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प्याज की बढ़ती कीमतों से सरकार भी हुई परेशान, लिया ये महत्त्वपूर्ण फैसला!
प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और अब सरकार के लिए भी ये एक चुनौती बन गए हैं. इसी बीच भारत सरकार ने काफी महत्त्वपूर्ण फैसला लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
प्याज के एक्सपोर्ट्स को लेकर इस वक्त एक काफी चौंका देने वाली खबर सामने आ रही है. भारत सरकार ने आधिकारिक सूचना जारी करते हुए फैसला लिया है कि मार्च 2024 तक देश द्वारा प्याज का एक्सपोर्ट नहीं किया जायेगा. DGFT द्वारा जरी की गई सूचना में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद कुछ विशेष देशों को प्याज एक्सपोर्ट किया जा सकता है.
क्या है पूरा मामला?
भारत की रिटेल मार्केटों में फिलहाल प्याज की कीमत 60 रुपए प्रति किलोग्राम है. आपको बता दें कि अगस्त में भारत सरकार द्वारा प्याज के एक्सपोर्ट पर 40% का शुल्क लगा दिया था ताकि प्याज के भंडारों में वृद्धि दो सके और साल के अंत तक घरेलु मार्केटों में प्याज की सप्लाई बेहतर हो सके. इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 29 अक्टूबर से प्याज के एक्सपोर्ट्स की MEP (न्यूनतम एक्सपोर्ट कीमत) 800 अमरीकी डॉलर्स तय की गई थी. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा बैंगलोर में पैदा होने वाली प्याज के एक्सपोर्ट पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या फिर MEP नहीं लगाया गया है.
बढ़ते दामों से परेशान सरकार
बैंगलोर में उगाई जाने वाली प्याज एक अलग ही तरह की वैरायटी है जिसे बैंगलोर और आस पास के इलाकों में उगाया जाता है. साल 2015 में बैंगलोर में उगाई जाने वाली इस प्याज को GI (Geographical Indication) टैग भी मिल चुका है. प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इन पर नियंत्रण पाने के लिए भारत सरकार के द्वारा अपने बफर स्टॉक में से प्याज को रिलीज करना पड़ रहा है. इससे पहले भारत सरकार ने निर्णय लिया था कि वह 2023-2024 के बीच 3 लाख टन प्याज को बफर स्टॉक बनाकर रखेगी. 2022-23 के दौरान भारत सरकार द्वारा 2.51 लाख टन प्याज का भंडारण बफर स्टॉक के रूप में किया था.
बफर स्टॉक का क्या है इस्तेमाल
बफर स्टॉक का इस्तेमाल अचानक से किसी भी सब्जी की मांग में होने वाली वृद्धि या फिर कीमतों को स्थिर करने के लिए किया जाता है. आपको बता दें कि अप्रैल से जून के बीच उगाई गई प्याज भारत द्वारा उत्पादित किये जाने वाले कुल प्याज का 65% हिस्सा है और जब तक अक्टूबर-नवंबर की फसल बाजार में नहीं आ जाती तब तक इसी फसल की मदद से मांग की पूर्ती की जाती है.
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