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AI कैसे बदल रहा है कॉर्पोरेट ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजमेंट का तरीका

कॉर्पोरेट ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजमेंट अब सिर्फ ऑपरेशनल काम नहीं रह गया है, बल्कि यह बिजनेस की फाइनेंशियल सेहत और गवर्नेंस से सीधे जुड़ा रणनीतिक फंक्शन बन चुका है.

रितु राणा 9 months ago

जैसे-जैसे बिजनेस ट्रैवल एक बार फिर रफ्तार पकड़ रहा है, वैसे-वैसे कंपनियों के सामने कॉर्पोरेट ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजमेंट को लेकर पुरानी समस्याएं फिर उभरकर सामने आ रही हैं. आज यह सिर्फ खर्चों का हिसाब रखने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कंप्लायंस, कंट्रोल और बिजनेस एफिशिएंसी से जुड़ा एक अहम फंक्शन बन चुका है. ProXpense के फाउंडर और CEO हिमांशु सिंह बताते हैं कि मौजूदा सिस्टम कहां चूक रहे हैं और AI इस इंडस्ट्री को कैसे नया रूप दे रहा है.

बिखरे सिस्टम आज भी सबसे बड़ी चुनौती

आज भी बड़ी संख्या में कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजमेंट एक बिखरा हुआ सिस्टम बना हुआ है. ट्रैवल बुकिंग, अप्रूवल, पेमेंट और रिइम्बर्समेंट अलग-अलग टूल्स और प्लेटफॉर्म्स पर होते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि खर्चों पर साफ और रियल-टाइम नजर नहीं रह पाती और कंप्लायंस से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं.

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 प्रतिशत से अधिक कंपनियां आज भी अपने खर्चों को मैन्युअल या सेमी-मैन्युअल तरीकों से मैनेज कर रही हैं. इसकी वजह से न सिर्फ प्रोसेस में देरी होती है, बल्कि गलतियां और पॉलिसी उल्लंघन भी आम हो जाते हैं. जैसे-जैसे बिजनेस ट्रैवल दोबारा तेजी से बढ़ रहा है, ये कमजोरियां और ज्यादा स्पष्ट होती जा रही हैं.

AI और ऑटोमेशन ने सिस्टम को बनाया प्रोएक्टिव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजमेंट को एक रिएक्टिव सिस्टम से प्रोएक्टिव सिस्टम में बदल दिया है. अब ये प्लेटफॉर्म सिर्फ खर्चों का डेटा दर्ज नहीं करते, बल्कि रियल-टाइम में निगरानी करते हैं, पॉलिसी से बाहर हो रहे खर्चों को तुरंत पहचानते हैं और बेहतर विकल्प भी सुझाते हैं.

रिसर्च के अनुसार, AI-आधारित ऑटोमेशन से एक्सपेंस प्रोसेसिंग का समय 40 से 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है. इसके अलावा Slack या Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये ट्रैवल बुकिंग और एक्सपेंस सबमिशन की सुविधा मिलने से कर्मचारियों के लिए सिस्टम को अपनाना आसान हो जाता है और कंप्लायंस अपने-आप सुनिश्चित हो जाती है.

ProXpense कैसे भर रहा है यह गैप

हिमांशु सिंह के मुताबिक, ProXpense का उद्देश्य पूरे ट्रैवल और एक्सपेंस प्रोसेस को एक ही इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म पर लाना है. इसमें ट्रैवल बुकिंग, एक्सपेंस रिपोर्टिंग, ऑडिट और एनालिटिक्स सभी एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. ऐसे इंटीग्रेटेड सिस्टम अपनाने के बाद कंपनियों में पॉलिसी से बाहर होने वाले खर्चों में 30 से 35 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है. साथ ही रिइम्बर्समेंट साइकल भी काफी तेज़ हो जाता है. इससे फाइनेंस टीम को बेहतर कंट्रोल और विजिबिलिटी मिलती है, जबकि कर्मचारियों को बिना झंझट के खर्च मैनेज करने का अनुभव मिलता है.

CFOs के लिए क्यों अहम हो गया है डिजिटल कंप्लायंस

आज के समय में CFOs के लिए कंप्लायंस सिर्फ साल के अंत में ऑडिट कराने तक सीमित नहीं रह गया है. अब जरूरत है हर खर्च पर रियल-टाइम निगरानी रखने की. AI-आधारित ऑडिट सिस्टम हर ट्रांजैक्शन को तुरंत जांच सकते हैं. चाहे वह डुप्लिकेट बिल हो, पॉलिसी के बाहर किया गया क्लेम हो या फिर कोई असामान्य खर्च पैटर्न. इंडस्ट्री डेटा बताता है कि AI-आधारित ऑडिट सिस्टम, मैन्युअल जांच के मुकाबले 90 प्रतिशत तक तेज़ होते हैं. इससे ग़लतियों और संभावित फ्रॉड को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है.

ग्लोबल ट्रैवल मैनेजमेंट बनी नई चुनौती

भारत की कई कंपनियां अब ग्लोबल लेवल पर ऑपरेट कर रही हैं, लेकिन उनके ट्रैवल मैनेजमेंट सिस्टम अब भी लोकल जरूरतों तक सीमित हैं. अलग-अलग देशों की करेंसी, टैक्स नियम और कंप्लायंस फ्रेमवर्क इस प्रोसेस को और जटिल बना देते हैं.

आज के AI-आधारित और मल्टी-करेंसी सपोर्ट वाले प्लेटफॉर्म इन चुनौतियों को काफी हद तक आसान बना रहे हैं. ऐसे सिस्टम ग्लोबल ट्रैवल खर्चों को एक ही प्लेटफॉर्म से मैनेज करने, रीजन-वाइज़ पॉलिसी लागू करने और सेंट्रल रिपोर्टिंग देने में मदद करते हैं.

अगले 2–3 साल में इंडस्ट्री किस दिशा में जाएगी

हिमांशु सिंह का मानना है कि आने वाले समय में कॉर्पोरेट ट्रैवल पूरी तरह डेटा-आधारित और AI-सक्षम हो जाएगा. इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, 2026 तक ग्लोबल बिजनेस ट्रैवल खर्च 1.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकता है.

इसके साथ ही कंपनियां प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स, ऑटोमेटेड कंप्लायंस और सस्टेनेबिलिटी ट्रैकिंग पर ज्यादा फोकस करेंगी. ट्रैवल अब सिर्फ एक लॉजिस्टिक जरूरत नहीं रहेगा, बल्कि यह एक रणनीतिक बिज़नेस फ़ंक्शन के रूप में देखा जाएगा, जो लागत नियंत्रण, उत्पादकता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में अहम भूमिका निभाएगा.

 

 


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