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रतन टाटा के नाम के साथ कैसे जुड़ा TATA सरनेम, जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी?

रतन टाटा एक ऐसे महान उद्योगपति हैं, जो स्वास्थ्य सेवा से लेकर छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान करने तक राष्ट्र व समाजसेवा सेवा के लिए हमेशा सबसे आगे रहे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

प्रतिष्ठित उद्योगपति और परोपकारी रतन टाटा का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया. रतन टाटा ने राष्ट्र सेवा के लिए जो कार्य किए, उसे हमेशा देश याद रखेगा. स्वास्थ्य सेवा से लेकर छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान करने तक राष्ट्र और समाजसेवा सेवा के लिए रतन टाटा हमेशा सबसे आगे रहे. उन्होंने टाटा ग्रुप को भी नई बुलंदियों पर पहुंचाया, लेकिन क्या आप जानते हैं रतन टाटा के पिता नवल टाटा के नाम के साथ ‘टाटा’ सरनेम कब और कैसे जुड़ा? अगर नहीं, तो चलिए  आज आपको इसके पीछे कहानी बताते हैं?   

अनाथआश्रम से निकले पिता और ऐसे बदली किस्मत
रतन टाटा ने टाटा सन्स ग्रुप (Tata Sons Group) के एविएशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी नवल टाटा के घर जन्म लिया. रतन टाटा के पिता के नाम नवल टाटा था, जिनका जन्म 30 अगस्त 1904 को मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. रतन टाटा के दादा होर्मुसजी, टाटा समूह (TATA Group) की अहमदाबाद स्थित एडवांस मिल्स में स्पिनिंग मास्टर थेजब नवल टाटा 4 साल के हुए तब उनके पिता होर्मुसजी का 1908 में निधन हो गया. उनके गुजर जाने के बाद अचानक से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. इसके बाद नवल और उनकी मां मुंबई से गुजरात के नवासारी में आ गईं. यहां रोजगार का कोई मजबूत साधन नहीं था, तो उनकी मां ने कपड़े की कढ़ाई का छोटा सा काम शुरू कर दिया. उनके परिवार को जानने वालों ने नवल की पढ़ाई और मदद के लिए उन्हें जेएन पेटिट पारसी अनाथालय भिजवा दिया. वहां वह अपनी पढ़ाई-लिखाई करने लगे. शुरूआती पढाई उन्होंने यहीं से की. जब 13 साल के हुए तब 1917 में सर रतन टाटा (सुविख्यात पारसी उद्योगपति और जनसेवी जमशेदजी नासरवान जी टाटा के पुत्र) की पत्नी नवाजबाई जेएन पेटिट पारसी अनाथालय पहुंची. वहां उन्हें नवल दिखाई दिए. नवाजबाई को नवल बहुत पसंद आए और उन्हें अपना बेटा बनाकर गोद ले लिया, जिसके बाद ‘नवल’ टाटा परिवार से जुड़कर ‘नवल टाटा’ बन गए.

2 शादी, पहली पत्नी से हुए रतन टाटा
नवल टाटा ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी सूनी कॉमिस्सैरिएट और दूसरी सिमोन डुनोयर थीं. सूनी कॉमिस्सैरिएट से उनके दो बच्चे रतन टाटा और जिमी टाटा हुए. 1940 में नवल टाटा का सूनी कॉमिस्सैरिएट से तलाक हो गया था. 1955 में नवल टाटा ने स्विट्जरलैंड की बिजनेसवूमन सिमोन से शादी की, जिनसे निएल टाटा का जन्म हुआ. नवल टाटा कैंसर की बीमारी से ग्रस्त हो गए थे और 5 मई 1989 को मुंबई (बॉम्बे) में उनका निधन हो गया था. बता दें, रतन टाटा 1962 में टाटा ग्रुप से आधिकारिक तौर पर जुड़े. वह भले ही टाटा परिवार के सदस्य थे, लेकिन उन्होंने पहले निचले स्तर पर काम करके तजुर्बा लिया. इसके बाद रतन टाटा साल 1991 में टाटा संस (Tata Sons) और टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने.

इन सामाजिक कार्यों के लिए रतन को हमेशा किया जाएगा याद 

1. कोरोना महामारी के समय हमारा देश स्वास्थ्य संकटों से जूझ रहा था. उस समय टाटा समूह ने देश की मदद के लिए 1500 करोड़ रुपये का डोनेशन दिया. इसके अलावा ट्रस्ट हर साल करीब 1200 करोड़ परमार्थ के लिए खर्च करता है.
2. देश में हर आम आदमी की ख्वाहिश होती है कि उनके पास एक कार हो. आम आदमी के इस ख्वाब को पूरा करने के लिए साल 2008 में टाटा मोटर्स की ओर से नैनो कॉर लॉन्च किया गया. इस कार की कीमत करीब 1 लाख रखी गई. 
3. आर्थिक तंगी से जूझने वाले छात्रों की मदद के लिए भी टाटा ग्रुप हमेशा आगे रहा है. ट्रस्ट ऐसे जरूरतमंद छात्रों को स्कॉलरशिप देता है. छात्रों को J.N. Tata Endowment, Sir Ratan Tata Scholarship और Tata Scholarship दिया जाता है. 

4. टाटा शिक्षा एवं विकास ट्रस्ट ने 28 मिलियन डॉलर का टाटा छात्रवृत्ति कोष प्रदान किया था, जिससे कॉर्नेल विश्वविद्यालय भारत के स्नातक छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर सके. वार्षिक स्कॉलरशिप से एक समय में लगभग 20 छात्रों को सहायता मिलती थी. वहीं, टाटा समूह ने 2014 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे को 950 मिलियन डॉलर का ऋण दिया गया और टाटा सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन (टीसीटीडी) का गठन किया गया. यह संस्थान के इतिहास में अब तक प्राप्त सबसे बड़ा दान है.

5. रतन टाटा ने भारत में कई कैंसर अस्पताल बनवाए हैं. इनमें टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई, टाटा मेमोरियल सेंटर कोलकाता, टाटा मेमोरियल सेंटर चेन्नई, टाटा मेमोरियल सेंटर वाराणसी समेत देश के कई शहरों में कैंसर अस्पताल हैं. टाटा समूह की कंपनियों और टाटा चैरिटीज ने 2010 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (एचबीएस) को एक कार्यकारी केंद्र के निर्माण के लिए 50 मिलियन डॉलर का दान दिया था. वर्ष 1970 के दशक में उन्होंने आगा खान अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना की शुरुआत की, जिसने भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में से एक की नींव रखी. रतन टाटा को कुत्तों से बहुत लगावा था, उन्होंने मुंबई में कुत्तों के लिए एक अस्पताल खोला है. ये अस्पताल नवी मुंबई में 5 मंजिला है, जिसमें 200 पालतू जानवरों का एक साथ इलाज किया जा सकता है. इस अस्पताल को बनवाने में 165 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. 
 

 


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