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परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश को हरी झंडी: 2047 तक 100 GW क्षमता लक्ष्य की ओर भारत का बड़ा कदम
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने का निर्णय भारत के ऊर्जा सुरक्षा ढांचे में एक बड़ा सुधार है. यह बदलाव क्षमता वृद्धि, तकनीकी आधुनिकीकरण और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में भारत को मजबूती देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
केंद्र सरकार ने भारत के परमाणु ऊर्जा ढांचे को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा उद्योग में प्रवेश का रास्ता खोलते हुए प्रमुख विधायी संशोधनों को मंजूरी दे दी है.
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता खुला
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत नए परमाणु ऊर्जा विधेयक का उद्देश्य गैर-सामरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को सक्षम बनाना है. इसके लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व (सीएलएनडी) अधिनियम 2010 में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. माना जा रहा है कि मौजूदा कानून निजी कंपनियों, विदेशी तकनीक प्रदाताओं और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं के लिए बाधा बन रहे थे.
सरकार का लक्ष्य: 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता
सरकार ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यह विधेयक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा. संसद के मौजूदा सत्र में ‘सतत दोहन एवं परमाणु ऊर्जा उन्नति (शांति) विधेयक’ को विधायी एजेंडा में शामिल किया गया है.
निजी भागीदारी जरूरी
जून में एक उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा परमाणु ऊर्जा अधिनियम निजी क्षेत्र या राज्य सरकारों को इस क्षेत्र में भागीदारी की अनुमति नहीं देता. रिपोर्ट के अनुसार 100 GW क्षमता हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी, जो निजी क्षेत्र के बिना कठिन है.
दायित्व कानून को लेकर कंपनियों की चिंता
हालांकि निजी क्षेत्र की भागीदारी से पूंजी, आधुनिक तकनीक और निर्माण दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन कंपनियां अभी भी सीएलएनडी अधिनियम के तहत दायित्व की सीमा को लेकर आशंकित हैं. आपूर्तिकर्ताओं और संभावित परिचालकों को दुर्घटना से जुड़े दायित्वों की अनिश्चितताओं पर और स्पष्टता का इंतजार है.---
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