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फरवरी में GST संग्रह 7.9% उछला, ₹1.61 लाख करोड़ पर पहुंचा शुद्ध राजस्व

फरवरी का GST डेटा बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों के बावजूद संतुलित गति से आगे बढ़ रही है. मजबूत कर संग्रह, आयात में सुधार और राज्यों में व्यापक आर्थिक गतिविधियां आने वाले महीनों में भी सकारात्मक रुझान का संकेत देती हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत की कर व्यवस्था से अर्थव्यवस्था को मजबूत संकेत मिल रहे हैं. फरवरी 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का शुद्ध संग्रह 7.9% की वार्षिक वृद्धि के साथ ₹1.61 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह बीते छह महीनों में तीसरी सबसे बड़ी मासिक उपलब्धि है और बताता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं.

छह महीनों में तीसरा सबसे बड़ा संग्रह

रविवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार फरवरी का शुद्ध GST राजस्व जनवरी (₹1.70 लाख करोड़) और अक्टूबर (₹1.69 लाख करोड़) के बाद पिछले छह महीनों का तीसरा सर्वाधिक स्तर है. हालांकि, क्रमिक आधार पर इसमें करीब 5.7% की गिरावट दर्ज की गई है. 1 फरवरी से केंद्र सरकार ने GST मुआवजा उपकर का भुगतान बंद कर दिया है. फरवरी में जारी ₹5,063 करोड़ का मुआवजा उपकर जनवरी के लेनदेन से संबंधित था.

सकल राजस्व भी मजबूत, ₹1.83 लाख करोड़ पहुंचा

फरवरी में सकल GST संग्रह 8.1% बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गया. हालांकि, यह जनवरी के ₹1.93 लाख करोड़ के मुकाबले 5.05% कम रहा. आंकड़े बताते हैं कि आयात से सकल राजस्व 17.2% बढ़कर ₹0.47 लाख करोड़ हो गया, जबकि घरेलू लेनदेन से प्राप्त राजस्व 5.3% बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ रहा. यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और घरेलू मांग दोनों में संतुलित सुधार जारी है.

रिफंड में बढ़ोतरी, आयात श्रेणी में तेज उछाल

कुल GST रिफंड 10.2% बढ़ा है. इसमें घरेलू रिफंड 5.3% घटा, जबकि आयात से जुड़े रिफंड में 26.5% की तेज वृद्धि दर्ज की गई. यह आयात गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है.

राज्यों में व्यापक आर्थिक गतिविधि के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर, बिहार, सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा और लद्दाख जैसे राज्यों में तेज वृद्धि यह दिखाती है कि आर्थिक विस्तार अब बड़े राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में व्यापक हो चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद GST संग्रह में मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के औपचारीकरण और कर अनुपालन में सुधार को दर्शाती है. वहीं डेलॉयट इंडिया के पार्टनर महेश जयसिंह का कहना है कि घरेलू GST राजस्व की स्थिरता और आयात आधारित IGST में वृद्धि से व्यापारिक गतिविधियों की निरंतरता का संकेत मिलता है.

उल्लेखनीय है कि सितंबर में GST परिषद ने खपत बढ़ाने और कारोबार सुगमता के लिए दरों को युक्तियुक्त बनाया था. विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों का असर अब संग्रह आंकड़ों में दिखाई देने लगा है.


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