भारत के वैकल्पिक परिसंपत्ति बाजार में गाजा कैपिटल ने रचा इतिहास

गोपाल जैन ने कहा, हमने 1 लाख रुपये से शुरुआत की थी. आईपीओ के बाद हमारी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये होगी.

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Wednesday, 26 August, 2026
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उर्वी श्रीवास्तव

गाजा कैपिटल ब्रांड के तहत काम करने वाली गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट ने बुधवार को शेयर बाजार में पदार्पण किया. इसके साथ ही यह भारत की पहली सूचीबद्ध वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी बन गई और देश के तेजी से विस्तार कर रहे निजी पूंजी उद्योग में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई.

यह लिस्टिंग गाजा कैपिटल द्वारा भारतीय कारोबारों में निवेश शुरू करने के दो दशक से अधिक समय बाद और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार किए जाने के एक दशक से अधिक समय बाद हुई है.

गाजा कैपिटल की एनएसई लिस्टिंग के दौरान औपचारिक दीप प्रज्वलन

कंपनी ने 550 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के बाद सार्वजनिक बाजार में प्रवेश किया. इसमें 450 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 100 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश शामिल थी. आईपीओ का मूल्य दायरा 152-160 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था. यह आईपीओ 19 अगस्त को अभिदान के लिए खुला और 21 अगस्त को बंद हुआ. बोली प्रक्रिया के अंत तक इसे 31.33 गुना अभिदान मिला.

इस पदार्पण का महत्व केवल निर्गम के आकार से कहीं अधिक है. जहां कई म्यूचुअल फंड से जुड़ी और पारंपरिक वित्तीय सेवा कंपनियां भारत के शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हो चुकी हैं, वहीं यह लिस्टिंग देश के वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली एक नई खिड़की खोलती है.

गाजा कैपिटल ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर अपनी ऐतिहासिक लिस्टिंग दर्ज की

आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज में कॉरपोरेट फाइनेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख पिनाक भट्टाचार्य ने कहा, “कई म्यूचुअल फंड सूचीबद्ध हैं, लेकिन यह स्पष्ट रूप से अपनी तरह की पहली सूचीबद्ध कंपनी है. यह पूरी तरह से घरेलू कंपनी है. टीम ने बड़े स्तर पर लाभप्रदता विकसित की है और कंपनी में शासन तथा बोर्ड की कार्यप्रणालियों का स्तर इसे अलग पहचान देता है.”

एआईएफ नियमों से 13.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा पारिस्थितिकी तंत्र

गाजा कैपिटल की लिस्टिंग भारत के वैकल्पिक निवेश परिदृश्य में आए बदलाव की पृष्ठभूमि में हुई है. सेबी ने 2012 में वैकल्पिक निवेश कोष विनियम पेश किए थे, जिसके तहत निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल और अन्य निजी तौर पर जुटाए गए निवेश माध्यमों को एक निर्धारित नियामकीय ढांचे के तहत लाया गया.

इसके बाद से इस उद्योग का तेजी से विस्तार हुआ है. भारत के एआईएफ उद्योग में प्रतिबद्धताएं 13.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई हैं. इससे वैकल्पिक निवेश भारतीय वित्तीय क्षेत्र के अपेक्षाकृत छोटे खंड से बढ़कर पूंजी के एक महत्वपूर्ण स्रोत में बदल गया है.

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के गैर-कार्यकारी चेयरमैन और सेबी के पूर्व चेयरमैन यू.के. सिन्हा ने कहा, “गाजा दो दशक से अधिक समय से चुपचाप काम कर रहा है. मेरे लिए यह व्यक्तिगत रूप से संतोषजनक है क्योंकि 2012 में, जब मैं सेबी में काम कर रहा था, तब हमने एआईएफ विनियम तैयार किए थे. इससे पहले वैकल्पिक निवेशों से जुड़े नियम स्पष्ट नहीं थे. आज प्रतिबद्धताओं की राशि 13.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. यह कोई सामान्य लिस्टिंग नहीं है. वित्तीय कंपनियों की लिस्टिंग के मामले में भारत अब विकसित दुनिया के साथ कदम मिला चुका है. आज यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के विकास का परिणाम है.”

इस तरह यह लिस्टिंग दो यात्राओं के मिलन को दर्शाती है—एक ओर घरेलू निजी इक्विटी फर्म के रूप में गाजा कैपिटल का एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी में बदलना और दूसरी ओर वैकल्पिक निवेश का भारत की वित्तीय व्यवस्था के एक स्थापित हिस्से के रूप में उभरना.

आईपीओ को मिली मजबूत मांग ने इस प्रस्ताव में निवेशकों की रुचि को भी रेखांकित किया. 550 करोड़ रुपये के इस निर्गम के लिए पेश किए गए शेयरों की तुलना में कई गुना अधिक बोलियां मिलीं और यह 31 गुना से अधिक अभिदान के साथ बंद हुआ.

‘सबसे अच्छी निजी इक्विटी फर्म भारतीय होगी’

गाजा कैपिटल के लिए शेयर बाजार में पदार्पण भारत की उद्यमशील अर्थव्यवस्था के अगले चरण पर भी एक दांव है. खासतौर पर उन कारोबारों के साथ घरेलू पूंजी को जोड़ने का अवसर, जिन्हें विस्तार के लिए वित्त की जरूरत है.

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल जैन ने कहा, “भारत में पूंजी के बिना प्रतिभा है और प्रतिभा के बिना पूंजी है. हमने पिछले 22 वर्षों में पहली समस्या पर काम किया है. अब हम दूसरी समस्या पर काम कर रहे हैं. हमने भारत को एक उद्यमशील अर्थव्यवस्था बनते देखा है. हमारी लिस्टिंग पूंजी तक पहुंच की कमी को दूर करती है.”

भारत के निजी इक्विटी पारिस्थितिकी तंत्र के परिपक्व होने के साथ कंपनी का स्वतंत्र और घरेलू होने पर जोर और महत्वपूर्ण हो जाता है. वैश्विक निजी इक्विटी कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से देश के संस्थागत वैकल्पिक निवेश परिदृश्य में बड़ी भूमिका निभाई है, जबकि भारतीय प्रबंधकों ने धीरे-धीरे बड़े पूंजीगत कोष और निवेश का ट्रैक रिकॉर्ड तैयार किया है.

जैन ने कहा, “हम स्वतंत्र हैं, हम घरेलू हैं. हमारे पास विदेशी उद्योग का हिस्सा बनने के कई अवसर थे. आज से 20 साल बाद सबसे अच्छी निजी इक्विटी फर्म एक भारतीय फर्म होगी.”

यह लिस्टिंग गाजा को खुद भी कारोबारों में निवेश करने वाली कंपनी से बदलकर ऐसा कारोबार बनाती है, जिसमें शेयर बाजार के निवेशक हिस्सेदारी ले सकते हैं. इससे उस उद्योग तक पहुंच व्यापक होती है, जो पारंपरिक रूप से मुख्य रूप से संस्थागत और संपन्न निवेशकों के लिए उपलब्ध रहा है.

दो दशक से अधिक समय पहले मामूली पूंजी से शुरुआत करने वाली कंपनी के लिए यह अवसर प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा. जैन ने कहा, “हमने 1 लाख रुपये से शुरुआत की थी. आईपीओ के बाद हमारी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये होगी.”

आखिरकार यह पदार्पण दलाल स्ट्रीट पर एक और आईपीओ आने से कहीं अधिक है. इसने पहली बार एक घरेलू वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी को भारत के सार्वजनिक बाजार में जगह दी है और इस तरह ऐसी कंपनी, जिसका कारोबार दूसरी कंपनियों में निवेश करने पर आधारित है, खुद सूचीबद्ध कंपनियों की दुनिया का हिस्सा बन गई है.

उर्वी श्रीवास्तव, BW रिपोर्टर्स

(उर्वी श्रीवास्तव बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड में सहायक संपादक हैं, जहां वह शेयर बाजार, सार्वजनिक बाजार, ऊर्जा, सौर ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी खबरें लिखती हैं. उनका काम भारत के आर्थिक और औद्योगिक बदलाव को आगे बढ़ाने वाली गतिविधियों पर केंद्रित है. वह पूंजी प्रवाह, नीतिगत बदलाव और टिकाऊ विकास से जुड़े रुझानों पर नजर रखती हैं.)
 


दूरदर्शन से सैटेलाइट टीवी तक, मार्कंड अधिकारी ने ऐसे बदली भारतीय टेलीविजन की तस्वीर

70 साल के हुए मीडिया दिग्गज मार्कंड अधिकारी, चार दशकों के करियर में टीवी के प्रारूप, अर्थशास्त्र और कारोबार को दिया नया आकार

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
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Wednesday, 26 August, 2026
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भारतीय टेलीविजन के विकास की कहानी कई मायनों में मार्कंड अधिकारी के सफर से भी जुड़ी हुई है. ऐसे दौर में जब भारत में टेलीविजन का मतलब मुख्य रूप से दूरदर्शन था, मार्कंड अधिकारी ने कार्यक्रमों के निर्माण, वित्तपोषण और दर्शकों तक उनकी पहुंच के नए तरीकों पर प्रयोग शुरू कर दिए थे.

26 अगस्त को 70 वर्ष के हुए मार्कंड अधिकारी ने चार दशक से अधिक लंबे अपने करियर में भारतीय टेलीविजन के कई महत्वपूर्ण बदलावों को करीब से देखा और उनमें योगदान दिया. दूरदर्शन के दौर से लेकर सैटेलाइट टेलीविजन, विशेष चैनलों और डिजिटल कंटेंट तक, उन्होंने मीडिया कारोबार में आने वाले बदलावों को मुख्यधारा में आने से पहले पहचानने की क्षमता दिखाई.

अपने दिवंगत भाई गौतम अधिकारी के साथ उन्होंने श्री अधिकारी ब्रदर्स की स्थापना की, जिसे बाद में एसएबी ग्रुप के नाम से जाना गया. परिवार द्वारा संचालित प्रोडक्शन कारोबार से शुरू हुआ यह समूह आगे चलकर टेलीविजन निर्माण, प्रसारण, फिल्मों, वितरण, डिजिटल कंटेंट, विजुअल इफेक्ट्स, प्रकाशन और समाचार एवं समसामयिक मामलों तक फैल गया.

इस विस्तार के केंद्र में दर्शकों की पसंद, कार्यक्रमों के प्रारूप और रचनात्मक कारोबार को टिकाऊ बनाने वाली व्यावसायिक व्यवस्था को समझने की उनकी क्षमता रही.

टेलीविजन के अर्थशास्त्र में बदलाव

मार्कंड अधिकारी के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक दूरदर्शन के दौर में देखने को मिला. 1980 के दशक में श्री अधिकारी ब्रदर्स उन शुरुआती स्वतंत्र प्रोडक्शन हाउस में शामिल था, जिसने सार्वजनिक प्रसारक के लिए व्यावसायिक कार्यक्रम और धारावाहिक तैयार किए.

मार्कंड अधिकारी को भारतीय टेलीविजन पर प्रायोजन आधारित कार्यक्रमों को शुरू करने और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है. उस समय टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्माण और वित्तपोषण का मॉडल अभी विकसित हो रहा था. ऐसे में इस मॉडल ने विज्ञापनदाताओं को सीधे कार्यक्रम निर्माण की व्यवस्था से जोड़ दिया.

यह केवल विज्ञापन के क्षेत्र में बदलाव नहीं था. इससे स्वतंत्र रूप से बनाए जाने वाले टेलीविजन कंटेंट के लिए व्यावसायिक आधार तैयार हुआ और प्रोडक्शन हाउस के लिए कंटेंट के बौद्धिक संपदा अधिकारों को बनाए रखना संभव हुआ. आगे चलकर यह मॉडल भारतीय प्रसारण उद्योग के अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया.

सैटेलाइट टीवी के दौर को पहचाना

मार्कंड अधिकारी और उनके भाई ने यह भी जल्दी समझ लिया था कि टेलीविजन दर्शक आगे चलकर अधिक विविधता की मांग करेंगे. निजी सैटेलाइट प्रसारण के विस्तार के साथ श्री अधिकारी ब्रदर्स शुरुआती प्रोडक्शन हाउस में शामिल रहा, जिसने जी टीवी के लिए फिक्शन और मनोरंजन कार्यक्रम तैयार किए.

इन शुरुआती सफल कार्यक्रमों में ‘कमांडर’ शामिल था, जिसे दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली. कंपनी ने ‘फिलिप्स टॉप 10’ भी बनाया, जिसमें संगीत की उलटी गिनती को कॉमेडी और प्रदर्शन के साथ जोड़ा गया था. इसकी अलग प्रस्तुति ने इसे पारंपरिक संगीत कार्यक्रमों से अलग पहचान दी.

यादगार टेलीविजन प्रारूपों का निर्माण

दूरदर्शन के डीडी मेट्रो के विस्तार ने भी श्री अधिकारी ब्रदर्स के लिए नए अवसर पैदा किए. कंपनी ने 1990 के दशक में भारतीय टेलीविजन के कई लोकप्रिय कार्यक्रमों का निर्माण किया. इनमें ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘ऑल द बेस्ट’ और बाद में ‘हैलो इंस्पेक्टर’ जैसे कार्यक्रम शामिल रहे.

इनमें ‘श्रीमान श्रीमती’ उस दौर के सबसे यादगार हास्य धारावाहिकों में शामिल रहा. इसके किरदार और परिस्थितिजन्य हास्य ने लंबे समय तक दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाए रखी. इसने दिखाया कि मजबूत टेलीविजन बौद्धिक संपदा लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय रह सकती है.

श्री अधिकारी ब्रदर्स ने नियमित धारावाहिकों से आगे भी प्रयोग किए. करीब तीन दशक पहले कंपनी ने मधू और अयूब खान अभिनीत ‘चेहरा’ का निर्माण किया था. यह टेलीविजन के लिए तैयार की गई मूल फीचर फिल्म थी. यह प्रयोग बाद में टेलीविजन नेटवर्क और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर घर बैठे दर्शकों के लिए फिल्में तैयार करने की व्यापक प्रवृत्ति से पहले का कदम था.

विदेशों में भी बनाया कंटेंट

कंपनी का लक्ष्य केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं था. श्री अधिकारी ब्रदर्स शुरुआती भारतीय प्रोडक्शन हाउस में शामिल था, जिसने ब्रिटेन और अमेरिका में टीवी एशिया के लिए मूल फिक्शन कंटेंट तैयार किया. यह उस समय की बात है जब भारतीय प्रवासी दर्शकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंटेंट वितरण अभी सामान्य व्यावसायिक मॉडल नहीं बना था.

1995 में कंपनी ने एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट उपलब्धि हासिल की और भारत की पहली सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध टेलीविजन प्रोडक्शन कंपनी बनी. बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग ने यह संकेत दिया कि टेलीविजन प्रोडक्शन को केवल रचनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि विस्तार योग्य और निवेश योग्य कारोबार के रूप में भी देखा जा सकता है.

कॉमेडी के दम पर बनाया अलग चैनल

साल 2000 में एसएबी टीवी की शुरुआत के साथ समूह ने केवल कार्यक्रम बनाने और बेचने से आगे बढ़कर अपना टेलीविजन चैनल संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया.

उस समय हिंदी सामान्य मनोरंजन टेलीविजन पर पारिवारिक धारावाहिकों और तेजी से लोकप्रिय हो रहे ‘सास-बहू’ प्रारूप का दबदबा था. इसके विपरीत एसएबी टीवी ने हास्य और हल्के-फुल्के मनोरंजन को अपनी पहचान बनाया.

‘ऑफिस ऑफिस’ और ‘यस बॉस’ जैसे कार्यक्रमों ने चैनल को अलग पहचान दिलाई. कॉमेडी पर केंद्रित यह रणनीति इस सोच को दर्शाती थी कि नए चैनल के लिए बड़े खिलाड़ियों की नकल करना जरूरी नहीं है. वह किसी खास विधा और दर्शकों के भावनात्मक जुड़ाव वाले क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाकर भी मजबूत दर्शक आधार तैयार कर सकता है.

2005 में सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन ने एसएबी टीवी का अधिग्रहण कर लिया. इसके बावजूद कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन के साथ चैनल की पहचान आज भी उस मूल रणनीति की सफलता को दर्शाती है.

विशेष दर्शकों के लिए चैनलों पर जोर

मार्कंड अधिकारी ने विशेष प्रसारण मॉडल पर भी प्रयोग जारी रखे. 2006 में शुरू हुआ जनमत एक इंटरैक्टिव और चर्चा आधारित समाचार एवं समसामयिक मामलों का चैनल था.

इसके बाद समूह ने क्षेत्रीय और लक्षित दर्शकों के लिए मी मराठी, मस्ती, दबंग, धमाल और दिल्लगी जैसे उपक्रमों के जरिए प्रसारण कारोबार का विस्तार किया.

इन सभी प्रयासों में एक समान रणनीति दिखाई देती है—ऐसे दर्शक वर्ग या विधा की पहचान करना, जिसकी जरूरत पर्याप्त रूप से पूरी नहीं हो रही थी और फिर उसके लिए स्पष्ट पहचान वाला मंच तैयार करना.

5,000 घंटे से अधिक का कंटेंट संग्रह

समय के साथ श्री अधिकारी ब्रदर्स ने 5,000 घंटे से अधिक का कंटेंट संग्रह तैयार किया. डिजिटल सिंडिकेशन और स्ट्रीमिंग के दौर में पुराने कंटेंट और अभिलेखागार की बढ़ती अहमियत को देखते हुए यह संग्रह सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यावसायिक संपत्ति भी है.

अगस्त 2024 में मार्कंड अधिकारी ने श्री अधिकारी ब्रदर्स टेलीविजन नेटवर्क के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद से हटकर चेयरमैन एमेरिटस की जिम्मेदारी संभाली. यह उनके लंबे करियर के बाद परिचालन जिम्मेदारी के औपचारिक हस्तांतरण का महत्वपूर्ण पड़ाव था.

कार्यक्रमों और चैनलों से कहीं बड़ी है विरासत

मार्कंड अधिकारी की विरासत केवल उनके बनाए कार्यक्रमों या लॉन्च किए गए चैनलों तक सीमित नहीं है. उनका योगदान उन कारोबारी मॉडलों में भी दिखाई देता है, जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ाया. इनमें प्रायोजन आधारित कार्यक्रम, कंटेंट अधिकारों का स्वामित्व, विधा आधारित प्रसारण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंटेंट निर्माण और टेलीविजन प्रोडक्शन को एक संगठित कॉरपोरेट कारोबार के रूप में स्थापित करना शामिल है.

70 वर्ष की उम्र में मार्कंड अधिकारी उस पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिसने केवल भारतीय टेलीविजन के विकास में भाग नहीं लिया, बल्कि उस उद्योग की कई बुनियादी संरचनाओं को आकार देने में भी भूमिका निभाई.

दूरदर्शन से सैटेलाइट प्रसारण और सामान्य मनोरंजन से विशेष चैनलों तक, उनके करियर की सबसे बड़ी खासियत नए अवसरों को दूसरों से पहले पहचानने की रही है.

तकनीक से लगातार बदलते मीडिया उद्योग में, जहां कहानियां आज भी कारोबार की बुनियाद हैं, बदलाव को समय से पहले पहचानने की यही क्षमता मार्कंड अधिकारी की सबसे स्थायी विरासत मानी जा सकती है.
 


भारत में तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर बाजार, 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट होगा फुटप्रिंट: रिपोर्ट

भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. Anarock Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक पहुंच सकता है. वहीं, अगले चरण के विस्तार के लिए 300 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
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Wednesday, 26 August, 2026
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भारत का डेटा सेंटर उद्योग अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है. देश में डेटा की खपत और उत्पादन बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. Anarock Capital की रिपोर्ट ‘डेटा सेंटर: द ब्लूप्रिंट ऑफ द डिजिटल फोर्ट्रेस इन इंडिया’ के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक हो सकता है. 2007 में यह महज 0.6 मिलियन वर्ग फुट था, जो H1 2026 तक बढ़कर करीब 27 मिलियन वर्ग फुट हो गया है. आगामी आपूर्ति और विस्तार को 300 अरब डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताओं से समर्थन मिलने की उम्मीद है.

H1 2026 तक डेटा सेंटर क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक

रिपोर्ट के मुताबिक, H1 2026 तक भारत में डेटा सेंटर की आईटी क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक हो चुकी है. अगले चार वर्षों में विकासाधीन परियोजनाओं के कारण यह क्षमता 6.7 गीगावाट से अधिक हो सकती है, यानी मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब तीन गुना वृद्धि की संभावना है.

Anarock Capital के सीईओ शोभित अग्रवाल के अनुसार, 101 मिलियन वर्ग फुट का अनुमानित डेटा सेंटर फुटप्रिंट रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े अवसर को दर्शाता है. डेटा सेंटर सामान्य कार्यालय या औद्योगिक परियोजनाओं से अलग होते हैं, क्योंकि इनके लिए बड़े भूखंड, पर्याप्त बिजली क्षमता, आधुनिक कूलिंग सिस्टम, मजबूत कनेक्टिविटी और उच्च स्तर की परिचालन क्षमता जरूरी होती है.

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर का विस्तार केवल अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र की मांग नहीं पैदा करेगा, बल्कि यह रियल एस्टेट, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम पर स्थित एक विशेष एसेट क्लास के रूप में विकसित होगा. इसके साथ रणनीतिक स्थानों पर जमीन, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग एवं निर्माण सेवाओं, फाइबर कनेक्टिविटी और विशेष कूलिंग समाधानों की मांग भी बढ़ेगी.

मुंबई-एमएमआर सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब

भारत में मुंबई-एमएमआर डेटा सेंटर का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. क्षेत्र में 54 परिचालन डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 812 मेगावाट है. इसके बाद चेन्नई का स्थान है, जहां 25 डेटा सेंटर और 298 मेगावाट की क्षमता है.

दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 18-18 परिचालन डेटा सेंटर हैं. इनकी आईटी क्षमता क्रमशः 179 मेगावाट और 137 मेगावाट है. वहीं, हैदराबाद में 12 डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 178 मेगावाट है. 

इन डेटा सेंटर क्लस्टर्स के विकास में जमीन और बिजली की उपलब्धता, नेटवर्क कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच और प्रमुख मांग केंद्रों से नजदीकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इससे स्थापित डेटा सेंटर हब के अलावा अन्य शहरों में भी रियल एस्टेट विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. 

एआई बढ़ाएगा डेटा सेंटर की मांग

रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को डेटा सेंटर की मौजूदा और भविष्य की मांग के प्रमुख कारकों में से एक बताया गया है. एआई मॉडल को पारंपरिक डिजिटल एप्लीकेशन की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग पावर, स्टोरेज क्षमता और ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की डिजाइन और इंजीनियरिंग जरूरतें भी बदलेंगी. 

पावर, जमीन और कनेक्टिविटी सबसे बड़ी जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर उद्योग के अगले चरण की वृद्धि मुख्य रूप से बिजली, जमीन और कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी. विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, उपयुक्त जमीन, तेज कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता यह तय करेगी कि भविष्य में डेटा सेंटर क्षमता कहां विकसित की जाएगी. 

इस विस्तार का असर केवल डेटा सेंटर उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा. रिपोर्ट के अनुसार, इससे भारत के प्रमुख डिजिटल बाजारों में जमीन के इस्तेमाल के तरीके, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और पूरे कमर्शियल रियल एस्टेट परिदृश्य में भी बदलाव आने की संभावना है. 
 

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₹30,000 करोड़ के 6 बड़े प्रोजेक्ट्स की PM मोदी ने की समीक्षा, बोले- रफ्तार के साथ क्वालिटी भी जरूरी

PRAGATI बैठक में प्रधानमंत्री का सख्त निर्देश, 9 राज्यों में चल रही इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर दिया जोर

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Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली छह बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की. उन्होंने परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया. 53वीं PRAGATI बैठक में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी इन परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के निर्देश दिए.

9 राज्यों में फैली परियोजनाओं की समीक्षा

सेवा तीर्थ में हुई बैठक में 9 राज्यों में चल रही छह परियोजनाओं की समीक्षा की गई. इस दौरान परियोजनाओं की समय-सीमा, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और लंबित मुद्दों के समाधान पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं के हर चरण में गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा.

देरी से बढ़ती है लागत, टलते हैं आर्थिक फायदे

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी का असर सिर्फ लागत बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे नागरिकों, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं. उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर प्रो-एक्टिव तरीके से काम करने और हर स्तर पर अधिक जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई.

उन्होंने कहा कि किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के तौर पर नहीं, बल्कि एक एकीकृत परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए. अलग-अलग हिस्सों में हुई प्रगति का अंतिम लक्ष्य पूरी परियोजना को समय पर पूरा कर उसे परिचालन में लाना होना चाहिए.

बड़े प्रोजेक्ट्स में कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर पर जोर

प्रधानमंत्री ने बड़े परिवहन प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव होने पर कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावनाओं का आकलन करने को भी कहा. इससे अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं के लिए बेहतर समन्वित व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है.

एग्रीस्टैक में AI के इस्तेमाल पर जोर

बैठक में एग्रीस्टैक की भी समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इनपुट की योजना बनाने से लेकर कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन में डेटा इकोसिस्टम का बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए. इससे किसानों और अन्य हितधारकों तक सही लाभ पहुंचाने और डेटा आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी.

साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता अभियान बढ़ाने के निर्देश

प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता, शिक्षा और प्रशिक्षण पर लगातार काम करने की जरूरत है. खासतौर पर बुजुर्गों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए लक्षित जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया. उन्होंने साइबर अपराध से निपटने वाले कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग की जरूरत भी बताई, ताकि वे फ्रॉड के बदलते तरीकों की पहचान कर सकें और मामलों पर तेजी से कार्रवाई कर सकें.
 


होर्मुज संकट के बीच भारत का मास्टरप्लान, खाड़ी से घटा गैस आयात तो अमेरिका से बढ़ाई खरीद

जलडमरूमध्य में संकट से खाड़ी देशों से गैस सप्लाई प्रभावित, अगस्त में अमेरिका से 0.62 मिलियन टन LPG और 0.75 मिलियन टन LNG का आयात

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Published - Wednesday, 26 August, 2026
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Wednesday, 26 August, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत ने अपनी गैस सप्लाई रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका से LPG और LNG का आयात बढ़ा दिया है. केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की, जबकि LNG के मामले में भी अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन की खरीद हुई. वहीं, कच्चे तेल के मोर्चे पर रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है.

अमेरिका बना LPG का बड़ा सप्लायर

अमेरिका से भारत की LPG खरीद में हाल के महीनों में तेजी आई है. अगस्त में अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की गई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 0.89 मिलियन टन था. केपलर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अमेरिका से हुई LPG खरीद भारत के कुल LPG आयात का 73 फीसदी से अधिक रही. इसके उलट खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है. अगस्त में UAE से भारत को सिर्फ करीब 1.40 लाख टन LPG मिली. कतर से करीब 60 हजार टन की सप्लाई हुई, जबकि सऊदी अरब से जुलाई और अगस्त में कोई सप्लाई नहीं हुई.

LNG सप्लाई में भी बदला समीकरण

LNG के मामले में भी भारत ने अमेरिका की ओर रुख बढ़ाया है. कतर से LNG की सप्लाई अप्रैल में शून्य हो गई थी, जबकि अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन LNG खरीदी. इससे साफ है कि पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत वैकल्पिक स्रोतों से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है.

अमेरिका से गैस मंगाना पड़ रहा महंगा

खाड़ी देशों की तुलना में अमेरिका से लंबी दूरी से गैस आयात करने का असर लागत पर भी पड़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबी दूरी की समुद्री सप्लाई में मालभाड़ा और बीमा लागत अधिक होती है. इसके अलावा वैश्विक बाजार में गैस की सप्लाई सीमित होने से कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है.

ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन में यह बदलाव तुरंत नहीं होता, क्योंकि ऊर्जा व्यापार में पहले से किए गए दीर्घकालिक अनुबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

कच्चे तेल के लिए रूस पर भरोसा कायम

LPG और LNG के लिए अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाने के बावजूद कच्चे तेल के मामले में भारत की रूस पर निर्भरता बनी हुई है. अगस्त में भारत ने रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया. यह मात्रा दूसरे सबसे बड़े सप्लायर UAE से करीब तीन गुना अधिक रही.

जानकारों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में रूसी कच्चे तेल को पूरी तरह दूसरे स्रोतों से बदलना भारत के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से मुश्किल है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर पाइपलाइन और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण UAE से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई भी काफी हद तक स्थिर बनी हुई है.

वेनेजुएला से भी बढ़ा कच्चे तेल का आयात

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत वेनेजुएला भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है. अगस्त में भारत ने वेनेजुएला से करीब 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया.

वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयोगी माना जाता है. हालांकि, अमेरिकी रिफाइनरियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इसकी उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है.

एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता घटाने की कोशिश

पश्चिम एशिया के संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में सप्लाई स्रोतों का विविधीकरण तेज करने के लिए मजबूर किया है. LPG और LNG के लिए अमेरिका, कच्चे तेल के लिए रूस और UAE तथा अतिरिक्त विकल्प के तौर पर वेनेजुएला से आयात बढ़ाकर भारत एक व्यापक ऊर्जा सप्लाई नेटवर्क तैयार कर रहा है. इससे किसी एक क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
 


मैक्स फाइनेंशियल-एक्सिस बैंक को बड़ी राहत, सेबी ने 3,912 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले की जांच की खत्म

2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए लेनदेन की हुई थी जांच, बीमा कमीशन की सीमा से बचने और शेयरधारकों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की हुई थी पड़ताल

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MFSL), एक्सिस बैंक और अन्य संस्थाओं के खिलाफ 3,911.95 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कार्यवाही खारिज कर दी है. यह मामला मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों से जुड़े लेनदेन से संबंधित था. सेबी ने कहा कि प्रतिभूति धोखाधड़ी, शेयरधारकों को गलत तरीके से निवेश के लिए प्रेरित करने या MFSL के शेयर मूल्य में हेरफेर के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले.

2010 से 2021 तक के लेनदेन की जांच

इस मामले में 2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए कई इक्विटी लेनदेन की जांच की गई थी. नियामक ने यह भी जांच की कि क्या इन लेनदेन की संरचना बीमा कमीशन पर लागू सीमा से बचने के लिए तैयार की गई थी और क्या इससे MFSL के शेयरधारकों को नुकसान हुआ. सेबी की कार्यवाही में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस कैपिटल, एक्सिस सिक्योरिटीज और कंपनियों के कुछ प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों को भी शामिल किया गया था.

IRDAI की कार्रवाई के बाद शुरू हुई थी जांच

सेबी की जांच नवंबर 2022 में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की ओर से मिली जानकारी के बाद शुरू हुई थी. यह जानकारी मैक्स लाइफ के गैर-सूचीबद्ध शेयरों से जुड़े लेनदेन को लेकर दी गई थी. इससे पहले IRDAI ने कुछ लेनदेन में बीमा कमीशन की निर्धारित सीमा से बचने का मामला पाए जाने के बाद एक्सिस बैंक पर 2 करोड़ रुपये और मैक्स लाइफ पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

मामले के अनुसार, एक्सिस बैंक को मैक्स लाइफ के शेयर 10 रुपये के अंकित मूल्य पर मिले थे. इसके बाद MFSL और उसके साझेदारों ने उचित बाजार मूल्य के आधार पर 54 रुपये से 166 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर इन शेयरों को दोबारा खरीदा था.

सेबी के कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि ये लेनदेन एक्सिस बैंक को बैंकएश्योरेंस साझेदारी के लिए मुआवजा देने वाली एक व्यापक व्यवस्था का हिस्सा थे. इससे MFSL को कथित तौर पर 3,911.95 करोड़ रुपये का नुकसान और एक्सिस समूह की संस्थाओं को लाभ होने का आरोप था.

प्रतिभूति कानून के तहत धोखाधड़ी के सबूत नहीं मिले

सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि बीमा क्षेत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन या उनसे बचने की कोशिश अपने आप में प्रतिभूति कानूनों के तहत धोखाधड़ी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. नियामक को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि शेयरधारकों को गलत जानकारी के आधार पर शेयरों में कारोबार करने के लिए प्रेरित किया गया था या MFSL के शेयर मूल्य में कृत्रिम तरीके से हेरफेर किया गया.

खुलासे से जुड़े आरोप भी खारिज

सेबी ने 2010 और 2015 में किए गए समझौतों से जुड़े पुट और कॉल विकल्पों की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने के आरोपों की भी जांच की. नियामक के अनुसार, शुरुआती कुछ खुलासों में लेनदेन की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, लेकिन उस समय लागू नियमों के आधार पर इसकी समीक्षा की गई.

दिसंबर 2015 से पहले के लेनदेन उस समय लागू लिस्टिंग एग्रीमेंट के तहत आते थे. इसमें बाद में लागू हुए लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों की तरह मात्रात्मक महत्वपूर्णता की सीमा तय नहीं थी.

सेबी ने इन आरोपों से जुड़ी कार्यवाही भी खत्म कर दी. नियामक ने कहा कि कारण बताओ नोटिस में यह स्थापित नहीं किया गया था कि कथित तौर पर छूटी हुई जानकारी का MFSL के कारोबार या शेयर के मूल्य निर्धारण पर क्या प्रभाव पड़ा. मुख्य धोखाधड़ी और खुलासे से जुड़े आरोप साबित नहीं होने के बाद सेबी ने मामले में नामित प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी खारिज कर दी.
 


नेक्सएज कैपिटल ने जुटाए 2 करोड़ डॉलर, भारत के छोटे शहरों में बढ़ाएगी वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का दायरा

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में कारोबार बढ़ाने और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म मजबूत करने पर करेगी निवेश

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
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नेक्सएज कैपिटल (Nexedge Capital) ने अपने पहले फंडिंग राउंड में 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 170 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Mirae Asset Venture Investment और Elev8 Venture Partners ने किया. वेल्थ मैनेजमेंट और मल्टी-फैमिली ऑफिस कंपनी Nexedge Capital इस पूंजी का इस्तेमाल भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगी.

टेक्नोलॉजी और वरिष्ठ बैंकर नेटवर्क पर जोर

कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, वरिष्ठ बैंकरों के नेटवर्क का विस्तार करने और देशभर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा कंपनी एनआरआई ग्राहकों के लिए एक समर्पित सेवा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) कारोबार जैसे नए पूरक व्यवसाय भी विकसित करेगी. Nexedge Capital ग्राहकों की जरूरतों और लक्ष्यों के आधार पर वित्तीय निवेश एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन, एस्टेट प्लानिंग, कारोबार विस्तार और वैश्विक मोबिलिटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है.

18 महीने में 3 अरब डॉलर से ज्यादा का AUM

कंपनी के अनुसार, स्थापना के महज 18 महीने में Nexedge Capital का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 3 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. कंपनी करीब 1,300 ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. इसके अलावा कंपनी ने 95 से ज्यादा वरिष्ठ बैंकरों को अपने साथ जोड़ा है, जबकि 2026 में 50-60 और वरिष्ठ बैंकरों के जुड़ने की उम्मीद है. Nexedge Capital के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिरुद्ध तापड़िया ने कहा कि नई पूंजी से कंपनी बैंकरों की नियुक्ति तेज करने, देशभर में वितरण नेटवर्क मजबूत करने और अधिक परिवारों तक अपनी नेट वर्थ एडवाइजरी सेवाएं पहुंचाने में सक्षम होगी.

फरवरी 2025 में हुई थी कंपनी की स्थापना

Nexedge Capital की स्थापना अनिरुद्ध तापड़िया ने फरवरी 2025 में की थी. इससे पहले वह 360 ONE Wealth के सह-संस्थापक और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं. कंपनी के अन्य सह-संस्थापकों में सिद्धार्थ शॉ, विजेता शर्मा और पंकज वालिया शामिल हैं. इनके साथ 15 संस्थापक साझेदारों की टीम भी है, जिनके पास Citibank, Kotak Wealth, 360 One और Standard Chartered जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव है.

भारत के HNI और UHNI बाजार पर नजर

Mirae Asset Venture Investment के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत कुमार ने कहा कि कंपनी Nexedge Capital के ओनरशिप मॉडल को देखते हुए उसमें निवेश कर रही है. वहीं, Elev8 Venture Partners के मैनेजिंग पार्टनर नवीन होनागुड़ी ने कहा कि भारत में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (UHNI) सेगमेंट की संपत्ति लंबे समय तक बढ़ने के दौर की शुरुआत में है.
 


शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 287 अंक उछला; आज इन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर

मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
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Wednesday, 26 August, 2026
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भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए मजबूत वापसी की. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसला था और निफ्टी भी 24,150 के नीचे खुला था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बाजार में खरीदारी लौटी. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया. आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर मंगलवार की तेजी के बाद बाजार की आगे की दिशा, वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और प्रमुख शेयरों से जुड़े अपडेट पर रहेगी.

सेंसेक्स के 24 शेयरों में तेजी

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि छह शेयरों में गिरावट रही. इंडिगो 2.05 फीसदी की तेजी के साथ 5,220 रुपये पर बंद हुआ और सेंसेक्स का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा. अडाणी पोर्ट्स में 1.19 फीसदी, इंफोसिस में 1.15 फीसदी और ट्रेंट में 1.10 फीसदी की तेजी रही. इसके अलावा टाइटन 0.98 फीसदी, एसबीआई 0.87 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.84 फीसदी, टेक महिंद्रा 0.76 फीसदी, आईटीसी 0.74 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.64 फीसदी चढ़कर बंद हुए.

इन शेयरों में रही गिरावट

दूसरी ओर, इटरनल में 0.85 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. एचसीएल टेक 0.68 फीसदी, पावरग्रिड 0.53 फीसदी, बजाज फिनसर्व 0.29 फीसदी, एचडीएफसी बैंक 0.26 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर 0.15 फीसदी गिरकर बंद हुए.

रुपये में भी दिखी मजबूती

मंगलवार को भारतीय रुपये में भी सुधार देखने को मिला. दोपहर करीब 3:30 बजे रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी मजबूत होकर 95.4075 के स्तर पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.7450 के स्तर पर बंद हुआ था.

आज बाजार की दिशा के लिए अहम होंगे ये संकेत

मंगलवार की तेजी के बाद बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के संकेतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट पर रहेगी. मंगलवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली थी, ऐसे में आज यह देखना अहम होगा कि यह तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार में मुनाफावसूली का दबाव आता है.

इन शेयरों पर रखें नजर
शेयर बाजार में आज कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट के चलते Hindustan Copper, Honasa Consumer, Axis Bank, Canara HSBC Life Insurance, Ather Energy, Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, UCO Bank, Welspun Corp, Cipla, United Breweries और Varun Beverages समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. Hindustan Copper में सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) का ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त 2.9 करोड़ शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए हैं, जिससे OFS का कुल आकार 5.8 करोड़ शेयर यानी करीब 6% हिस्सेदारी हो गया है. Honasa Consumer ने Fluence Pharma में 58% हिस्सेदारी खरीदने की प्रस्तावित डील रद्द कर दी है. Axis Bank, Axis Securities और Axis Capital से जुड़े मामले में SEBI ने कार्यवाही समाप्त कर दी है.

Canara HSBC Life Insurance ने HSBC के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत GIFT City के जरिए बीमा उत्पादों के वितरण को बढ़ावा दिया जाएगा. Ather Energy के बोर्ड ने 16 लाख शेयर ₹1,230 प्रति शेयर और 79 लाख वारंट ₹1,260 प्रति वारंट के भाव पर आवंटित करने को मंजूरी दी है. Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में Ribbit Capital करीब 1.6% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है, जिसका संभावित आकार करीब ₹1,914 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹195 प्रति शेयर है. UCO Bank में वित्त मंत्रालय ने Executive Director राजेंद्र कुमार साबू को MD & CEO का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. Welspun Investments & Commercials और कंपनी के MD & CEO Vipul Mathur Welspun Corp में करीब 63 लाख शेयर यानी लगभग 2.4% हिस्सेदारी बेच सकते हैं, जिसकी संभावित ब्लॉक डील करीब ₹1,417 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹2,250 प्रति शेयर है. Cipla की Pithampur मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में USFDA ने 17 से 25 अगस्त के बीच फॉलो-अप cGMP निरीक्षण किया, जिसके बाद कंपनी को Form 483 में सात टिप्पणियां मिली हैं. United Breweries ने Heineken Silver का विस्तार Kerala, Odisha और Madhya Pradesh में करने की घोषणा की है. वहीं, Varun Beverages ने RTD अल्कोहलिक बेवरेज कारोबार के लिए KIVA Spirits and Company नाम से नई सब्सिडियरी बनाने और Tunisia में एक जॉइंट वेंचर स्थापित करने की घोषणा की है.
 


अमेजन, स्विगी-इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर सख्ती, धतूरे की बिक्री के चलते फूड लाइसेंस सस्पेंड

कर्नाटक FDA का बड़ा एक्शन, प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट मिलने के बाद उठाया कदम

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग को लेकर कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने अमेजन (Amazon), स्विगी-इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और बिगबास्केटस (BigBasket) के फूड लाइसेंस अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिए हैं. यह कार्रवाई इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे (Datura/Thorn Apple) के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट किए जाने और उनकी बिक्री से जुड़ी शिकायतों के बाद की गई है. विभाग ने तीनों प्लेटफॉर्म्स को धतूरे से संबंधित सभी लिस्टिंग और विज्ञापन तत्काल हटाने तथा इसकी खाद्य उत्पाद के तौर पर बिक्री और वितरण रोकने का निर्देश दिया है.

धतूरे की लिस्टिंग पर सरकार सख्त

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक FDA ने तीनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके फूड लाइसेंस सस्पेंड किए हैं. विभाग ने प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सभी लिस्टिंग और विज्ञापन हटाने को कहा है, जिनमें धतूरे के फल या बीजों को इंसानों के खाने के लिए उपलब्ध कराया गया था. FDA के निर्देश के अनुसार, अगले आदेश तक इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे को खाद्य उत्पाद के रूप में बेचने या वितरित करने की अनुमति नहीं होगी. विभाग ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि ऐसी प्रतिबंधित लिस्टिंग दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न हों.

खाने के लिए प्रतिबंधित है धतूरा

धतूरे को अंग्रेजी में ‘Thorn Apple’ कहा जाता है. यह एक जहरीला पौधा है, जिसके फल और बीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, इसका सेवन विषाक्तता का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है. कर्नाटक FDA के अनुसार, धतूरे के फल और बीजों को इंसानों के खाने के लिए खाद्य पदार्थ के तौर पर रखना, बेचना या वितरित करना प्रतिबंधित है. इसी वजह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसकी खाद्य उत्पाद के रूप में लिस्टिंग को गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघन माना गया है.

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध उत्पादों की निगरानी और उनकी लिस्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. बड़ी संख्या में उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तुओं की पहचान और उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है. कर्नाटक FDA की कार्रवाई इसी निगरानी व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत मानी जा रही है.
 


L&T को दो हफ्तों में मिले ₹40,000 करोड़ के ऑर्डर, मिडिल ईस्ट से AI तक बढ़ा ग्लोबल दबदबा

गैस कंप्रेशन, बैटरी स्टोरेज और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट; अकेले मिडिल ईस्ट से करीब ₹25,000 करोड़ के ऑर्डर

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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देश की दिग्गज इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने महज दो हफ्तों में करीब 40,000 करोड़ रुपये के बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं. कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट मिडिल ईस्ट के बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर तक के लिए मिले हैं. इनमें करीब 25,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिडिल ईस्ट से जुड़े हैं, जबकि अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई में बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का ऑर्डर भी शामिल है. लगातार मिल रहे इन बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स से L&T की ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने के साथ ही वैश्विक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है.

मिडिल ईस्ट में ₹5,000-10,000 करोड़ का बैटरी स्टोरेज ऑर्डर

L&T को मिडिल ईस्ट में तीन Battery Energy Storage System (BESS) प्रोजेक्ट्स के लिए 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. इन परियोजनाओं की कुल स्टोरेज क्षमता 6 GWh होगी. कंपनी इन प्रोजेक्ट्स के लिए पावर ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए सब-स्टेशन और अंडरग्राउंड केबल समेत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेगी. प्रत्येक प्रोजेक्ट में चार घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता होगी.

इन बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल कम मांग के दौरान अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने और पीक डिमांड के समय उसकी आपूर्ति के लिए किया जाएगा. इससे पावर ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. प्रोजेक्ट्स में लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.

₹15,000 करोड़ से ज्यादा का अल्ट्रा-मेगा गैस प्रोजेक्ट

इससे पहले L&T को खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े क्लाइंट के लिए गैस कंप्रेशन प्रोजेक्ट का अल्ट्रा-मेगा कॉन्ट्रैक्ट मिला था. L&T 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर को अल्ट्रा-मेगा कैटेगरी में रखती है. यह ऑर्डर कंपनी की सब्सिडियरी L&T Energy Hydrocarbon Onshore को मिला है.

इसके तहत कंपनी सॉर गैस की प्रोसेसिंग के लिए नए ऑनशोर इंस्टॉलेशन में गैस कंप्रेशन प्लांट के इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) का काम करेगी. प्रोजेक्ट में गैस इनलेट सुविधाओं, कंप्रेशन सिस्टम, कंडेनसेट और प्रोड्यूस्ड-वॉटर हैंडलिंग सिस्टम तथा प्रोपेन रेफ्रिजरेशन सिस्टम समेत कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

Together AI के लिए बनाएगी भारत की बड़ी AI फैक्ट्री

L&T ने 13 अगस्त को बताया था कि उसे भारत का सबसे बड़ा सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का बड़ा ऑर्डर मिला है. इसके तहत अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई स्थित L&T डेटा सेंटर कैंपस में 10,000 NVIDIA B300 GPU लगाए जाएंगे. इस ऑर्डर की वैल्यू 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये के बीच है.

यह प्रोजेक्ट AI इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में L&T की महत्वपूर्ण एंट्री मानी जा रही है. इस AI फैक्ट्री को L&T की AI इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडियरी LTN Compute विकसित करेगी और इसे Vyoma के चेन्नई डेटा सेंटर कैंपस में स्थापित किया जाएगा.

चेन्नई कैंपस को गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर साइट के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसके पहले चरण को 250 मेगावाट क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें 150 MVA का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है. इससे भविष्य में AI फैक्ट्री की क्षमता को और बढ़ाने की गुंजाइश रहेगी.

ग्लोबल कारोबार में बढ़ रही L&T की पकड़

लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर से साफ है कि L&T की पहुंच पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से आगे बढ़कर एनर्जी स्टोरेज, डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों तक पहुंच रही है. मिडिल ईस्ट में ऊर्जा परियोजनाओं और भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए लंबी अवधि में ऑर्डर बुक और कारोबार की ग्रोथ को मजबूत कर सकते हैं.
 


मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत! सेमीकंडक्टर-ऑटो कंपनियों के नियम होंगे आसान, 60 दिनों में लागू होगा नया फ्रेमवर्क

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे.

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे. सरकार का यह कदम देश में निवेश बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

60 दिनों में बदलेंगे नियम

पीयूष गोयल ने टोक्यो में ‘निक्केई एशिया’ के साथ बातचीत में कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की इच्छुक दो बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ हाल में बातचीत हुई है. कंपनियों की ओर से नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को लेकर जताई गई चिंताओं का समाधान किया गया है. सरकार अब अगले दो महीनों में जरूरी नियमों में बदलाव कर उन्हें लागू करेगी, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को किसी तरह की नियामकीय बाधा का सामना न करना पड़े.

BIS की मंजूरी प्रक्रिया होगी आसान

सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मौजूदा फ्रेमवर्क को भी आसान बनाने पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को सरल और तेज करना है. सरकार ऐसे सप्लायर्स से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रही है, जो मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग मानकों के दायरे में आते हैं.

गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग की वास्तविक जरूरतों और निष्पक्ष व्यापार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कंपनियां केवल दूसरे देशों से उत्पाद आयात करने की मांग कर सकती हैं, लेकिन ऐसी मांगों पर फैसला घरेलू उद्योग और निष्पक्ष व्यापार को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.

सेमीकॉन 2.0 से 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य

सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है. इसके तहत सरकार की योजना निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अगले डेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और इससे जुड़े उद्योगों में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश शुरू कराने की है.

सरकार का मानना है कि आसान रेगुलेशन, तेज मंजूरी और बड़े निवेश से भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ऑटोमोटिव कंपोनेंट और इससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में भी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन सकता है.

‘प्लस वन’ रणनीति से आगे बढ़ने की कोशिश

भारत अब खुद को केवल कंपनियों के ‘चाइना प्लस वन’ विकल्प के तौर पर सीमित नहीं रखना चाहता. सरकार की कोशिश है कि देश में ऐसी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन तैयार हो, जो वैश्विक कंपनियों को लंबे समय के लिए भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए आकर्षित करे.

पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा पहल के बाद सरकार आगे ‘सेमीकंडक्टर 3.0’ की दिशा में भी बढ़ सकती है.
 

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