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विनिवेश पर सरकार का फोकस बरकरार, राजस्व जुटाने का बनेगा मजबूत आधार: निर्मला सीतारमण
बजट के बाद वित्त मंत्री के बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखते हुए विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण को राजस्व जुटाने का अहम जरिया बनाए रखेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
वित्त वर्ष 2027 का आम बजट पेश करने के एक दिन बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि सरकार की विनिवेश रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आने वाले समय में विनिवेश व परिसंपत्ति मुद्रीकरण की गति ही राजस्व जुटाने का मजबूत रास्ता तैयार करेगी. उन्होंने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक निर्गम और संपत्तियों के बेहतर उपयोग पर सरकार का फोकस बना रहेगा.
विनिवेश लक्ष्य वाजिब, रणनीति में कोई बदलाव नहीं
वित्त मंत्री ने सोमवार को कहा कि विनिवेश की दिशा और रफ्तार से ही राजस्व जुटाने का माहौल बनेगा. उन्होंने भरोसा जताया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए विनिवेश से तय किया गया राजस्व लक्ष्य पूरी तरह व्यावहारिक है. सरकार का इरादा केंद्रीय पीएसयू में हिस्सेदारी बिक्री के साथ-साथ परिसंपत्ति मुद्रीकरण पर जोर देने का है.
80,000 करोड़ रुपये का बड़ा लक्ष्य
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में विविध पूंजी प्राप्ति मद के तहत 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा गया है. इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में शेयरों की बिक्री और सरकारी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण दोनों शामिल हैं. हालांकि वित्त वर्ष 2026 के लिए पहले 47,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया गया.
आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री होगी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. हालांकि इसके समय को लेकर उन्होंने कोई निश्चित जानकारी नहीं दी.
आईबीसी संशोधन विधेयक बजट सत्र में संभव
ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (IBC) संशोधन विधेयक को लेकर वित्त मंत्री ने बताया कि इसे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किए जाने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक पर संसदीय प्रवर समिति अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप चुकी है.
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर सरकार का रुख
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को लेकर सीतारमण ने कहा कि यह हर साल की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन सरकार की प्राथमिकता आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने की रहेगी. उन्होंने कहा कि अगले साल की स्थिति को देखकर आगे की रणनीति तय की जाएगी.
एसईजेड और एमएसएमई पर अहम संकेत
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को घरेलू शुल्क क्षेत्र में उत्पाद बेचने की अनुमति को वित्त मंत्री ने अस्थायी और एकबारगी कदम बताया. वहीं एमएसएमई को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार का ज्यादा फोकस मध्यम उपक्रमों पर रहेगा, साथ ही छोटे उद्यमों को बड़ा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर टिप्पणी
वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव पर वित्त मंत्री ने कहा कि कई केंद्रीय बैंक सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल रही है.
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