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भारत की GDP ने झूठे साबित किए सब अनुमान, कुछ ऐसा रहा प्रदर्शन!
हाल ही में NSO द्वारा जनवरी 2023 से मार्च 2023 तक के क्वार्टर के नतीजे जारी किये गए थे जिसके बाद यह जानकारी सामने आई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
GDP यानी सकल घरेलु उत्पाद, किसी भी देश की इकॉनमी की वृद्धि को दर्शाती है और इसीलिए इसे इकॉनमी का एक काफी महत्त्वपूर्ण पहलू माना जाता है. NSO (National Statistical Office) द्वारा जारी की गयी जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के चौथे क्वार्टर के दौरान भारत की GDP में 5.5% की दर से वृद्धि देखने को मिली है.
GDP में हुई वृद्धि
हाल ही में NSO द्वारा वित्त वर्ष 23 के चौथे क्वार्टर यानी जनवरी 2023 से मार्च 2023 तक के क्वार्टर के नतीजे जारी किये गए थे जिसके बाद यह जानकारी सामने आई है. भारत के केंद्रीय बैंक, RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) द्वारा अनुमान लगाया गया था कि वित्त वर्ष 23 के चौथे क्वार्टर में GDP की वृद्धि की दर 5.1% रहेगी, लेकिन चौथे क्वार्टर के नतीजों के अनुसार केंद्रीय बैंक का यह अनुमान गलत साबित होता नजर आया क्योंकि GDP में 5.5% की दर से वृद्धि देखने को मिली है. इतना ही नहीं, केंद्रीय बैंक ने यह भी आशंका जताई थी कि वित्त वर्ष 23 के दौरान विकास दर लगभग 7% रहेगी लेकिन यह अनुमान भी गलत निकला और वित्त वर्ष 23 के दौरान 7.2% की विकास दर देखने को मिली. हालांकि यह विकास दर वित्त वर्ष 22 में दर्ज की गयी 9.1% की विकास दर से कम है.
कैसा रहा विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन?
सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सांकेतिक GDP के 272.41 लाख करोड़ रुपयों के स्तर पर रहने का अनुमान लगाया गया था जो वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 234.71 लाख करोड़ के मुकाबले 16.1% ज्यादा है. अगर विभिन्न क्षेत्रों द्वारा दर्ज की गई विकास दर की बात करें तो वित्त वर्ष 23 के चौथे क्वार्टर के दौरान कुछ ऐसा प्रदर्शन देखने को मिला है:
कृषि क्षेत्र में 5% की दर से हुई वृद्धि
खनन क्षेत्र ने दर्ज की 4.3% की विकास दर
निर्माण क्षेत्र में 10.4% की दर से हुई वृद्धि
बिजली के क्षेत्र में 6.9% की दर से हुआ विकास
मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 4.5% रही विकास दर
फाइनेंशियल क्षेत्र में 7.1% की दर से हुई वृद्धि
ट्रेड और होटल्स के क्षेत्र में देखने को मिली 9.1% की विकास दर
भारत ने पूरा किया वित्त वर्ष 23 के वित्तीय घाटे का लक्ष्य
भारत सरकार द्वारा वित्त वर्ष 23 के लिए निर्धारित किए गए वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा किया गया, वित्त वर्ष 23 में भारत का वित्तीय घाटा 17.33 लाख करोड़ रुपये था जबकि अनुमान लगाया जा रहा था कि यह आंकड़ा 17.55 लाख करोड़ रुपयों के आस पास हो सकता है. ICRA (इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) में रिसर्च और आउटरीच विभाग की प्रमुख और चीफ इकोनॉमिस्ट Aditi Nayar ने कहा, भारत सरकार वित्त वर्ष 23 के लिए 17.3 ट्रिलियन के साथ अपने वित्तीय घाटे को कम रखने में सफल रही है. उम्मीद से ज्यादा प्राप्त हुई कमाई, खर्च में बहुत थोड़ी कमी, विनिवेश और उम्मीद से बेहतर कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के जरिये सरकार द्वारा यह लक्ष्य प्राप्त किया गया है.
सरकारी सिक्योरिटीज का क्या?
इस वक्त ICRA को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 24 के लिए आवंटित किया गया मजबूत बजट पर्याप्त होगा. सरकार ने वित्त वर्ष 24 के लिए पहले ही P&K (Phosphorus and Potassium) फर्टिलाइजर्स पर 38,000 करोड़ रुपयों की सब्सिडी जारी कर दी है. इसके साथ ही खरीफ सीजन के लिए प्रमुख पोषक तत्वों, N (नाइट्रोजन), P (फोस्फोरस), K (पोटैशियम), और S (सल्फर) पर लगाईं जाने वाली NBS (Nutrient Based Subsidy) को कम कर दिया है जिसके पीछे अंतरराष्ट्रीय फर्टिलाइजर और प्रमुख कच्चे माल में गिरावट को वजह माना जा रहा है. हालांकि फिलहाल वित्तीय परेशानियां कम हैं और RBI की MPC (Monetary Policy Committee) द्वारा निकट भविष्य में पॉलिसी रेट्स बढ़ाने के मौके भी कम हैं. लेकिन आने वाले महीनों में अधिकतर राज्यों की सरकार द्वारा लिए गए उधार से वित्त वर्ष 24 के पहले 6 महीनों के दौरान सरकारी सिक्योरिटीज में 7% से 7.2% की दर से वृद्धि देखने को मिल सकती है.
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