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बिजली क्षेत्र की प्रगति की राह में बाधा, वितरण दबाव और नीति खामियों का समाधान जरूरी: ICRA
भारत के बिजली क्षेत्र ने क्षमता विस्तार, विद्युतीकरण और नीतिगत सुधारों में महत्वपूर्ण प्रगति की है. हालांकि, वितरण क्षेत्र में वित्तीय दबाव, नियामक असंगति और टैरिफ नीति से जुड़े जोखिमों को हल करना आवश्यक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत का बिजली क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में क्षमता विस्तार, विद्युतीकरण और नीतिगत सुधारों में तेजी से प्रगति कर रहा है. लेकिन ICRA की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस प्रगति को सतत बनाए रखने के लिए वितरण क्षेत्र के वित्तीय दबाव, टैरिफ असंतुलन और नीति खामियों को दूर करना अनिवार्य है. राज्य-स्वामित्व वाली डिस्कॉम कंपनियों की कमजोर वित्तीय स्थिति और नवीनीकरण ऊर्जा के बढ़ते हिस्से ने सेक्टर की स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
नवीनीकरण ऊर्जा और निजी निवेश में तेजी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोलियां (TBCB) के तहत बढ़ रहा है, जो पूलिंग मैकेनिजम और लॉन्ग-टर्म ट्रांसमिशन सेवा समझौतों (TSAs) से समर्थित है. हालांकि, राइट-ऑफ-वे (RoW) मुद्दों और नियामक देरी के कारण कार्यान्वयन चुनौतियां बनी हुई हैं. ICRA ने जोर दिया कि आने वाली नवीनीकरण ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने के लिए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त क्षमता जोड़ना महत्वपूर्ण है.
वित्तीय सुधार योजनाएं और उनके प्रभाव
हालांकि सब्सिडी भुगतान में सुधार हुआ है, लेकिन क्रॉस-सब्सिडी और टैरिफ सुधार के विरोध ने डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति पर असर डाला है. उज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (UDAY), रीवैंप्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS), इलेक्ट्रिसिटी (लेट पेमेंट सरचार्ज) रूल्स और ईंधन व बिजली खरीद लागत समायोजन (FPPAS) नियमों जैसी सुधार पहलों का उद्देश्य डिस्कॉम प्रदर्शन को बेहतर बनाना रहा है.
वित्तीय चुनौतियां और जोखिम
हालांकि FPPAS नियमों का असमान क्रियान्वयन और टैरिफ आदेशों में देरी ने डिस्कॉम की कमजोर वित्तीय स्थिति को बढ़ाया है. लागत और टैरिफ के बीच नकदी अंतर अभी भी उच्च है, जिसे बढ़ती बिजली खरीद लागत और ब्याज खर्च और बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा, उच्च टैरिफ वाले वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहक तेजी से ओपन एक्सेस और ग्रुप कैप्टिव मॉडल के माध्यम से नवीनीकरण ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे डिस्कॉम के उच्च भुगतान करने वाले उपभोक्ता आधार और क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर असर पड़ रहा है.
भविष्य की चुनौतियां और ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पवन और सौर ऊर्जा की अनियमितता और बड़े जल विद्युत सहित नवीनीकरण ऊर्जा के हिस्से में वृद्धि के कारण ऊर्जा भंडारण क्षमता पर ध्यान बढ़ रहा है.
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