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गोल्ड लोन एनबीएफसी का AUM FY27 तक 4 लाख करोड़ रुपये के पार, 40% CAGR का अनुमान
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ऊंचे सोने के दाम, नियामकीय समर्थन और सुरक्षित कर्ज की बढ़ती मांग के चलते गोल्ड लोन एनबीएफसी आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि के रास्ते पर बने रह सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
गोल्ड लोन पर केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मौजूदा वित्त वर्ष से FY27 तक करीब 40 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ोतरी होने का अनुमान है. मार्च 2027 तक यह आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है. यह अनुमान क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट में लगाया गया है.
पिछले वर्षों की तुलना में कहीं तेज ग्रोथ
रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमानित वृद्धि FY23 से FY25 के बीच दर्ज की गई 27 प्रतिशत CAGR से कहीं अधिक है. इस तेज विस्तार के पीछे मुख्य वजहें सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें, सुरक्षित कर्ज की ओर बढ़ता रुझान और अनुकूल नियामकीय माहौल हैं.
सोने की कीमतों में उछाल से बढ़ा लोन वितरण
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सोने की कीमतों में करीब 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. इससे गिरवी रखे गए सोने का मूल्य बढ़ा है, जिससे गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों को लोन वितरण बढ़ाने का मौका मिला है. इसके साथ ही, अनसिक्योर्ड लोन की उपलब्धता सख्त होने से कई कर्जदार वैकल्पिक फंडिंग विकल्प के तौर पर गोल्ड लोन की ओर रुख कर रहे हैं.
बड़े और मझोले एनबीएफसी अपना रहे अलग रणनीति
क्रिसिल रेटिंग्स की डायरेक्टर अपर्णा किरुबाकरण के मुताबिक, बड़ी गोल्ड-लोन एनबीएफसी अपनी मजबूत ब्रांड पहचान के दम पर मौजूदा शाखाओं से ही पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं. वहीं, मझोले आकार की कंपनियां नई शाखाएं खोलने के साथ-साथ बड़े एनबीएफसी और बैंकों के लिए ओरिजिनेटिंग पार्टनर के रूप में भी काम कर रही हैं.
उन्होंने बताया कि ऊंचे सोने के दाम और मजबूत मांग के चलते पिछले दो वित्त वर्षों में प्रति शाखा कारोबार में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रति शाखा औसत AUM बढ़कर करीब 14 करोड़ रुपये हो गया है, जो FY24 में लगभग 10 करोड़ रुपये था.
नियामकीय बदलावों से मिलेगा और सहारा
नियामकीय मोर्चे पर भी गोल्ड लोन सेक्टर को समर्थन मिल रहा है. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए लोन-टू-वैल्यू (LTV) नियमों के तहत 2.5 लाख रुपये से कम के टिकट साइज वाले बुलेट गोल्ड लोन पर LTV सीमा को मौजूदा 65–68 प्रतिशत से बढ़ाकर 70–75 प्रतिशत किया जा सकता है. इससे लोन देने की क्षमता और बढ़ेगी.
अनसिक्योर्ड से सिक्योर्ड कर्ज की ओर कर्जदारों का रुझान
गोल्ड लोन की मांग में तेजी की एक बड़ी वजह कर्जदारों का अनसिक्योर्ड लोन से सिक्योर्ड लोन की ओर शिफ्ट होना भी है. अनसिक्योर्ड लेंडिंग सेगमेंट में एसेट क्वालिटी से जुड़ी चुनौतियों के बाद लेंडर्स ने अंडरराइटिंग मानकों को सख्त किया और नियामकों ने भी निगरानी बढ़ा दी. इसके चलते उस सेगमेंट में कर्ज की उपलब्धता तेजी से घटी है.
क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर प्रशांत माने के अनुसार, इस माहौल में गोल्ड लोन एक मजबूत वैकल्पिक क्रेडिट विकल्प के रूप में उभरा है, जो आसान पहुंच, तेज प्रोसेसिंग और लचीले पुनर्भुगतान विकल्प प्रदान करता है.
जोखिम और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी चिंता का विषय
हालांकि ग्रोथ आउटलुक मजबूत है, लेकिन क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि ऊंचे LTV स्तर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के खिलाफ सुरक्षा को कम कर सकते हैं. ऐसे में एनबीएफसी को सख्त जोखिम प्रबंधन अपनाना होगा. इसके लिए LTV की मार्क-टू-मार्केट निगरानी, मजबूत नीलामी प्रक्रियाएं, सोने की शुद्धता का सही आकलन और नियमित शाखा ऑडिट बेहद जरूरी होंगे.
इसके अलावा, इस सेगमेंट में बैंकों की बढ़ती मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, टिकाऊ विकास के लिए एनबीएफसी को तेज विस्तार और सावधानीपूर्ण लेंडिंग के बीच संतुलन बनाना होगा, साथ ही प्राइम और नॉन-प्राइम दोनों क्षेत्रों में अपनी पहुंच मजबूत करनी होगी.
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