ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार की ओर से विंड एनर्जी सेक्टर को लेकर किए गए एक महत्वपूर्ण कदम ने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के हालिया बयान और नई पहल के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली. मंगलवार को कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत तक उछल गया. बाजार का मानना है कि पुरानी विंड टर्बाइनों को आधुनिक तकनीक से बदलने की सरकारी योजना से विंड एनर्जी उद्योग को नई गति मिल सकती है.
पुरानी टर्बाइनों के आकलन का निर्देश
गोवा में ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है. इससे बिना अतिरिक्त भूमि उपयोग के बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी. उन्होंने विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (WIPPA) और इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) को 30 दिनों के भीतर देशभर में पुरानी हो चुकी टर्बाइनों का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
भारत की विंड एनर्जी क्षमता पर सरकार का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत लोकलाइजेशन, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण भारत का विंड एनर्जी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. नेसेल, ब्लेड, टावर और एडवांस्ड गियरबॉक्स जैसे प्रमुख उपकरणों के निर्माण में भारतीय कंपनियां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं और वैश्विक बाजार में भी विस्तार कर रही हैं.
WT-MARUT पोर्टल का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान प्रह्लाद जोशी ने WT-MARUT पोर्टल भी लॉन्च किया. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विंड एनर्जी उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर प्रोजेक्ट साइट तक पूरी सप्लाई चेन की निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करेगा. सरकार के अनुसार, यह पोर्टल ट्रेसेबिलिटी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को मजबूत बनाएगा. इससे विंड एनर्जी परियोजनाओं के संचालन में दक्षता बढ़ने की उम्मीद है.
सुजलॉन के नए 5 मेगावाट टर्बाइन का अनावरण
इस अवसर पर कर्नाटक के विजयनगर में प्रह्लाद जोशी ने सुजलॉन एनर्जी के अत्याधुनिक S175 (5 मेगावाट) विंड टरबाइन का भी अनावरण किया. कंपनी के अनुसार, 175 मीटर रोटर, 160 मीटर हाइब्रिड लैटिस टावर और 247.5 मीटर ब्लेड टिप ऊंचाई वाला यह टरबाइन अधिक ऊंचाई पर उपलब्ध तेज और स्थिर हवाओं का उपयोग कर ज्यादा बिजली उत्पादन करने में सक्षम है.
2030 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी टर्बाइनों के रिपावरिंग कार्यक्रम और नई तकनीकों के इस्तेमाल से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
शेयर में दिखी जोरदार तेजी
सरकारी घोषणाओं के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली. दोपहर के कारोबार में खबर लिखे जाने तक कंपनी का शेयर 4.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 58.02 रुपये पर कारोबार करता दिखा. पिछले तीन महीनों में यह शेयर 40 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुका है, जबकि तीन वर्षों में निवेशकों को 290 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दे चुका है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की रिपावरिंग योजना तेजी से आगे बढ़ती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ विंड टरबाइन निर्माण और परियोजना विकास से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है.
मई में बढ़ी बेरोजगारी दर, रोजगार और श्रम भागीदारी दोनों में आई गिरावट, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के श्रम बाजार से चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, मई 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और रोजगार दर (WPR) में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रोजगार बाजार की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है.
11 महीने के निचले स्तर पर पहुंची श्रम भागीदारी दर
सर्वेक्षण के अनुसार, मई में काम कर रहे या सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे लोगों का अनुपात घटकर 54.4 प्रतिशत रह गया, जो पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था. ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी दर अप्रैल के 57.5 प्रतिशत से घटकर 56.6 प्रतिशत पर आ गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.1 प्रतिशत से मामूली गिरावट के साथ 49.8 प्रतिशत दर्ज की गई.
रोजगार दर में भी लगातार गिरावट
मई के दौरान रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी घटा है. अप्रैल में जहां यह 52.2 प्रतिशत था, वहीं मई में यह घटकर 51.4 प्रतिशत रह गया. यह भी पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दर 54.9 प्रतिशत से घटकर 53.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 46.8 प्रतिशत से घटकर 46.6 प्रतिशत रह गई.
NSO ने बताए श्रम बाजार की कमजोरी के संकेत
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि कामकाजी आबादी और रोजगार प्राप्त लोगों के अनुपात में कमी तथा बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी श्रम बाजार की कमजोर होती स्थिति की ओर इशारा करती है. रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार के अवसरों में कमी, काम की तलाश करने वालों की संख्या में आई गिरावट की तुलना में अधिक तेज रही है. यही वजह है कि बेरोजगारी दर में वृद्धि दर्ज की गई. मई के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती को भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.
पुरुषों और महिलाओं दोनों के रोजगार में कमी
रोजगार के मोर्चे पर पुरुषों और महिलाओं दोनों की स्थिति कमजोर हुई है. मई में पुरुषों का रोजगार अनुपात अप्रैल के 73.2 प्रतिशत से घटकर 72.5 प्रतिशत रह गया. वहीं महिलाओं का रोजगार अनुपात 32.1 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत पर आ गया. यह आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार के अवसरों में कमी का असर दोनों वर्गों पर समान रूप से पड़ा है.
ग्रामीण भारत में बढ़ी बेरोजगारी, शहरों में मामूली राहत
मई में शहरी क्षेत्रों की बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ी है, जहां बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई.
महिलाओं की बेरोजगारी दर पुरुषों से अधिक
लैंगिक आधार पर देखें तो बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पुरुषों की बेरोजगारी दर अप्रैल के 5.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.4 प्रतिशत हो गई. वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गई.
क्या कहते हैं आंकड़े?
मई 2026 के आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के श्रम बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. बेरोजगारी दर में वृद्धि के साथ श्रम भागीदारी और रोजगार दर में गिरावट यह दर्शाती है कि रोजगार सृजन की गति धीमी हुई है. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है. यदि आने वाले महीनों में रोजगार के अवसरों में सुधार नहीं हुआ, तो श्रम बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और निर्यातकों को वैश्विक कीमतों के अंतर का अतिरिक्त लाभ उठाने से रोकने के लिए उठाया गया है. हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
16 जून से लागू हुई नई दरें
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं. सरकार ने डीजल के निर्यात पर SAED को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं ATF के निर्यात पर यह शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर लागू शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर बना रहेगा.
घरेलू बाजार पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन कर ढांचे में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा.
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी सतर्कता
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा उसके बाद हुए जवाबी हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था. इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 26 मार्च को डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क लगाया था और तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है. बाद में 16 मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया था.
क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स?
सरकार का मानना है कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. ऐसे माहौल में निर्यातकों को वैश्विक कीमतों का असामान्य लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखना और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. सरकार चाहती है कि वैश्विक संकट के दौर में ईंधन निर्यात के कारण देश के भीतर आपूर्ति प्रभावित न हो और ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 जून तक 12.23 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं. वहीं बद्रीनाथ धाम में 10.92 लाख से ज्यादा भक्तों ने पूजा-अर्चना की है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन-पूजन कर श्रद्धा अर्पित की. इस दौरान उन्होंने दोनों मंदिरों को 5-5 करोड़ रुपये का दान दिया. चारधाम यात्रा के बीच उनकी इस यात्रा को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुकेश अंबानी सोमवार को पारंपरिक परिधान में उत्तराखंड पहुंचे और बद्रीनाथ तथा केदारनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना की. मंदिर पहुंचने पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. जानकारी के अनुसार, उनका हेलीकॉप्टर सुबह करीब 10 बजे बद्रीनाथ हेलीपैड पर उतरा. इसके बाद वे भगवान बद्रीविशाल के गर्भगृह में पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर समिति के अधिकारियों से भी मुलाकात की.
मंदिरों को दिए 10 करोड़ रुपये
अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान अंबानी ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों को 5-5 करोड़ रुपये का दान दिया. इस तरह दोनों धामों को कुल 10 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है. मंदिर समिति के अधिकारियों ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया.
चारधाम यात्रा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. देशभर से लाखों श्रद्धालु हिमालय की गोद में बसे इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. कई श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना मानी जाती है.
क्या है चारधाम यात्रा का महत्व?
हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है. इस यात्रा के अंतर्गत श्रद्धालु गढ़वाल हिमालय में स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं. मान्यता है कि इन चारों धामों की यात्रा करने से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है.
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 जून तक 12.23 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं. वहीं बद्रीनाथ धाम में 10.92 लाख से ज्यादा भक्तों ने पूजा-अर्चना की है. इसके अलावा गंगोत्री में 5.95 लाख से अधिक और यमुनोत्री में 5.56 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि चारधाम यात्रा के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह लगातार मजबूत हो रहा है.
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.20 अरब डॉलर हो गया. वहीं आयात भी बढ़कर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंचा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका-ईरान तनाव में कमी और पश्चिम एशिया में हालात सुधरने के बीच भारत के निर्यात क्षेत्र से उत्साहजनक खबर आई है. मई 2026 में देश का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 18 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 45.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. खास बात यह है कि पश्चिम एशियाई बाजारों में मांग लौटने और सप्लाई चेन में सुधार के संकेतों के बीच यह उछाल दर्ज किया गया है.
मई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.20 अरब डॉलर हो गया. वहीं आयात भी बढ़कर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंचा. इसके बावजूद व्यापार घाटा लगभग स्थिर रहा और मई में 28.21 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो अप्रैल के 28.38 अरब डॉलर से थोड़ा कम है.
पश्चिम एशिया में सुधार से मिली रफ्तार
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि मई उन चुनिंदा महीनों में शामिल रहा, जिनमें भारत ने सबसे अधिक मासिक निर्यात वृद्धि दर्ज की है. उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष के कारण प्रभावित हुए निर्यात में अब सुधार देखने को मिल रहा है. उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन जैसे देशों को होने वाले भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय रिकवरी दर्ज की गई है. यह सुधार ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में शुरुआती समझौते की घोषणा हुई है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीद बढ़ी है.
सप्लाई चेन और तेल कारोबार को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से संचालित होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन को राहत मिलेगी. साथ ही कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही सुगम होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है.
12 वर्षों में दोगुना हुआ निर्यात आधार
राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात आधार लगभग दोगुना हो चुका है. वहीं सेवा क्षेत्र का निर्यात करीब तीन गुना बढ़ा है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारत के निर्यात को नई गति देंगे.
सरकार UAE, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों का लाभ निर्यातकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न राज्यों में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित करेगी.
सोने के आयात में भी तेज उछाल
निर्यात और आयात में बढ़ोतरी के साथ-साथ सोने के आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. अप्रैल-मई 2026 के दौरान सोने का आयात सालाना आधार पर 60 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और निवेशकों की रुचि भी कीमती धातुओं में बढ़ी है.
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात स्थिर रहते हैं और नए व्यापार समझौतों का लाभ उद्योगों तक तेजी से पहुंचता है, तो आने वाले महीनों में भारत का निर्यात प्रदर्शन और मजबूत हो सकता है. वैश्विक मांग में सुधार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम कम होने की स्थिति में भारतीय व्यापार क्षेत्र को अतिरिक्त बढ़त मिलने की संभावना है.
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर पहुंच गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया से आई राहत भरी खबरों और कच्चे तेल में नरमी के चलते सोमवार को शेयर बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 736 अंक उछलकर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी ने भी करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी. हालांकि आज निवेशकों के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार मुनाफावसूली के दौर में प्रवेश करेगा. दरअसल, वैश्विक संकेतों के साथ कई अहम कॉरपोरेट घटनाक्रम आज बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
तेजी के साथ बंद हुए प्रमुख सूचकांक
सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर पहुंच गया. दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 1,200 अंकों से अधिक और निफ्टी ने 350 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाई थी, हालांकि अंतिम घंटे में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली.
रुपये को भी मिला सहारा
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की बेहतर धारणा के चलते भारतीय मुद्रा भी मजबूत हुई. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.71 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.11 पर बंद हुआ था.
इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी ट्रेंट में रही, जिसके शेयर 5.40 प्रतिशत उछले. इसके अलावा इंडिगो, बजाज फिनसर्व, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, टाइटन, इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और सन फार्मा जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही शानदार तेजी
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल आधार पर रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स कारोबार के दौरान लगभग 4 प्रतिशत तक चढ़ गया. इसके अलावा ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी रही. हालांकि फार्मा शेयरों में कुछ कमजोरी दर्ज की गई.
अमेरिका-ईरान समझौते से बढ़ा भरोसा
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर रही. रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने और संघर्ष समाप्त करने की दिशा में सहमति जताई है. इससे तीन महीने से अधिक समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने की उम्मीद बढ़ी है. निवेशकों को भरोसा है कि क्षेत्र में शांति बहाल होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा.
कच्चे तेल में गिरावट से मिला बड़ा सहारा
तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 5 प्रतिशत तक टूट गया और बाद में 82.88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है. इससे दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों, खासकर ब्याज दरों को लेकर, अधिक संतुलित रुख अपनाने की संभावना बढ़ सकती है.
कॉरपोरेट घटनाक्रमों ने भी बढ़ाई बाजार की रफ्तार
वैश्विक संकेतों के अलावा कई बड़े कॉरपोरेट अपडेट्स ने भी बाजार की धारणा को मजबूती दी. HCL Technologies ने Sarvam AI से जुड़ी कंपनी Axonwise में 1,427 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि SBI की 18 जून को होने वाली बोर्ड बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा. Aditya Birla Fashion & Retail में प्रबंधन स्तर पर बदलाव हुए हैं और GIC में सरकार 5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लेकर आ रही है.
वहीं Adani Enterprises ने Jabil के साथ मिलकर भारत में AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण प्लेटफॉर्म विकसित करने की घोषणा की है. Yes Bank ने Northern Arc Capital के साथ डिजिटल लेंडिंग को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी की है. इसके अलावा Mahindra Finance की 1,000 करोड़ रुपये के NCD जारी करने की योजना, Dhanlaxmi Bank में नए CFO की नियुक्ति, IRCTC में वित्त प्रमुख के इस्तीफे और Vikran Engineering को मिली नई क्रेडिट रेटिंग जैसे घटनाक्रम भी निवेशकों के रडार पर रहे. इन खबरों के चलते संबंधित शेयरों में अच्छी गतिविधि देखने को मिली और बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला.
बाजार की नजर अब आगे की घटनाओं पर
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान समझौते की औपचारिक प्रक्रिया, कच्चे तेल की दिशा और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति बैठकों पर रहेगी. यदि भू-राजनीतिक हालात स्थिर रहते हैं और तेल कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो भारतीय बाजारों में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में ईंधन और बिजली श्रेणी की थोक महंगाई बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. खुदरा महंगाई में तेजी के बाद अब थोक महंगाई (WPI) भी मई 2026 में बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी. ईंधन और बिजली की कीमतों में उछाल, खाद्य वस्तुओं की महंगाई और विनिर्मित उत्पादों की बढ़ती लागत ने थोक मूल्य सूचकांक को ऊपर धकेला है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है.
ईंधन और बिजली ने बढ़ाया महंगाई का दबाव
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में ईंधन और बिजली श्रेणी की थोक महंगाई बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी. कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर भी बढ़कर 61.51 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो एक महीने पहले 56.31 प्रतिशत थी. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और घरेलू कीमतों पर पड़ा.
खाद्य वस्तुओं के दामों में भी तेजी
मई में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी. खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने आम उपभोक्ताओं के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन और सप्लाई चेन महंगी हुई है, जिसका असर खाद्य कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है.
विनिर्मित उत्पादों की लागत बढ़ी
विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर भी मई में बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 6.68 प्रतिशत थी. कच्चे माल और ऊर्जा की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च में इजाफा हुआ है, जिसका असर विभिन्न औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है.
खुदरा महंगाई भी 16 महीने के उच्च स्तर पर
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई (CPI) भी मई में बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले 16 महीनों का उच्चतम स्तर है. अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है. सरकार ने महंगाई दर को 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
RBI ने भी बढ़ाया महंगाई का अनुमान
इस महीने की शुरुआत में RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था. केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और कच्चे माल की लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में RBI की आगामी मौद्रिक नीति बैठकों पर बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि बढ़ती महंगाई ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक के रुख को प्रभावित कर सकती है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा, तेल और गैस आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद; वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
करीब तीन महीने तक चले सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम और शांति समझौते का रास्ता साफ हो गया है. दोनों देशों ने संघर्ष समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा पर सहमति बना ली है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी. इस घटनाक्रम को वैश्विक ऊर्जा बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
ट्रंप ने किया समझौते का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल रही है. उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-मुक्त तरीके से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की मंजूरी देने की बात कही. ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें, तेल को बहने दें.” हालांकि समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है. खाड़ी क्षेत्र से निर्यात होने वाले कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कई अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. युद्ध के दौरान इस मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी और ऊर्जा कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. अब इसके दोबारा खुलने से तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है.
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते को अंतिम रूप देने में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति जताई है. ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करने की दिशा में अहम कदम बताया है.
ईरान और अमेरिका दोनों ने जताई संतुष्टि
ईरान के सरकारी मीडिया ने इस समझौते को अपनी कूटनीतिक जीत बताया है और दावा किया है कि अमेरिका को युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते का रास्ता अपनाना पड़ा. हालांकि तेहरान की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. दूसरी ओर अमेरिका इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है.
परमाणु कार्यक्रम पर अभी भी बरकरार है विवाद
युद्ध विराम के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास बड़ी मात्रा में उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे लेकर पश्चिमी देशों की चिंता लगातार बनी हुई है.
अमेरिका चाहता है कि इस यूरेनियम को या तो नष्ट किया जाए या फिर किसी तीसरे देश में स्थानांतरित किया जाए. रूस ने इसे अपने यहां सुरक्षित रखने की पेशकश भी की है. हालांकि मौजूदा समझौते में इस मुद्दे का अंतिम समाधान नहीं निकाला गया है और इस पर आगे अलग से वार्ता होने की संभावना है.
इजराइल और अमेरिकी नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
समझौते को लेकर इजराइल पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है. वहीं अमेरिका में भी कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इसकी आलोचना की है. उनका कहना है कि यह समझौता कई मायनों में 2015 के परमाणु समझौते जैसा दिखता है, जिसे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में समाप्त कर दिया था.
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सुधार होगा. इससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिसका सकारात्मक असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और महंगाई पर पड़ेगा. फिलहाल निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और वैश्विक बाजारों की नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर और उसके बाद की परिस्थितियों पर टिकी हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें भी महंगाई को ऊपर धकेल रही हैं. व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 18.46 फीसदी पर बनी हुई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में महंगाई एक बार फिर रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है. मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48 फीसदी थी. हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास है, लेकिन खाद्य पदार्थों, ईंधन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सेंट्रम ब्रोकरेज का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव इसी तरह बना रहा तो RBI अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है.
खाद्य महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता
मई में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.78 फीसदी हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20 फीसदी थी. सब्जियों की कीमतों में तेजी इसका प्रमुख कारण रही. टमाटर की महंगाई दर 35.3 फीसदी से बढ़कर 48.4 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि अदरक की महंगाई 14.4 फीसदी से बढ़कर 32.5 फीसदी हो गई. हालांकि आलू की कीमतों में अभी भी राहत बनी हुई है और इसके दाम सालाना आधार पर 23.7 फीसदी नीचे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्ष खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट का आधार प्रभाव अब खत्म हो रहा है, जिससे आने वाले महीनों में और अधिक खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं.
ईंधन महंगा, परिवहन लागत पर असर
15 से 25 मई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी. इसका असर अब महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगा है. परिवहन महंगाई अप्रैल में लगभग शून्य थी, जो मई में बढ़कर 1.75 फीसदी हो गई. वहीं, माल ढुलाई सेवाओं की महंगाई 7.63 फीसदी तक पहुंच गई है. बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का असर आने वाले समय में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
सोना-चांदी की चमक से भी बढ़ा महंगाई का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें भी महंगाई को ऊपर धकेल रही हैं. व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 18.46 फीसदी पर बनी हुई है. चांदी के आभूषणों की महंगाई 155 फीसदी से अधिक दर्ज की गई है, जबकि सोना, हीरा और प्लैटिनम से जुड़े उत्पादों की महंगाई 40 फीसदी से ऊपर बनी हुई है. आयात शुल्क में वृद्धि का असर अब भी बाजार में दिखाई दे रहा है.
रेस्तरां में खाना भी हुआ महंगा
बढ़ती लागत का असर होटल और रेस्तरां क्षेत्र पर भी दिख रहा है. रेस्तरां और होटल सेवाओं की महंगाई अप्रैल के 4.2 फीसदी से बढ़कर मई में 5.75 फीसदी हो गई. विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी की सीमित उपलब्धता और बढ़ती परिचालन लागत के कारण होटल एवं रेस्तरां संचालकों पर दबाव बढ़ा है, जिसका बोझ अब ग्राहकों पर पड़ रहा है.
कुछ राहत के संकेत भी मौजूद
महंगाई के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं. जून की शुरुआत में देश के प्रमुख जलाशयों में जल स्तर सामान्य से बेहतर रहा है. टमाटर, प्याज और आलू की बाजार आवक भी महीने-दर-महीने 5 से 6 फीसदी बढ़ी है. इसके अलावा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो सप्ताह तक भीषण गर्मी की संभावना कम बताई है. इससे खाद्य महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण रहने की उम्मीद की जा रही है.
मानसून और कच्चा तेल बने सबसे बड़े जोखिम
सेंट्रम ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में मानसून और कच्चे तेल की कीमतें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. मौसम विभाग के दूसरे अनुमान के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. सामान्य वर्षा के मुकाबले करीब 90 फीसदी बारिश का अनुमान है, जबकि कमजोर मानसून की संभावना 60 फीसदी तक बताई गई है. एल नीनो के संकेत भी कृषि उत्पादन के लिए चुनौती बन सकते हैं.
दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर ईंधन, परिवहन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा.
RBI की अगली चाल क्या होगी?
ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल महंगाई RBI के लक्ष्य के करीब है और कोर महंगाई भी नियंत्रण में है. ऐसे में अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम दिखाई देती है. हालांकि यदि खाद्य महंगाई, ईंधन कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी जारी रहती है और CPI महंगाई RBI की ऊपरी सीमा की ओर बढ़ती है, तो अक्टूबर 2026 में केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है.
सेंट्रम ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत खुदरा महंगाई करीब 5.1 फीसदी रह सकती है. इससे संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा है.
'Healthy', 'Vegan' और 'True Vitamin' जैसे दावों पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले ब्रांड नामों, ट्रेड नेम और उत्पाद दावों के इस्तेमाल को लेकर आठ खाद्य कंपनियों को नोटिस जारी किया है. नियामक का कहना है कि इन कंपनियों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग गतिविधियां खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती हैं.
FSSAI ने रविवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस कार्रवाई की जानकारी दी. नियामक के अनुसार, कंपनियों की ब्रांडिंग और प्रचार सामग्री की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है.
FSSAI has issued notices to several food business operators (FBOs) for violating provisions of the FSS Act, 2006 regarding misleading brand names, trade names, and product claims... (1)2 pic.twitter.com/CgSVspoQxS
— FSSAI (@fssaiindia) June 14, 2026
इन कंपनियों को भेजा गया नोटिस
नोटिस पाने वाली कंपनियों में Emami Healthy & Tasty, Health Aid, Troovy, The Healthy Factory, Healthy Master, Healthy Choice, Plan B और Neuherbs शामिल हैं. FSSAI का आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कुछ नाम, टैगलाइन और उत्पाद दावे उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा पैदा कर सकते हैं.
Emami और Plan B पर क्या हैं आरोप
कोलकाता स्थित Emami Group की खाद्य तेल इकाई Emami Healthy & Tasty के ट्रेड नेम को लेकर नियामक ने आपत्ति जताई है. FSSAI का मानना है कि यह नाम उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या स्वास्थ्य लाभ के बारे में भ्रमित कर सकता है. वहीं, प्लांट-बेस्ड फूड ब्रांड Plan B पर अपने उत्पादों को "Plant Based Vegan" बताकर प्रचारित करने का आरोप है. प्राधिकरण के अनुसार कंपनी ने अपने FSSAI लाइसेंस में आवश्यक वीगन फूड अनुमोदन प्राप्त किए बिना ऐसे दावों का इस्तेमाल किया, जिससे ग्राहकों के बीच गलत संदेश जा सकता है.
'Zero Maida' और 'Healthy' दावों की जांच
The Healthy Factory के "Zero Maida Whole Wheat Bread" और "Zero Maida Pizza Base" जैसे उत्पाद भी जांच के दायरे में आए हैं. FSSAI का कहना है कि इन उत्पादों में आटे के अलावा अन्य अवयव भी मौजूद हैं, इसलिए "जीरो मैदा" जैसे दावों की सत्यता पर सवाल खड़े होते हैं. इसी तरह Troovy के "Healthy Mix Veggie Chips", "Healthy Ragi Chips" और "Healthy Moong Dal Chips" जैसे स्नैक उत्पादों को लेकर भी नियामक ने आपत्ति जताई है. उसके अनुसार इन उत्पादों में कई अन्य सामग्री शामिल हैं, ऐसे में इन्हें सीधे तौर पर "Healthy" बताना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है.
Neuherbs के 'True Vitamin' ब्रांड पर भी सवाल
FSSAI ने Neuherbs की "True Vitamin" उत्पाद श्रृंखला को भी नोटिस भेजा है. नियामक का कहना है कि "True Vitamin" शब्दावली खाद्य सुरक्षा नियमों में परिभाषित या मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए इसका इस्तेमाल ग्राहकों को गलत संदेश दे सकता है.
टैगलाइन और ब्रांड नाम भी बने जांच का विषय
कार्रवाई केवल उत्पादों तक सीमित नहीं रही. FSSAI ने Healthy Master की टैगलाइन "Vision to Serve Healthy", Healthy Choice के "Healthy Food for Healthy Life Poha" और Health Aid के ब्रांड नाम पर भी आपत्ति दर्ज की है. प्राधिकरण का मानना है कि इस तरह के नाम और दावे ग्राहकों को यह विश्वास दिला सकते हैं कि उत्पाद विशेष स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, जबकि इसके लिए स्पष्ट नियामकीय आधार आवश्यक है.
उपभोक्ता हितों की सुरक्षा पर जोर
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों के नाम, पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावे तथ्यात्मक, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होने चाहिए. नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता किसी आकर्षक नाम या दावे से प्रभावित होकर गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी का निर्णय न लें.
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई खाद्य उद्योग को अधिक जवाबदेह बनाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
नीतिगत सुधार, निजी निवेश और स्टार्टअप्स के दम पर अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ेगा भारत का दबदबा
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (स्पेस इकोनॉमी) अगले एक दशक में करीब पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और तेजी से बढ़ रहे स्पेस स्टार्टअप्स के कारण भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अभूतपूर्व विकास की ओर बढ़ रहा है.
भारत की स्पेस इकोनॉमी में तेजी से हो रहा विस्तार
जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में भारत की स्पेस इकोनॉमी का आकार लगभग 8-9 अरब डॉलर है और देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं. कुछ वर्षों पहले इनकी संख्या बेहद सीमित थी. उन्होंने कहा कि यह वृद्धि भारत में मजबूत होते नवाचार (इनोवेशन) इकोसिस्टम और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी का प्रमाण है.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज आम नागरिक खुद को भारत की वैज्ञानिक प्रगति से जुड़ा हुआ महसूस करता है और उसमें अपनी भागीदारी देखता है." उनके अनुसार विज्ञान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन चुका है.
प्रधानमंत्री मोदी की पहल ने बदली तस्वीर
जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जनचर्चा के केंद्र में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi की दूरदर्शी सोच को दिया. उन्होंने कहा कि **डिजिटल इंडिया**, Gaganyaan और Deep Ocean Mission जैसी पहलों ने तकनीक आधारित विकास को मुख्यधारा में लाने का काम किया है.
चंद्रयान-3 ने बढ़ाया वैश्विक सम्मान
मंत्री ने कहा कि चंद्रयान-3 जैसे मिशनों ने भारत को दुनिया के अग्रणी अंतरिक्ष देशों की श्रेणी में पहुंचाया है और आम लोगों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई है. उन्होंने कहा कि भारत का आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान स्वदेशी तकनीकों पर भरोसा और मजबूत करेगा.
शासन और विकास में बढ़ रहा अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब केवल अंतरिक्ष अन्वेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और बुनियादी ढांचा विकास में भी अंतरिक्ष तकनीक का व्यापक उपयोग कर रहा है. उन्होंने बताया कि पीएम गति शक्ति और शहरी विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों में योजना निर्माण, निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है.
निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खुले नए अवसर
मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों के चलते अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया है. इससे स्टार्टअप्स अब लॉन्च सेवाओं, सैटेलाइट निर्माण, डेटा सेवाओं और विभिन्न अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
उन्होंने कहा, "कम समय में जिस गति से यह क्षेत्र बढ़ा है, वह भारत की स्पेस इकोनॉमी की अपार संभावनाओं को दर्शाता है."
अस्थायी चुनौतियां वैज्ञानिक प्रगति का हिस्सा
हाल में हुए कुछ प्रक्षेपणों में आई तकनीकी चुनौतियों पर बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालिया PSLV मिशन में आई तकनीकी गड़बड़ी का विश्लेषण पूरा कर लिया गया है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य के मिशन इन अनुभवों से और अधिक मजबूत बनेंगे.
उन्होंने कहा कि अस्थायी असफलताएं वैज्ञानिक प्रगति का स्वाभाविक हिस्सा होती हैं और चंद्र तथा अंतरग्रहीय मिशनों में भारत की पहली कोशिश में मिली सफलताएं दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों की तुलना में देश की मजबूत उपलब्धियों को दर्शाती हैं.