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भारत में GCC ऑफिस डिमांड अगले वर्षों में कुल मांग का आधा हिस्सा संभाल सकता है: Colliers

Colliers ने यह भी कहा कि भारत का GCC इकोसिस्टम अब सिर्फ बैक ऑफिस ऑपरेशन नहीं बल्कि उच्च-मूल्य और ज्ञान-आधारित कार्यों पर केंद्रित है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे और आने वाले वर्षों में शीर्ष सात शहरों में कुल ऑफिस स्पेस की मांग का लगभग 50 प्रतिशत योगदान दे सकते हैं, यह जानकारी कोलियर्स इंडिया (Colliers India) ने दी है.

GCC का ग्रेड ए ऑफिस स्पेस पर दबदबा

Colliers India के अनुसार, GCC के माध्यम से वार्षिक ग्रेड ए ऑफिस स्पेस का अधिग्रहण 35–40 मिलियन स्क्वायर फीट (msf) तक पहुँच सकता है, जो कुल लीजिंग वॉल्यूम का लगभग 40–50 प्रतिशत हो सकता है. इस विस्तार को भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ विकसित व्यापार संबंधों का समर्थन प्राप्त है.

भारत लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर को 20 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है, जबकि 2027 में इसे 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.

वैश्विक व्यापार समझौतों का असर

Colliers ने बताया कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और यूके के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए प्रवेश बाधाएँ कम होंगी. टैरिफ रेशनलाइजेशन और डिजिटल ट्रेड फिसिलिटेशन पहलें भी भारत-आधारित संचालन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देंगी.

GCC अब सिर्फ लागत लाभ केंद्र नहीं

पहले जहां Capability Centres को लागत लाभ (Cost Arbitrage) के लिए जाना जाता था, वहीं अब ये रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं.

अमेरिकी कंपनियाँ अभी भी आगे

2020 से अब तक, अमेरिकी कंपनियों ने भारत में GCC लीजिंग गतिविधि का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा लिया है. यूरोपीय और यूके आधारित कंपनियों का हिस्सा लगभग 8–10 प्रतिशत है. Colliers ने कहा कि अमेरिकी कंपनियाँ प्रमुख रहेंगी, लेकिन यूरोप और यूके की कंपनियों की उपस्थिति बढ़ने के साथ उनका हिस्सा धीरे-धीरे संतुलित हो सकता है.

Colliers India ऑफिस सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्पित मेहरोत्रा ने कहा कि मुख्य व्यापार साझेदारों के साथ हालिया समझौते विदेशी निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं और GCC से रियल एस्टेट की मांग को और मजबूत कर सकते हैं.

ऑफिस एब्जॉर्प्शन में लगातार बढ़त

भारत के ऑफिस मार्केट ने पोस्ट-पैंडेमिक अवधि में निरंतर गति बनाए रखी है. 2020–2025 के बीच कुल ग्रेड ए ऑफिस एब्जॉर्प्शन 310.5 msf रही, जिसमें GCC का हिस्सा 117.3 msf, यानी लगभग 38 प्रतिशत था. वार्षिक GCC लीजिंग वॉल्यूम 2020 में 16.3 msf से बढ़कर 2025 में 29.2 msf हो गया, और पिछले साल इसका कुल लीज़िंग में हिस्सा 40 प्रतिशत से अधिक हो गया.

GCC में क्षेत्रीय विविधता

Colliers ने नोट किया कि GCC की मांग में क्षेत्रीय विविधता स्पष्ट होती जा रही है. अमेरिकी GCC मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी फर्मों द्वारा संचालित हैं, जबकि BFSI (बैंकिंग, फाइनेंस और इंश्योरेंस) कंपनियों की उपस्थिति भी मजबूत बनी हुई है.

यूरोपीय GCC का ध्यान ज्यादातर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग में है, जबकि यूके GCC में BFSI और कंसल्टिंग फर्मों के साथ विविध मिश्रण दिखाई दे रहा है.

Colliers India की नेशनल डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च विमला नादर, ने कहा कि भले ही GCC लीज़िंग टेक्नोलॉजी सेक्टर द्वारा संचालित हो, लेकिन भविष्य में मांग अधिक व्यापक होगी. BFSI और इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग फर्में 2026 में GCC स्पेस अपटेक का 40–50 प्रतिशत योगदान देंगी.

ज्ञान आधारित और उच्च-मूल्य कार्य केंद्र

Colliers ने यह भी कहा कि भारत का GCC इकोसिस्टम अब सिर्फ बैक ऑफिस ऑपरेशन नहीं बल्कि उच्च-मूल्य और ज्ञान-आधारित कार्यों पर केंद्रित है. कुशल प्रतिभा और संरचनात्मक लागत लाभ लंबे समय तक विस्तार की गति बनाए रखने में मदद करेंगे.


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