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बजट से पहले सरकार का इंफ्रा मास्टरप्लान, 17 लाख करोड़ के 852 PPP प्रोजेक्ट्स तैयार
बजट 2026 से पहले घोषित 17 लाख करोड़ रुपए की PPP पाइपलाइन सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
बजट 2026 से पहले केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लेकर अपना इरादा साफ कर दिया है. अगले तीन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 852 सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन तैयार की गई है. सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं के जरिए इंफ्रा ग्रोथ को तेज करना, निजी निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है. इसे विकसित भारत के दीर्घकालिक रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है.
बजट 2026 से पहले इंफ्रा पर सरकार का फोकस
1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले आम बजट से पहले सरकार ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास उसकी शीर्ष प्राथमिकताओं में रहेगा. वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह तीन वर्षीय PPP पाइपलाइन वित्त वर्ष 2025-26 से लागू की जाएगी. इससे न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है, बल्कि शेयर बाजार और औद्योगिक गतिविधियों में भी सकारात्मक माहौल बन सकता है.
PPP के जरिए निवेश को बढ़ावा
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने बताया कि इस PPP पाइपलाइन का मकसद संभावित परियोजनाओं की प्रारंभिक जानकारी समय से उपलब्ध कराना है. इससे निवेशकों, डेवलपर्स और अन्य हितधारकों को निवेश से जुड़े फैसले लेने में सहूलियत मिलेगी. सरकार का मानना है कि स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप से निजी क्षेत्र की भागीदारी और तेज होगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी.
केंद्र और राज्यों की साझा भूमिका
इस पूरी योजना में केंद्र और राज्यों दोनों की अहम भूमिका तय की गई है. कुल 852 PPP परियोजनाओं में से 232 परियोजनाएं केंद्र सरकार के अधीन होंगी, जिन पर करीब 13.15 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. वहीं, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 620 परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनकी अनुमानित लागत 3.84 लाख करोड़ रुपए बताई गई है. इससे साफ है कि इंफ्रा विकास को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है.
किन मंत्रालयों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार की परियोजनाओं में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. इस मंत्रालय के तहत 108 PPP प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं, जिनका कुल बजट करीब 8.76 लाख करोड़ रुपए है. इसके बाद बिजली मंत्रालय आता है, जो 46 परियोजनाओं पर करीब 3.4 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगा. रेल मंत्रालय के हिस्से में 13 PPP प्रोजेक्ट्स आए हैं, जिनकी लागत लगभग 30,904 करोड़ रुपए आंकी गई है.
अन्य मंत्रालयों का योगदान
अन्य मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी भी इस PPP पाइपलाइन में अहम है. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग 29 परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा, जिन पर करीब 12,254 करोड़ रुपए खर्च होंगे. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की परियोजनाओं पर लगभग 8,743 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यय होगा. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग दो परियोजनाओं के लिए 6,646 करोड़ रुपए निवेश करेगा, जबकि नागर विमानन मंत्रालय 11 PPP परियोजनाओं पर 2,262 करोड़ रुपए खर्च करेगा.
राज्यों में कहां सबसे ज्यादा निवेश
राज्यों के स्तर पर सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश को मिला है, जहां इस पाइपलाइन के तहत 270 PPP परियोजनाएं प्रस्तावित हैं और इन पर करीब 1.16 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है, जहां 70 परियोजनाओं के लिए लगभग 87,640 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं. अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी अलग-अलग क्षेत्रों में इंफ्रा प्रोजेक्ट्स शामिल किए गए हैं.
अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर PPP परियोजनाओं के लागू होने से अगले तीन वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेज गतिविधि देखने को मिलेगी. इससे स्टील, सीमेंट, पावर, कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा. साथ ही, इन परियोजनाओं के जरिए लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
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