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भारत के AI इकोसिस्टम में गूगल का बड़ा निवेश, स्वास्थ्य और कृषि सेवाओं में रहेगा फोकस
गूगल का यह निवेश भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है. खेती और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में AI के प्रभावी इस्तेमाल से न केवल सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि आम लोगों तक तकनीक की पहुंच भी बढ़ेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
गूगल (Google) ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास को तेज करने के लिए करोड़ों रुपये के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश खास तौर पर कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और भारतीय भाषाओं पर आधारित तकनीकी समाधानों को मजबूत करने पर केंद्रित होगा. आइए गूगल की इस निवेश योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं.
AI के जरिए खेती और इलाज को मिलेगी नई दिशा
दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों में शामिल गूगल ने भारत के AI उत्कृष्टता केंद्रों को 80 लाख अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है. इसका उद्देश्य खेती और स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर जमीनी स्तर पर बदलाव लाना है. कंपनी डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड और AI आधारित उपचार समाधानों को बढ़ावा देगी.
हेल्थ और एग्रीकल्चर के लिए 45 लाख डॉलर की मदद
गूगल ने हेल्थ और एग्रीकल्चर सेक्टर में मल्टी-लिंगुअल AI एप्लिकेशन को समर्थन देने के लिए वधवानी AI को 45 लाख अमेरिकी डॉलर देने का फैसला किया है. इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तकनीक आधारित समाधान अधिक सुलभ हो सकेंगे.
भारतीय भाषाओं पर खास फोकस
भारतीय भाषाओं में AI समाधान विकसित करने के लिए गूगल ने ज्ञानीडॉटAI, कोरोवरडॉटAI और भारतजेन को 50-50 हजार अमेरिकी डॉलर का अनुदान देने की घोषणा की है. इसके साथ ही IIT मुंबई में भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए 20 लाख अमेरिकी डॉलर का प्रारंभिक योगदान दिया जाएगा.
एम्स और एम्स के साथ साझेदारी
गूगल, एम्स के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डर्मेटोलॉजी और OPD ट्राइएजिंग के लिए भारत-विशिष्ट AI मॉडल विकसित करेगा. वहीं, IISc के शोधकर्ता और चिकित्सक AI के व्यापक क्लिनिकल उपयोग की संभावनाओं पर काम करेंगे. गूगल का कहना है कि ये सभी पहल भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम हैं. इससे न सिर्फ तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की भाषाई विविधता और सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AI का समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा.
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