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क्विक कॉमर्स में ‘10 मिनट डिलिवरी’ पर ब्रेक, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त
क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलिवरी की दौड़ पर अब लगाम लगती दिख रही है और फोकस धीरे-धीरे गिग वर्कर्स की सुरक्षा और टिकाऊ कारोबार मॉडल की ओर शिफ्ट होता नजर आ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में अब “10 मिनट में डिलिवरी” का दावा इतिहास बनने की कगार पर है. गिग वर्कर्स की सुरक्षा और काम के दबाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद कई प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियां अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति बदलने की तैयारी में हैं. इस दिशा में पहला कदम ब्लिंकइट ने उठाया है, जिसने अपनी चर्चित 10 मिनट डिलिवरी टैगलाइन हटा दी है.
श्रम मंत्रालय की सख्ती के बाद बदला रुख
गिग कामगारों की कार्य परिस्थितियों को लेकर श्रम मंत्रालय की ओर से हस्तक्षेप के बाद जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और अन्य क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी दबाव बढ़ा है. पिछले सप्ताह हुई एक बैठक में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने ब्लिंकइट, जोमैटो और स्विगी इंस्टामार्ट समेत कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से डिलिवरी समय-सीमा और उससे जुड़े श्रमिकों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर चर्चा की थी.
कंपनियों ने क्या दी सफाई
बैठक में कंपनियों ने दलील दी कि तेज डिलिवरी के लक्ष्य श्रमिकों पर सीधे दबाव डालकर नहीं, बल्कि स्थानीय डार्क स्टोर्स के स्तर पर तय किए जाते हैं. हालांकि, श्रम मंत्री ने गिग वर्कर्स के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कंपनियों से 10 मिनट डिलिवरी की ब्रांडिंग से दूरी बनाने का आग्रह किया.
ब्लिंकइट ने बदली टैगलाइन
सरकारी दबाव के बीच ब्लिंकइट ने अपनी मुख्य टैगलाइन में बदलाव कर दिया है. कंपनी ने ‘10 मिनट में 10,000+ उत्पादों की डिलिवरी’ की जगह अब ‘आपके दरवाजे पर 30,000 से अधिक उत्पादों की डिलिवरी’ को अपनाया है. इससे साफ संकेत मिलता है कि अब जोर स्पीड के बजाय प्रोडक्ट रेंज पर दिया जा रहा है.
अन्य प्लेटफॉर्म भी बदलाव के मूड में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सूत्रों के मुताबिक स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो भी 10 मिनट डिलिवरी के वादे को हटाने और अपनी ब्रांडिंग रणनीति में बदलाव पर विचार कर रहे हैं. हालांकि कंपनियों का कहना है कि सरकार की ओर से फिलहाल कोई लिखित निर्देश या आधिकारिक आदेश नहीं आया है. जानकारी के अनुसार ऐसा कोई कानून नहीं है जो कंपनियों को 10 मिनट डिलिवरी का प्रचार करने से रोकता हो, लेकिन गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दबाव जरूर बनाया गया है. इसी वजह से कंपनियां स्वेच्छा से यह बदलाव कर रही हैं.
गिग वर्कर्स यूनियनों का स्वागत
गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा की दिशा में अहम पहल बताया है. यूनियन का कहना है कि 10 मिनट डिलिवरी मॉडल ने डिलिवरी पार्टनर्स को खतरनाक ड्राइविंग, अत्यधिक तनाव और असुरक्षित काम करने की परिस्थितियों में डाल दिया था.
कारोबारी मॉडल पर असर नहीं
क्विक कॉमर्स कंपनियों का मानना है कि टैगलाइन बदलने से उनके बिजनेस मॉडल पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. एक कंपनी के वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि हकीकत में भी सभी डिलिवरी 10 मिनट में नहीं होतीं और ज्यादातर ऑर्डर में इससे ज्यादा समय लगता है. डार्क स्टोर्स से डिलिवरी की प्रक्रिया पहले जैसी ही बनी रहेगी.
इंडस्ट्री में अब भी जारी ‘10 मिनट’ का प्रचार
हालांकि, कई प्लेटफॉर्म्स के मोबाइल ऐप्स पर अब भी 10 मिनट डिलिवरी का दावा दिखाई दे रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या पूरी इंडस्ट्री एक समान रुख अपनाती है या सिर्फ चुनिंदा कंपनियां ही इस बदलाव को लागू करती हैं.
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