Harsha Engineers IPO: तीन दिन में हुआ ओवर सब्सक्राइब, ग्रे मार्केट में पकड़ी शेयर ने उड़ान

निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया के बाद हर्षा इंजीनियर्स के शेयरों पर ग्रे मार्केट में भी तेजी आई है. आईपीओ सब्सक्रिप्शन स्टेटस से पता चलता है कि इस कंपनी को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है.

Last Modified:
Sunday, 18 September, 2022
IPO

नई दिल्लीः 755 करोड़ रुपये के पब्लिक इश्यू के तीन दिनों के सब्सक्रिप्शन के बाद हर्षा इंजीनियर्स के आईपीओ सब्सक्रिप्शन स्टेटस से पता चलता है कि इस कंपनी को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है. शेयर बाजार की धारणा में कमजोरी के बावजूद पब्लिक इश्यू 74.70 गुना सब्सक्राइब हुआ है. रिटेल निवेशकों के जरिए 17.63 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि एनआईआई श्रेणी में यह 71.32 गुना सब्सक्राइब हुआ है. वहीं क्यूआईबी हिस्से को 178.26 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है. निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया के बाद हर्षा इंजीनियर्स के शेयरों पर ग्रे मार्केट में भी तेजी आई है. बाजार के जानकारों के मुताबिक ग्रे मार्केट में हर्षा इंजीनियर्स के शेयर आज 235 रुपये के प्रीमियम पर उपलब्ध हैं.

ग्रे मार्केट में पांच रुपये की बढ़ोतरी

कंपनी का आईपीओ जीएमपी (ग्रे मार्केट प्रीमियम) आज 235 रुपये है, जो शुक्रवार के 230 रुपये के जीएमपी से 5 रुपये अधिक है.  यह छलांग छोटी लग सकती है लेकिन जिस तरह से शुक्रवार को दलाल स्ट्रीट पर कोहराम देखा गया, उस हिसाब से कंपनी के आईपीओ को निवेशकों ने जो प्यार दिया है वो सही में दिल को राहत देने वाली है.  हर्षा इंजीनियर्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम सब्सक्रिप्शन खुलने के बाद से लगातार बढ़ रहा है. पिछले चार दिनों में हर्षा इंजीनियर्स का आईपीओ जीएमपी लगभग ₹ 200 से बढ़कर ₹ 235 हो गया है. 

26 सितंबर को होगा लिस्ट

हर्षा इंजीनियर्स के आईपीओ आवंटन की संभावित तिथि 21 सितंबर 2022 है. सार्वजनिक निर्गम को एनएसई और बीएसई दोनों पर शेयर लिस्टिंग की संभावित तिथि 26 सितंबर 2022 है. ग्रे मार्केट संकेत दे रहा है कि आईपीओ अपनी लिस्टिंग तिथि पर लगभग 70 फिसदी प्रीमियम पर सूचीबद्ध हो सकता है. बाजार पर्यवेक्षकों ने कहा कि हर्षा इंजीनियर्स का आईपीओ जीएमपी आज ₹235 है, लेकिन यह ₹565 पर लिस्टिंग ले सकता है. 

शेयर बाजार के पर्यवेक्षकों ने निवेशकों को मूल बातों के साथ जाने और कंपनी की बैलेंस शीट से बाहर निकलने की सलाह दी क्योंकि यह कंपनी के मूल सिद्धांतों के बारे में स्पष्ट और ठोस तस्वीर देगा.

हर्षा इंजीनियर्स इंटरनेशनल लिमिटेड के फंडामेंटल पर प्रकाश डालते हुए, एंजेल वन की रिपोर्ट कहती है, "वैल्यूएशन के मामले में पोस्ट-इश्यू पी/ई 32.7x FY22 EPS (इश्यू प्राइस बैंड के ऊपरी छोर पर) पर काम करता है. कंपनी का समेकित PAT है और मार्जिन विस्तार के कारण वित्त वर्ष 20-22 के दौरान यह 105% की सीएजीआर से बढ़ी है. एचईआईएल के पास विविध उत्पाद पोर्टफोलियो और मजबूत विशेषज्ञता है."

VIDEO: भारत के इन 8 शहरों में 57 'Ghost Mall', क्या आप गए हैं इनमें कभी?

 


महाराष्ट्र में 2.56 लाख करोड़ का मेगा निवेश, 1 लाख से ज्यादा नौकरियों का रास्ता खुला

इन प्रोजेक्ट्स से MSME को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.

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Thursday, 23 April, 2026
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महाराष्ट्र की औद्योगिक तस्वीर तेजी से बदलने वाली है. राज्य सरकार ने एक साथ 2.56 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश वाले 18 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. यह फैसला न सिर्फ औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा.

सरकार की बैठक में बड़ा फैसला

देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनन से जुड़ी कैबिनेट उप-समिति की 14वीं बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकारी बयान के अनुसार इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹2,56,137.01 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है.

किन सेक्टर्स में होगा निवेश?

यह निवेश कई रणनीतिक और हाई-टेक क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

1. सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल
2. ग्रीन स्टील और ग्रीन अमोनिया
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल
4. लिथियम-आयन बैटरी
5. स्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी
6. गैस-टू-केमिकल्स इंडस्ट्री

सरकार का लक्ष्य इन सेक्टर्स के जरिए राज्य को इंडस्ट्रियल हब के रूप में और मजबूत करना है.

कई बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश

इस मेगा प्लान के तहत देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां महाराष्ट्र में भारी निवेश करेंगी.

1. Virtuoso Compressors (नासिक): ₹800 करोड़, 500 नौकरियां
2. Tembo Defence (अमरावती): ₹1,000 करोड़
3. Jabil Circuit (पुणे): ₹1,500 करोड़, 3,000 नौकरियां
4. Ashok Leyland (भंडारा): ₹10,000 करोड़
5. ACME Cleantech (नागपुर व रायगढ़): ₹22,400 करोड़ से अधिक
6. Solar Defence and Aerospace (नागपुर): ₹12,780 करोड़
7. Godavari New Energy (छत्रपति संभाजीनगर): ₹27,515 करोड़
8. Rashmi Metallurgical Industries (गढ़चिरोली): ₹40,000 करोड़, 20,000 नौकरियां
9. Essar Exploration and Production (रायगढ़): ₹56,852 करोड़, 25,000 नौकरियां

रोजगार और स्थानीय विकास पर जोर

सरकारी अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से 1 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी. इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश कोंकण, विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को तेज करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा.

MSME और स्किल डेवलपमेंट को फायदा

इन प्रोजेक्ट्स से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.

महाराष्ट्र का यह मेगा निवेश पैकेज राज्य को औद्योगिक विकास के नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है. सरकार का दावा है कि यह कदम न सिर्फ निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय विकास की गति को भी कई गुना बढ़ा देगा.
 


RBI का बड़ा प्रस्ताव: डिजिटल वॉलेट में ₹2 लाख तक की लिमिट तय

ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है.

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Thursday, 23 April, 2026
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डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी डिजिटल वॉलेट और कार्ड्स के नियमों में बड़े बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्ताव के मुताबिक अब किसी भी वॉलेट में ₹2 लाख से ज्यादा बैलेंस रखने की अनुमति नहीं होगी. इस मसौदे पर 22 मई 2026 तक स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं.

RBI ने डिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित बनाने के लिए PPI फ्रेमवर्क में व्यापक बदलाव की तैयारी की है. PPI ऐसे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं. जिनमें पहले पैसे लोड किए जाते हैं और फिर उसी बैलेंस का उपयोग खरीदारी या ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है. ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है. अब महीने में ₹10,000 से ज्यादा कैश लोड नहीं किया जा सकेगा.

RBI ने PPI को अलग अलग कैटेगरी में बांटा है. जिनमें जनरल पर्पज, गिफ्ट PPI, ट्रांजिट PPI (मेट्रो/बस कार्ड) और NRI PPI शामिल हैं. प्रस्ताव के मुताबिक.

1. गिफ्ट PPI की अधिकतम सीमा ₹10,000 होगी
2. ट्रांजिट PPI की सीमा ₹3,000 तय की गई है

कौन जारी कर सकेगा PPI?
ड्राफ्ट में कहा गया है कि वे बैंक जिन्हें डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति मिली है. वे RBI के पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम विभाग (DPSS) को सूचना देकर PPI जारी कर सकते हैं. इसके अलावा गैर बैंकिंग कंपनियां भी RBI की मंजूरी के बाद PPI जारी कर सकेंगी. हालांकि गैर बैंकिंग संस्थाओं के लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹5 करोड़ होना जरूरी होगा. और उन्हें अपने वैधानिक ऑडिटर से प्रमाण पत्र भी देना होगा.

सुरक्षा और कस्टमर प्रोटेक्शन पर फोकस
इस नए ड्राफ्ट में ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी को मजबूत करने. रिफंड प्रोसेस को स्पष्ट बनाने और शिकायतों के तेजी से निपटारे के लिए भी नियम शामिल किए गए हैं. RBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित बनाना है. अब इस ड्राफ्ट पर 22 मई तक इंडस्ट्री से फीडबैक लिया जाएगा. जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते हैं.
 


एक्सपायरी डे आज: बाजार में बढ़ेगी हलचल, इन स्टॉक्स पर रखें फोकस

बुधवार को BSE सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया.

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Thursday, 23 April, 2026
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गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है. पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया है. पिछले सत्र की तेज गिरावट का असर आज भी जारी है और साप्ताहिक एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है. बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट का असर गुरुवार की शुरुआत में भी देखने को मिल रहा है.

आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. एचसीएल टेक के शेयर 10% से अधिक टूटे, जिससे कंपनी के मार्केट कैप में करीब 40,000 करोड़ रुपये की कमी आई. वहीं इंफोसिस और टीसीएस में भी लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई.

दिग्गज शेयरों में कमजोरी
महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में दबाव रहा. हालांकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट में हल्की खरीदारी देखने को मिली.

मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त
आईटी के साथ-साथ फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो शेयरों में भी गिरावट रही. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सीमित बढ़त दर्ज की गई. इस दौरान रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93.79 पर पहुंच गया.

पश्चिम एशिया तनाव बना मुख्य वजह
गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख कारण रही. सीजफायर बढ़ने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने कमजोरी को और गहरा किया.

आज साप्ताहिक एक्सपायरी
गुरुवार को साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव संभव है. गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं.

इन शेयरों पर रखें नजर

आज इंफोसिस, टाटा कैपिटल, आदित्य बिरला सन लाइफ एएमसी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, ब्लूस्टोन ज्वैलरी एंड लाइफस्टाइल, सीआईई ऑटोमोटिव इंडिया, साइएंट, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX), महिंद्रा लॉजिस्टिक्स, स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी.

मंथली डेटा के अनुसार मार्च में रिलायंस जियो ने 32.27 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े, जबकि भारती एयरटेल ने 50.94 लाख और वोडा आइडिया ने 1.02 लाख यूजर्स जोड़े, जो सेक्टर में मजबूती का संकेत है. क्वांट म्यूचुअल फंड ने ब्लैकबक में हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मुफिन ग्रीन फाइनेंस में खरीद-बिक्री के सौदे हुए. इसके अलावा आज क्रिसिल, हुहतामाकी इंडिया और शेफलर इंडिया एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे, वहीं सेल में एफएंडओ की नई पोजिशन पर रोक रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


2028 तक भारत की ग्रोथ में गिरावट का अनुमान, मूडीज ने जारी की रिपोर्ट

मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Investors Service ने अनुमान लगाया है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आ सकती है. हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.

2028 तक GDP ग्रोथ में गिरावट का अनुमान

मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है. आगे चलकर यह 2028 तक घटकर 6.3% तक पहुंचने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि उच्च वृद्धि के दौर के बाद अब अर्थव्यवस्था सामान्य स्तर की ओर बढ़ रही है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी सुस्ती के संकेत

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी विकास दर धीमी हो सकती है. इस क्षेत्र की ग्रोथ 2025 में 4.3% से घटकर 2026 में 3.8% और 2027 में 3.6% रहने का अनुमान है.

कमजोर मांग और एक्सपोर्ट ग्रोथ की चुनौती

मूडीज ने कहा कि घरेलू मांग में नरमी और निर्यात वृद्धि में संभावित गिरावट इस सुस्ती के प्रमुख कारण हैं. हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारत क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

महंगाई में बढ़ोतरी का अनुमान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 2025 में महंगाई 2.2% और 2026 में 4.5% बढ़ने का अनुमान है. इसका कारण वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव बताए गए हैं.

मध्य पूर्व तनाव और वैश्विक जोखिम

मूडीज ने खास तौर पर मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों को प्रमुख जोखिम बताया है. इन कारणों से तेल और अन्य कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यह स्थिति कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखी गई सप्लाई बाधाओं जैसी बताई गई है.

रोजगार पर भी हल्का दबाव

रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोजगारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी हो सकती है. 2025 में बेरोजगारी 6.9% और 2026 में  7% तक जाने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि आर्थिक सुस्ती का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है.

कुल मिलाकर, Moody’s Investors Service की रिपोर्ट के अनुसार भारत की विकास दर में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, लेकिन इसके बावजूद देश वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा. आने वाले वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताएं और घरेलू चुनौतियां आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती हैं.
 


भारत के कपड़ा निर्यात में 2.1% की बढ़ोतरी, FY26 में ₹3.16 लाख करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

कपड़ा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) का रहा. इस सेगमेंट का निर्यात ₹1,35,427.6 करोड़ से बढ़कर ₹1,39,349.6 करोड़ हो गया, यानी 2.9% की वृद्धि दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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भारत के कपड़ा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025–26 में स्थिर वृद्धि दर्ज की है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल टेक्सटाइल निर्यात (हस्तशिल्प सहित) 2.1% बढ़कर ₹3,16,334.9 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹3,09,859.3 करोड़ था. यह बढ़ोतरी वैश्विक मांग में सुधार और प्रमुख बाजारों में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है.

रेडीमेड गारमेंट्स बने सबसे बड़े निर्यातक सेगमेंट

कपड़ा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) का रहा. इस सेगमेंट का निर्यात ₹1,35,427.6 करोड़ से बढ़कर ₹1,39,349.6 करोड़ हो गया, यानी 2.9% की वृद्धि दर्ज की गई. यह लगातार भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की सबसे मजबूत कैटेगरी बनी हुई है.

सूती और मैनमेड फाइबर में स्थिर और मजबूत प्रदर्शन

सूती धागा, कपड़े, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पादों का निर्यात लगभग स्थिर रहा और यह ₹1,02,399.7 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹1,02,002.8 करोड़ था. वहीं, मैन-मेड यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स सेगमेंट में 3.6% की मजबूत वृद्धि देखी गई, जहां निर्यात ₹41,196 करोड़ से बढ़कर ₹42,687.8 करोड़ हो गया.

हैंडिक्राफ्ट्स में सबसे तेज वृद्धि

वैल्यू-एडेड सेगमेंट में हस्तशिल्प (हैंडिक्राफ्ट्स) ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. हैंडमेड कारपेट्स को छोड़कर इस कैटेगरी का निर्यात 6.1% बढ़कर ₹14,945.5 करोड़ से ₹15,855.1 करोड़ हो गया. यह दर्शाता है कि पारंपरिक भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है.

120 से ज्यादा देशों में बढ़ा निर्यात

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत के टेक्सटाइल निर्यात में 120 से अधिक देशों में वृद्धि दर्ज की गई. यह भारत के निर्यात बाजार के तेजी से भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है.

प्रमुख बाजारों में मजबूत बढ़त

भारत के कई प्रमुख बाजारों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. संयुक्त अरब अमीरात में 22.3%, यूनाइटेड किंगडम में 7.8%, जर्मनी में 9.9%, स्पेन में 15.5%, जापान में 20.6%, मिस्र में 38.3%, नाइजीरिया में 21.4%, सेनेगल में 54.4% और सूडान में 205.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बढ़ेंगे अवसर

सरकार का कहना है कि आगामी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा. इससे टैरिफ में कमी, बेहतर सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी. यह टेक्सटाइल, अपैरल, हैंडिक्राफ्ट्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के लिए नए अवसर पैदा करेगा.

सरकारी योजनाओं से मिला समर्थन

सरकार ने इस सेक्टर को समर्थन देने के लिए कई योजनाओं को जारी रखा है, जिनमें RoSCTL और RoDTEP स्कीम शामिल हैं. इन्हें 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने की घोषणा की गई है, जिससे निर्यातकों को लागत में राहत और प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी.

## निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत का टेक्सटाइल सेक्टर स्थिर लेकिन मजबूत वृद्धि की ओर बढ़ रहा है. वैश्विक बाजारों में विस्तार, नीतिगत समर्थन और वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते आने वाले समय में इस सेक्टर के और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.
 


क्या भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय अपनी कन्विक्शन रेट में हेरफेर करती है?

एजेंसी दावा करती है कि उसकी कन्विक्शन रेट 93.6 प्रतिशत है, वह ₹1.54 लाख करोड़ की जब्त संपत्तियों को संभालती है, और आज तक कभी किसी स्वतंत्र परफॉर्मेंस ऑडिट के दायरे में नहीं आई है. यहां पढ़िए कि जब आप इसके आंकड़ों को बारीकी से देखते हैं तो क्या सामने आता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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पलक शाह 

भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की वित्तीय स्थिति और कार्यप्रणाली देश के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बनी हुई है.

ED की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट 93.6 प्रतिशत की कन्विक्शन रेट के साथ शुरू होती है. यह ऐसा आंकड़ा है जो संसद के जवाबों, FATF ब्रीफिंग्स और टीवी डिबेट्स तक पहुंचता है. यह एक सटीक और प्रभावी जांच तंत्र का संकेत देता है.

लेकिन जब आप इसके गणित को देखते हैं, तो तस्वीर बदल जाती है.

ED ने अपने गठन के बाद से PMLA के तहत 1,739 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की हैं. इनमें से केवल 47 मामलों में ही अंतिम अदालत का फैसला आया है.

“47”

यानी सिर्फ 47 मामले.

93.6 प्रतिशत का दावा इन्हीं बेहद छोटे हिस्से पर आधारित है, जो कुल मामलों का केवल 2.7 प्रतिशत है. बाकी 97 प्रतिशत मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं और मुख्य आंकड़े में शामिल नहीं किए जाते.

यह असल में कन्विक्शन रेट नहीं है, बल्कि एक ऐसा चयनित आधार है जिससे एक विशेष परिणाम निकल सके. और आज तक कोई स्वतंत्र ऑडिट नहीं है जो आधिकारिक तौर पर इसे चुनौती दे सके.

यहीं सवाल उठता है: क्या ED अपनी कन्विक्शन रेट को “कुक” करती है?

₹1.54 लाख करोड़, जिसका कोई स्वतंत्र हिसाब नहीं

रिपोर्ट का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण दावा सिर्फ कन्विक्शन रेट नहीं है, बल्कि संपत्ति जब्ती का आंकड़ा है.

₹1,54,594 करोड़ की अस्थायी रूप से जब्त संपत्तियां जमीन, इमारतें, कंपनियां, बैंक खाते, जिन्हें अक्सर वर्षों तक फ्रीज रखा जाता है.

FY25 में ही ED ने ₹30,036 करोड़ की संपत्ति जब्त की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 141 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है.

लेकिन इन संपत्तियों का मूल्यांकन कैसे किया गया? इसका कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं है. न ही CAG ने यह जांचा है कि ये मूल्यांकन सटीक, कम या अधिक दिखाए गए हैं.

यह आंकड़ा खुद एजेंसी द्वारा रिपोर्ट किया गया है और बिना किसी बाहरी जांच के आगे बढ़ता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FY25 में ₹5,238 करोड़ का FEMA जुर्माना लगाया गया, लेकिन इसमें से कितना वसूला गया, यह जानकारी नहीं दी गई है.

वह ऑडिटर जो मौजूद ही नहीं है

ED का पूरा बजट भारत की संचित निधि से आता है. संविधान के अनुच्छेद 148–151 और CAG अधिनियम 1971 की धारा 13 के तहत यह पूरी तरह से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अधिकार क्षेत्र में आता है.

लेकिन वास्तविकता में CAG केवल प्रशासनिक खर्चों जैसे वेतन, भवन और खरीद का ऑडिट करता है.

ED के संचालन और प्रदर्शन पर आज तक कोई समर्पित परफॉर्मेंस ऑडिट नहीं किया गया है, और न ही ऐसा कोई रिपोर्ट संसद में पेश हुआ है.

आयकर विभाग और कस्टम्स जैसे संस्थानों का ऑडिट हो चुका है, लेकिन ED का नहीं.

2024–25 की 212 पन्नों की रिपोर्ट में CAG का एक भी उल्लेख नहीं है.

वह डिस्क्लेमर जिसे नजरअंदाज कर दिया गया

रिपोर्ट के अंत में एक अहम लाइन दर्ज है.

प्रवर्तन निदेशालय कहता है कि वह दस्तावेज में मौजूद किसी भी तथ्य, त्रुटि, व्याख्या या राय की जिम्मेदारी या जवाबदेही स्वीकार नहीं करता.

यानि: ये हमारे आंकड़े हैं, हम इन्हें सही मानते हैं, लेकिन अगर ये गलत हों तो इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है.

एक मजबूत जवाबदेही प्रणाली में यह काम बाहरी ऑडिट करता है, लेकिन यहां यह खाली जगह बनी रहती है.

असल निगरानी क्या है?

ED पर निगरानी पूरी तरह अनुपस्थित नहीं है. अदालतें मामलों की जांच करती हैं, FATF ने 2024 में भारत की सराहना की है, और आंतरिक निगरानी तंत्र भी मौजूद है.

लेकिन ये सभी निगरानी व्यक्तिगत मामलों तक सीमित हैं, पूरी प्रणाली के प्रदर्शन को नहीं आंकते.

स्पष्ट स्थिति

ED भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसियों में से एक है. यह बिना अदालत के फैसले से पहले संपत्तियां जब्त कर सकती है और भारी वित्तीय नियंत्रण रखती है.

लेकिन यह अपनी सफलता खुद तय करती है, अपने आंकड़े खुद सत्यापित करती है, और अपनी रिपोर्ट खुद प्रकाशित करती है, बिना किसी स्वतंत्र ऑडिट के जो इसे चुनौती दे सके.

यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या एक पूरी संस्था इतने लंबे समय तक बिना स्वतंत्र जांच के अपनी ही परिभाषित सफलता के आधार पर काम कर सकती है?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


भारत के समुद्री निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड, FY26 में ₹72,325 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

विशाखापट्टनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों ने कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64% हिस्सा संभाला है. इससे इन बंदरगाहों की लॉजिस्टिक और ट्रेडिंग में अहम भूमिका साफ होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात ने वित्त वर्ष 2025–26 में अब तक का सबसे बड़ा स्तर हासिल किया है. मजबूत वैश्विक मांग, खासकर झींगा (श्रिम्प) की बढ़ती खपत और चीन, यूरोपीय संघ व दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में बेहतर प्रदर्शन के चलते कुल निर्यात ₹72,325.82 करोड़ तक पहुंच गया है. यह जानकारी मरीन प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों में सामने आई है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस वित्त वर्ष में 19.32 लाख टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया है. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है, जो वैश्विक बाजारों में भारतीय समुद्री उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाता है.

झींगा बना सबसे बड़ा कमाई का स्रोत

फ्रोजन झींगा भारत के समुद्री निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है. इसने अकेले ₹47,973.13 करोड़ का योगदान दिया, जो कुल कमाई का दो-तिहाई से भी अधिक है. झींगा के निर्यात में मात्रा 4.6% और मूल्य में 6.35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है.

अमेरिका में गिरावट, लेकिन अन्य बाजारों ने संभाली कमान

संयुक्त राज्य अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, लेकिन यहां शिपमेंट में गिरावट देखी गई है. अमेरिका को होने वाले निर्यात में मात्रा 19.8% और मूल्य 14.5% घटा है, जिसका मुख्य कारण पारस्परिक टैरिफ प्रभाव बताया गया है. हालांकि इस गिरावट की भरपाई अन्य प्रमुख बाजारों ने की है.

चीन, यूरोप और एशिया से मजबूत मांग

चीन को होने वाले निर्यात में 22.7% की मूल्य वृद्धि और 20.1% की मात्रा वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं यूरोपीय संघ में यह वृद्धि और भी तेज रही, जहां निर्यात मूल्य 37.9% और मात्रा 35.2% बढ़ी. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी 36% से अधिक की बढ़त देखी गई है, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है.

जापान और पश्चिम एशिया का प्रदर्शन

जापान को निर्यात में 6.55% की वृद्धि हुई है, जबकि पश्चिम एशिया में वित्त वर्ष के अंत में क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण हल्की गिरावट दर्ज की गई.

फ्रोजन फिश, स्क्विड, कटलफिश, सूखे उत्पाद और लाइव सीफूड सेगमेंट में भी बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं कुछ चिल्ड प्रोडक्ट्स में गिरावट आई है. इसके अलावा फिशमील और फिश ऑयल जैसे सेगमेंट ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है.

प्रमुख बंदरगाहों की अहम भूमिका

विशाखापट्टनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों ने कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64% हिस्सा संभाला है. इससे इन बंदरगाहों की लॉजिस्टिक और ट्रेडिंग में अहम भूमिका साफ होती है.

कुल मिलाकर, भारत का समुद्री निर्यात अब पारंपरिक बाजारों पर निर्भर न रहकर विविध वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. यह बदलाव कमजोर बाजारों के प्रभाव को संतुलित करते हुए सेक्टर की स्थिर और मजबूत वृद्धि को सुनिश्चित कर रहा है.
 


भारत-दक्षिण कोरिया के बीच MSME समझौता, व्यापार और निवेश सहयोग को मिलेगा नया जोर

सरकार के अनुसार, यह समझौता इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश MSME सेक्टर को समावेशी विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन मानते हैं. इससे विभिन्न बाजारों में स्टेकहोल्डर्स के बीच सहयोग भी बढ़ेगा.

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Published - Wednesday, 22 April, 2026
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Wednesday, 22 April, 2026
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भारत और दक्षिण कोरिया ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises और दक्षिण कोरिया के Ministry of SMEs and Startups के बीच एक समझौता (MoU) साइन हुआ है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के छोटे व्यवसायों को जोड़ना और व्यापार के नए अवसर पैदा करना है.

राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हुआ समझौता

यह समझौता दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung की भारत यात्रा के दौरान साइन किया गया. इसका मकसद MSME से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच एक मजबूत और व्यवस्थित संवाद तंत्र तैयार करना है, जिससे सहयोग लंबे समय तक जारी रह सके.

व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इस MoU के तहत दोनों देश व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए कई कदम उठाएंगे. इसमें जानकारी और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करना, बिजनेस मैचमेकिंग और तकनीकी व आर्थिक सहयोग शामिल है. इससे दोनों देशों के MSME सेक्टर को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.

MSME इकोसिस्टम को जोड़ने पर फोकस

यह समझौता दोनों देशों के MSME इकोसिस्टम को बेहतर तरीके से समझने और आपसी साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है. संयुक्त पहलों के जरिए कंपनियों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी, जिससे छोटे व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा.

समावेशी विकास और रोजगार पर जोर

सरकार के अनुसार, यह समझौता इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश MSME सेक्टर को समावेशी विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन मानते हैं. इससे विभिन्न बाजारों में स्टेकहोल्डर्स के बीच सहयोग भी बढ़ेगा.

भारत के MSME सेक्टर की ताकत

भारत का MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

1. उद्यम पोर्टल पर 7.16 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूनिट्स
2. 31 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
3. GDP में करीब 30% योगदान
4. मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में 35.4% हिस्सेदारी
5. निर्यात में लगभग 45% योगदान

यह आंकड़े दिखाते हैं कि यह सेक्टर आर्थिक विकास में कितनी अहम भूमिका निभाता है.

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, MSME सेक्टर कई चुनौतियों का सामना भी कर रहा है. करीब ₹8.1 लाख करोड़ की राशि देरी से होने वाले भुगतान में फंसी हुई है, जिससे छोटे व्यवसायों की नकदी स्थिति पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा सस्ती और औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच भी बड़ी समस्या है, जहां लगभग ₹30 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप बना हुआ है. इन चुनौतियों के कारण कई कंपनियां तकनीक अपनाने और बड़े सप्लाई चेन से जुड़ने में पीछे रह जाती हैं.

 


NSE IPO की राह साफ, ₹1800 करोड़ सेटलमेंट से सुलझेगा विवाद

₹1800 करोड़ के प्रस्तावित सेटलमेंट के साथ NSE और SEBI के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
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Wednesday, 22 April, 2026
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करीब एक दशक से अटके नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है. मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति अधिनियम (Securities and Exchange Board of India-SEBI) की एक हाई-पावर्ड कमेटी ने को-लोकेशन विवाद के निपटारे के लिए ₹1800 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है, जिससे देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.

₹1800 करोड़ सेटलमेंट का प्रस्ताव क्या है

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) ने NSE से ₹1800 करोड़ से अधिक राशि के सेटलमेंट की सिफारिश की है. इस प्रस्ताव के तहत करीब ₹1200 करोड़ को डिस्गॉर्जमेंट यानी कथित अनुचित लाभ की वसूली के रूप में रखा गया है, जबकि लगभग ₹400 करोड़ ब्याज के तौर पर शामिल हैं. शेष राशि अन्य शर्तों के आधार पर तय की जाएगी. हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए अभी सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों की अंतिम मंजूरी जरूरी है.

NSE की पेशकश से ज्यादा है राशि

इससे पहले NSE ने इस विवाद को सुलझाने के लिए ₹1387.39 करोड़ का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया था. कंपनी ने इस प्रक्रिया के तहत करीब ₹600 करोड़ पहले ही एस्क्रो खाते में जमा कर दिए हैं और बाकी राशि अंतिम मंजूरी मिलने के बाद जमा करने की बात कही है. ऐसे में सेबी की कमेटी द्वारा सुझाई गई राशि NSE की शुरुआती पेशकश से काफी ज्यादा है.

क्या है को-लोकेशन विवाद

को-लोकेशन मामले में NSE पर आरोप लगे थे कि उसने कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को ट्रेडिंग डेटा तक तेज और प्राथमिक पहुंच दी, जिससे उन्हें बाजार में अनुचित बढ़त मिली. इस मामले में लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही, जिसके कारण NSE का आईपीओ करीब 10 वर्षों से अटका हुआ है.

IPO की तैयारी कहां तक पहुंची

इस बीच NSE ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तैयारी भी तेज कर दी है. कंपनी ने हाल ही में 20 निवेश बैंकों को आईपीओ मैनेज करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जो किसी भी भारतीय आईपीओ के लिए अब तक की सबसे बड़ी टीम मानी जा रही है. इसके साथ ही मौजूदा निवेशकों को आईपीओ के जरिए अपने शेयर बेचने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसके लिए 27 अप्रैल तक की समयसीमा तय की गई है.

क्यों अहम है यह लिस्टिंग

NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज होने के साथ-साथ सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों में भी शामिल है. इसके करीब 1.90 लाख निवेशक हैं, जो लंबे समय से लिस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं. आईपीओ आने से निवेशकों को एग्जिट का मौका मिलेगा और कंपनी की वास्तविक बाजार वैल्यू भी सामने आएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.

सूत्रों के अनुसार, सेबी जल्द ही NSE को भुगतान के लिए डिमांड लेटर जारी कर सकता है. इसके बाद अंतिम आदेश जारी होगा और सेटलमेंट प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस प्रक्रिया के पूरा होते ही NSE के आईपीओ का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकता है.

 


अडानी पोर्ट्स को करंजा टर्मिनल खरीदने की मंजूरी, दिवालिया प्रक्रिया के तहत तीसरी बड़ी डील की तैयारी

यह डील पूरी होने पर APSEZ का यह तीसरा पोर्ट अधिग्रहण होगा, जो भारत के दिवालिया ढांचे के तहत किया जा रहा है. इससे पहले कंपनी महाराष्ट्र के दिघी पोर्ट और पुडुचेरी के करैकल पोर्ट का अधिग्रहण कर चुकी है.

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Wednesday, 22 April, 2026
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देश की प्रमुख पोर्ट ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone -APSEZ) को करंजा टर्मिनल एंड लॉजिस्टिक्स के अधिग्रहण के लिए कर्जदाताओं की मंजूरी मिल गई है. अगर यह डील पूरी होती है, तो यह कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया के तहत तीसरी बड़ी पोर्ट खरीद होगी, जिससे पश्चिमी भारत में उसकी पकड़ और मजबूत होगी.

कर्जदाताओं की समिति से मिली 100% मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 अप्रैल को कर्जदाताओं की समिति (Committee of Creditors) ने इस अधिग्रहण योजना को 100% वोटिंग सपोर्ट के साथ मंजूरी दे दी. इस समिति का नेतृत्व प्रुडेंट एआरसी (Prudent ARC) कर रहा है, जिसे केनरा बैंक ने जनवरी 2025 में कर्ज ट्रांसफर किया था.

दिवालिया प्रक्रिया के तहत तीसरा अधिग्रहण

यह डील पूरी होने पर APSEZ का यह तीसरा पोर्ट अधिग्रहण होगा, जो भारत के दिवालिया ढांचे के तहत किया जा रहा है. इससे पहले कंपनी महाराष्ट्र के दिघी पोर्ट और पुडुचेरी के करैकल पोर्ट का अधिग्रहण कर चुकी है. करंजा और दिघी दोनों पोर्ट देश के सबसे व्यस्त कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू के पास स्थित हैं, जो इन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है.

क्या है करंजा टर्मिनल की खासियत

करंजा टर्मिनल एंड लॉजिस्टिक (Karanja Terminal and Logistics) एक मल्टी-पर्पज पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सुविधा है, जो महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित है.

1. यह पोर्ट 4,000 DWT तक के जहाजों को संभाल सकता है
2. करीब 100 एकड़ में फैला लॉजिस्टिक्स पार्क
3. वेयरहाउसिंग, बॉन्डेड स्टोरेज, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू-एडेड कार्गो सेवाएं उपलब्ध

मौजूदा कंपनी का विरोध

इस अधिग्रहण का विरोध मौजूदा पेरेंट कंपनी Mercantile Ports and Logistics ने किया है. कंपनी का कहना है कि उसने कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कर्जदाताओं ने उसे खारिज कर दिया. MPL ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है.

अडानी पोर्ट्स को क्या होगा फायदा

अगर यह सौदा पूरा होता है, तो APSEZ की पश्चिमी भारत में मौजूदगी और मजबूत होगी. साथ ही कंपनी की लॉजिस्टिक्स और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में पकड़ और गहरी हो जाएगी.

करंजा टर्मिनल का अधिग्रहण Adani Ports and Special Economic Zone के विस्तार की रणनीति में एक अहम कदम साबित हो सकता है. मजबूत लोकेशन और लॉजिस्टिक्स क्षमता के चलते यह डील कंपनी के दीर्घकालिक विकास को नई दिशा दे सकती है.