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HDFC बैंक के मर्जर की खबर तो सुनी होगी, अब ये भी जान लीजिए
इस मर्जर से HDFC बैंक की विस्तार योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बैंक अपनी शाखाओं (Branch) का विस्तार करना जारी रखेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
HDFC बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन यानी HDFC के विलय (Merger) के लिए सभी जरूरी मंजूरियां हासिल कर ली गई हैं. इन दोनों कंपनियों का विलय इसी साल जुलाई तक पूरा हो जाएगा. ऐसे में इन कंपनियों के ग्राहक उलझन में हैं कि मर्जर से उन पर क्या असर पड़ेगा. बता दें कि HDFC बैंक को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पहले से ही Too Big To Fail श्रेणी में रखा है. यानी उसके डूबने की आशंका नहीं है. इस विलय के बाद बैंक और बड़ा हो जाएगा, जिसका मतलब है कि ग्राहक अपने पैसों की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा बेफिक्र हो सकते हैं.
बढ़ेगी एसेट वैल्यू
HDFC बैंक और HDFC के विलय के बाद दोनों कंपनियों की कुल एसेट वैल्यू करीब 18 लाख करोड़ रुपए की होगी. इस विलय के लिए दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डर्स और बाजार नियामक SEBI सहित सभी जरूरी संस्थाओं की मंजूरी ले ली गई है. मर्जर के बाद HDFC के मौजूदा शेयरधारकों की बैंक में 41% हिस्सेदारी होगी. इसके अलावा, HDFC के शेयरधारकों को प्रत्येक 25 शेयरों पर HDFC बैंक के 42 शेयर मिल सकते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मर्जर से दोनों कंपनियों के ग्राहकों को केवल फायदा ही होगा.
Home Loan का क्या?
इस मर्जर से HDFC बैंक की विस्तार योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बैंक अपनी शाखाओं (Branch) का विस्तार करना जारी रखेगा. बैंक ने फरवरी में कहा था कि अगले दो वर्षों तक हर साल 1200 से 1300 नई ब्रांच खोली जाएंगी. एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या मर्जर के बाद HDFC से होम लोन लेने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिलेगी? एक रिपोर्ट बताती है कि HDFC-HDFC Bank के विलय के बाद होम लोन लेने वालों के कर्ज बैंकों के अनुसार तय होंगे. यानी कि लोन एक्सटरनल बेंच मार्क लेडिंग रेट (EBLR) से तय होंगे. अब तक फाइनेंस कंपनी के रूप में HDFC रिटेल प्राइम लैंडिंग रेट (RPLR) के आधार पर ब्याज दरें तय करता था. EBLR के आधार पर ब्याज दरें ज्यादा पारदर्शी तरीके से तय होती हैं. ऐसे में HDFC के होम लोन ग्राहकों को ब्याज दरों के स्तर पर कुछ राहत मिलने की पूरी संभावना है.
मिल सकता है फायदा
बैंकिंग मामलों के जानकार मानते हैं कि इस मर्जर से मौजूदा लोन नियम और शर्तों में बदलाव की संभावना नहीं है. विलय के बाद हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC का होम लोन पोर्टफोलियो बैंकिंग यूनिट HDFC बैंक में स्थानांतरित हो जाएगा. बैंक, विशेष रूप से बड़े CASA (चालू खाता और बचत खाता जमा) जमा वाले बैंकों को लोअर कॉस्ट ऑफ फंड्स का फायदा मिलता है. मर्जर से HDFC बैंक कम ब्याज दरों पर अधिक पैसा उधार लेने की स्थिति में होगा और इसका फायदा वो ग्राहकों के साथ साझा कर सकता है. हालांकि, ये निर्णय पूरी तरह प्रबंधन का होगा.
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