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सस्ते की उम्मीद छोड़िए, महंगा हो सकता है हवाई सफर; सामने आई वजह
कोरोना काल में सरकार ने देश में हवाई किराए की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की थी, जिसे अब हटाया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कुछ वक्त पहले नरमी को देखते हुए माना जा रहा था कि विमानन कंपनियां हवाई सफर सस्ता कर सकती हैं. यानी फ्लाइट्स के किराए में कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब किराया बढ़ाने की बात ज़रूर सामने आ रही है. दरअसल, कोरोना काल में सरकार ने देश में हवाई किराए की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की थी, जिसे अब हटाया जाएगा. घरेलू हवाई किराए पर लगाई गई यह सीमा करीब 27 महीने बाद 31 अगस्त से हटा दी जाएगी. इससे फ्लाइट्स की टिकटें महंगी हो सकती हैं.
अभी इतनी है सीमा
कोरोना महामारी के कारण दो महीने के लॉकडाउन के बाद जब 25 मई, 2020 को विमान सेवाएं फिर से शुरू हुईं, तो सरकार ने उड़ान की अवधि के आधार पर घरेलू हवाई किराए के लिए निचली और ऊपरी सीमा तय कर दी थी. जिसके तहत एयरलाइंस किसी यात्री से 40 मिनट से कम की घरेलू उड़ानों के लिए 2,900 रुपए (GST छोड़कर) से कम और 8,800 रुपए (GST छोड़कर) से अधिक किराया नहीं ले सकती हैं. लेकिन अब जब स्थिति ठीक है, तो इस सीमा को हटाने का फैसला लिया गया है. लिहाजा, माना जा रहा है कि कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए हवाई किराए में इजाफा कर सकती हैं.
सिंधिया ने किया ट्वीट
सिविल एविएशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस संबंध में ट्वीट करके बताया है, 'हवाई किराए की सीमा को हटाने का फैसला दैनिक मांग और विमान ईंधन (ATF) की कीमतों के सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद लिया गया है. स्थिरता आने लगी है और हमें भरोसा है कि यह क्षेत्र निकट भविष्य में घरेलू यातायात में वृद्धि के लिए तैयार है'. नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि घरेलू परिचालन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के बाद किराए की सीमा को 31 अगस्त 2022 से खत्म करने का फैसला लिया गया है.
टूट गईं उम्मीदें
अगस्त की शुरुआत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में गिरावट की खबर आई थी. एटीएफ की कीमतों में महीने की पहली और 16 तारीख को बदलाव किया जाता है. माना जा रहा था कि कि इस कटौती के बाद एयरलाइन कंपनियां किराये में कमी कर सकती हैं. एयरलाइन कंपनियों के खर्च में एटीएफ का बड़ा हिस्सा होता है. एक अनुमान के मुताबिक, एयरलाइन की ऑपरेशनल कॉस्ट में जेट फ्यूल का योगदान लगभग 40% होता है. ऐसे में उम्मीद थी कि कंपनियां ATF में कमी का कुछ फायदा यात्रियों को दे सकती हैं.
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