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Petrol: सस्ता होने की उम्मीद छोड़ दीजिए, दाम बढ़ने का बढ़ रहा खतरा!    

हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में तेल लेकर भारत आ रहे रूसी जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पिछले काफी समय से जनता पेट्रोल-डीजल के दामों (Petrol-Diesel Price) में कमी की आस लगाए बैठी है. पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तेल के दाम घटने की उम्मीद जगी, लेकिन हुआ कुछ नहीं. फिर बीच में खबर आई कि पेट्रोल 10 रुपए तक सस्ता हो सकता है, मगर कंपनियों ने इसे कोरी अफवाह करार दे डाला. इसकी संभावना भी बेहद कम है कि लोकसभा चुनाव में वोट की चाहत में मोदी सरकार आवाम को सस्ते तेल का तोहफा दे. इसके उलट पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जरूर निर्मित होती दिखाई दे रही है.    

लागत में इजाफे की आशंका 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती विद्रोही लाल सागर से गुजरने वाले रूसी ऑयल टैंकरों को निशाना बना रहे हैं. हाल ही में विद्रोहियों ने रूसी कच्चा तेल ले जा रहे जहाज पर मिसाइल से हमला किया. पिछले तीन हफ्तों में यह इस तरह का दूसरा हमला है. रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है. यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूस से डिस्काउंट रेट पर कच्चा तेल खरीद रहा है. यदि हमले जारी रहते हैं, तो रूसी जहाजों को वैकल्पिक मार्ग चुनना होगा. उन्हें अफ्रीका का चक्कर लगाना पड़ सकता है, जिससे न केवल समय ज्यादा लगेगा बल्कि लागत में भी इजाफा होगा. दूसरे शब्दों में कहें तो भारत को मिलने वाला सस्ता तेल महंगा हो जाएगा और कंपनियां इस अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं.

रूस पर बढ़ गई है निर्भरता
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पनामा-पंजीकृत जहाज पोलक्स, जिसने 24 जनवरी को नोवोरोस्सिएस्क के रूसी बंदरगाह में शेशकारिस तेल टर्मिनल पर कच्चा तेल लोड किया था उसे 28 फरवरी को पारादीप बंदरगाह पर यूराल ग्रेड वितरित करना था. लेकिन जहाज पर लाल सागर में यमन के मोखा बंदरगाह के उत्तर-पश्चिम में हमला किया गया. हूती विद्रोहियों ने मिसाइलों से करीब 628,000 बैरल तेल ले जा रहे इस जहाज को निशाना बनाया. जहाज को केवल मामूली नुकसान पहुंचा है, लेकिन इस हमले ने दहशत जरूर पैदा कर दी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हमले जारी रहे तो रूसी जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाना पड़ सकता है, जिससे लागत में इजाफा होना तय है. भारत कच्चे तेल के मामले में अब रूस पर काफी ज्यादा निर्भर हो गया है. 2023 में रूस से आयातित कच्चे तेल का हिस्सा बढ़ाकर 39% हो चुका है, जो 2022 में 16 प्रतिशत था.

कितनी बढ़ जाएगी मुश्किल?
हूती विरोधी भारत के इजरायल के समर्थन से नाराज हैं. यही वजह है कि वह भारतीयों को जॉब देने वाले और भारत सामान ले जाने वाले जहाजों को निशाना बना रहे हैं. रिपोर्ट्स में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि स्वेज के रास्ते भारत में कच्चा तेल ले जाने वाले रूसी सहित कुछ टैंकर अपना गंतव्य भारत नहीं दर्शा रहे हैं. बता दें कि स्वेज नहर में 2021 में जब एक बड़ा जहाज कुछ दिनों तक अटका गया था, तो इसके चलते ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी. इस नहर को एशिया और यूरोप की लाइफलाइन कहा जाता है. भारत भी इस घटना से प्रभावित हुआ था. उस दौर में भारत का लगभग 200 अरब डॉलर का समुद्री व्यापार इसी रूट होता था, लेकिन अब ये आंकड़ा काफी ज्यादा बड़ा है. Bharat स्वेज नहर के रास्ते यूरोप को खाद्य पदार्थ, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स भेजता है. साथ ही इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल आयात करता है. 

आखिर क्यों हो रहे हैं हमले?
अब यह भी जान लेते हैं कि आखिर हूती विद्रोही ऐसा क्यों कर रहे हैं. CBC की एक रिपोर्ट बताती है कि हूती विद्रोही इजरायल को चोट पहुंचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे केवल उन्हीं जहाजों पर हमले कर रहे हैं, जिनका इजरायल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई न कोई जुड़ाव है. विद्रोही इजरायल द्वारा फिलिस्तीन पर किए जा रहे हमलों से नाराज हैं. हालांकि, यह भी सामने आया है कि हूती विद्रोहियों ने ऐसे जहाजों को भी निशाना बनाया, जिनका इजरायल से कोई कनेक्शन नहीं है. माना जा रहा है कि अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं. गौरतलब है कि भारत से लाल सागर की दूरी 4,201 किमी है.  


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