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हर घर तिरंगा अभियानः खादी के झंडों की बिक्री में गिरावट, ये बड़ी वजह आई सामने

सरकार ने 13 से लेकर के 15 अगस्त के बीच हर घर पर तिरंगा फहराने के लिए कहा है. इससे तिरंगों की ब्रिकी में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः आजादी के अमृत महोत्सव के तहत केंद्र सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान चला रखा है. इस अभियान के तहत सरकार ने 13 से लेकर के 15 अगस्त के बीच हर घर पर तिरंगा फहराने के लिए कहा है. इससे तिरंगों की ब्रिकी में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है. हालांकि इस बिक्री में खादी आश्रम का योगदान न के बराबर है. वैसे सभी जगह खादी के बने झंडों की मांग हमेशा रहती थी, लेकिन इस बार गांधी आश्रमों में सन्नाटा पसरा है. इसकी वजह है कीमतों में काफी अंतर होना. 

कीमतों में इतना है अंतर

वर्तमान में स्वयं सहायता समूह, डाकघर तथा निजी संस्थाएं झंडा 25 रुपये का दे रही हैं. इसके विपरीत गांधी आश्रम पर झंडा 220 रुपये का है. यह माना जा रहा है कि इसी महंगाई के कारण लोग गांधी आश्रम पर झंडा के लिए नहीं जा रहे हैं बल्कि अन्य स्थानों से झंडा ले रहे हैं. हालांकि सरकार, निजी संस्थाएं, स्वंय सहायता समूह और डाकघरों के माध्यम से जो झंडा बिक रहा है उसका एक स्टैण्डर्ड साइज है. खादी आश्रमों में जो झंडा बिक रहा है उसकी कीमत आकार के हिसाब से 150 से 220 रुपये के बीच है. छोटे आकार के झंडे की कीमत भी इतनी ज्यादा है कि एक आम आदमी उसको ले नहीं रहा है. बल्कि वो भी पॉलिस्टर कपड़े से बने 25 रुपये वाले झंडे को ले रहा है. 

केवल बड़े कॉर्पोरेट्स ही खरीद रहे हैं खादी आश्रम का झंडा

केवल बड़े कॉर्पोरेट्स और सरकारी संस्थान जिनको अपने ऑफिस या बड़ी बिल्डिंग पर झंडा लगाना होता है वो ही केवल खादी आश्रम से झंडों को खरीद रहे हैं. इटावा के क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के संचालक ने बताया कि खादी ग्रामउद्योग ने तिरंगा अभियान में डिमांड आने की उम्मीद में ज्यादा झंडे तैयार करवा लिए, लेकिन कीमत ज्यादा होने की वजह से उतने झंडे इस बार नहीं बिक रहे हैं, जितने की अपेक्षा दुकानदारों ने की थी. डाकघरों में जहां 25 रुपये का एक झंडा मिल रहा है, वहीं इनकी कीमत खादी आश्रम पर ज्यादा होने की वजह से लोग खरीद नहीं रहे हैं. 

खादी आश्रमों की संख्या न के बराबर

एक कारण ये भी है कि खादी आश्रम प्रत्येक जिला हेडक्वार्टर पर एक दो ही खुले हुए हैं. यूपी के बड़ौत जनपद में खादी के दो स्टोर हैं, ये केवल बड़ौत की कहानी नहीं है, ब्लकि देश के प्रत्येक शहर या जिले में लोगों को पता ही नहीं है उनके यहां पर खादी आश्रम कहां पर स्थित है. ऐसे में लोग स्वंय सहायता समूह, स्टेशनरी शॉप या फिर डाकघरों से इनको खरीद रहे हैं. 

झंडे की यह है खादी आश्रम पर कीमत

आगरा शहर के गांधी आश्रम पर  खादी का 2×3 फीट का गुल्ली समेत झंडा 1200 रुपये का है, लेकिन डंडे या पाइप में लगाने वाले कम कीमत के झंडे भी यहां पहली बार उपलब्ध कराए गए हैं. इसकी कीमत 350 रुपये है. वहीं 3*4.5 फीट वाला झंडा 2120 रुपये का है. सबसे बड़े आकार का झंडा जोकि 4*6 फीट का है उसकी कीमत 3120 रुपये है. इसको सेना, कलेक्ट्रेट, पुलिस आदि ज्यादा उपयोग करते हैं. घरों में छोटे झंडे की मांग ज्यादा है. गांधी आश्रम के मंत्री एसपी गुप्ता ने बताया कि पॉलिस्टर और कॉटन के झंडे की अनुमति तो हैं, पर खादी के झंडे ही चलन में हैं. केवल यही मानक पूरे करते हैं और इसी वजह से इनकी मांग बरकरार है, हालांकि बिक्री इनकी कीमतों के लिहाज से काफी कम हो रही है.  

उत्तराखंड में मेरठ और नांदेड़ से मंगाए गए हैं झंडे

क्षेत्रीय गांधी आश्रम हल्द्वानी के सचिव दीपचंद्र जोशी ने बताया कि हर घर तिरंगा अभियान से इस बार तिरंगे की डिमांड बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि डिमांड को देखते हुए महाराष्ट्र के नांदेड़ और उत्तर प्रदेश के मेरठ से तिरंगे झंडे बड़ी संख्या में मंगाये गये हैं. क्योंकि खादी निर्मित झंडे वहीं पर तैयार होते हैं. उन्होंने बताया कि गांधी आश्रम में खादी से बने झंडे के आकार के अनुसार कीमत होती है. गांधी आश्रम के पास ₹400 से लेकर ₹3000 तक के झंडे उपलब्ध हैं. गांधी आश्रम के झंडे की क्वालिटी बेहतर है और खादी के तिरंगे झंडे का विशेष महत्व होता है. ऐसे में खादी से बने तिरंगे झंडे की डिमांड अधिक है. हालांकि तिरंगा महंगा होने के चलते बहुत से लोग इसे खरीदने से पीछे हट रहे हैं. क्योंकि बाजार में कम दामों के बहुत से तिरंगे झंडे आ चुके हैं. इसके चलते खादी के तिरंगा झंडा खरीदने से लोग बच रहे हैं.

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