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आईटी सेक्टर की बाधाओं को दूर करने पर सरकार का फोकस: अश्विनी वैष्णव
सरकार उद्योग और अकादमिक जगत के साथ मिलकर अपस्किलिंग और रिस्किलिंग पर जोर दे रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत सरकार देश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन अवसर पर कही.
ग्लोबल साउथ का पहला एआई शिखर सम्मेलन, 118 देशों की भागीदारी
ग्लोबल साउथ में आयोजित इस पहले एआई शिखर सम्मेलन में 118 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. अपने संबोधन में वैष्णव ने राष्ट्रीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए सरकार की पांच-स्तरीय रणनीति का उल्लेख किया. इसमें एप्लिकेशन, मॉडल, कंप्यूट, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
उन्होंने कहा, “हम आईटी उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों से पूरी तरह अवगत हैं. इनका समाधान करने के लिए हम उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर अपस्किलिंग, रिस्किलिंग और नई प्रतिभा श्रृंखला विकसित करने पर काम कर रहे हैं, ताकि नए इंटेलिजेंस युग की जरूरतों को पूरा किया जा सके.”
एआई भारत के आईटी सेक्टर के लिए सबसे बड़ा अवसर: एन. चंद्रशेखरन
वैष्णव के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मुख्य वक्तव्य दिया. उन्होंने एआई को भारत के आईटी सेक्टर के लिए “सबसे बड़ा अवसर” बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी उद्योग की असली ताकत हर उद्यम के व्यापार और तकनीकी परिप्रेक्ष्य को समझने और प्रक्रियाओं, आपूर्ति श्रृंखला, भागीदारों और ग्राहकों के बीच समाधान को एकीकृत करने में है.
उन्होंने कहा, “एआई इस भूमिका को और व्यापक बनाएगा. यह वर्कफ्लो में एआई और एआई एजेंट्स को शामिल करने, प्रक्रियाओं को फिर से परिभाषित करने और हर उद्यम को अपनी दृष्टि और मॉडल साकार करने का अवसर देता है.”
स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई समाधान पर जोर
वैष्णव ने स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, डिजाइन और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक एआई समाधानों के विकास पर विशेष बल दिया. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को दर्शाता है जिसमें तकनीक का लोकतंत्रीकरण और उसके लाभों को आम जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है.
38,000 जीपीयू वाला सार्वजनिक-निजी कंप्यूट प्लेटफॉर्म
भारत स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बहुभाषी और बहु-मोडल क्षमताओं वाले विशेष एआई मॉडल विकसित कर रहा है. एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत साझा कंप्यूट प्लेटफॉर्म पर फिलहाल 38,000 जीपीयू स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए किफायती दरों पर उपलब्ध हैं. जल्द ही इसमें 20,000 और जीपीयू जोड़े जाने की योजना है.
देश वैश्विक डेटा निवेश आकर्षित करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग पर भी ध्यान दे रहा है. वर्तमान में भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आता है, साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सुधार किए जा रहे हैं.
एआई अवसंरचना में 200 अरब डॉलर तक निवेश की संभावना
मंत्री वैष्णव ने हाल के दिनों में कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत में एआई अवसंरचना में 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक का निवेश हो सकता है. भारत का लक्ष्य एआई अनुसंधान, विकास और तैनाती का वैश्विक केंद्र बनना है.
जिम्मेदार एआई पर जोर
जिम्मेदार एआई के मुद्दे पर बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि एआई के प्रसार के साथ मानव सुरक्षा और गरिमा को केंद्र में रखना अनिवार्य है. उन्होंने कहा, “हमें एआई के लाभों का उपयोग करते हुए उससे जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए सामूहिक समाधान भी तलाशने होंगे.”
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर फोकस
इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सहित कई वैश्विक नेताओं ने भाग लिया. सम्मेलन में तकनीक, नवाचार और जिम्मेदार एआई के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया.
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