्विटी फंड सहित कई संभावित खरीदारों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी की थी, लेकिन डील AO Smith के साथ अब पूरी हुई है.
2004 में हुई थी शुरुआत
वॉटर प्यूरीफायर कारोबार में प्योरइट जाना-पहचाना नाम है. HUL इस ब्रैंड के तहत भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, वियतनाम और मेक्सिको आदि देशों में पानी को साफ करने से संबंधित समाधान पेश करती है. Hindustan Unilever ने 2004 में यूरेका फोर्ब्स और केंट जैसे स्थापित ब्रैंड्स को टक्कर देते हुए एक एंट्री-लेवल वॉटर प्यूरीफायर के साथ वॉटर प्यूरीफायर मार्केट में कदम रखा था. 2011 में, कंपनी ने RO यानी रिवर्स ऑस्मोसिस वॉटर प्यूरीफायर की अपनी रेंज लॉन्च की. वर्तमान में Pureit एडवांस्ड RO और UV (अल्ट्रावायोलेट) वॉटर प्यूरीफायर बेचती है.
कितना बड़ा है कारोबार?
पिछले वित्त वर्ष तक HUL का वॉटर प्यूरिफायर कारोबार 293 करोड़ रुपए था, जो एचयूएल के कुल कारोबार के एक प्रतिशत से भी कम है. पिछले साल यह खबर सामने आई थी कि FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने आटे और नमक के कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है. कंपनी इसे बेच रही है और डील 60.4 करोड़ रुपए में फाइनल हो सकती है. HUL के इन कारोबार को खरीदने के लिए उमा ग्लोबल फूड्स और उमा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का नाम सामने आया था. ये दोनों कंपनियां सिंगापुर मुख्यालय वाली कंपनी रिएक्टिवेट ब्रांड्स इंटरनेशनल की सब्सिडियरी कंपनी हैं. जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटिश कंपनी Unilever की सब्सिडियरी है.
AO के लिए फायदे की डील
भारत में वॉटर प्यूरीफायर का बाजार काफी बड़ा है. शुद्द पानी अभी भी हमारे देश में एक अहम् मुद्दा है, इसलिए वॉटर प्यूरीफायर की डिमांड बनी रहती है. हालांकि, ये बात अलग है कि इस सेक्टर में प्रतियोगिता काफी कड़ी है. कई दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ लोकल प्लेयर भी बाजार में मौजूद हैं. फिलहाल Eureka Forbes का इस कारोबार में दबदबा है. कंपनी एक्वागार्ड ब्रैंड के तहत वॉटर प्यूरीफायर की बिक्री करती है. इसी तरह, AO Smith का मार्केट भी लगातार बढ़ रहा है. कंपनी ने पिछले कुछ समय में काफी तेजी से तरक्की की है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस डील से AO को ज्यादा मार्केट कैप्चर करने में मदद मिलेगी.
एयर इंडिया एक्सप्रेस, TCS, JSW, पॉलिसीबाजार और HDFC लाइफ समेत कई दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी जूरी में शामिल होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्केटिंग, ब्रांडिंग और कम्युनिकेशन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने वाला BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 अपने चौथे संस्करण के साथ 18 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है. यह आयोजन देश के प्रमुख मार्केटिंग पेशेवरों, ब्रांड लीडर्स और कम्युनिकेशन विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा. अवॉर्ड्स का उद्देश्य उन अभियानों, ब्रांड्स और व्यक्तियों को सम्मानित करना है जिन्होंने उपभोक्ता जुड़ाव और व्यवसायिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
मार्केटिंग उत्कृष्टता को मिलेगा सम्मान
BW मेरिट अवॉर्ड्स उन पहलों को पहचान देता है जो केवल दृश्यता तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वास्तविक प्रभाव भी पैदा करती हैं. पुरस्कारों के माध्यम से रचनात्मकता, नवाचार, रणनीतिक सोच और मापनीय परिणामों को महत्व दिया जाता है. इसका लक्ष्य ऐसे विचारों और अभियानों को सामने लाना है जो पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए मार्केटिंग के नए मानक स्थापित करते हैं.
उद्योग के दिग्गजों से सजी जूरी
अवॉर्ड्स के मूल्यांकन को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए इस वर्ष एक मजबूत जूरी पैनल का गठन किया गया है. इसमें विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ मार्केटिंग और ब्रांड विशेषज्ञ शामिल हैं.
जूरी में एफी लायंस फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य शुभ्रांशु सिंह, JSW स्टील के हेड मार्केटिंग तरुण झा, TCS के ग्लोबल हेड-मार्केटिंग डिमांड सेंटर अमित तिवारी, एयर इंडिया एक्सप्रेस के मुख्य विपणन अधिकारी सिद्धार्थ बुटालिया, पॉलिसीबाजार के मुख्य विपणन अधिकारी साई नारायण और HDFC लाइफ की हेड मार्केटिंग एवं CSR प्रितिका शाह सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं.
इसके अलावा मोटरोला मोबिलिटी, JSW MG मोटर इंडिया, ITC, MRF टायर्स, वोडाफोन आइडिया, वुडलैंड और नारायणा हेल्थ जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी जूरी का हिस्सा होंगे.
59 श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 में कुल 59 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. इन्हें पांच प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:
बेस्ट यूज ऑफ चैनल्स एंड प्लेटफॉर्म्स- इस श्रेणी में कंटेंट, मीडिया, डिजिटल और सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग तथा इवेंट्स के प्रभावी उपयोग को सम्मानित किया जाएगा.
बेस्ट इन सेक्टर्स- ऑटोमोबाइल, BFSI, कंज्यूमर टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, शिक्षा, ऊर्जा, FMCG, हेल्थकेयर, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट, रियल एस्टेट, रिटेल, ई-कॉमर्स, स्पोर्ट्स और ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन मार्केटिंग पहलों को पुरस्कृत किया जाएगा.
बेस्ट ऑफ कैंपेन- इस श्रेणी में CSR कैंपेन, रीजनल मार्केटिंग, स्मॉल बजट कैंपेन, टेक्नोलॉजी-सक्षम अभियान, डिजिटल कैंपेन, SEO, ऑर्गेनिक कंटेंट, वायरल इन्फ्लुएंसर कैंपेन, फेस्टिव मार्केटिंग और वर्ष के सर्वश्रेष्ठ मार्केटिंग अभियान जैसी श्रेणियां शामिल हैं.
युवा पेशेवरों को भी मिलेगा मंच -अवॉर्ड्स में व्यक्तिगत उत्कृष्टता को भी मान्यता दी जाएगी. इसके तहत 35 वर्ष से कम आयु के पेशेवरों के लिए 'मार्केटिंग इनोवेटर ऑफ द ईयर', 'बेस्ट मार्केटिंग कम्युनिकेशन प्रोफेशनल' और 'बेस्ट डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल' जैसी श्रेणियां रखी गई हैं.
ब्रांड निर्माण के विभिन्न चरणों पर फोकस
'स्टेजेज ऑफ ब्रांडिंग' श्रेणी के तहत कैटेगरी क्रिएशन, नए उत्पाद का लॉन्च, ब्रांड एक्सटेंशन, ब्रांड री-जुवेनेशन, ट्रांसफॉर्मेशनल ग्रोथ, कस्टमर एक्सपीरियंस, कस्टमर रिलेशनशिप मार्केटिंग और डेटा एवं AI के उपयोग जैसी पहलों को सम्मानित किया जाएगा.
सीखने और नेटवर्किंग का भी मिलेगा अवसर
BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 केवल पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहेगा. यह कार्यक्रम उद्योग जगत के पेशेवरों, एजेंसियों, ब्रांड्स और नवोन्मेषकों को एक-दूसरे से सीखने, विचार साझा करने और सहयोग के अवसर भी प्रदान करेगा.
आयोजकों के अनुसार, यह मंच उन दूरदर्शी नेताओं और प्रभावशाली अभियानों का जश्न मनाएगा जो लगातार मार्केटिंग उत्कृष्टता की परिभाषा को नया स्वरूप दे रहे हैं और उद्योग के भविष्य को दिशा प्रदान कर रहे हैं.
नए कॉमर्स समाधान के जरिए ग्राहक केवल दो चरणों में उत्पाद खोजने से लेकर खरीदारी तक पहुंच सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ट्रूकॉलर ऐड्स (truecaller Ads) ने वैश्विक स्तर पर अपने नए कॉमर्स समाधान ‘कॉल-टू-कार्ट’ (Call-to-Cart) की शुरुआत की है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित यह प्लेटफॉर्म रोजमर्रा के संचार अनुभव को सीधे खरीदारी के अवसर में बदलने के लिए विकसित किया गया है. कंपनी का दावा है कि यह समाधान ग्राहकों को उत्पाद खोजने से लेकर खरीदारी पूरी करने तक की प्रक्रिया को केवल दो चरणों में पूरा करने में मदद करेगा.
खरीदारी प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर
कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन खरीदारी के दौरान प्रत्येक अतिरिक्त क्लिक ग्राहक के खरीदारी प्रक्रिया छोड़ने की संभावना को बढ़ा देता है. अधिकांश मोबाइल कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को कई स्क्रीन, ऐप और सर्च प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है.
‘कॉल-टू-कार्ट’ का उद्देश्य इस जटिलता को कम करना है. यह समाधान ट्रूकॉलर के उस विशिष्ट स्थान का लाभ उठाता है जहां उपयोगकर्ता कॉल प्राप्त करते समय और कॉल समाप्त होने के तुरंत बाद सबसे अधिक सक्रिय और ध्यान केंद्रित रहते हैं.
कॉल के दौरान और बाद में दिखेंगे प्रासंगिक ऑफर
नई सेवा के तहत ब्रांड्स ग्राहकों तक उन क्षणों में पहुंच सकेंगे जब वे कॉल रिसीव कर रहे हों या कॉल समाप्त कर चुके हों. AI आधारित टार्गेटिंग और कॉमर्स इंटीग्रेशन की मदद से ग्राहकों को उनकी रुचि के अनुरूप ऑफर दिखाए जाएंगे, जिससे उत्पाद खोजने और खरीदने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी.
FMCG, ब्यूटी, फिनटेक और मोबिलिटी ब्रांड्स को होगा फायदा
ट्रूकॉलर ऐड्स के वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल हेड हेमंत अरोड़ा ने कहा कि लाखों खरीदारी निर्णय पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बाहर शुरू होते हैं. उनके अनुसार, संचार के दौरान मिलने वाले अवसर ब्रांड्स के लिए एक प्रभावी कॉमर्स स्पेस बन सकते हैं.
उन्होंने बताया कि यह समाधान विशेष रूप से FMCG, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्यूटी, फार्मा, फिनटेक और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां सही समय और प्रासंगिकता ग्राहक के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
AI प्लेटफॉर्म ‘adVantage’ करेगा अनुभव को बेहतर
‘कॉल-टू-कार्ट’ के पीछे ट्रूकॉलर का इन-हाउस विकसित इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘adVantage’ काम करता है. यह प्लेटफॉर्म एडवांस्ड रिकमेंडेशन इंजन, AI-आधारित पर्सनलाइजेशन और फर्स्ट-पार्टी डेटा संकेतों का उपयोग करके ग्राहकों को सही समय पर उपयुक्त ऑफर उपलब्ध कराता है.
ट्रूकॉलर ऐड्स में adVantage के इंजीनियरिंग डायरेक्टर लिनिकर सिक्सास के अनुसार, यह तकनीक उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अनुभव को अधिक सहज बनाती है और विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करती है.
150 से अधिक देशों में उपलब्ध होगा समाधान
कंपनी ने बताया कि ‘कॉल-टू-कार्ट’ ट्रूकॉलर ऐड्स का पहला ऐसा समाधान है जिसे वैश्विक स्तर पर सीधे विज्ञापनदाताओं के लिए लॉन्च किया गया है. ट्रूकॉलर के दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन अरबों विज्ञापन अवसर उपलब्ध होते हैं.
शुरुआती चरण में चुनिंदा ब्रांड्स को मिलेगी सुविधा
पहले चरण में ट्रूकॉलर ने विभिन्न प्रमुख बाजारों में चुनिंदा ‘ऑलवेज-ऑन’ विज्ञापनदाताओं को इस कार्यक्रम के लिए व्हाइटलिस्ट किया है. इन भागीदारों को विशेष ऑनबोर्डिंग सहायता, कस्टम इंटीग्रेशन और adVantage प्लेटफॉर्म तक प्राथमिक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी. कंपनी का मानना है कि यह पहल मोबाइल कम्युनिकेशन और डिजिटल कॉमर्स के बीच की दूरी को कम करेगी तथा ब्रांड्स को ग्राहकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने में मदद करेगी.
ग्राहकों के अतिरिक्त बैंक बैलेंस को अब मिलेगा निवेश का विकल्प, बचत और लिक्विडिटी दोनों पर रहेगा फोकस
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) और वैश्विक एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक (BlackRock) के संयुक्त उपक्रम जियोब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट (Jio BlackRock AMC) ने डिजिटल निवेश को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने जियोब्लैकरॉक ओवरनाइट फंड को जियो पेमेंट्स बैंक के ‘सेविंग्स प्रो’ फीचर के साथ जोड़ दिया है. यह सुविधा जियोफाइनेंस ऐप के जरिए उपलब्ध होगी और ग्राहकों को अपने बैंक खाते में पड़ी अतिरिक्त राशि को आसानी से निवेश करने का विकल्प देगी.
अतिरिक्त राशि का होगा स्वतः निवेश
नए इंटीग्रेशन के तहत ग्राहक अपने खाते में तय सीमा से अधिकjiobl;ackrock मौजूद राशि को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से ओवरनाइट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगे. इसका उद्देश्य निष्क्रिय पड़ी रकम का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है, जबकि जरूरत पड़ने पर धन तक आसान पहुंच भी बनी रहेगी.
ऑटो और वन-टाइम निवेश दोनों की सुविधा
‘सेविंग्स प्रो’ फीचर ग्राहकों को दो तरह के निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है. पहला, ऑटो इन्वेस्ट फीचर, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक राशि का निवेश प्रतिदिन स्वतः हो जाता है. दूसरा, वन-टाइम इन्वेस्टमेंट विकल्प, जिसके जरिए ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार तत्काल निवेश कर सकते हैं. ग्राहक 5,000 रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की निवेश सीमा निर्धारित कर सकते हैं. प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिदिन अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है.
निवेश के साथ लिक्विडिटी भी बरकरार
इस सुविधा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ग्राहक अपने अतिरिक्त धन पर संभावित रिटर्न हासिल करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से निकाल भी सकें. ग्राहक तत्काल आधार पर 50,000 रुपये तक या निवेशित राशि के 90 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, निकाल सकते हैं. इससे अधिक राशि की निकासी के अनुरोध नियामकीय नियमों के अनुसार T+1 आधार पर प्रोसेस किए जाएंगे, यानी धनराशि अगले कारोबारी दिन उपलब्ध होगी.
निवेश को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में कदम
जियोब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिड स्वामीनाथन ने कहा कि आज ग्राहक अपने अतिरिक्त धन को प्रबंधित करने के लिए सरल और सुविधाजनक विकल्प चाहते हैं. उनके अनुसार यह इंटीग्रेशन डिजिटल बैंकिंग और निवेश को एक साथ लाकर ग्राहकों को पारदर्शी और सहज निवेश अनुभव प्रदान करेगा. उन्होंने कहा कि यह पहल अधिक से अधिक लोगों तक निवेश सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है.
ग्राहकों के लिए बेहतर डिजिटल बैंकिंग अनुभव
जियो पेमेंट्स बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद ईश्वरन ने कहा कि बैंक लगातार ग्राहकों के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. उनके अनुसार ‘सेविंग्स प्रो’ फीचर ग्राहकों को अतिरिक्त धन का बेहतर प्रबंधन करने और जरूरत पड़ने पर आसान लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करेगा.
पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ सकेंगे ग्राहक
यह सुविधा जियो पेमेंट्स बैंक के बचत और सैलरी अकाउंट धारकों के लिए उपलब्ध है. ग्राहक आधार आधारित प्रमाणीकरण और वीडियो केवाईसी के जरिए जियोफाइनेंस ऐप पर पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से खाता खोल सकते हैं और सेवा का लाभ उठा सकते हैं.
इसके अलावा ग्राहक अपनी निवेश सीमा तय करने या बदलने, निवेश की निगरानी करने और सभी लेनदेन को ट्रैक करने जैसी सुविधाओं का भी उपयोग कर सकेंगे.
एकीकृत वित्तीय इकोसिस्टम की ओर बढ़ता कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह इंटीग्रेशन बैंकिंग और निवेश सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इससे ग्राहकों को रोजमर्रा की बैंकिंग जरूरतों के साथ-साथ निवेश संबंधी सुविधाएं भी एकीकृत रूप में उपलब्ध होंगी, जिससे डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग और अधिक आसान बन सकेगा.
(नोट: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं. निवेश से पहले योजना से संबंधित सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें.)
भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है. 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने की नीति अब ठोस परिणाम देती नजर आ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात 63 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में करीब 25 गुना अधिक है. बढ़ते निर्यात और सरकारी प्रोत्साहन से रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिस पर निवेशकों की भी पैनी नजर है.
80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे भारतीय रक्षा उत्पाद
भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.
रक्षा निर्यात में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 43.8 प्रतिशत थी. वहीं निजी क्षेत्र का योगदान 45 प्रतिशत रहा, जो रक्षा उद्योग में उसकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है.
FY29 तक 50,000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके लिए स्वदेशी तकनीक के विकास, स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रक्षा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे इस क्षेत्र की विकास गति और तेज हो सकती है.
Astra Microwave पर बढ़ी बाजार की नजर
रक्षा और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स् (Astra Microwave Products) इस उभरते अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. कंपनी रडार, टैक्टिकल सिस्टम और स्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण करती है तथा अमेरिका, इजराइल और सिंगापुर समेत कई देशों को निर्यात करती है.
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से आया. कंपनी अब कम मार्जिन वाले कारोबार से हटकर बौद्धिक संपदा (IP) आधारित उत्पादों और उच्च मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है.
31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 2,600 करोड़ रुपये की थी. इसी अवधि में उसका राजस्व 10.6 प्रतिशत बढ़कर 1,163 करोड़ रुपये और EBITDA 24 प्रतिशत बढ़कर 334 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
निवेशकों के लिए क्यों अहम है डिफेंस सेक्टर
विश्लेषकों के अनुसार, रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि, आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए लंबी अवधि के मजबूत अवसर तैयार कर रही है.
ऐसे में रक्षा कंपनियों के शेयर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. यदि सरकार अपने निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में डिफेंस सेक्टर भारतीय शेयर बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकता है.
सुभाष चंद्रा ने यह संपत्ति वर्ष 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी. प्रस्तावित बिक्री मूल्य के आधार पर पिछले एक दशक में इस संपत्ति का मूल्य चार गुना से अधिक बढ़ चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एस्सेल समूह (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित लुटियंस बंगला क्षेत्र में स्थित अपने 2.8 एकड़ के आवासीय परिसर को 1,260 करोड़ रुपये में बेचने पर सहमति जताई है. यह सौदा देश के आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की सबसे बड़ी डील्स में से एक माना जा रहा है. इस लेनदेन के दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है.
2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी संपत्ति
सुभाष चंद्रा ने यह संपत्ति वर्ष 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी. प्रस्तावित बिक्री मूल्य के आधार पर पिछले एक दशक में इस संपत्ति का मूल्य चार गुना से अधिक बढ़ चुका है. यह वृद्धि दिल्ली के प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार में तेजी से बढ़ती कीमतों को दर्शाती है.
लुटियंस बंगला क्षेत्र की दुर्लभ संपत्तियों में शामिल
भगवान दास रोड पर स्थित यह संपत्ति राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और कड़े नियामकीय नियंत्रण वाले आवासीय इलाकों में से एक लुटियंस बंगला क्षेत्र का हिस्सा है. यहां बड़े भूखंडों वाली संपत्तियां बहुत कम बिक्री के लिए उपलब्ध होती हैं. इस इलाके में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, न्यायाधीश, राजनयिक और चुनिंदा उद्योगपति निवास करते हैं.
सीमित आपूर्ति से बनी रहती है ऊंची मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, लुटियंस क्षेत्र में जमीन की सीमित उपलब्धता और सख्त विकास नियमों के कारण संपत्तियों का मूल्य लगातार ऊंचा बना रहता है. यहां संपत्ति के सौदे कम होते हैं, इसलिए हर बड़ा लेनदेन देश के अल्ट्रा-लक्जरी आवासीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है.
हाई-वैल्यू एसेट मोनेटाइजेशन पर भी नजर
यह सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई प्रमुख कारोबारी परिवार अपनी उच्च-मूल्य वाली परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण पर ध्यान दे रहे हैं. हालांकि भगवान दास रोड स्थित यह बंगला सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति है, फिर भी इतने बड़े पैमाने का लेनदेन धन प्रबंधन और पूंजी आवंटन के व्यापक रुझानों को लेकर चर्चा का विषय बनता है.
दिल्ली के लक्जरी हाउसिंग बाजार में नया बेंचमार्क
1,260 करोड़ रुपये के प्रस्तावित मूल्य के साथ यह सौदा दिल्ली के लक्जरी आवासीय बाजार में एक नया मानक स्थापित कर सकता है. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में स्थित दुर्लभ और सीमित भूमि परिसंपत्तियों की लगातार बनी हुई मांग को भी रेखांकित करता है.
रेल मंत्रालय ने इस कॉरिडोर को भारतीय रेलवे की मिशन 3000 एमटी और हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर पहल के तहत चिन्हित किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रेलवे ने छत्तीसगढ़ में 42 किलोमीटर लंबी चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है. लगभग 755 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस परियोजना का निर्माण साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे द्वारा किया जाएगा. इसके तहत चांपा और कोरबा के बीच तीसरी रेलवे लाइन बिछाई जाएगी. हालांकि पहले से स्वीकृत मदवारानी-सरागबुंदिया खंड को इसमें शामिल नहीं किया गया है.
मिशन 3000 एमटी के तहत महत्वपूर्ण परियोजना
रेल मंत्रालय ने इस कॉरिडोर को भारतीय रेलवे की मिशन 3000 एमटी और हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर पहल के तहत चिन्हित किया है. इन पहलों का उद्देश्य माल परिवहन क्षमता को बढ़ाना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को समर्थन देना है.
कोयला परिवहन का प्रमुख केंद्र है कोरबा
Korba को अक्सर "भारत की पावर कैपिटल" कहा जाता है. यहां कई ताप विद्युत संयंत्र स्थित हैं और यह देश में कोयला परिवहन का एक प्रमुख केंद्र भी है. चांपा-कोरबा रेलखंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड (South Eastern Coalfields Limited) और महानदी कोलफील्ड (Mahanadi Coalfields Limited) द्वारा संचालित कोयला खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क तथा मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मौजूदा नेटवर्क पर बढ़ रहा दबाव
वर्तमान में इस रेलखंड पर प्रतिदिन लगभग 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 55 जोड़ी मालगाड़ियां संचालित होती हैं. हालांकि क्षेत्र में लगातार बढ़ते कोयला उत्पादन के कारण रेलवे नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ रहा है. रेलवे के अनुसार, SECL और MCL की संयुक्त कोयला उत्पादन क्षमता वर्तमान में लगभग 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 450 एमटीपीए तक पहुंचने की संभावना है.
इस विस्तार से करीब 200 एमटीपीए अतिरिक्त कोयला यातायात उत्पन्न होगा, जिसके लिए रेलवे क्षमता का विस्तार आवश्यक माना जा रहा है.
माल ढुलाई और यात्री सेवाओं को मिलेगा लाभ
रेलवे अधिकारियों के अनुसार तीसरी रेल लाइन बनने से इस व्यस्त मार्ग की वहन क्षमता, परिचालन लचीलापन और ट्रेन संचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा. परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो अतिरिक्त जोड़ी यात्री ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा. इसके अलावा लगभग 5.95 एमटीपीए अतिरिक्त माल परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध होगी.
रेलवे की आय में होगा इजाफा
रेलवे का अनुमान है कि इस परियोजना से सालाना लगभग 85 करोड़ रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय होगी. इसमें 82 करोड़ रुपये माल ढुलाई परिचालन से तथा 3 करोड़ रुपये यात्री सेवाओं से प्राप्त होने की संभावना है.
परिचालन लागत में भी होगी बचत
नई रेल लाइन से मालगाड़ियों की रुकावट और देरी में कमी आएगी. वर्तमान में इस मार्ग पर मालगाड़ियों को दोनों दिशाओं में औसतन पांच मिनट तक रुकना पड़ता है. रेलवे का मानना है कि परिचालन दक्षता बढ़ने से हर वर्ष करीब 1.30 करोड़ रुपये की बचत भी हो सकेगी.
ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विकास को मिलेगा बल
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना सरकार के रेल अवसंरचना विस्तार, लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधार और बिजली उत्पादन के लिए निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है. चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना के पूरा होने से देश के प्रमुख कोयला क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा एवं अवसंरचना विकास लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा.
नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के समापन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है. नए ढांचे के तहत फंड प्रबंधकों को अधिक लचीलापन मिलेगा, जबकि फंड के अंतिम चरण में अनुपालन संबंधी बोझ भी कम होगा.
संशोधित नियमों के अनुसार अब AIFs को कुछ विशेष परिस्थितियों में अपनी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी परिसमापन से प्राप्त राशि अपने पास रखने की अनुमति होगी. यह पहले के नियमों से बड़ा बदलाव है, जिनमें फंड को अपना पंजीकरण सरेंडर करने से पहले सभी राशि निवेशकों को वितरित करनी होती थी और बैंक खाते का बैलेंस शून्य रखना अनिवार्य था.
‘इनऑपरेटिव फंड’ का नया ढांचा
सेबी ने "इनऑपरेटिव फंड" नाम से एक नया ढांचा भी पेश किया है. इसके तहत वे फंड, जिन्होंने अपनी निवेश अवधि पूरी कर ली है लेकिन लंबित देनदारियों, कानूनी विवादों या कर संबंधी मामलों के कारण पूरी तरह बंद नहीं हो पाए हैं, सीमित अनुपालन आवश्यकताओं के साथ संचालन जारी रख सकेंगे. ऐसे फंड तब तक इस व्यवस्था के तहत बने रहेंगे, जब तक उनका पंजीकरण औपचारिक रूप से सरेंडर नहीं कर दिया जाता.
किन परिस्थितियों में रख सकेंगे धनराशि?
सेबी के अनुसार यदि किसी AIF को मुकदमेबाजी संबंधी नोटिस, टैक्स डिमांड या नियामकीय दावा प्राप्त हुआ है, तो वह अपनी वैध अवधि के बाद भी कुछ धनराशि रोक कर रख सकता है. इसके अलावा संभावित देनदारियों को पूरा करने के लिए भी राशि सुरक्षित रखी जा सकती है, बशर्ते फंड को मूल्य के आधार पर कम से कम 75 प्रतिशत निवेशकों की सहमति प्राप्त हो.
नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.
लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान
यह सुधार उन व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिनका सामना कई AIFs को अपने समापन के दौरान करना पड़ता था. अक्सर ऐसा देखा गया कि फंड अपने निवेश पोर्टफोलियो का परिसमापन कर चुके होते थे, लेकिन लंबित कानूनी मामलों, कर निर्धारण प्रक्रियाओं या अन्य परिचालन दायित्वों के कारण वे औपचारिक रूप से बंद नहीं हो पाते थे.
अनुपालन बोझ होगा कम
नए इनऑपरेटिव फंड ढांचे के तहत सेबी ऐसे फंडों के लिए कई अनुपालन आवश्यकताओं को युक्तिसंगत बनाने की तैयारी में है. इनमें कुछ नियमित रिपोर्टिंग और फाइलिंग दायित्वों से राहत भी शामिल हो सकती है. हालांकि इन फंडों को नए निवेश योजनाएं शुरू करने की अनुमति नहीं होगी और सभी देनदारियों के निपटारे तथा पंजीकरण सरेंडर होने तक वे नियामकीय निगरानी में बने रहेंगे.
उद्योग जगत ने किया स्वागत
बाजार विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिभागियों ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है. उनका मानना है कि यह AIFs को अधिक व्यावहारिक और सुगम एग्जिट तंत्र उपलब्ध कराएगा, साथ ही निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव से उन फंडों की प्रशासनिक लागत भी घटेगी, जो सक्रिय परिचालन बंद कर चुके हैं लेकिन लंबित दायित्वों के कारण पंजीकृत बने हुए हैं.
निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने की दिशा में कदम
ताजा सुधार भारत के निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने और वैकल्पिक निवेश साधनों से जुड़े नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में सेबी के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं.
कंपनी का कहना है कि यह नई रणनीति भारत के प्रतिस्पर्धी लुब्रिकेंट बाजार में रिलस्टार को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ मूल्य-सचेत उपभोक्ताओं के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस बीपी मोबिलिटी के उपभोक्ता लुब्रिकेंट ब्रांड रिलस्टार (Relstar) को नई पहचान देने के लिए डिजाइन इंटेलिजेंस फर्म EuMo (यूरेका मोमेंट) ने व्यापक ब्रांड रीपोजिशनिंग और पैकेजिंग ट्रांसफॉर्मेशन की घोषणा की है. कंपनी ने रिलस्टार के लिए "Driven by More" नामक नया ब्रांड प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसके साथ पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो की पैकेजिंग को भी नया स्वरूप दिया गया है.
कंपनी का कहना है कि यह नई रणनीति भारत के प्रतिस्पर्धी लुब्रिकेंट बाजार में रिलस्टार को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ मूल्य-सचेत उपभोक्ताओं के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगी.
140 से अधिक उत्पादों में लागू होगी नई पैकेजिंग
EuMo द्वारा विकसित नई विजुअल आइडेंटिटी और पैकेजिंग आर्किटेक्चर रिलस्टार के ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल लुब्रिकेंट्स के पूरे पोर्टफोलियो में लागू की जाएगी. इसमें 13 सेगमेंट और तीन प्राइस टियर में फैले 140 से अधिक उत्पाद वेरिएंट शामिल हैं. नई पैकेजिंग का उद्देश्य ग्राहकों तक उत्पाद की गुणवत्ता और प्रदर्शन का संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचाना है, साथ ही ब्रांड के साथ भावनात्मक संबंध को भी मजबूत करना है.
एकरूपता और आसान पहचान पर जोर
नई डिजाइन रणनीति एक लचीले पैकेजिंग फ्रेमवर्क पर आधारित है. इसमें उत्पाद संबंधी जानकारी और बड़े आकार की वाहन छवियों को प्रमुखता दी गई है, ताकि उत्पाद के उपयोग और उससे जुड़ी भावनाओं को प्रभावी ढंग से दर्शाया जा सके.
नई पैकेजिंग की प्रमुख विशेषताएं
1. स्केलेबल डिजाइन सिस्टम-एक ही सुसंगत लेआउट को सभी सेगमेंट और प्राइस टियर में अपनाया गया है. इससे 140 से अधिक उत्पाद वेरिएंट्स के बीच ब्रांड की तुरंत पहचान संभव होगी और ग्राहकों के लिए सही उत्पाद चुनना आसान बनेगा.
2. रंगों के जरिए श्रेणीकरण- तीनों प्राइस कैटेगरी के लिए अलग-अलग रंग बैंड निर्धारित किए गए हैं. इससे ग्राहक आसानी से अपनी जरूरत और बजट के अनुसार उत्पाद चुन सकेंगे, जबकि रिटेलर्स के लिए भी उत्पादों को व्यवस्थित करना सरल होगा.
3. प्रभावशाली विजुअल्स- नई पैकेजिंग में ऑटोमोबाइल और मशीनरी की आकर्षक तस्वीरों का उपयोग किया गया है, जो तुरंत उत्पाद के उपयोग को दर्शाती हैं. इन्हें साधारण पृष्ठभूमि के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि पैकेजिंग पर अनावश्यक दृश्य अव्यवस्था न हो.
4. 'आर्म ऑफ स्टार' ब्रांड मोटिफ- नई पहचान का प्रमुख आकर्षण "Arm of Star" नामक ब्रांड मोटिफ है. यह गतिशील स्टार-आकार का डिजाइन तत्व पैकेजिंग को ऊर्जा प्रदान करता है और ब्रांड की विशिष्ट पहचान को मजबूत बनाता है.
ग्राहकों की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई रणनीति
EuMo की सह-संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर शानू भाटिया ने कहा कि "Driven by More" की अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि मूल्य-सचेत ग्राहक भी अपनी आकांक्षाओं, महत्वाकांक्षाओं और जीवन में महत्वपूर्ण चीजों से अधिक पाने की इच्छा से प्रेरित होते हैं.
उन्होंने कहा कि EuMo का उद्देश्य इस समझ को ऐसे ब्रांड प्लेटफॉर्म और पैकेजिंग आर्किटेक्चर में बदलना था, जो बड़े पैमाने पर ब्रांड को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ खुदरा बाजार में ग्राहकों के लिए उत्पादों को समझना और चुनना भी आसान बनाए.
भाटिया के अनुसार, रिलस्टार के लिए सबसे बड़ा अवसर उन लोगों के साथ मजबूत भावनात्मक संबंध बनाना था, जो रोजमर्रा के कामकाज में इसके उत्पादों पर भरोसा करते हैं. "Arm of Star" इसी सोच को मूर्त रूप देता है और पूरे पोर्टफोलियो में एक यादगार तथा विशिष्ट विजुअल पहचान तैयार करता है.
टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को अमेरिका में चल रहे बहुचर्चित DXC टेक्नोलॉजी ट्रेड सीक्रेट्स मामले में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर कंपनी की समीक्षा याचिका सुनने से इनकार कर दिया है. इसके बाद टीसीएस को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ेगा. कंपनी पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है और अब कुल देनदारी हर्जाने, ब्याज तथा कानूनी खर्चों के कारण और बढ़ गई है.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद कंपनी को अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर का प्रावधान करना होगा. यह राशि एक बार के असाधारण व्यय के रूप में दर्ज की जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2019 में सामने आया था, जब कंप्यूटर साइसेंज कॉर्पोरेशन (CSC) (अब DXC टेक्नोलॉजी का हिस्सा) ने टीसीएस पर व्यापारिक गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. आरोप था कि टीसीएस ने ट्रांसअमेरिका के करीब 2,200 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने के बाद उनकी सॉफ्टवेयर तक पहुंच का इस्तेमाल कर प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित किया.
मामला उस समय शुरू हुआ जब ट्रांसअमेरिका और टीसीएस के बीच करीब 2 अरब डॉलर का आउटसोर्सिंग समझौता हुआ था. टीसीएस का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसकी गोपनीय तकनीकी जानकारी का अनुचित उपयोग किया गया.
अदालत ने लगाया भारी हर्जाना
साल 2023 में अमेरिकी अदालत की एक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि टीसीएस ने जानबूझकर व्यापारिक गोपनीयता का दुरुपयोग किया है. इसके बाद कंपनी पर 21 करोड़ डॉलर का हर्जाना लगाया गया. हालांकि, 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया था. बाद में पांचवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा.
अपील की सभी राहें हुईं बंद
टीसीएस ने फैसले के खिलाफ पहले अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की थी. कंपनी को उम्मीद थी कि उसे कानूनी राहत मिलेगी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद उसके लिए फैसले को चुनौती देने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं.
कंपनी पर कितना पड़ेगा असर?
टीसीएस पहले ही इस मामले के लिए 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है. अब अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर जोड़ने के बाद कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी बढ़ जाएगी. इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल हैं. हालांकि, कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को देखते हुए इसका दीर्घकालिक कारोबारी प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन अल्पकाल में यह उसके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों की नजर टीसीएस के आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी. बाजार यह आकलन करेगा कि अतिरिक्त प्रावधान का कंपनी की लाभप्रदता और मार्जिन पर कितना असर पड़ता है. साथ ही, यह मामला वैश्विक आईटी कंपनियों के लिए बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाता है.
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की सबसे पहचान वाली पिज्जा चेन में शुमार पिज्जा हट (Pizza Hut) अब नए मालिकों के हाथों में जाने वाली है. इसकी मूल कंपनी यम ब्रांड्स (Yum Brands) ने 2.7 अरब डॉलर (करीब 25,500 करोड़ रुपये) में पिज्जा हट कारोबार बेचने का फैसला किया है. लगातार घटती बिक्री, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती उपभोक्ता पसंद के दबाव के बीच कंपनी ने अपने इस ऐतिहासिक ब्रांड से अलग होने का निर्णय लिया है. इस सौदे के बाद यम ब्रांड्स अपना पूरा ध्यान KFC और Taco Bell जैसे अधिक लाभदायक ब्रांड्स के विस्तार पर केंद्रित करेगी.
दो हिस्सों में होगी डील
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी. वहीं मुख्य भूमि चीन में संचालित पिज्जा हट रेस्तरां को Yum China Holdings करीब 1.2 अरब डॉलर में अपने अधीन लेगी. दोनों सौदों के वर्ष की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.
चीन पिज्जा हट के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी की कुल बिक्री में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. ऐसे में कारोबार को दो हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग खरीदारों को सौंपने का फैसला रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
नवंबर से चल रही थी रणनीतिक समीक्षा
यम ब्रांड्स ने नवंबर 2025 में पिज्जा हट के भविष्य को लेकर रणनीतिक समीक्षा शुरू की थी. कंपनी की चिंता का मुख्य कारण लगातार कमजोर होती बिक्री और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी में गिरावट थी. समीक्षा के दौरान कंपनी ने कई विकल्पों पर विचार किया और अंततः बिक्री का फैसला लिया.
क्यों कमजोर पड़ा Pizza Hut?
पिज्जा हट की मुश्किलों की सबसे बड़ी वजह बदलता बाजार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा रही है. Domino's और Papa John's जैसी कंपनियों ने डिजिटल ऑर्डरिंग, तेज डिलीवरी और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया. दूसरी ओर पिज्जा हट लंबे समय तक अपने पारंपरिक डाइन-इन मॉडल पर निर्भर रहा, जिससे वह बदलती उपभोक्ता जरूरतों के अनुरूप तेजी से खुद को नहीं ढाल पाया.
महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती लागत और उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों में बदलाव ने भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया. पिछले साल पिज्जा हट की कुल वैश्विक बिक्री में वृद्धि हुई, लेकिन पिज्जा हट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई.
68 साल का गौरवशाली सफर
पिज्जा हट की शुरुआत 1958 में अमेरिका के कंसास राज्य के विचिटा शहर में हुई थी. दो भाइयों ने अपनी मां से 600 डॉलर उधार लेकर पहला रेस्तरां शुरू किया था. देखते ही देखते यह दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन गई. 1969 में इसकी पहचान बनी लाल छत और 1971 तक यह बिक्री के मामले में वैश्विक बाजार की अग्रणी पिज्जा कंपनी बन चुकी थी.
1977 में इसे PepsiCo ने खरीदा और बाद में 1997 में इसके रेस्टोरेंट कारोबार को अलग कर यम ब्रांड्स का गठन हुआ. हालांकि बदलते बाजार और नई प्रतिस्पर्धा के दौर में Pizza Hut अपनी पुरानी चमक बरकरार नहीं रख सका.
Yum Brands की नई रणनीति
कंपनी का मानना है कि पिज्जा हट की वापसी के लिए बड़े निवेश और व्यापक पुनर्गठन की जरूरत है. ऐसे में यम ब्रांड्स ने अपने संसाधनों को KFC और Taco Bell जैसे तेजी से बढ़ते ब्रांड्स पर केंद्रित करने का फैसला किया है.
इस सौदे से मिलने वाली राशि का उपयोग शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन, शेयर बायबैक और भविष्य की विकास योजनाओं में किया जाएगा. वहीं नए मालिक पिज्जा हट को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने और उसकी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस पाने की कोशिश करेंगे.
बदलते फूड बिजनेस की बड़ी मिसाल
पिज्जा हट की बिक्री केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि यह वैश्विक फूड इंडस्ट्री में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार और डिजिटल युग की चुनौतियों का भी संकेत है. कभी पिज्जा बाजार का पर्याय मानी जाने वाली यह चेन आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे नई रणनीति और नए नेतृत्व के सहारे अपनी पहचान दोबारा स्थापित करनी होगी.