नेक्सएज कैपिटल ने जुटाए 2 करोड़ डॉलर, भारत के छोटे शहरों में बढ़ाएगी वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का दायरा

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में कारोबार बढ़ाने और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म मजबूत करने पर करेगी निवेश

Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
BWHindi

नेक्सएज कैपिटल (Nexedge Capital) ने अपने पहले फंडिंग राउंड में 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 170 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Mirae Asset Venture Investment और Elev8 Venture Partners ने किया. वेल्थ मैनेजमेंट और मल्टी-फैमिली ऑफिस कंपनी Nexedge Capital इस पूंजी का इस्तेमाल भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगी.

टेक्नोलॉजी और वरिष्ठ बैंकर नेटवर्क पर जोर

कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, वरिष्ठ बैंकरों के नेटवर्क का विस्तार करने और देशभर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा कंपनी एनआरआई ग्राहकों के लिए एक समर्पित सेवा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) कारोबार जैसे नए पूरक व्यवसाय भी विकसित करेगी. Nexedge Capital ग्राहकों की जरूरतों और लक्ष्यों के आधार पर वित्तीय निवेश एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन, एस्टेट प्लानिंग, कारोबार विस्तार और वैश्विक मोबिलिटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है.

18 महीने में 3 अरब डॉलर से ज्यादा का AUM

कंपनी के अनुसार, स्थापना के महज 18 महीने में Nexedge Capital का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 3 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. कंपनी करीब 1,300 ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. इसके अलावा कंपनी ने 95 से ज्यादा वरिष्ठ बैंकरों को अपने साथ जोड़ा है, जबकि 2026 में 50-60 और वरिष्ठ बैंकरों के जुड़ने की उम्मीद है. Nexedge Capital के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिरुद्ध तापड़िया ने कहा कि नई पूंजी से कंपनी बैंकरों की नियुक्ति तेज करने, देशभर में वितरण नेटवर्क मजबूत करने और अधिक परिवारों तक अपनी नेट वर्थ एडवाइजरी सेवाएं पहुंचाने में सक्षम होगी.

फरवरी 2025 में हुई थी कंपनी की स्थापना

Nexedge Capital की स्थापना अनिरुद्ध तापड़िया ने फरवरी 2025 में की थी. इससे पहले वह 360 ONE Wealth के सह-संस्थापक और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं. कंपनी के अन्य सह-संस्थापकों में सिद्धार्थ शॉ, विजेता शर्मा और पंकज वालिया शामिल हैं. इनके साथ 15 संस्थापक साझेदारों की टीम भी है, जिनके पास Citibank, Kotak Wealth, 360 One और Standard Chartered जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव है.

भारत के HNI और UHNI बाजार पर नजर

Mirae Asset Venture Investment के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत कुमार ने कहा कि कंपनी Nexedge Capital के ओनरशिप मॉडल को देखते हुए उसमें निवेश कर रही है. वहीं, Elev8 Venture Partners के मैनेजिंग पार्टनर नवीन होनागुड़ी ने कहा कि भारत में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (UHNI) सेगमेंट की संपत्ति लंबे समय तक बढ़ने के दौर की शुरुआत में है.
 


शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 287 अंक उछला; आज इन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर

मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए मजबूत वापसी की. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसला था और निफ्टी भी 24,150 के नीचे खुला था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बाजार में खरीदारी लौटी. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया. आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर मंगलवार की तेजी के बाद बाजार की आगे की दिशा, वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और प्रमुख शेयरों से जुड़े अपडेट पर रहेगी.

सेंसेक्स के 24 शेयरों में तेजी

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि छह शेयरों में गिरावट रही. इंडिगो 2.05 फीसदी की तेजी के साथ 5,220 रुपये पर बंद हुआ और सेंसेक्स का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा. अडाणी पोर्ट्स में 1.19 फीसदी, इंफोसिस में 1.15 फीसदी और ट्रेंट में 1.10 फीसदी की तेजी रही. इसके अलावा टाइटन 0.98 फीसदी, एसबीआई 0.87 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.84 फीसदी, टेक महिंद्रा 0.76 फीसदी, आईटीसी 0.74 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.64 फीसदी चढ़कर बंद हुए.

इन शेयरों में रही गिरावट

दूसरी ओर, इटरनल में 0.85 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. एचसीएल टेक 0.68 फीसदी, पावरग्रिड 0.53 फीसदी, बजाज फिनसर्व 0.29 फीसदी, एचडीएफसी बैंक 0.26 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर 0.15 फीसदी गिरकर बंद हुए.

रुपये में भी दिखी मजबूती

मंगलवार को भारतीय रुपये में भी सुधार देखने को मिला. दोपहर करीब 3:30 बजे रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी मजबूत होकर 95.4075 के स्तर पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.7450 के स्तर पर बंद हुआ था.

आज बाजार की दिशा के लिए अहम होंगे ये संकेत

मंगलवार की तेजी के बाद बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के संकेतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट पर रहेगी. मंगलवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली थी, ऐसे में आज यह देखना अहम होगा कि यह तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार में मुनाफावसूली का दबाव आता है.

इन शेयरों पर रखें नजर
शेयर बाजार में आज कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट के चलते Hindustan Copper, Honasa Consumer, Axis Bank, Canara HSBC Life Insurance, Ather Energy, Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, UCO Bank, Welspun Corp, Cipla, United Breweries और Varun Beverages समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. Hindustan Copper में सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) का ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त 2.9 करोड़ शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए हैं, जिससे OFS का कुल आकार 5.8 करोड़ शेयर यानी करीब 6% हिस्सेदारी हो गया है. Honasa Consumer ने Fluence Pharma में 58% हिस्सेदारी खरीदने की प्रस्तावित डील रद्द कर दी है. Axis Bank, Axis Securities और Axis Capital से जुड़े मामले में SEBI ने कार्यवाही समाप्त कर दी है.

Canara HSBC Life Insurance ने HSBC के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत GIFT City के जरिए बीमा उत्पादों के वितरण को बढ़ावा दिया जाएगा. Ather Energy के बोर्ड ने 16 लाख शेयर ₹1,230 प्रति शेयर और 79 लाख वारंट ₹1,260 प्रति वारंट के भाव पर आवंटित करने को मंजूरी दी है. Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में Ribbit Capital करीब 1.6% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है, जिसका संभावित आकार करीब ₹1,914 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹195 प्रति शेयर है. UCO Bank में वित्त मंत्रालय ने Executive Director राजेंद्र कुमार साबू को MD & CEO का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. Welspun Investments & Commercials और कंपनी के MD & CEO Vipul Mathur Welspun Corp में करीब 63 लाख शेयर यानी लगभग 2.4% हिस्सेदारी बेच सकते हैं, जिसकी संभावित ब्लॉक डील करीब ₹1,417 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹2,250 प्रति शेयर है. Cipla की Pithampur मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में USFDA ने 17 से 25 अगस्त के बीच फॉलो-अप cGMP निरीक्षण किया, जिसके बाद कंपनी को Form 483 में सात टिप्पणियां मिली हैं. United Breweries ने Heineken Silver का विस्तार Kerala, Odisha और Madhya Pradesh में करने की घोषणा की है. वहीं, Varun Beverages ने RTD अल्कोहलिक बेवरेज कारोबार के लिए KIVA Spirits and Company नाम से नई सब्सिडियरी बनाने और Tunisia में एक जॉइंट वेंचर स्थापित करने की घोषणा की है.
 


अमेजन, स्विगी-इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर सख्ती, धतूरे की बिक्री के चलते फूड लाइसेंस सस्पेंड

कर्नाटक FDA का बड़ा एक्शन, प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट मिलने के बाद उठाया कदम

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग को लेकर कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने अमेजन (Amazon), स्विगी-इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और बिगबास्केटस (BigBasket) के फूड लाइसेंस अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिए हैं. यह कार्रवाई इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे (Datura/Thorn Apple) के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट किए जाने और उनकी बिक्री से जुड़ी शिकायतों के बाद की गई है. विभाग ने तीनों प्लेटफॉर्म्स को धतूरे से संबंधित सभी लिस्टिंग और विज्ञापन तत्काल हटाने तथा इसकी खाद्य उत्पाद के तौर पर बिक्री और वितरण रोकने का निर्देश दिया है.

धतूरे की लिस्टिंग पर सरकार सख्त

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक FDA ने तीनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके फूड लाइसेंस सस्पेंड किए हैं. विभाग ने प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सभी लिस्टिंग और विज्ञापन हटाने को कहा है, जिनमें धतूरे के फल या बीजों को इंसानों के खाने के लिए उपलब्ध कराया गया था. FDA के निर्देश के अनुसार, अगले आदेश तक इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे को खाद्य उत्पाद के रूप में बेचने या वितरित करने की अनुमति नहीं होगी. विभाग ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि ऐसी प्रतिबंधित लिस्टिंग दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न हों.

खाने के लिए प्रतिबंधित है धतूरा

धतूरे को अंग्रेजी में ‘Thorn Apple’ कहा जाता है. यह एक जहरीला पौधा है, जिसके फल और बीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, इसका सेवन विषाक्तता का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है. कर्नाटक FDA के अनुसार, धतूरे के फल और बीजों को इंसानों के खाने के लिए खाद्य पदार्थ के तौर पर रखना, बेचना या वितरित करना प्रतिबंधित है. इसी वजह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसकी खाद्य उत्पाद के रूप में लिस्टिंग को गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघन माना गया है.

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध उत्पादों की निगरानी और उनकी लिस्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. बड़ी संख्या में उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तुओं की पहचान और उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है. कर्नाटक FDA की कार्रवाई इसी निगरानी व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत मानी जा रही है.
 


L&T को दो हफ्तों में मिले ₹40,000 करोड़ के ऑर्डर, मिडिल ईस्ट से AI तक बढ़ा ग्लोबल दबदबा

गैस कंप्रेशन, बैटरी स्टोरेज और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट; अकेले मिडिल ईस्ट से करीब ₹25,000 करोड़ के ऑर्डर

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

देश की दिग्गज इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने महज दो हफ्तों में करीब 40,000 करोड़ रुपये के बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं. कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट मिडिल ईस्ट के बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर तक के लिए मिले हैं. इनमें करीब 25,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिडिल ईस्ट से जुड़े हैं, जबकि अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई में बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का ऑर्डर भी शामिल है. लगातार मिल रहे इन बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स से L&T की ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने के साथ ही वैश्विक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है.

मिडिल ईस्ट में ₹5,000-10,000 करोड़ का बैटरी स्टोरेज ऑर्डर

L&T को मिडिल ईस्ट में तीन Battery Energy Storage System (BESS) प्रोजेक्ट्स के लिए 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. इन परियोजनाओं की कुल स्टोरेज क्षमता 6 GWh होगी. कंपनी इन प्रोजेक्ट्स के लिए पावर ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए सब-स्टेशन और अंडरग्राउंड केबल समेत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेगी. प्रत्येक प्रोजेक्ट में चार घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता होगी.

इन बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल कम मांग के दौरान अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने और पीक डिमांड के समय उसकी आपूर्ति के लिए किया जाएगा. इससे पावर ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. प्रोजेक्ट्स में लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.

₹15,000 करोड़ से ज्यादा का अल्ट्रा-मेगा गैस प्रोजेक्ट

इससे पहले L&T को खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े क्लाइंट के लिए गैस कंप्रेशन प्रोजेक्ट का अल्ट्रा-मेगा कॉन्ट्रैक्ट मिला था. L&T 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर को अल्ट्रा-मेगा कैटेगरी में रखती है. यह ऑर्डर कंपनी की सब्सिडियरी L&T Energy Hydrocarbon Onshore को मिला है.

इसके तहत कंपनी सॉर गैस की प्रोसेसिंग के लिए नए ऑनशोर इंस्टॉलेशन में गैस कंप्रेशन प्लांट के इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) का काम करेगी. प्रोजेक्ट में गैस इनलेट सुविधाओं, कंप्रेशन सिस्टम, कंडेनसेट और प्रोड्यूस्ड-वॉटर हैंडलिंग सिस्टम तथा प्रोपेन रेफ्रिजरेशन सिस्टम समेत कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

Together AI के लिए बनाएगी भारत की बड़ी AI फैक्ट्री

L&T ने 13 अगस्त को बताया था कि उसे भारत का सबसे बड़ा सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का बड़ा ऑर्डर मिला है. इसके तहत अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई स्थित L&T डेटा सेंटर कैंपस में 10,000 NVIDIA B300 GPU लगाए जाएंगे. इस ऑर्डर की वैल्यू 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये के बीच है.

यह प्रोजेक्ट AI इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में L&T की महत्वपूर्ण एंट्री मानी जा रही है. इस AI फैक्ट्री को L&T की AI इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडियरी LTN Compute विकसित करेगी और इसे Vyoma के चेन्नई डेटा सेंटर कैंपस में स्थापित किया जाएगा.

चेन्नई कैंपस को गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर साइट के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसके पहले चरण को 250 मेगावाट क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें 150 MVA का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है. इससे भविष्य में AI फैक्ट्री की क्षमता को और बढ़ाने की गुंजाइश रहेगी.

ग्लोबल कारोबार में बढ़ रही L&T की पकड़

लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर से साफ है कि L&T की पहुंच पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से आगे बढ़कर एनर्जी स्टोरेज, डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों तक पहुंच रही है. मिडिल ईस्ट में ऊर्जा परियोजनाओं और भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए लंबी अवधि में ऑर्डर बुक और कारोबार की ग्रोथ को मजबूत कर सकते हैं.
 


मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत! सेमीकंडक्टर-ऑटो कंपनियों के नियम होंगे आसान, 60 दिनों में लागू होगा नया फ्रेमवर्क

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे.

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे. सरकार का यह कदम देश में निवेश बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

60 दिनों में बदलेंगे नियम

पीयूष गोयल ने टोक्यो में ‘निक्केई एशिया’ के साथ बातचीत में कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की इच्छुक दो बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ हाल में बातचीत हुई है. कंपनियों की ओर से नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को लेकर जताई गई चिंताओं का समाधान किया गया है. सरकार अब अगले दो महीनों में जरूरी नियमों में बदलाव कर उन्हें लागू करेगी, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को किसी तरह की नियामकीय बाधा का सामना न करना पड़े.

BIS की मंजूरी प्रक्रिया होगी आसान

सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मौजूदा फ्रेमवर्क को भी आसान बनाने पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को सरल और तेज करना है. सरकार ऐसे सप्लायर्स से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रही है, जो मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग मानकों के दायरे में आते हैं.

गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग की वास्तविक जरूरतों और निष्पक्ष व्यापार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कंपनियां केवल दूसरे देशों से उत्पाद आयात करने की मांग कर सकती हैं, लेकिन ऐसी मांगों पर फैसला घरेलू उद्योग और निष्पक्ष व्यापार को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.

सेमीकॉन 2.0 से 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य

सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है. इसके तहत सरकार की योजना निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अगले डेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और इससे जुड़े उद्योगों में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश शुरू कराने की है.

सरकार का मानना है कि आसान रेगुलेशन, तेज मंजूरी और बड़े निवेश से भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ऑटोमोटिव कंपोनेंट और इससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में भी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन सकता है.

‘प्लस वन’ रणनीति से आगे बढ़ने की कोशिश

भारत अब खुद को केवल कंपनियों के ‘चाइना प्लस वन’ विकल्प के तौर पर सीमित नहीं रखना चाहता. सरकार की कोशिश है कि देश में ऐसी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन तैयार हो, जो वैश्विक कंपनियों को लंबे समय के लिए भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए आकर्षित करे.

पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा पहल के बाद सरकार आगे ‘सेमीकंडक्टर 3.0’ की दिशा में भी बढ़ सकती है.
 

TAGS bw-hindi

MP Steel का IPO लाने की तैयारी, SEBI के पास जमा किए दस्तावेज; 95 करोड़ रुपये जुटाने की योजना

स्टेनलेस स्टील उत्पाद निर्माता कंपनी का IPO फ्रेश इश्यू और OFS का होगा मिश्रण, बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में इस्तेमाल होगी इश्यू से जुटाई रकम

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

स्टेनलेस स्टील उत्पाद बनाने वाली कंपनी MP Steel ने शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए हैं. कंपनी की योजना IPO के जरिए 95 करोड़ रुपये तक जुटाने की है. IPO में 95 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और प्रमोटरों की ओर से 23 लाख से अधिक इक्विटी शेयरों की बिक्री यानी ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल होगा.

कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने में करेगी. यह कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन रणनीति का हिस्सा है. इसके अलावा कुछ रकम बढ़ती वर्किंग कैपिटल जरूरतों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.

बिलेट यूनिट से मजबूत होगा बैकवर्ड इंटीग्रेशन

MP Steel मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बाजार के लिए स्टेनलेस स्टील उत्पाद बनाती है. कंपनी के उत्पाद डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, हार्डवेयर, शिपबिल्डिंग, पोर्ट्स, पावर प्लांट्स और रिफाइनरी समेत कई क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारियों और निर्माताओं को सप्लाई किए जाते हैं.

कंपनी की गुजरात के मेहसाणा में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. घरेलू स्तर पर कंपनी का बिक्री नेटवर्क 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में फैला है. यहां वह ट्रेडर्स और सीधे ग्राहकों के जरिए अपने उत्पाद बेचती है.

21 देशों में करती है निर्यात

MP Steel का कारोबार केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है. कंपनी अपने उत्पादों का निर्यात 21 देशों में करती है. इसके प्रमुख विदेशी बाजारों में UAE, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, ब्राजील और पोलैंड शामिल हैं. कंपनी की योजना नई बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के जरिए उत्पादन प्रक्रिया के एक और हिस्से को अपने नियंत्रण में लाने की है. इससे स्टेनलेस स्टील मैन्युफैक्चरिंग कारोबार के विस्तार के साथ कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन क्षमता भी मजबूत होने की उम्मीद है.

FY26 में 413 करोड़ रुपये रहा राजस्व

वित्त वर्ष 2025-26 में MP Steel ने 413.41 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया. इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 15.81 करोड़ रुपये रहा. IPO के लिए Monarch Networth Capital को एकमात्र बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है, जबकि KFin Technologies इस इश्यू का रजिस्ट्रार है.
 

TAGS bw-hindi

मांग-आपूर्ति के दबाव से बढ़े चीनी के दाम, लेकिन स्टॉक पर्याप्त: ISMA

त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, उत्पादन अनुमान घटने और वैश्विक कीमतों में उछाल से बढ़ी कीमतें; ISMA ने कहा- देश में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी अस्थायी है और इसे देश में चीनी की कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. ISMA के मुताबिक 2025-26 में भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन रहने की संभावना है. सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान है, जो अगले चीनी वर्ष में भी घरेलू आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है.

ISMA ने कहा कि हाल में चीनी कीमतों में मजबूती कई अस्थायी कारणों के चलते आई है. इनमें शुरुआती अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारों के मौसम में बढ़ी मांग, बाजार की धारणा और अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में तेजी प्रमुख हैं. इन कारणों से कीमतों पर दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन घरेलू बाजार में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं है.

सरकार के कदम एहतियाती और संतुलित

ISMA ने त्योहारों के मौसम में बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का स्वागत किया है. संगठन के मुताबिक 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी आयात की अनुमति, स्टॉक रखने की सीमा, चीनी भंडार का भौतिक सत्यापन, GST जांच के साथ साप्ताहिक स्टॉक खुलासा और 2026-27 के पेराई सीजन को आगे बढ़ाना बाजार में भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. डीलरों के लिए देशभर में 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है. ISMA ने इसे और घटाकर 200 टन करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनुशासन मजबूत हो सके.

ISMA के अनुसार कुछ कारोबारियों की ओर से जमाखोरी और पहले से स्टॉक जमा करने के कारण बड़े थोक खरीदारों ने अपनी 1.5-2 महीने की जरूरत के बराबर चीनी का भंडार बना लिया था. इससे बड़ी मात्रा में चीनी अस्थायी तौर पर बाजार के सर्कुलेशन से बाहर हो गई और पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद कमी जैसी स्थिति का आभास पैदा हुआ.

संगठन ने कहा कि शुल्क-मुक्त आयात मुख्य रूप से अतिरिक्त आपूर्ति का विकल्प है. इसे एहतियाती और बाजार में भरोसा बढ़ाने वाले कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा.

ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा, "भारत में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. सरकार और उद्योग त्योहारों की मांग को देखते हुए पहले से कदम उठा रहे हैं. आयात विंडो, स्टॉक से जुड़े उपाय और पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से बाजार में अस्थायी तेजी को संभालने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे."

चीनी की नई घरेलू आपूर्ति जल्द बढ़ेगी

ISMA, NFCSF और चीनी मिलें 2026-27 के पेराई सीजन की शुरुआत 10-15 दिन पहले करने की दिशा में काम कर रही हैं. इसका उद्देश्य त्योहारों के मौसम में घरेलू बाजार में नई चीनी की उपलब्धता जल्द बढ़ाना है.

तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले ही शुरू हो चुकी है. ISMA के मुताबिक पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 4 लाख टन के मुकाबले करीब 10 लाख टन तक पहुंच सकता है. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति मिलेगी.

ISMA के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने कहा कि पेराई सीजन को 10-15 दिन पहले शुरू करने से उस समय अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, जब बाजार को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी. मौजूदा स्टॉक और सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज कोटा के साथ नई घरेलू चीनी की उपलब्धता से मौजूदा दबाव कम होने की उम्मीद है.

इथेनॉल नहीं है चीनी कीमतों में तेजी की वजह

ISMA ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा चीनी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है. संगठन के मुताबिक इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन पेराई सीजन शुरू होने से पहले घरेलू खपत और उपलब्ध चीनी के कुल संतुलन को ध्यान में रखकर तय किया जाता है.

इथेनॉल कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की तस्वीर भी काफी बदल गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 2021-22 में सिर्फ 17 फीसदी थी. वहीं चीनी आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति करीब 1,197 करोड़ लीटर रहने और ब्लेंडिंग दर 20 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.

ISMA ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इससे मिलों को किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर करने में मदद मिली है. 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 के करीब 97 फीसदी गन्ना बकाये का भुगतान किया जा चुका था.

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि आंकड़े यह नहीं बताते कि इथेनॉल मौजूदा चीनी कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार है. उनके मुताबिक चीनी डायवर्जन घरेलू जरूरतों और कुल चीनी संतुलन का आकलन करने के बाद ही तय किया जाता है. साथ ही इथेनॉल आपूर्ति में अब अनाज की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी 16 फीसदी से ज्यादा महंगी

वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में तेज उछाल का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा है. ISMA के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत 30 जून 2026 को 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई. यानी करीब दो महीने से भी कम समय में कीमतों में 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी से आयातित चीनी की लागत बढ़ती है, जिससे घरेलू चीनी कीमतों को भी समर्थन मिलता है.

2016-17 जैसी स्थिति नहीं

ISMA ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2016-17 के चीनी सीजन से नहीं करने की सलाह दी है. संगठन के मुताबिक 2016-17 में देश को वास्तविक सूखे के कारण उत्पादन में बड़ी कमी का सामना करना पड़ा था. उस समय चीनी उत्पादन करीब 203 लाख टन रहा था, जबकि घरेलू मांग 245-250 लाख टन के आसपास थी.

इसके मुकाबले मौजूदा स्थिति काफी आरामदायक है. 2025-26 में करीब 279 लाख टन शुद्ध उत्पादन और करीब 35 लाख टन के अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक के साथ घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है. ऐसे में मौजूदा सरकारी कदम किसी संरचनात्मक कमी को दूर करने के बजाय त्योहारों के दौरान बाजार को स्थिर रखने के लिए एहतियाती और संक्रमणकालीन उपाय हैं.

त्योहारों तक पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने की उम्मीद

ISMA ने कहा कि मौजूदा स्टॉक, तमिलनाडु और कर्नाटक में शुरू हुई विशेष पेराई, 2026-27 सीजन की जल्द शुरुआत, सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज और शुल्क-मुक्त आयात की अतिरिक्त सुविधा के कारण घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी.

संगठन के मुताबिक सरकार की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदमों का असर दिखने लगा है और पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में नरमी आई है. त्योहारों की खरीदारी सामान्य होने और नई घरेलू आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी नरमी आने की उम्मीद है. इससे त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.


फ्रंट-रनिंग मामले में केतन पारिख को झटका, SAT ने खारिज की अपील

सेबी के आदेश के खिलाफ दाखिल की थी अपील, कैपिटल ग्रुप के दो ट्रेडर्स से जिरह की मांग को भी नहीं मिली मंजूरी

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

फ्रंट-रनिंग मामले में शेयर बाजार के चर्चित कारोबारी केतन पारिख को बड़ा झटका लगा है. प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने सेबी के उस फैसले के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी है, जिसमें उन्हें कैपिटल ग्रुप के दो ट्रेडर्स से क्रॉस-एग्जामिनेशन यानी जिरह की अनुमति देने से इनकार किया गया था.

यह मामला जनवरी 2025 में सेबी की ओर से जारी अंतरिम आदेश से जुड़ा है. इस आदेश में केतन पारिख और सिंगापुर के ट्रेडर रोहित सालगावकर को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया था. दोनों पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका स्थित एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के ट्रेड में फ्रंट-रनिंग की थी. यह एफपीआई दुनियाभर में करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करता है.

65.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप

सेबी ने कथित फ्रंट-रनिंग योजना के जरिए हुई 65.77 करोड़ रुपये की गैर-कानूनी कमाई को वापस करने का भी निर्देश दिया था. हालांकि, सेबी का जनवरी 2025 का आदेश अंतरिम था और मामले में अंतिम आदेश आना अभी बाकी है. SAT के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति पीएस दिनेश कुमार ने मौखिक आदेश में कहा कि कानून की स्थिति स्पष्ट है. एक बार सुनवाई पूरी हो जाने के बाद याचिकाकर्ता के पास केवल अंतिम आदेश को चुनौती देने का अधिकार बचता है.

न्यायाधिकरण ने कहा कि इस स्थिति में मामले की सुनवाई पूरी होने और आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद दो इकाइयों से जिरह की मांग करना उचित नहीं है. इसी आधार पर पारिख की अपील खारिज कर दी गई.

सेबी ने जिरह की मांग का किया था विरोध

केतन पारिख ने मामले में कैपिटल ग्रुप के दो ट्रेडर्स से जिरह करने की अनुमति मांगी थी. हालांकि, सेबी ने उनकी इस मांग का विरोध किया था. नियामक का कहना था कि इन दोनों ट्रेडर्स के बयानों का इस्तेमाल पारिख के खिलाफ किसी प्रतिकूल निष्कर्ष के लिए नहीं किया गया है. ट्रेडर्स ने अपने बयानों में स्पष्ट रूप से कहा था कि वे केतन पारिख को नहीं जानते.

सेबी ने यह भी कहा था कि जनवरी 2025 के अंतरिम आदेश में इन दोनों ट्रेडर्स के नाम तक शामिल नहीं थे. ऐसे में उनके साथ जिरह की मांग का कोई आधार नहीं बनता.


शेयर बाजार में आज भी हलचल के आसार, कल सेंसेक्स 172 अंक टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को सेंसेक्स 171.72 अंक टूटकर 77,369.11 पर और निफ्टी 32.95 अंक गिरकर 24,219.05 पर बंद हुआ.

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली हावी हो गई और सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 171.72 अंक टूटकर 77,369.11 पर और निफ्टी 32.95 अंक गिरकर 24,219.05 पर बंद हुआ. बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के तनाव के साथ-साथ कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों और कॉरपोरेट गतिविधियों पर रहेगी. आज TCS, IRFC, Hindustan Copper, Piramal Finance, Lenskart Solutions, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, UCO Bank, Can Fin Homes, Coal India, Senco Gold और Meesho समेत कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं.

कल बाजार का क्या रहा हाल?

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला था, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली बढ़ गई. 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77,629.56 पर खुला और दिन में 77,789.40 के ऊपरी स्तर तक गया. हालांकि, बाद में यह 77,201.66 के निचले स्तर तक फिसला और अंत में 171.72 अंक यानी 0.22 फीसदी की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी 24,285.05 पर खुला. कारोबार के दौरान इसने 24,313 का उच्चतम और 24,144.30 का निचला स्तर छुआ. अंत में निफ्टी 32.95 अंक यानी 0.14 फीसदी टूटकर 24,219.05 पर बंद हुआ.

अडानी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस फिसले

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. अडानी पोर्ट्स 1.30 फीसदी टूटकर 1,675 रुपये पर आ गया, जबकि बजाज फाइनेंस में 1.26 फीसदी की गिरावट रही और शेयर 1,079 रुपये पर बंद हुआ. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में 1.27 फीसदी, ट्रेंट में 0.87 फीसदी, एक्सिस बैंक में 0.85 फीसदी, एसबीआई में 0.71 फीसदी, TCS में 0.65 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.49 फीसदी, ICICI बैंक में 0.35 फीसदी और एशियन पेंट्स में 0.33 फीसदी की गिरावट रही.

टाटा स्टील और HCL टेक में तेजी

दूसरी ओर, टाटा स्टील 1.86 फीसदी की बढ़त के साथ 186 रुपये पर बंद हुआ. HCL टेक में 1.30 फीसदी की तेजी रही. इन्फोसिस 0.89 फीसदी, सन फार्मा 0.47 फीसदी, इंडिगो 0.43 फीसदी और HDFC बैंक 0.14 फीसदी की बढ़त में रहे. इटरनल, मारुति और टेक महिंद्रा भी मामूली बढ़त के साथ बंद हुए.

पश्चिम एशिया के तनाव पर भी नजर

बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेत अहम रहेंगे. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. इससे निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है. ऐसे में घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव और मुनाफावसूली का दौर जारी रह सकता है.

इन शेयरों पर रखें नजर

TCS की नीदरलैंड्स स्थित पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी TCS Netherlands BV ने Porsche AG की सब्सिडियरी MHP Management- und IT-Beratung GmbH को 320 मिलियन यूरो के एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदने की मंजूरी दी है. इसके बाद Porsche AG ने MHP और TCS के साथ पांच साल के लिए 1.25 अरब यूरो का रणनीतिक समझौता किया है. IRFC को वित्त वर्ष 2022-23 के इनपुट टैक्स क्रेडिट में अंतर से जुड़े मामले में ब्याज और पेनल्टी समेत 549 करोड़ रुपये का GST शो-कॉज नोटिस मिला है. Hindustan Copper में सरकार OFS के जरिए 3 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है, जिसके लिए फ्लोर प्राइस 514 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है और अतिरिक्त 3 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का ग्रीन-शू विकल्प भी है. Piramal Finance ने QIP शुरू किया है और इसके लिए 2,102.65 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है. Lenskart Solutions में SoftBank Group से जुड़ी SVF II Lightbulb ने 4.5 करोड़ शेयर यानी 2.58 फीसदी हिस्सेदारी 641.75 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचकर करीब 2,887.87 करोड़ रुपये जुटाए हैं. ICICI Bank ने 7.5 अरब डॉलर के Global Medium Term Note Programme के तहत 1 अरब डॉलर के सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड-रेट नोट्स की कीमत तय की है. Kotak Mahindra Bank ने 650 मिलियन डॉलर के 5.478 फीसदी सीनियर नोट्स जारी किए हैं. UCO Bank के बोर्ड ने Medium Term Note Programme के तहत डेट इंस्ट्रूमेंट जारी कर 1 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने को मंजूरी दी है. Can Fin Homes का बोर्ड 29 अगस्त को 5,000 करोड़ रुपये तक की फंड जुटाने की योजना पर विचार करेगा. Coal India ने सिंगापुर में CIL Global Pte नाम की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बनाई है, जिसका उद्देश्य विदेशों में क्रिटिकल मिनरल्स की संपत्तियों के अधिग्रहण और विकास के अवसर तलाशना है. Senco Gold में Vision Ahead Services ने 10 लाख शेयर 365.66 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदे हैं. Meesho में Y Combinator से जुड़ी संस्थाओं ने 48.47 लाख शेयर यानी करीब 1.05 फीसदी हिस्सेदारी 200.01 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचकर करीब 969.63 करोड़ रुपये जुटाए हैं.

बाजार के लिए आज क्या अहम?

आज बाजार में एक तरफ वैश्विक संकेत और पश्चिम एशिया का तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ TCS, Lenskart Solutions, Hindustan Copper और Meesho जैसे शेयरों में कॉरपोरेट गतिविधियों के कारण अलग-अलग एक्शन देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर फंड जुटाने, OFS, ब्लॉक डील और बड़े कारोबारी समझौतों से जुड़ी खबरों पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


सरकार का बड़ा फैसला: गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई

घरेलू सप्लाई बेहतर होने के बाद सरकार ने लिया फैसला, अब बिना प्रतिबंध विदेश भेज सकेंगे गेहूं से बने ये उत्पाद

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
BWHindia

केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं. सरकार के इस फैसले के बाद अब मैदा, सूजी, साबुत गेहूं का आटा और रिजल्टेंट आटा समेत गेहूं से बने इन उत्पादों का बिना किसी प्रतिबंध के निर्यात किया जा सकेगा.

सरकार ने सोमवार को निर्यात नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की. यह फैसला देश में गेहूं की उपलब्धता बेहतर होने, उत्पादन मजबूत रहने और घरेलू बाजार में सप्लाई की स्थिति सहज होने के बीच लिया गया है. माना जा रहा है कि इससे भारत के प्रोसेस्ड गेहूं उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों तथा निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में नए अवसर खुलेंगे.

2022 से लागू थीं निर्यात पाबंदियां

गेहूं के आटे और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध वर्ष 2022 में लगाया गया था. उस समय सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण रखना था. बाद में सरकार ने इन प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना शुरू किया और कोटा आधारित अनुमति के जरिए सीमित निर्यात की इजाजत दी गई. अब सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है.

आटा मिलों और निर्यातकों को बड़ी राहत

सरकार के इस फैसले से आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. पिछले करीब चार वर्षों से इन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रतिबंधित थी. उद्योग जगत लंबे समय से सरकार से निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने की मांग कर रहा था. उसका कहना था कि गेहूं का उत्पादन बेहतर रहने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से देश की खाद्य आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है.

उद्योग के मुताबिक, गेहूं से बने वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने से मिलों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. इसके साथ ही किसानों की आय को समर्थन मिलने और वैश्विक खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होने की उम्मीद है.

दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका पर नजर

निर्यातक अब उन पड़ोसी और पारंपरिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जहां भारतीय गेहूं उत्पादों की मांग पहले से मौजूद है. इनमें दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ बाजार प्रमुख हैं. निर्यात नीति में बदलाव से प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होने की उम्मीद है.

घरेलू खाद्य सुरक्षा अब भी प्राथमिकता

सरकार ने गेहूं उत्पादों के निर्यात से प्रतिबंध हटाने का फैसला जरूर किया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता अभी भी प्रमुख प्राथमिकताओं में बनी हुई है. पहले कम फसल उत्पादन और मौसम संबंधी लगातार व्यवधानों के कारण घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी थी. इसी वजह से सरकार ने गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था. अब बेहतर फसल, पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई को लेकर कम होती चिंताओं ने सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातकों को अधिक स्वतंत्रता देने का भरोसा दिया है. हाल के महीनों में स्टॉक लिमिट में ढील और निर्यात कोटे में बढ़ोतरी जैसे कदम भी सरकार की धीरे-धीरे उदार होती निर्यात नीति का संकेत दे रहे थे.

किसानों और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है फायदा

निर्यात प्रतिबंध हटने से गेहूं से जुड़े प्रोसेस्ड उत्पादों की मांग बढ़ सकती है. इससे आटा मिलों और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की क्षमता का इस्तेमाल बढ़ने के साथ किसानों के लिए भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है. सरकार का यह कदम भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
 


ईरान की चेतावनी: अमेरिका का आर्थिक युद्ध जारी रहा तो खाड़ी से एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा

अमेरिका की नई पाबंदियों की धमकी के बीच तेहरान ने बढ़ाया दबाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
BWHindia

ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन उसके खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी रखता है, तो खाड़ी क्षेत्र से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक दिया जाएगा. ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इसमें रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला तेल निर्यात भी शामिल है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा तो तेल की एक बूंद भी निर्यात नहीं की जाएगी." उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ फारस की खाड़ी के अन्य हिस्सों से होने वाले तेल निर्यात पर भी लागू होगा.

अमेरिका की नई पाबंदियों के बीच बढ़ा तनाव

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की योजना के बीच ईरान ने यह सख्त रुख अपनाया है. रेजाई ने यह भी कहा कि अमेरिका के आर्थिक अभियान का समर्थन करने या उसमें शामिल होने वाले किसी भी देश को ईरान युद्ध में भागीदार के तौर पर देखेगा.

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यहां से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन की बड़ी मात्रा की आवाजाही होती है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. ईरान पहले भी अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने के दौरान इस जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन को बाधित करने की धमकी देता रहा है. हालांकि, इस बार की चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि तेहरान ने आर्थिक दबाव बढ़ने की स्थिति में व्यापक स्तर पर तेल निर्यात रोकने की बात कही है.

ईरानी संसद के स्पीकर ने भी अमेरिका पर साधा निशाना

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी रविवार को ट्रंप की प्रतिबंध लगाने की धमकी का मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि आक्रामक आर्थिक दबाव लगाने वाले देशों पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है. गालिबाफ ने X पर एक पोस्ट में "ईरान बूमरैंग" का व्यंग्यात्मक संदर्भ दिया. इसके साथ चार हिस्सों वाली एक कॉमिक साझा की गई, जिसमें "अब तक का सबसे विनाशकारी आर्थिक अभियान" लिखे हथियार को ईरान की ओर फेंकते और फिर उसी हथियार को उसके इस्तेमाल करने वाले पर वापस आते दिखाया गया.

ईरान ने सैन्य दबाव को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका का आर्थिक उपायों पर जोर देना इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सैन्य दबाव काम नहीं कर पाया. ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, मोहेबी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का आर्थिक युद्ध का आदेश देना इस बात की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है.

उन्होंने कहा कि ईरान दशकों से अपने महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रतिबंधों का सामना करता रहा है और आगे लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव को भी संभालने में सक्षम होगा.

‘प्रतिबंध ईरान के लिए नई बात नहीं’

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिका की प्रतिबंधों की धमकी की आलोचना की. अल जजीरा के अनुसार, उन्होंने कहा कि युद्ध और प्रतिबंध इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए नई बात नहीं हैं. बघाई ने कहा कि ईरान करीब दो दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है.