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महंगाई से परेशान आम लोगों के लिए आई खुशखबरी, क्या खाने पीने के सामान पर होगा असर?
महंगाई के मोर्चे पर जिस तरह के हालात पैदा होते दिख रहे हैं उसमें फिलहाल तो आंकड़ों में कमी दिख रही है. सब्जियों से लेकर जूते और कपड़ों के आंकड़ों में भी इस बार कमी देखने को मिल रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
केन्द्र सरकार की ओर से खुदरा महंगाई दर जारी कर दी गई है. इस खुदरा महंगाई में अप्रैल के मुकाबले कमी देखने को मिली है. अप्रैल में जहां खुदरा महंगाई 4.83 फीसदी रही थी वहीं मई में ये महंगाई दर 4.75 प्रतिशत पर आ गई है. खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा रिजर्व बैंक की ओर से तय की हुई सीमा के अंदर है. आंकड़े बता रहे हैं महंगाई दर में शहर से लेकर गांव तक में कमी देखने को मिल रही है.
क्या कह रहे हैं खुदरा महंगाई के आंकड़े?
खुदरा महंगाई के आंकड़े कह रहे हैं कि खाने पीने के सामानों पर महंगाई का असर कम देखने को मिल रहा है. खाने पीने के सामानों पर मई में महंगाई जहां 8.75 प्रतिशत थी वहीं इस बार ये घटकर 8.62 प्रतिशत हो गई है. वहीं अगर मई 2023 के महंगाई के आंकड़ों से इसकी तुलना करें तो ये अभी भी 3.3 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई के आंकड़े बता रहे हैं कि वहां भी पहले के मुकाबले राहत मिली है. मई में जहां शहरों में महंगाई दर 4.15 प्रतिशत हो गई है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में ये 5.43 प्रतिशत से गिरकर 5.28 प्रतिशत हो गई है.
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खाने पीने के सामानों का क्या है हाल?
आंकड़ों को बारीकी से देखें और खाने-पीने के सामानों पर नजर डालें तो वहां भी कमी देखने को मिल रही है. सब्जियों की बात करें तो अप्रैल में जहां ये 27.8 प्रतिशत थी तो वहीं मई में ये 27.3 प्रतिशत पर आ गई है.इसी तरह अगर दालों की महंगाई पर नजर डालें तो वो 17.14 प्रतिशत बनी हुई है जबकि अनाज की महंगाई दर 8.69 प्रतिशत रही है. आंकड़े बता रहे हैं कि ईंधन और बिजली की महंगाई दर भी कम हुई है. अप्रैल में जहां ये -4.24 प्रतिशत से घटकर मई में – 3.83 प्रतिशत हो गई है. वहीं अगर कपड़े और जूतों की महंगाई पर नजर डालें तो ये 2.74 प्रतिशत और घरों पर 2.56 प्रतिशत रही है. महंगाई को नियंत्रण करने को लेकर आरबीआई की ओर से जो कदम उठाए जा रहे हैं उसमें लगता ये है कि ये जल्द ही 4 प्रतिशत हो जाएगी.
आरबीआई ने इतनी जताई है महंगाई की आशंका
लगातार पिछले आठ महीनों से रेपो रेट को स्थिर बनाकर महंगाई कम करने की कोशिश करने वाले आरबीआई ने भी इस पूरे साल को अपने अनुमान जारी किए थे. हर दो महीने में होने वाली एमपीसी बैठक में 7 जून को आरबीआई ने जो बताया था उसके अनुसार, सीपीआई मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. इसमें पहली तिमाही में इसके 4.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
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