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OFS के जरिए IRFC में अपनी इतनी हिस्‍सेदारी को बेचेगी सरकार

इस क्‍वार्टर में अगर IRFC के नतीजों पर नजर डालें तो इस जून में 1557 करोड़ का मुनाफा कमाया है वहीं पिछले साल कंपनी ने 6 % ज्‍यादा 1660 करोड़ रुपये कमाया था. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

केन्‍द्र सरकार राज्‍यों द्वारा संचालित होने वाली IRFC (Indian Railway Finance Corporation) में अपनी हिस्‍सेदारी बेचने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार इसे ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचने की तैयारी कर रहा है. सरकार रेलवे की इस फाइनेंसिंग पार्ट में 80 से ज्‍यादा प्रतिशत की हिस्‍सेदारी रखती है. इसमें अपनी कुछ  हिस्‍सेदारी को बेचने को लेकर सरकार इंटर मिनिस्‍टीरियल ग्रुप से सलाह कर रही है. 

सरकार क्‍यों उठा रही है ये कदम? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल सरकार केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी को सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानदंड के नियमों के तहत लाने के लिए ये कदम उठाने की जरूरत पड़ रही है. इसके लिए सरकार को IRFC में अपनी 11.36 प्रतिशत हिस्सेदारी कम करनी होगी. एमपीएस नियमों के अनुसार लिस्‍टेड यूनिट के पास, लिस्टिंग के पांच साल के अंदर न्यूनतम 25 प्रतिशत सार्वजनिक फ्लोट होना चाहिए. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार इसमें निवेशकों की रुचि का आकलन कर रहे हैं. IRFC के शेयर बीएसई पर पिछले बंद के मुकाबले 0.14 प्रतिशत ऊपर 50.97 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे.

सरकार को हासिल होगी कितनी रकम? 
सरकार को अपनी 11.36 प्रतिशत हिस्‍सेदारी को कम करके 7,600 करोड़ रुपये हासिल होंगे. सरकार जनवरी 2021 में IRFC को स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध कर चुकी है. शेयर बिक्री में कंपनी द्वारा शेयरों का एक नया मुद्दा और सरकार द्वारा अतिरिक्त 4.55 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल थी. IRFC ने जून में समाप्त तिमाही में 1,557 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के 1,660 करोड़ रुपये से 6 प्रतिशत कम है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयर 52.70 रुपये के अपने हाई स्तर पर पहुंच गए. इस महीने शेयर की कीमत 38 फीसदी बढ़ी है.

क्‍या करती है IRFC ? 
जैसा कि इस कंपनी के नाम से नजर आता है कि ये रेलवे के लिए फाइनेंस के काम को देखती है. IRFC रेलवे के लिए फंडिंग करने का काम करती है. IRFC रेलवे के लिए कोई 40 से 45 प्रतिशत तक फाइनेंस करने का काम करती है. 
 


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