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रिकॉर्ड रफ्तार से भागा सोना क्या अब सुस्ताएगा, दाम घटने के बन रहे आसार?
पिछले कुछ समय में सोना जिस रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा है, उसमें हमारे पड़ोसी चीन का भी अहम योगदान है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
सोने (Gold) की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है. कल यानी 14 जून को सोना 70 रुपए गिरकर 72,080 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. इस दौरान, चांदी के भाव भी 250 रुपए कम होकर 90,700 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गए. बीते कुछ समय में सोने और चांदी रिकॉर्ड तेजी से भागे हैं. लेकिन आने वाले समय में सोना वैश्विक स्तर पर सस्ता होने की उम्मीद बनती दिखाई दे रही है और इसकी प्रमुख वजह है हमारा पड़ोसी चीन.
केंद्रीय बैंक ने लगाई रोक
चीन की सरकार से लेकर आम जनता तक कुछ वक्त पहले तक ऐसे सोना खरीद रहे थे, जैसे ये पीली धातु धरती से खत्म होने वाली है. चीन में लगातार बढ़ रही डिमांड के चलते सोने की कीमतों में आग लगी थी. हालांकि, अब सोने को लेकर चीन में बेताबी थोड़ी कम हुई है. चीन के केंद्रीय बैंक ने भी अपने गोल्ड रिजर्व के लिए सोने की खरीद पर रोक लगा दी है. चीन बीते 18 महीने से लगातार सोना खरीद रहा था. नतीजतन गोल्ड के स्पॉट रेट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे. पिछले महीने यानी मई में चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने सोने की खरीद पर रोक लगा दी.
जमकर खरीदा था Gold
अप्रैल 2024 के दौरान चीन का गोल्ड रिजर्व 2 टन बढ़कर 2,264 टन पर पहुंच गया था. जबकि अक्टूबर 2022 के अंत में चीन का कुल गोल्ड रिजर्व 1,948.32 टन था. पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 2023 के दौरान अपने गोल्ड रिजर्व में कुल 225 टन की बढ़ोतरी की थी. दरअसल, बीता कुछ समय चीन के लिए अच्छा नहीं रहा है. रियल एस्टेट से लेकर शेयर मार्केट तक में उसकी स्थिति खराब है. इसलिए चीन ने पूरा फोकस सोना खरीदने पर लगा दिया था. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में सोने की कीमत 2400 डॉलर प्रति औंस के हाई पर पहुंचने के पीछे चाइना कनेक्शन की बात कही गई थी. इसमें कहा गया है कि सोने की वैश्विक कीमत अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, क्योंकि चीनी निवेशक और उपभोक्ता रिकॉर्ड तेजी के साथ सोने में निवेश कर रहे हैं.
दाम में नरमी की उम्मीद
चीन में लगातार बढ़ रही सोने की डिमांड से उसकी कीमतों में तूफानी तेजी आ गई. अब जब वहां डिमांड में कमी आ रही है, तो उम्मीद है कि सोने के दामों में भी नरमी आएगी. गोल्ड को निवेश के बेहतरीन ऑप्शन के तौर पर देखा जाता है, इसलिए जब भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई उथल-पुथल होती है सोना महंगा हो जाता है. जैसा कि इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान देखने को मिला था. यदि ईरान और इजरायल के बीच युद्ध शुरू हो जाता, तो सोने की कीमतों में आग लग सकती थी. सोने की बात निकली है तो चलिए यह भी जान लेते हैं कि इसके दाम कैसे तय होते हैं.
कौन तय करता है Gold Price?
दुनियाभर में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा सोने की कीमत तय की जाती है. वह यूएस डॉलर में सोने की कीमत प्रकाशित करता है। यह कीमत बैंकरों और बुलियन व्यापारियों के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है. भारत में, इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आयात शुल्क और अन्य लागू टैक्स को जोड़कर यह तय करता है कि रिटेल विक्रेताओं को सोना किस दर पर दिया जाएगा.
Bharat यहां से करता है इम्पोर्ट
भारत के लिए स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत है. यहां से हमारे कुल गोल्ड आयात की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात से भारत लगभग 13 फीसदी और दक्षिण अफ्रीका से करीब 10 प्रतिशत सोना आयात करता है. भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Gold कंज्यूमर है. देश में सोने का आयात मुख्य रूप से ज्वैलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है. देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से ज्यादा की है.
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