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ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगी रफ्तार, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और NISE के बीच अहम समझौता
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के बीच हुआ यह समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन भविष्य की दिशा में एक अहम पहल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन-न्यूट्रल मोबिलिटी की दिशा में भारत ने एक और मजबूत कदम बढ़ाया है. टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी का मकसद भारत में हाइड्रोजन आधारित परिवहन तकनीक की वास्तविक परिस्थितियों में व्यवहार्यता और प्रदर्शन का आकलन करना है.
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगा समर्थन
यह MoU नई दिल्ली स्थित MNRE मुख्यालय में संपन्न हुआ. यह पहल भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और दीर्घकालिक कार्बन-तटस्थता लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेगी. इस मौके पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा की ओर सफर अब योजनाओं से आगे बढ़कर जमीन पर क्रियान्वयन की दिशा में बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि NISE और टोयोटा के बीच यह साझेदारी ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ऊर्जा स्वतंत्रता और कार्बन तटस्थता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी.
टोयोटा मिराई को सौंपा गया परीक्षण के लिए
इस समझौते के तहत टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अपना हाइड्रोजन फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहन टोयोटा मिराई NISE को सौंपा है. इस वाहन का भारत की ड्राइविंग स्थितियों और विविध जलवायु में वास्तविक प्रदर्शन का गहन अध्ययन किया जाएगा. यह सहयोग उद्योग, अनुसंधान और राष्ट्रीय नीति के बीच एक अहम समन्वय को दर्शाता है, जो स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा प्रणाली की ओर भारत के संक्रमण को तेज करेगा.
किन पहलुओं पर होगा मूल्यांकन
NISE द्वारा टोयोटा मिराई का कई महत्वपूर्ण मानकों पर परीक्षण किया जाएगा. इनमें ईंधन दक्षता, वास्तविक ड्राइविंग रेंज, वाहन की संचालन क्षमता, हाइड्रोजन भरने का व्यवहार, विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन, सर्द मौसम में कार्यक्षमता और पर्यावरणीय लचीलापन शामिल है. इसके साथ ही भारत की सड़कों का बुनियादी ढांचा, ट्रैफिक पैटर्न, धूल का प्रभाव और बदलती जलवायु परिस्थितियों के प्रति वाहन की अनुकूलता का भी अध्ययन किया जाएगा.
भारत की अलग-अलग भौगोलिक और मौसमीय परिस्थितियों में टोयोटा मिराई का परीक्षण यह समझने में मदद करेगा कि हाइड्रोजन भविष्य की मोबिलिटी का कितना बड़ा समाधान बन सकता है. कंपनी ने दोहराया कि वह मल्टी-पाथवे अप्रोच पर काम कर रही है, जिसमें हाइड्रोजन फ्यूल-सेल, बैटरी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन तकनीकें शामिल हैं.
क्या है टोयोटा मिराई की खासियत
टोयोटा मिराई दूसरी पीढ़ी का हाइड्रोजन फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहन है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा करता है. इसका एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प होता है. करीब 650 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज और केवल पांच मिनट में ईंधन भरने की क्षमता के साथ यह शून्य-उत्सर्जन मोबिलिटी के सबसे उन्नत समाधानों में गिना जाता है.
भारत के ऊर्जा लक्ष्यों से तालमेल
यह पहल भारत की उभरती हाइड्रोजन नीति के अनुरूप है और ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा स्वच्छ परिवहन विकल्पों को बढ़ावा देती है. टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने 2050 तक कार्बन न्यूट्रल बनने की प्रतिबद्धता दोहराई है, जिसके तहत पूरे उत्पाद जीवनचक्र में नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने पर फोकस किया जाएगा.
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