टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को अमेरिका में चल रहे बहुचर्चित DXC टेक्नोलॉजी ट्रेड सीक्रेट्स मामले में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर कंपनी की समीक्षा याचिका सुनने से इनकार कर दिया है. इसके बाद टीसीएस को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ेगा. कंपनी पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है और अब कुल देनदारी हर्जाने, ब्याज तथा कानूनी खर्चों के कारण और बढ़ गई है.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद कंपनी को अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर का प्रावधान करना होगा. यह राशि एक बार के असाधारण व्यय के रूप में दर्ज की जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2019 में सामने आया था, जब कंप्यूटर साइसेंज कॉर्पोरेशन (CSC) (अब DXC टेक्नोलॉजी का हिस्सा) ने टीसीएस पर व्यापारिक गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. आरोप था कि टीसीएस ने ट्रांसअमेरिका के करीब 2,200 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने के बाद उनकी सॉफ्टवेयर तक पहुंच का इस्तेमाल कर प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित किया.
मामला उस समय शुरू हुआ जब ट्रांसअमेरिका और टीसीएस के बीच करीब 2 अरब डॉलर का आउटसोर्सिंग समझौता हुआ था. टीसीएस का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसकी गोपनीय तकनीकी जानकारी का अनुचित उपयोग किया गया.
अदालत ने लगाया भारी हर्जाना
साल 2023 में अमेरिकी अदालत की एक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि टीसीएस ने जानबूझकर व्यापारिक गोपनीयता का दुरुपयोग किया है. इसके बाद कंपनी पर 21 करोड़ डॉलर का हर्जाना लगाया गया. हालांकि, 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया था. बाद में पांचवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा.
अपील की सभी राहें हुईं बंद
टीसीएस ने फैसले के खिलाफ पहले अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की थी. कंपनी को उम्मीद थी कि उसे कानूनी राहत मिलेगी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद उसके लिए फैसले को चुनौती देने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं.
कंपनी पर कितना पड़ेगा असर?
टीसीएस पहले ही इस मामले के लिए 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है. अब अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर जोड़ने के बाद कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी बढ़ जाएगी. इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल हैं. हालांकि, कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को देखते हुए इसका दीर्घकालिक कारोबारी प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन अल्पकाल में यह उसके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों की नजर टीसीएस के आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी. बाजार यह आकलन करेगा कि अतिरिक्त प्रावधान का कंपनी की लाभप्रदता और मार्जिन पर कितना असर पड़ता है. साथ ही, यह मामला वैश्विक आईटी कंपनियों के लिए बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाता है.
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की सबसे पहचान वाली पिज्जा चेन में शुमार पिज्जा हट (Pizza Hut) अब नए मालिकों के हाथों में जाने वाली है. इसकी मूल कंपनी यम ब्रांड्स (Yum Brands) ने 2.7 अरब डॉलर (करीब 25,500 करोड़ रुपये) में पिज्जा हट कारोबार बेचने का फैसला किया है. लगातार घटती बिक्री, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती उपभोक्ता पसंद के दबाव के बीच कंपनी ने अपने इस ऐतिहासिक ब्रांड से अलग होने का निर्णय लिया है. इस सौदे के बाद यम ब्रांड्स अपना पूरा ध्यान KFC और Taco Bell जैसे अधिक लाभदायक ब्रांड्स के विस्तार पर केंद्रित करेगी.
दो हिस्सों में होगी डील
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी. वहीं मुख्य भूमि चीन में संचालित पिज्जा हट रेस्तरां को Yum China Holdings करीब 1.2 अरब डॉलर में अपने अधीन लेगी. दोनों सौदों के वर्ष की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.
चीन पिज्जा हट के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी की कुल बिक्री में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. ऐसे में कारोबार को दो हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग खरीदारों को सौंपने का फैसला रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
नवंबर से चल रही थी रणनीतिक समीक्षा
यम ब्रांड्स ने नवंबर 2025 में पिज्जा हट के भविष्य को लेकर रणनीतिक समीक्षा शुरू की थी. कंपनी की चिंता का मुख्य कारण लगातार कमजोर होती बिक्री और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी में गिरावट थी. समीक्षा के दौरान कंपनी ने कई विकल्पों पर विचार किया और अंततः बिक्री का फैसला लिया.
क्यों कमजोर पड़ा Pizza Hut?
पिज्जा हट की मुश्किलों की सबसे बड़ी वजह बदलता बाजार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा रही है. Domino's और Papa John's जैसी कंपनियों ने डिजिटल ऑर्डरिंग, तेज डिलीवरी और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया. दूसरी ओर पिज्जा हट लंबे समय तक अपने पारंपरिक डाइन-इन मॉडल पर निर्भर रहा, जिससे वह बदलती उपभोक्ता जरूरतों के अनुरूप तेजी से खुद को नहीं ढाल पाया.
महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती लागत और उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों में बदलाव ने भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया. पिछले साल पिज्जा हट की कुल वैश्विक बिक्री में वृद्धि हुई, लेकिन पिज्जा हट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई.
68 साल का गौरवशाली सफर
पिज्जा हट की शुरुआत 1958 में अमेरिका के कंसास राज्य के विचिटा शहर में हुई थी. दो भाइयों ने अपनी मां से 600 डॉलर उधार लेकर पहला रेस्तरां शुरू किया था. देखते ही देखते यह दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन गई. 1969 में इसकी पहचान बनी लाल छत और 1971 तक यह बिक्री के मामले में वैश्विक बाजार की अग्रणी पिज्जा कंपनी बन चुकी थी.
1977 में इसे PepsiCo ने खरीदा और बाद में 1997 में इसके रेस्टोरेंट कारोबार को अलग कर यम ब्रांड्स का गठन हुआ. हालांकि बदलते बाजार और नई प्रतिस्पर्धा के दौर में Pizza Hut अपनी पुरानी चमक बरकरार नहीं रख सका.
Yum Brands की नई रणनीति
कंपनी का मानना है कि पिज्जा हट की वापसी के लिए बड़े निवेश और व्यापक पुनर्गठन की जरूरत है. ऐसे में यम ब्रांड्स ने अपने संसाधनों को KFC और Taco Bell जैसे तेजी से बढ़ते ब्रांड्स पर केंद्रित करने का फैसला किया है.
इस सौदे से मिलने वाली राशि का उपयोग शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन, शेयर बायबैक और भविष्य की विकास योजनाओं में किया जाएगा. वहीं नए मालिक पिज्जा हट को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने और उसकी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस पाने की कोशिश करेंगे.
बदलते फूड बिजनेस की बड़ी मिसाल
पिज्जा हट की बिक्री केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि यह वैश्विक फूड इंडस्ट्री में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार और डिजिटल युग की चुनौतियों का भी संकेत है. कभी पिज्जा बाजार का पर्याय मानी जाने वाली यह चेन आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे नई रणनीति और नए नेतृत्व के सहारे अपनी पहचान दोबारा स्थापित करनी होगी.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,808.48 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 135.25 अंक चढ़कर 23,989.15 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई और सेंसेक्स 544 अंक की छलांग लगाकर 76,808 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,000 के बेहद करीब पहुंच गया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया. अब निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर रहेगी, जहां वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कई कॉरपोरेट घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
तीन दिन की तेजी से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,808.48 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 135.25 अंक चढ़कर 23,989.15 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में यह लगातार तीसरा सत्र था, जब प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए. रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और 94.56 पर बंद हुआ.
आईटी और कंज्यूमर शेयरों ने संभाला मोर्चा
पिछले सत्र में HCL Tech, NTPC, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, TCS और ITC जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. वहीं इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति, टाटा स्टील, SBI और सन फार्मा जैसे शेयर दबाव में रहे.
किन सेक्टरों ने दिखाई मजबूती?
निफ्टी रियल्टी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर मंगलवार के कारोबार में सबसे बड़े गेनर्स रहे. इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला. हालांकि मेटल शेयरों में कमजोरी बनी रही.
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
बाजार की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद भी रही. ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बीच ब्रेंट क्रूड में गिरावट दर्ज की गई और यह 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. यदि कच्चे तेल में नरमी जारी रहती है तो भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है.
आज इन शेयरों पर रहेगा फोकस
भारतीय शेयर बाजार में आज कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. दरअसल, DOMS Industries में इटली की कंपनी FILA द्वारा करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी की खबर है, जबकि GIC Re में सरकार OFS के जरिए 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. Bharat Forge की सहायक कंपनी Kalyani Strategic Systems ने Eurosatory 2026 में नया बख्तरबंद वाहन पेश किया है. वहीं Wipro ने Anthropic के Claude AI मॉडल्स पर आधारित Applied AI Center of Excellence लॉन्च किया है. Cipla ने शिवम पुरी को One India Business का नया CEO नियुक्त किया है. दूसरी ओर Sonata Software और Renaissance Global में संस्थागत निवेश देखने को मिला है. Essar Group ने International Resources Holding के साथ 500 मिलियन डॉलर की क्रूड सोर्सिंग और सप्लाई सुविधा के लिए समझौता किया है. Bank of Maharashtra ने MCLR दरों में बढ़ोतरी की है, जबकि Garware Technical Fibres ने 16.17 लाख शेयरों के कैंसिलेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते आज संबंधित शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रहने की संभावना है.
आज बाजार पर क्या रहेगी नजर?
विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक बाधा बना हुआ है. यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहे और कच्चे तेल में नरमी जारी रही तो बाजार अपनी तेजी बरकरार रख सकता है. वहीं मुनाफावसूली की स्थिति में निवेशकों को उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ सकता है. फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की चाल और चुनिंदा कॉरपोरेट शेयरों पर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और जापान के बीच बढ़ता औद्योगिक सहयोग अब एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिस पर लंबे समय से चीन का लगभग एकाधिकार रहा है. आंध्र प्रदेश में जापान की अग्रणी कंपनी प्रोटेरियल द्वारा 2,250 करोड़ रुपये के निवेश से रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित किया जाएगा. यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है.
आंध्र प्रदेश में स्थापित होगा अत्याधुनिक प्लांट
जापान की प्रमुख एडवांस्ड मैटेरियल्स कंपनी प्रोटेरियल आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले स्थित अच्युतापुरम में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण इकाई स्थापित करेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.
ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइनों, औद्योगिक मोटर्स, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में उपयोग होने वाले सबसे महत्वपूर्ण घटकों में शामिल हैं. आंध्र प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन समिति ने हाल ही में इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की है.
चीन की मोनोपॉली को मिलेगी चुनौती
वर्तमान में वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट बाजार और इसकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है. दुनिया भर के कई उद्योग इन महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए चीनी आपूर्ति पर निर्भर हैं. ऐसे में भारत में इस उत्पादन क्षमता का विकास रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस परियोजना के शुरू होने से भारत की आयात निर्भरता कम होगी और देश अपनी घरेलू रेयर अर्थ वैल्यू चेन विकसित करने में सक्षम होगा. इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों को भी मजबूती मिलेगी.
सरकार की आत्मनिर्भरता रणनीति को मिलेगा बल
केंद्र सरकार हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. यह कदम दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र को केवल औद्योगिक अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहा है.
कौन है प्रोटेरियल?
प्रोटेरियल, जिसे पहले हिताची मेटल्स के नाम से जाना जाता था, रेयर अर्थ मैग्नेट तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले चुंबकीय पदार्थों और उन्नत औद्योगिक सामग्रियों के निर्माण के लिए जानी जाती है. पिछले वर्ष कंपनी ने लगभग 45,000 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया था. इसके संचालन उत्तर अमेरिका, यूरोप, चीन और एशिया के कई देशों में फैले हुए हैं.
'चीन प्लस वन' रणनीति में भारत को मिलेगा लाभ
वैश्विक कंपनियां अब सप्लाई चेन के लिए केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं. इसे 'चीन प्लस वन' रणनीति कहा जाता है. भारत इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने की कोशिश कर रहा है.
जापान की इस बड़ी परियोजना से भारत को न केवल निवेश और रोजगार मिलेगा, बल्कि वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त होगा. आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत को इस रणनीतिक क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
चेन्नई स्थित फुल-स्टैक सॉवरेन AI कंपनी Sarvam ने घोषणा की है कि उसने अपनी 300 मिलियन डॉलर की सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सॉवरेन AI इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए AI स्टार्टअप Sarvam ने अपनी सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस निवेश के साथ कंपनी का मूल्यांकन 1.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है और वह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई है. फंडिंग राउंड में HCLTech ने प्रमुख रणनीतिक निवेशक के रूप में भाग लिया है.
सीरीज-B फंडिंग में जुटाए 234 मिलियन डॉलर
चेन्नई स्थित फुल-स्टैक सॉवरेन AI कंपनी Sarvam ने घोषणा की है कि उसने अपनी 300 मिलियन डॉलर की सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 अरब डॉलर आंका गया है. इस निवेश दौर में HCLTech और Bessemer Venture Partners शामिल हुए हैं, जबकि मौजूदा निवेशकों Khosla Ventures और Peak XV Partners ने भी अपना समर्थन जारी रखा है.
HCLTech करेगा 150 मिलियन डॉलर का निवेश
इस फंडिंग राउंड में HCLTech 150 मिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है. कंपनी का कहना है कि HCLTech की वैश्विक उपस्थिति, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन विशेषज्ञता, डेटा और सॉफ्टवेयर क्षमताएं Sarvam को भारत और वैश्विक बाजारों के लिए मजबूत AI इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेंगी.
HCLTech के सीईओ और प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार ने कहा कि यह निवेश भारत के भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि Sarvam की AI रिसर्च और HCLTech की वैश्विक पहुंच मिलकर एंटरप्राइज और सरकारी संस्थानों के लिए सुरक्षित, स्केलेबल और जिम्मेदार AI समाधान विकसित करेंगी.
भारत के लिए सॉवरेन AI प्लेटफॉर्म बनाने पर फोकस
Sarvam के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसे AI मॉडल विकसित करना है जो भारतीय भाषाओं, दस्तावेजों और स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें. उनका कहना है कि कंपनी एंटरप्राइज और सरकारों को अपना स्वयं का सॉवरेन AI विकसित और संचालित करने में सक्षम बनाने के लिए फुल-स्टैक AI समाधान तैयार कर रही है.
नए निवेश का उपयोग कंपनी अपने अगले फ्रंटियर AI मॉडल के विकास, एजेंटिक AI, कोडिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े उपयोग मामलों पर शोध तथा बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने में करेगी.
भारत में विकसित किए कई उन्नत AI मॉडल
Sarvam ने पिछले कुछ महीनों में कई फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किए हैं, जिन्हें पूरी तरह भारत में विकसित और प्रशिक्षित किया गया है. कंपनी के अनुसार, Sarvam 105B मॉडल ज्ञान, तर्क क्षमता और एजेंटिक AI बेंचमार्क पर कई बड़े मॉडलों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन करता है. वहीं Sarvam 30B को उपभोक्ता हार्डवेयर पर चलने के लिए अनुकूलित किया गया है.
इसके अलावा Sarvam Vision प्लेटफॉर्म हस्तलिखित दस्तावेजों और भारतीय भाषाओं के रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने में इस्तेमाल हो रहा है. कंपनी अब तक बीमा फॉर्म से लेकर पुराने भूमि अभिलेखों तक 3.5 करोड़ से अधिक पन्नों का डिजिटलीकरण कर चुकी है.
बैंकिंग, बीमा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही पहुंच
Sarvam के AI समाधान तेजी से बैंकिंग, बीमा, सरकारी प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनाए जा रहे हैं. कंपनी का संवादात्मक AI प्लेटफॉर्म प्रतिदिन 20 लाख से अधिक इंटरैक्शन संभाल रहा है और पिछले दो महीनों में इसका उपयोग दोगुना हो गया है. वहीं कंपनी का इन्फरेंस प्लेटफॉर्म भारत में रोजाना लगभग 1 करोड़ API कॉल प्रोसेस कर रहा है.
किसानों और बीमा ग्राहकों तक पहुंचा AI
Sarvam की तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर सामाजिक प्रभाव पैदा करने के लिए भी किया जा रहा है. कंपनी के बहुभाषी वॉयस एजेंट प्लेटफॉर्म ने 1.7 करोड़ किसानों से डेटा एकत्र कर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं.
इसके अलावा भारत की एक प्रमुख बीमा कंपनी के लिए Sarvam ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों तक पहुंचने वाले कम लागत वाले वॉयस अभियान को भी समर्थन दिया है.
AI को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य
Sarvam के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य AI तकनीक को भारत में व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों, छोटे व्यवसायों, उद्योगों और राज्य व केंद्र सरकारों को इसका लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि HCLTech के साथ साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि भारतीय कॉरपोरेट समूह देश में AI की बुनियादी क्षमता निर्माण में कैसे योगदान दे सकते हैं.
भारत के AI क्षेत्र के लिए बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि Sarvam की यह फंडिंग भारत के उभरते सॉवरेन AI इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. HCLTech जैसे बड़े तकनीकी समूह के समर्थन से कंपनी भारतीय भाषाओं, सरकारी उपयोग और एंटरप्राइज AI समाधानों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है.
ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार की ओर से विंड एनर्जी सेक्टर को लेकर किए गए एक महत्वपूर्ण कदम ने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के हालिया बयान और नई पहल के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली. मंगलवार को कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत तक उछल गया. बाजार का मानना है कि पुरानी विंड टर्बाइनों को आधुनिक तकनीक से बदलने की सरकारी योजना से विंड एनर्जी उद्योग को नई गति मिल सकती है.
पुरानी टर्बाइनों के आकलन का निर्देश
गोवा में ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है. इससे बिना अतिरिक्त भूमि उपयोग के बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी. उन्होंने विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (WIPPA) और इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) को 30 दिनों के भीतर देशभर में पुरानी हो चुकी टर्बाइनों का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
भारत की विंड एनर्जी क्षमता पर सरकार का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत लोकलाइजेशन, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण भारत का विंड एनर्जी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. नेसेल, ब्लेड, टावर और एडवांस्ड गियरबॉक्स जैसे प्रमुख उपकरणों के निर्माण में भारतीय कंपनियां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं और वैश्विक बाजार में भी विस्तार कर रही हैं.
WT-MARUT पोर्टल का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान प्रह्लाद जोशी ने WT-MARUT पोर्टल भी लॉन्च किया. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विंड एनर्जी उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर प्रोजेक्ट साइट तक पूरी सप्लाई चेन की निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करेगा. सरकार के अनुसार, यह पोर्टल ट्रेसेबिलिटी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को मजबूत बनाएगा. इससे विंड एनर्जी परियोजनाओं के संचालन में दक्षता बढ़ने की उम्मीद है.
सुजलॉन के नए 5 मेगावाट टर्बाइन का अनावरण
इस अवसर पर कर्नाटक के विजयनगर में प्रह्लाद जोशी ने सुजलॉन एनर्जी के अत्याधुनिक S175 (5 मेगावाट) विंड टरबाइन का भी अनावरण किया. कंपनी के अनुसार, 175 मीटर रोटर, 160 मीटर हाइब्रिड लैटिस टावर और 247.5 मीटर ब्लेड टिप ऊंचाई वाला यह टरबाइन अधिक ऊंचाई पर उपलब्ध तेज और स्थिर हवाओं का उपयोग कर ज्यादा बिजली उत्पादन करने में सक्षम है.
2030 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी टर्बाइनों के रिपावरिंग कार्यक्रम और नई तकनीकों के इस्तेमाल से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
शेयर में दिखी जोरदार तेजी
सरकारी घोषणाओं के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली. दोपहर के कारोबार में खबर लिखे जाने तक कंपनी का शेयर 4.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 58.02 रुपये पर कारोबार करता दिखा. पिछले तीन महीनों में यह शेयर 40 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुका है, जबकि तीन वर्षों में निवेशकों को 290 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दे चुका है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की रिपावरिंग योजना तेजी से आगे बढ़ती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ विंड टरबाइन निर्माण और परियोजना विकास से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है.
मई में बढ़ी बेरोजगारी दर, रोजगार और श्रम भागीदारी दोनों में आई गिरावट, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के श्रम बाजार से चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, मई 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और रोजगार दर (WPR) में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रोजगार बाजार की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है.
11 महीने के निचले स्तर पर पहुंची श्रम भागीदारी दर
सर्वेक्षण के अनुसार, मई में काम कर रहे या सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे लोगों का अनुपात घटकर 54.4 प्रतिशत रह गया, जो पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था. ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी दर अप्रैल के 57.5 प्रतिशत से घटकर 56.6 प्रतिशत पर आ गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.1 प्रतिशत से मामूली गिरावट के साथ 49.8 प्रतिशत दर्ज की गई.
रोजगार दर में भी लगातार गिरावट
मई के दौरान रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी घटा है. अप्रैल में जहां यह 52.2 प्रतिशत था, वहीं मई में यह घटकर 51.4 प्रतिशत रह गया. यह भी पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दर 54.9 प्रतिशत से घटकर 53.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 46.8 प्रतिशत से घटकर 46.6 प्रतिशत रह गई.
NSO ने बताए श्रम बाजार की कमजोरी के संकेत
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि कामकाजी आबादी और रोजगार प्राप्त लोगों के अनुपात में कमी तथा बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी श्रम बाजार की कमजोर होती स्थिति की ओर इशारा करती है. रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार के अवसरों में कमी, काम की तलाश करने वालों की संख्या में आई गिरावट की तुलना में अधिक तेज रही है. यही वजह है कि बेरोजगारी दर में वृद्धि दर्ज की गई. मई के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती को भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.
पुरुषों और महिलाओं दोनों के रोजगार में कमी
रोजगार के मोर्चे पर पुरुषों और महिलाओं दोनों की स्थिति कमजोर हुई है. मई में पुरुषों का रोजगार अनुपात अप्रैल के 73.2 प्रतिशत से घटकर 72.5 प्रतिशत रह गया. वहीं महिलाओं का रोजगार अनुपात 32.1 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत पर आ गया. यह आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार के अवसरों में कमी का असर दोनों वर्गों पर समान रूप से पड़ा है.
ग्रामीण भारत में बढ़ी बेरोजगारी, शहरों में मामूली राहत
मई में शहरी क्षेत्रों की बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ी है, जहां बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई.
महिलाओं की बेरोजगारी दर पुरुषों से अधिक
लैंगिक आधार पर देखें तो बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पुरुषों की बेरोजगारी दर अप्रैल के 5.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.4 प्रतिशत हो गई. वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गई.
क्या कहते हैं आंकड़े?
मई 2026 के आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के श्रम बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. बेरोजगारी दर में वृद्धि के साथ श्रम भागीदारी और रोजगार दर में गिरावट यह दर्शाती है कि रोजगार सृजन की गति धीमी हुई है. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है. यदि आने वाले महीनों में रोजगार के अवसरों में सुधार नहीं हुआ, तो श्रम बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और निर्यातकों को वैश्विक कीमतों के अंतर का अतिरिक्त लाभ उठाने से रोकने के लिए उठाया गया है. हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
16 जून से लागू हुई नई दरें
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं. सरकार ने डीजल के निर्यात पर SAED को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं ATF के निर्यात पर यह शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर लागू शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर बना रहेगा.
घरेलू बाजार पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन कर ढांचे में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा.
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी सतर्कता
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा उसके बाद हुए जवाबी हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था. इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 26 मार्च को डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क लगाया था और तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है. बाद में 16 मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया था.
क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स?
सरकार का मानना है कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. ऐसे माहौल में निर्यातकों को वैश्विक कीमतों का असामान्य लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखना और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. सरकार चाहती है कि वैश्विक संकट के दौर में ईंधन निर्यात के कारण देश के भीतर आपूर्ति प्रभावित न हो और ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 जून तक 12.23 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं. वहीं बद्रीनाथ धाम में 10.92 लाख से ज्यादा भक्तों ने पूजा-अर्चना की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन-पूजन कर श्रद्धा अर्पित की. इस दौरान उन्होंने दोनों मंदिरों को 5-5 करोड़ रुपये का दान दिया. चारधाम यात्रा के बीच उनकी इस यात्रा को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुकेश अंबानी सोमवार को पारंपरिक परिधान में उत्तराखंड पहुंचे और बद्रीनाथ तथा केदारनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना की. मंदिर पहुंचने पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. जानकारी के अनुसार, उनका हेलीकॉप्टर सुबह करीब 10 बजे बद्रीनाथ हेलीपैड पर उतरा. इसके बाद वे भगवान बद्रीविशाल के गर्भगृह में पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर समिति के अधिकारियों से भी मुलाकात की.
मंदिरों को दिए 10 करोड़ रुपये
अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान अंबानी ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों को 5-5 करोड़ रुपये का दान दिया. इस तरह दोनों धामों को कुल 10 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है. मंदिर समिति के अधिकारियों ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया.
चारधाम यात्रा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. देशभर से लाखों श्रद्धालु हिमालय की गोद में बसे इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. कई श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना मानी जाती है.
क्या है चारधाम यात्रा का महत्व?
हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है. इस यात्रा के अंतर्गत श्रद्धालु गढ़वाल हिमालय में स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं. मान्यता है कि इन चारों धामों की यात्रा करने से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है.
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 जून तक 12.23 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं. वहीं बद्रीनाथ धाम में 10.92 लाख से ज्यादा भक्तों ने पूजा-अर्चना की है. इसके अलावा गंगोत्री में 5.95 लाख से अधिक और यमुनोत्री में 5.56 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि चारधाम यात्रा के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह लगातार मजबूत हो रहा है.
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.20 अरब डॉलर हो गया. वहीं आयात भी बढ़कर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंचा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका-ईरान तनाव में कमी और पश्चिम एशिया में हालात सुधरने के बीच भारत के निर्यात क्षेत्र से उत्साहजनक खबर आई है. मई 2026 में देश का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 18 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 45.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. खास बात यह है कि पश्चिम एशियाई बाजारों में मांग लौटने और सप्लाई चेन में सुधार के संकेतों के बीच यह उछाल दर्ज किया गया है.
मई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.20 अरब डॉलर हो गया. वहीं आयात भी बढ़कर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंचा. इसके बावजूद व्यापार घाटा लगभग स्थिर रहा और मई में 28.21 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो अप्रैल के 28.38 अरब डॉलर से थोड़ा कम है.
पश्चिम एशिया में सुधार से मिली रफ्तार
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि मई उन चुनिंदा महीनों में शामिल रहा, जिनमें भारत ने सबसे अधिक मासिक निर्यात वृद्धि दर्ज की है. उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष के कारण प्रभावित हुए निर्यात में अब सुधार देखने को मिल रहा है. उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन जैसे देशों को होने वाले भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय रिकवरी दर्ज की गई है. यह सुधार ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में शुरुआती समझौते की घोषणा हुई है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीद बढ़ी है.
सप्लाई चेन और तेल कारोबार को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से संचालित होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन को राहत मिलेगी. साथ ही कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही सुगम होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है.
12 वर्षों में दोगुना हुआ निर्यात आधार
राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात आधार लगभग दोगुना हो चुका है. वहीं सेवा क्षेत्र का निर्यात करीब तीन गुना बढ़ा है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारत के निर्यात को नई गति देंगे.
सरकार UAE, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों का लाभ निर्यातकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न राज्यों में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित करेगी.
सोने के आयात में भी तेज उछाल
निर्यात और आयात में बढ़ोतरी के साथ-साथ सोने के आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. अप्रैल-मई 2026 के दौरान सोने का आयात सालाना आधार पर 60 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और निवेशकों की रुचि भी कीमती धातुओं में बढ़ी है.
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात स्थिर रहते हैं और नए व्यापार समझौतों का लाभ उद्योगों तक तेजी से पहुंचता है, तो आने वाले महीनों में भारत का निर्यात प्रदर्शन और मजबूत हो सकता है. वैश्विक मांग में सुधार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम कम होने की स्थिति में भारतीय व्यापार क्षेत्र को अतिरिक्त बढ़त मिलने की संभावना है.
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया से आई राहत भरी खबरों और कच्चे तेल में नरमी के चलते सोमवार को शेयर बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 736 अंक उछलकर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी ने भी करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी. हालांकि आज निवेशकों के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार मुनाफावसूली के दौर में प्रवेश करेगा. दरअसल, वैश्विक संकेतों के साथ कई अहम कॉरपोरेट घटनाक्रम आज बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
तेजी के साथ बंद हुए प्रमुख सूचकांक
सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर पहुंच गया. दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 1,200 अंकों से अधिक और निफ्टी ने 350 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाई थी, हालांकि अंतिम घंटे में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली.
रुपये को भी मिला सहारा
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की बेहतर धारणा के चलते भारतीय मुद्रा भी मजबूत हुई. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.71 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.11 पर बंद हुआ था.
इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी ट्रेंट में रही, जिसके शेयर 5.40 प्रतिशत उछले. इसके अलावा इंडिगो, बजाज फिनसर्व, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, टाइटन, इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और सन फार्मा जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही शानदार तेजी
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल आधार पर रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स कारोबार के दौरान लगभग 4 प्रतिशत तक चढ़ गया. इसके अलावा ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी रही. हालांकि फार्मा शेयरों में कुछ कमजोरी दर्ज की गई.
अमेरिका-ईरान समझौते से बढ़ा भरोसा
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर रही. रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने और संघर्ष समाप्त करने की दिशा में सहमति जताई है. इससे तीन महीने से अधिक समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने की उम्मीद बढ़ी है. निवेशकों को भरोसा है कि क्षेत्र में शांति बहाल होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा.
कच्चे तेल में गिरावट से मिला बड़ा सहारा
तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 5 प्रतिशत तक टूट गया और बाद में 82.88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है. इससे दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों, खासकर ब्याज दरों को लेकर, अधिक संतुलित रुख अपनाने की संभावना बढ़ सकती है.
कॉरपोरेट घटनाक्रमों ने भी बढ़ाई बाजार की रफ्तार
वैश्विक संकेतों के अलावा कई बड़े कॉरपोरेट अपडेट्स ने भी बाजार की धारणा को मजबूती दी. HCL Technologies ने Sarvam AI से जुड़ी कंपनी Axonwise में 1,427 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि SBI की 18 जून को होने वाली बोर्ड बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा. Aditya Birla Fashion & Retail में प्रबंधन स्तर पर बदलाव हुए हैं और GIC में सरकार 5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लेकर आ रही है.
वहीं Adani Enterprises ने Jabil के साथ मिलकर भारत में AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण प्लेटफॉर्म विकसित करने की घोषणा की है. Yes Bank ने Northern Arc Capital के साथ डिजिटल लेंडिंग को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी की है. इसके अलावा Mahindra Finance की 1,000 करोड़ रुपये के NCD जारी करने की योजना, Dhanlaxmi Bank में नए CFO की नियुक्ति, IRCTC में वित्त प्रमुख के इस्तीफे और Vikran Engineering को मिली नई क्रेडिट रेटिंग जैसे घटनाक्रम भी निवेशकों के रडार पर रहे. इन खबरों के चलते संबंधित शेयरों में अच्छी गतिविधि देखने को मिली और बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला.
बाजार की नजर अब आगे की घटनाओं पर
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान समझौते की औपचारिक प्रक्रिया, कच्चे तेल की दिशा और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति बैठकों पर रहेगी. यदि भू-राजनीतिक हालात स्थिर रहते हैं और तेल कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो भारतीय बाजारों में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)