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इस शिपिंग कंपनी का हाथ छोड़ने को बेकरार सरकार, शेयरों में आया उछाल
मोदी सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को तेज कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मोदी सरकार (Modi Government) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) को निजी हाथों में सौंपने को बेकरार है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) जल्द ही SCI की रणनीतिक बिक्री के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित कर सकता है. जब से सरकार के इस कदम की खबर सामने आई है, कंपनी के शेयरों में उछाल देखने को मिला है. आज यानी गुरुवार को SCI के शेयर 6.88% की शानदार तेजी के साथ 149.95 रुपए पर बंद हुए. जबकि पिछले 5 कारोबारी सत्रों में इसने महज 0.44% का रिटर्न दिया था.
कितनी है सरकार की हिस्सेदारी?
द्र सरकार Shipping Corporation of India में अपनी 63.75% हिस्सेदारी बेचना चाहती है. इस बिक्री से सरकार की झोली में 3000 करोड़ रुपए तक आ सकते हैं. सरकार को उम्मीद है कि SCI में उसकी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 3 से 5 कंपनियां बोली लगाएंगी. सरकार की योजना इसी वित्त वर्ष में SCI की रणनीतिक बिक्री को पूरा करने की है. बता दें कि मोदी सरकार कई सरकारी कंपनियों के विनिवेश यानी उन्हें निजी हाथों में सौंपने की योजना पर काम कर रही है.
पहले ही मिल गई थी मंजूरी
शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी है. नवंबर 2019 में ही आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडिलीय समिति ने शिपिंग कॉरपोरेशन को बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई. अब सरकार जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहती है. SCI की स्थापना 2 अक्टूबर 1961 को हुई थी और 18 सितंबर 1992 को कंपनी का दर्जा प्राइवेट लिमिटेड से बदलकर पब्लिक लिमिटेड कर दिया गया था. कंपनी को केंद्र सरकार ने 2000 में 'मिनी रत्न' का खिताब दिया था. SCI की शुरुआत केवल 19 जहाजों से हुई और आज कंपनी के बेड़े में 83 से ज्यादा जहाज हैं.
पहले हो चुका है बंटवारा
इससे पहले, जून में सरकार ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को दो भागों में बांट दिया था. सरकार ने कंपनी की नॉन-कोर एसेट्स को अलग कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स लिमिटेड (SCILAL) में विभाजित कर दिया था. डीमर्जर प्रक्रिया के तहत SCILAL को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाना है. SCI के प्रत्येक शेयरधारक को एससीआईएलएएल का एक शेयर मिलेगा. पहले सरकार की योजना SCILAL को लिस्ट कराकर SCI को निजी हाथों में सौंपने की थी, लेकिन अब लगता है कि सरकार इसका इंतजार करना नहीं चाहती. जबकि आमतौर पर अलग हुई एंटिटी की लिस्टिंग के बाद ही वित्तीय बोलियां आमंत्रित की जाती हैं.
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