घरेलू सप्लाई बेहतर होने के बाद सरकार ने लिया फैसला, अब बिना प्रतिबंध विदेश भेज सकेंगे गेहूं से बने ये उत्पाद
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं. सरकार के इस फैसले के बाद अब मैदा, सूजी, साबुत गेहूं का आटा और रिजल्टेंट आटा समेत गेहूं से बने इन उत्पादों का बिना किसी प्रतिबंध के निर्यात किया जा सकेगा.
सरकार ने सोमवार को निर्यात नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की. यह फैसला देश में गेहूं की उपलब्धता बेहतर होने, उत्पादन मजबूत रहने और घरेलू बाजार में सप्लाई की स्थिति सहज होने के बीच लिया गया है. माना जा रहा है कि इससे भारत के प्रोसेस्ड गेहूं उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों तथा निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में नए अवसर खुलेंगे.
2022 से लागू थीं निर्यात पाबंदियां
गेहूं के आटे और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध वर्ष 2022 में लगाया गया था. उस समय सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण रखना था. बाद में सरकार ने इन प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना शुरू किया और कोटा आधारित अनुमति के जरिए सीमित निर्यात की इजाजत दी गई. अब सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है.
आटा मिलों और निर्यातकों को बड़ी राहत
सरकार के इस फैसले से आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. पिछले करीब चार वर्षों से इन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रतिबंधित थी. उद्योग जगत लंबे समय से सरकार से निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने की मांग कर रहा था. उसका कहना था कि गेहूं का उत्पादन बेहतर रहने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से देश की खाद्य आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है.
उद्योग के मुताबिक, गेहूं से बने वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने से मिलों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. इसके साथ ही किसानों की आय को समर्थन मिलने और वैश्विक खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होने की उम्मीद है.
दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका पर नजर
निर्यातक अब उन पड़ोसी और पारंपरिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जहां भारतीय गेहूं उत्पादों की मांग पहले से मौजूद है. इनमें दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ बाजार प्रमुख हैं. निर्यात नीति में बदलाव से प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होने की उम्मीद है.
घरेलू खाद्य सुरक्षा अब भी प्राथमिकता
सरकार ने गेहूं उत्पादों के निर्यात से प्रतिबंध हटाने का फैसला जरूर किया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता अभी भी प्रमुख प्राथमिकताओं में बनी हुई है. पहले कम फसल उत्पादन और मौसम संबंधी लगातार व्यवधानों के कारण घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी थी. इसी वजह से सरकार ने गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था. अब बेहतर फसल, पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई को लेकर कम होती चिंताओं ने सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातकों को अधिक स्वतंत्रता देने का भरोसा दिया है. हाल के महीनों में स्टॉक लिमिट में ढील और निर्यात कोटे में बढ़ोतरी जैसे कदम भी सरकार की धीरे-धीरे उदार होती निर्यात नीति का संकेत दे रहे थे.
किसानों और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है फायदा
निर्यात प्रतिबंध हटने से गेहूं से जुड़े प्रोसेस्ड उत्पादों की मांग बढ़ सकती है. इससे आटा मिलों और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की क्षमता का इस्तेमाल बढ़ने के साथ किसानों के लिए भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है. सरकार का यह कदम भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अमेरिका की नई पाबंदियों की धमकी के बीच तेहरान ने बढ़ाया दबाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन उसके खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी रखता है, तो खाड़ी क्षेत्र से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक दिया जाएगा. ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इसमें रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला तेल निर्यात भी शामिल है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा तो तेल की एक बूंद भी निर्यात नहीं की जाएगी." उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ फारस की खाड़ी के अन्य हिस्सों से होने वाले तेल निर्यात पर भी लागू होगा.
अमेरिका की नई पाबंदियों के बीच बढ़ा तनाव
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की योजना के बीच ईरान ने यह सख्त रुख अपनाया है. रेजाई ने यह भी कहा कि अमेरिका के आर्थिक अभियान का समर्थन करने या उसमें शामिल होने वाले किसी भी देश को ईरान युद्ध में भागीदार के तौर पर देखेगा.
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यहां से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन की बड़ी मात्रा की आवाजाही होती है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. ईरान पहले भी अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने के दौरान इस जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन को बाधित करने की धमकी देता रहा है. हालांकि, इस बार की चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि तेहरान ने आर्थिक दबाव बढ़ने की स्थिति में व्यापक स्तर पर तेल निर्यात रोकने की बात कही है.
ईरानी संसद के स्पीकर ने भी अमेरिका पर साधा निशाना
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी रविवार को ट्रंप की प्रतिबंध लगाने की धमकी का मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि आक्रामक आर्थिक दबाव लगाने वाले देशों पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है. गालिबाफ ने X पर एक पोस्ट में "ईरान बूमरैंग" का व्यंग्यात्मक संदर्भ दिया. इसके साथ चार हिस्सों वाली एक कॉमिक साझा की गई, जिसमें "अब तक का सबसे विनाशकारी आर्थिक अभियान" लिखे हथियार को ईरान की ओर फेंकते और फिर उसी हथियार को उसके इस्तेमाल करने वाले पर वापस आते दिखाया गया.
ईरान ने सैन्य दबाव को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका का आर्थिक उपायों पर जोर देना इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सैन्य दबाव काम नहीं कर पाया. ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, मोहेबी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का आर्थिक युद्ध का आदेश देना इस बात की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है.
उन्होंने कहा कि ईरान दशकों से अपने महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रतिबंधों का सामना करता रहा है और आगे लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव को भी संभालने में सक्षम होगा.
‘प्रतिबंध ईरान के लिए नई बात नहीं’
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिका की प्रतिबंधों की धमकी की आलोचना की. अल जजीरा के अनुसार, उन्होंने कहा कि युद्ध और प्रतिबंध इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए नई बात नहीं हैं. बघाई ने कहा कि ईरान करीब दो दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है.
10 कंपनियां ला रही हैं IPO, मेनबोर्ड सेगमेंट की तीन कंपनियां जुटाएंगी 2,475 करोड़ रुपये से ज्यादा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्राइमरी मार्केट में इस सप्ताह जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी. करीब 10 कंपनियां अपने शुरुआती सार्वजनिक निर्गम यानी IPO के जरिए पूंजी बाजार में उतरने की तैयारी में हैं. इनमें तीन मेनबोर्ड IPO शामिल हैं, जिनके जरिए कुल 2,475 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का लक्ष्य है. Skyways Air Services, Symbiotec Pharmalab और Hy-Tech Engineers के IPO सोमवार से खुलेंगे. इसके अलावा मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में कई अन्य कंपनियां भी इस सप्ताह अपने इश्यू लेकर आएंगी. कुछ कंपनियां इसी दौरान शेयर बाजार में लिस्ट भी होंगी.
Skyways Air Services का 582.80 करोड़ रुपये का IPO
Skyways Air Services का 582.80 करोड़ रुपये का IPO 24 अगस्त से 27 अगस्त तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. बुक-बिल्ट इश्यू में 398.80 करोड़ रुपये के 2.89 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 184 करोड़ रुपये के 1.33 करोड़ शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल के जरिए होगी.
Hy-Tech Engineers का 135.73 करोड़ रुपये का इश्यू
Hy-Tech Engineers का 135.73 करोड़ रुपये का IPO भी 24 अगस्त को खुलेगा और 27 अगस्त को बंद होगा. इसमें 60 करोड़ रुपये के 1.13 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे. वहीं, 75.73 करोड़ रुपये के 1.43 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल के तहत बेचे जाएंगे.
Symbiotec Pharmalab सबसे बड़ा मेनबोर्ड IPO
इस सप्ताह मेनबोर्ड सेगमेंट में सबसे बड़ा IPO Symbiotec Pharmalab का है. कंपनी इस इश्यू के जरिए 1,757 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. IPO 24 अगस्त से 27 अगस्त तक खुला रहेगा. इसमें 150 करोड़ रुपये के 0.15 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 1,607 करोड़ रुपये के 1.63 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल के जरिए पेश किए जाएंगे.
वहीं, Annu Projects का 175.06 करोड़ रुपये का IPO 25 अगस्त को खुलेगा और 28 अगस्त को बंद होगा. यह इश्यू पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है, जिसमें 1.77 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे. Lumino Industries 27 अगस्त को अपना 700 करोड़ रुपये का IPO लेकर आएगी. यह इश्यू 31 अगस्त को बंद होगा. इसमें 500 करोड़ रुपये के 6.10 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 200 करोड़ रुपये के 2.44 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल के तहत होंगे.
SME सेगमेंट में भी हलचल
SME सेगमेंट में भी इस सप्ताह कई कंपनियां IPO लेकर आ रही हैं. Madhur Knit Crafts और ABH Healthcare के IPO 24 अगस्त को खुलेंगे और 27 अगस्त को बंद होंगे. Sumax Engineering का इश्यू 25 अगस्त को खुलेगा, जबकि Kwick Forensic Solutions 27 अगस्त को अपना IPO लॉन्च करेगी. Complete Sports & Management India का IPO 28 अगस्त से 1 सितंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा.
शेयर बाजार में लिस्टिंग से भी बढ़ेगी हलचल
कंपनियां लगातार नई पूंजी जुटाने के लिए भारतीय इक्विटी बाजार का रुख कर रही हैं. वहीं, IPO में निवेशकों की मजबूत भागीदारी के बीच इस सप्ताह प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है. नए IPO के अलावा Lalithaa Jewellery Mart, Horizon Industrial Parks और Sunshine Pictures जैसी कंपनियां भी इस सप्ताह शेयर बाजार में डेब्यू करने की उम्मीद है. इससे प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां और तेज हो सकती हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
201 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले ललिता ज्वेलरी मार्ट का शेयर NSE पर 265 रुपये और BSE पर 265.30 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ. लिस्टिंग के साथ ही निवेशकों को प्रति शेयर 64 रुपये का फायदा हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ललिता ज्वेलरी मार्ट लिमिटेड (Lalithaa Jewellery Mart) के शेयरों ने सोमवार, 24 अगस्त को शेयर बाजार में शानदार एंट्री की. 201 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले कंपनी का शेयर NSE पर 265 रुपये और BSE पर 265.30 रुपये पर लिस्ट हुआ. इस तरह NSE पर निवेशकों को करीब 31.84 फीसदी का लिस्टिंग गेन मिला. वहीं, कंपनी के 1,700 करोड़ रुपये के IPO को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इश्यू कुल 66.3 गुना सब्सक्राइब हुआ था.
हर लॉट पर करीब 4,736 रुपये का लिस्टिंग गेन
IPO में एक लॉट में 74 शेयर थे. ऐसे में 201 रुपये के इश्यू प्राइस पर एक लॉट के लिए निवेशकों को 14,874 रुपये लगाने पड़े. NSE पर 265 रुपये की लिस्टिंग के हिसाब से एक लॉट की वैल्यू बढ़कर 19,610 रुपये हो गई. यानी लिस्टिंग के समय निवेशकों को प्रति लॉट करीब 4,736 रुपये का फायदा हुआ. लिस्टिंग के बाद शेयर में तेजी बनी रही. सुबह 10:07 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, शेयर 274.30 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गया था और करीब 267.65 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
IPO को मिला 66.3 गुना सब्सक्रिप्शन
ललिता ज्वेलरी मार्ट का IPO 17 से 19 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था. कंपनी ने इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल 1,700 करोड़ रुपये जुटाए. इसमें 1,200 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 500 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS शामिल था. इश्यू को कुल 66.3 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB कैटेगरी में 153.6 गुना सब्सक्रिप्शन हुआ. कंपनी के IPO में बड़े संस्थागत निवेशकों की भी भागीदारी देखने को मिली.
Equirus ने निभाई अहम भूमिका
IPO लेनदेन में Equirus ने ललिता ज्वेलरी मार्ट के सलाहकार और बुक रनिंग लीड मैनेजर के तौर पर काम किया. कंपनी के मुताबिक, Equirus ने IPO की प्रक्रिया को फाइलिंग से लेकर निवेशकों के साथ संवाद, एंकर बुक जुटाने और अलग-अलग निवेशक श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन तक आगे बढ़ाया.
दक्षिण भारत में मजबूत मौजूदगी
ललिता ज्वेलरी मार्ट दक्षिण भारत की प्रमुख वैल्यू-फोकस्ड ज्वेलरी रिटेल कंपनियों में शामिल है. कंपनी सोने, चांदी और हीरे की ज्वेलरी 'Lalithaa' ब्रांड के तहत बेचती है. इसका फोकस बड़े पैमाने पर कीमत और वैल्यू को ध्यान में रखकर ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों पर है.
कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत के प्रमुख संगठित ज्वेलरी कारोबारियों में उसके स्टोर का ऑपरेटिंग रेवेन्यू सबसे ज्यादा रहा. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के कुल राजस्व में सोने की ज्वेलरी की हिस्सेदारी 92.33 फीसदी थी.
51 शहरों में 61 स्टोर
31 मार्च 2026 तक ललिता ज्वेलरी मार्ट के 51 बड़े और मध्यम फॉर्मेट समेत कुल 61 स्टोर थे. ये स्टोर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पुडुचेरी के 51 शहरों में फैले हैं. कंपनी का कुल रिटेल एरिया करीब 6.51 लाख वर्ग फुट है.
कंपनी के पास तमिलनाडु में दो इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी हैं. 31 मार्च 2026 तक 4.73 लाख से ज्यादा ग्राहक कंपनी की ज्वेलरी स्कीम्स से जुड़े हुए थे, जबकि कंपनी में 7,059 कर्मचारी कार्यरत थे.
सेंसेक्स की क्लोजिंग कीमत एक छोटे से कमरे में तय होती है, जहां लगभग कोई ट्रेड नहीं करता. 13 अगस्त को कोई व्यक्ति सिर्फ 57 लाख रुपये लेकर वहां पहुंचा और इसे 240 अंक ऊपर कर दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
57 लाख रुपये. मुंबई में यह एक शादी या एक महंगी कार हो सकती है. यह वास्तविक पैसा है, लेकिन बहुत बड़ा पैसा नहीं है. इससे कोई फैक्ट्री नहीं बनती.
13 अगस्त की दोपहर किसी ने लगभग इतनी ही रकम खर्च की और सेंसेक्स को हिला दिया, किसी एक शेयर को नहीं, बल्कि पूरे इंडेक्स को, जो भारत की 30 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों को ट्रैक करता है. देश के हर टेलीविजन स्क्रीन पर चलने वाला और अखबारों के पहले पन्ने पर छपने वाला यह नंबर सिर्फ इसलिए 240 अंक ऊपर गया क्योंकि किसी ने उसे वहां पहुंचाने के लिए करीब 57 लाख रुपये चुकाए.
यह कोई सिद्धांत नहीं है. यह 19 अगस्त को हस्ताक्षरित SEBI के आदेश में दर्ज है. CAS के दौरान हेरफेर वाले ट्रेडों के मामले में जारी Ex-Parte Interim Order में नियामक ने 57 लाख रुपये को "expenditure" यानी खर्च कहा है, ऐसा पैसा जिसे जानबूझकर किसी नतीजे को हासिल करने के लिए खर्च किया गया. वह नतीजा एक्सपायरी-डे ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में 2.96 करोड़ रुपये का था, जिनका निपटान क्लोजिंग नंबर के आधार पर होता है.
यह समझने के लिए कि ऐसा कैसे संभव है, आपको यह जानना होगा कि सेंसेक्स की क्लोजिंग कीमत आती कहां से है.
इंडेक्स 30 कंपनियों से बना है और उनकी क्लोजिंग कीमतें BSE से ली जाती हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से नहीं. और BSE अब भारत के कैश मार्केट ट्रेडिंग का एक छोटा हिस्सा संभालता है, देश में हर 100 शेयरों में से करीब 93 शेयर NSE पर ट्रेड होते हैं.
3 अगस्त से क्लोजिंग कीमतें सामान्य ट्रेडिंग से भी तय नहीं होतीं. 3:15 बजे बाजार रुक जाता है. अगले 10 मिनट तक कोई ट्रेड नहीं करता; हर कोई अपनी पसंद के ऑर्डर जमा करता है और अंत में एक्सचेंज एक कीमत तय करता है. यही क्लोजिंग कीमत बनती है.
NSE पर जिन शेयरों को यह कवर करता है और जहां इन आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, वहां 10 मिनट की नीलामी में सामान्य कारोबारी दिन में होने वाले हर 100 शेयरों के कारोबार के मुकाबले करीब डेढ़ शेयर का कारोबार हुआ है. BSE के लिए इसी तरह का आंकड़ा किसी ने प्रकाशित नहीं किया है.
छोटा एक्सचेंज. आखिरी 10 मिनट. 30 कंपनियां.
यह कम ट्रेडिंग कितनी कीमत रखती है, इसका पता SEBI की अपनी तालिकाओं से चलता है और यही दस्तावेज का सबसे अहम हिस्सा है.
पैसा वहां नहीं गया, जहां कीमत हिली. पहले दो सेकंड के उछाल में लगाए गए 66.6 करोड़ रुपये के खरीद ऑर्डरों में सबसे बड़ी एकल रकम 11.79 करोड़ रुपये HDFC Bank में गई. एक और 10.76 करोड़ रुपये ICICI Bank में और 9.46 करोड़ रुपये Reliance में गए. ये भारी-भरकम शेयर हैं, जो इंडेक्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं.
SEBI की उस सूची में इनमें से कोई भी शेयर शामिल नहीं है, जिनमें उस समय महत्वपूर्ण हलचल हुई.
IndiGo इसमें शामिल है. इसमें 67 लाख रुपये गए, HDFC Bank में लगाए गए पैसे के सत्रहवें हिस्से से भी कम और यह 2.62 फीसदी चढ़ गया, जो उस दिन की सबसे बड़ी तेजी थी. Tech Mahindra 2.44 फीसदी और Trent 1.91 फीसदी चढ़ा.
HDFC Bank में 11.79 करोड़ रुपये लगाइए और लगभग कुछ नहीं होता. IndiGo में 67 लाख रुपये लगाइए और यह ढाई फीसदी ऊपर चला जाता है. यही क्लोजिंग ऑक्शन की पूरी कहानी है: सेंसेक्स के छोटे शेयरों में दोपहर 3:20 बजे दूसरी तरफ लगभग कोई मौजूद ही नहीं होता.
सेंसेक्स दो सेकंड में 362 अंक चढ़ा. फिर 12 सेकंड बाद दोबारा चढ़ा. इसके बाद तीसरी बार 28 सेकंड में 405 अंक की तेजी आई.
खरीदार को वास्तव में इनमें से ज्यादा कुछ खरीदना ही नहीं पड़ा.
इस ऑक्शन में जो ऑर्डर पूरा नहीं होता, वह भी अंतिम कीमत तय करने में गिना जाता है और 10 मिनट के दौरान एक्सचेंज लगातार बताता रहता है कि कीमत किस दिशा में जा रही है. आप ऑर्डर डालते हैं, नंबर को हिलते हुए देखते हैं और भुगतान करने से पहले उन्हें वापस ले लेते हैं. लगाए गए कुल ऑर्डरों में से करीब एक-तिहाई रद्द कर दिए गए. 98 करोड़ रुपये का एक बैच 15:26:14 पर लगाया गया और 15:26:21 पर वापस ले लिया गया.
ऑर्डर में शामिल दूसरी फर्म ने इसी तंत्र का उल्टा इस्तेमाल किया. उसने पांच मिनट तक 145 करोड़ रुपये के बिक्री ऑर्डर लगाए रखे और इंडेक्स को नीचे रोके रखा, फिर तीन सेकंड में हर 100 में से 99 ऑर्डर रद्द कर दिए.
SEBI ने इसे पकड़ लिया. आदेश के पैराग्राफ 5 में कहा गया है कि उसकी अपनी निगरानी टीम नए सिस्टम पर रोज नजर रख रही थी और उसने इन उछालों को पहचान लिया. छह दिन बाद पैसे फ्रीज करने और दो कंपनियों पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ. यह तेजी से हुई कार्रवाई है और इसका श्रेय नियामक को मिलना चाहिए.
BSE इसमें नजर नहीं आता. 46 पन्नों के इस दस्तावेज में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि एक्सचेंज ने कुछ फ्लैग किया, किसी को अलर्ट किया या कुछ नोटिस किया. उसकी स्क्रीन, उसका इंडेक्स, उसका सर्विलांस विभाग और दस्तावेज में यह दर्ज नहीं है कि उसने कुछ किया हो.
फिर वह हिस्सा है जिसकी अब तक जांच ही नहीं हुई है.
जब SEBI ने जुलाई 2025 में Jane Street के खिलाफ कार्रवाई की थी, भारत में अब तक का सबसे बड़ा इंडेक्स-हेरफेर मामला, जिसमें 4,843 करोड़ रुपये एस्क्रो में रखे गए थे — तब सार्वजनिक आदेश में Nifty और Bank Nifty की जांच की गई थी. उसमें Sensex की जांच नहीं की गई थी.
क्यों?
13 अगस्त का आदेश पहली बार है जब किसी नियामक ने सेंसेक्स की क्लोजिंग पर बारीकी से नजर डाली और अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए. उसे दो कंपनियों, 3.68 करोड़ रुपये और 57 लाख रुपये के आगे झुकने वाले एक इंडेक्स को खोजने में छह दिन लगे. वह एक गुरुवार था. ऐसे गुरुवार बहुत आए हैं.
इसके आसपास चार तारीखें हैं.
3 अगस्त को नई क्लोजिंग प्रणाली शुरू हुई. पहले दिन ऑक्शन के दौरान Nifty करीब 200 अंक उछला और 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि Sensex में 0.7 फीसदी की बढ़त रही. तब से दोनों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है.
12 अगस्त को रिटेल ट्रेडर्स ने सिस्टम को खत्म करने की मांग करते हुए एक दिन ट्रेडिंग से दूरी बनाई. उनका कहना था कि क्लोजिंग अप्रत्याशित और असुरक्षित हो गई है. उन्हें ऐसे जुआरी कहकर खारिज कर दिया गया जो बदलाव को संभाल नहीं सकते.
13 अगस्त को 57 लाख रुपये के लिए सेंसेक्स 240 अंक हिला.
19 अगस्त को SEBI ने अपना आदेश साइन किया. उसी दिन BSE ने MSCI के साथ एक समझौते की घोषणा की, जिसके तहत मंजूरी के अधीन MSCI के भारत सूचकांकों पर फ्यूचर्स और ऑप्शंस लॉन्च करने की संभावना तलाशने की बात कही गई.
आदेश में एक बात अब भी अनसुलझी है.
उसी ऑक्शन के शुरुआती सेकंड में, 15:20:03 से 15:20:06 के बीच, सेंसेक्स 451 अंक गिर गया. तीन सेकंड. यह उन तीन हलचलों में से दो से भी बड़ी गिरावट है, जिसके लिए SEBI ने किसी को जिम्मेदार ठहराया है. पैराग्राफ 26 में इसे दर्ज किया गया है और कहा गया है कि यह "under further examination" यानी "आगे जांच के अधीन" है, और फिर बात आगे बढ़ जाती है.
इसके लिए किसी का नाम नहीं लिया गया है.
57 लाख रुपये ने सेंसेक्स को ऊपर पहुंचाया. उसे नीचे किसने धकेला, यह अब तक स्पष्ट नहीं है.
SEBI के 19 अगस्त 2026 के आदेश में केवल prima facie यानी प्रथम दृष्टया निष्कर्ष दिए गए हैं. नामित दोनों कंपनियों के पास जवाब देने के लिए 21 दिन हैं और वे सुनवाई का अनुरोध कर सकती हैं. ऑर्डर में दिए गए मूल्य और कीमतों में बदलाव उसी आदेश की तालिकाओं से लिए गए हैं. ट्रेडिंग-शेयर और ऑक्शन-वॉल्यूम के आंकड़े 3 अगस्त 2026 से इस अवधि के प्रकाशित एक्सचेंज डेटा और स्वतंत्र विश्लेषण से लिए गए हैं.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
अमेरिकी बॉन्ड बायबैक के ऐलान के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने की चमक बढ़ी, MCX पर भी पीली धातु ने पकड़ी रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोने की कीमतों ने सोमवार को एक बार फिर तेजी की रफ्तार पकड़ ली. अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की उम्मीद से ज्यादा बायबैक की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ी. कॉमेक्स पर सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि चांदी 69 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही. घरेलू बाजार में भी सोने के वायदा भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली, जबकि चांदी दबाव में रही.
MCX पर सोने ने पकड़ी तेज रफ्तार
MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 386 रुपये की गिरावट के साथ 1,62,052 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला. हालांकि कारोबार के दौरान इसने तेजी पकड़ ली और खबर लिखे जाने तक 1,132 रुपये की बढ़त के साथ 1,63,570 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. सोने ने दिन के कारोबार में 1,63,585 रुपये का उच्च स्तर और 1,62,001 रुपये का निचला स्तर छुआ. इस साल MCX पर सोने का वायदा भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है.
चांदी की चमक पड़ी फीकी
सोने के मुकाबले चांदी में सोमवार को नरमी देखने को मिली. MCX पर चांदी का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 1,000 रुपये की गिरावट के साथ 2,45,597 रुपये प्रति किलो पर खुला. पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,46,597 रुपये पर बंद हुआ था. खबर लिखे जाने तक चांदी 461 रुपये की गिरावट के साथ 2,46,136 रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी. कारोबार के दौरान इसने 2,46,475 रुपये का उच्च और 2,44,815 रुपये का निचला स्तर छुआ. इस साल चांदी MCX पर 4,20,048 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है.
कॉमेक्स पर सोना 4,700 डॉलर के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी बनी हुई है. कॉमेक्स पर सोना 4,673.40 डॉलर प्रति औंस पर खुला था, जबकि पिछला क्लोजिंग प्राइस 4,680.60 डॉलर था. कारोबार के दौरान यह 25.70 डॉलर की बढ़त के साथ 4,706.30 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया. वहीं, कॉमेक्स पर चांदी 69.34 डॉलर प्रति औंस पर खुली. पिछले सत्र में इसका क्लोजिंग प्राइस 69.53 डॉलर था. खबर लिखे जाने तक चांदी 0.37 डॉलर की गिरावट के साथ 69.16 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी.
अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले से सोने को मिला सहारा
सोने की कीमतों में तेजी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की अपेक्षा से अधिक बायबैक की घोषणा को प्रमुख वजह माना जा रहा है. इस फैसले से बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई.
डेरिवेटिव्स मार्केट में युवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ नुकसान का आंकड़ा भी चौंकाने वाला, 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स सबसे ज्यादा प्रभावित
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में निवेश को लेकर युवाओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग में बढ़ती भागीदारी उनके लिए महंगी साबित हो रही है. सोशल मीडिया पर जल्दी पैसा कमाने के दावे, ट्रेडिंग ऐप्स की आसान उपलब्धता और कम समय में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद युवाओं को डेरिवेटिव्स बाजार की ओर खींच रही है. हालांकि, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आंकड़े इस ट्रेंड की दूसरी तस्वीर दिखाते हैं. वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के करीब 89 फीसदी F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. वहीं, इस उम्र वर्ग की डेरिवेटिव्स मार्केट में हिस्सेदारी भी चार साल में 31 फीसदी से बढ़कर 43 फीसदी हो गई है.
F&O में युवाओं की बढ़ी हिस्सेदारी
SEBI की स्टडी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स पार्टिसिपेंट्स का करीब 43 फीसदी रहे. चार साल पहले यह हिस्सेदारी 31 फीसदी थी. यानी कम उम्र के निवेशकों की F&O मार्केट में भागीदारी तेजी से बढ़ी है. हालांकि, इसी वर्ग में नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स की संख्या भी सबसे ज्यादा रही. वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के करीब 89 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. इसके मुकाबले 60 साल से ज्यादा उम्र वाले पार्टिसिपेंट्स में नुकसान उठाने वालों की हिस्सेदारी 81 फीसदी रही. इससे साफ है कि कम उम्र के ट्रेडर्स की बढ़ती भागीदारी के साथ जोखिम और नुकसान का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है.
कम आय वाले ट्रेडर्स पर ज्यादा मार
SEBI के आंकड़ों में आय के आधार पर भी F&O ट्रेडिंग की तस्वीर चिंताजनक है. व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स में करीब तीन-चौथाई ऐसे थे, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम थी. इस समूह का डेरिवेटिव्स टर्नओवर में करीब 43 फीसदी हिस्सा था, लेकिन कुल नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 53 फीसदी रही. इस आय वर्ग में करीब 88 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. वहीं, सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले निवेशकों में नुकसान उठाने वालों की हिस्सेदारी 81 फीसदी रही.
छोटे शहरों के निवेशक भी F&O में बढ़ा रहे दांव
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का विस्तार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है. SEBI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में B30 यानी बड़े शहरों के बाहर के इलाकों के निवेशक व्यक्तिगत ट्रेडर्स का करीब दो-तिहाई हिस्सा थे. डेरिवेटिव्स के कुल टर्नओवर में भी उनका हिस्सा करीब आधा रहा. खास बात यह है कि B30 निवेशकों की हिस्सेदारी व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड एसेट्स में करीब एक-चौथाई है. इससे संकेत मिलता है कि छोटे शहरों के निवेशक पारंपरिक निवेश की तुलना में डेरिवेटिव्स जैसे ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों में अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हैं.
1 लाख रुपये से कम पोर्टफोलियो वालों का सबसे ज्यादा नुकसान
SEBI की स्टडी में निवेशकों के इक्विटी पोर्टफोलियो और F&O ट्रेडिंग के बीच संबंध भी सामने आया है. वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 95 लाख यानी 78 फीसदी व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स का इक्विटी पोर्टफोलियो 1 लाख रुपये से कम था. इस समूह की डेरिवेटिव्स टर्नओवर में हिस्सेदारी करीब 51 फीसदी थी, लेकिन कुल नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 70 फीसदी तक पहुंच गई. यानी कम पूंजी वाले निवेशकों ने F&O में अपेक्षाकृत बड़ा जोखिम उठाया और नुकसान का बोझ भी ज्यादा झेला.
छोटा पोर्टफोलियो, बड़ा F&O दांव
स्टडी के मुताबिक, ऐसे ट्रेडर्स जिनका इक्विटी पोर्टफोलियो 1 लाख रुपये से कम था, लेकिन डेरिवेटिव्स में उनका टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा था, उनकी संख्या कुल ट्रेडर्स की करीब 13 फीसदी थी. हालांकि, कुल नुकसान में उनकी हिस्सेदारी 52 फीसदी रही. यह आंकड़ा बताता है कि सीमित इक्विटी पूंजी वाले कई निवेशक डेरिवेटिव्स में अपने उपलब्ध संसाधनों की तुलना में काफी बड़ा दांव लगा रहे थे.
बिना इक्विटी पोर्टफोलियो के भी F&O ट्रेडिंग
SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 43 लाख ट्रेडर्स यानी व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स पार्टिसिपेंट्स का लगभग 35 फीसदी हिस्सा ऐसा था, जिसके पास वित्त वर्ष 2026 के अंत में कोई अंडरलाइंग इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था. इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग बिना कैश इक्विटी होल्डिंग के भी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग कर रहे थे. ऐसे में F&O उनके लिए निवेश के बजाय सीधे सट्टेबाजी जैसे जोखिम वाला विकल्प बन सकता है.
कुल ट्रेडर्स की संख्या घटी, लेकिन जोखिम बना रहा
SEBI की स्टडी के मुताबिक, व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स की कुल संख्या में भी गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2025 में करीब 1.06 करोड़ व्यक्तिगत ट्रेडर्स थे, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर करीब 87.5 लाख रह गए. यानी ट्रेडर्स की संख्या में करीब 18 फीसदी की कमी आई. इसके बावजूद युवा निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ना और छोटे पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स का भारी नुकसान उठाना बाजार नियामक के लिए चिंता का विषय है.
सोशल मीडिया और आसान ट्रेडिंग से बढ़ा आकर्षण
F&O ट्रेडिंग की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया पर मौजूद फिनफ्लुएंसर्स, ट्रेडिंग से जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद और मोबाइल ऐप्स के जरिए बाजार तक आसान पहुंच जैसे कई कारण हैं. हालांकि, SEBI के आंकड़े बताते हैं कि डेरिवेटिव्स में तेजी से पैसा बनाने की कोशिश बड़े नुकसान में बदल सकती है.
SEBI ने अपनी स्टडी में उम्र, आय, भौगोलिक स्थिति, ट्रेडिंग गतिविधि और पोर्टफोलियो के आकार के आधार पर ट्रेडिंग के नतीजों का विश्लेषण किया है. हालांकि, नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन संबंधों को सीधे कारण और प्रभाव के प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
35,000 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने की योजना में बढ़ी उम्मीद, प्रवर्तक कंपनियां देंगी गारंटी; SBI निजी बैंकों से बाकी कर्ज मिलने के बाद ही जारी करेगा अपनी रकम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आईडिया (Vodafone Idea) को अपनी 45,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना के लिए बैंक ऋण जुटाने में बड़ी राहत मिली है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कंपनी के हिस्से का ऋण मंजूर करने पर सहमति जताई है. दरअसल, वोडाफोन-आईडिया की प्रवर्तक कंपनियां कर्ज के लिए गारंटी देने को तैयार हो गई हैं, जिससे पहले गारंटी को लेकर अटका वित्तपोषण प्रस्ताव आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है. हालांकि, SBI ने रकम जारी करने से पहले एक अहम शर्त रखी है. बैंक तब तक अपना हिस्सा जारी नहीं करेगा, जब तक वोडाफोन-आईडिया निजी क्षेत्र के बैंकों से प्रस्तावित ऋण का बाकी हिस्सा हासिल नहीं कर लेती.
प्रवर्तक कंपनियां देंगी गारंटी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गारंटी वोडाफोन-आईडिया की प्रवर्तक कंपनियां देंगी, न कि समूह की बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां. यह गारंटी SBI के ऋण के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर के तौर पर काम करेगी. सूत्र के मुताबिक, कंपनी की ओर से यह अनुरोध किया गया था कि यदि चार वर्षों तक सब कुछ ठीक रहता है तो गारंटी वापस ले ली जाए. SBI ने इस शर्त पर भी सहमति जताई है.
कंपनी में प्रमोटरों की 25.64 फीसदी हिस्सेदारी
मार्च 2026 तक वोडाफोन-आईडिया में प्रवर्तकों की कुल हिस्सेदारी 25.64 फीसदी थी. इसमें वोडाफोन ग्रुप पीएलसी की 19 फीसदी और कुमार मंगलम बिड़ला के नेतृत्व वाले आदित्य बिड़ला ग्रुप की 6.63 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है. भारत सरकार की कंपनी में करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन इसे प्रवर्तक के बजाय सार्वजनिक शेयरधारक की श्रेणी में रखा गया है.
निजी बैंकों से कर्ज जुटाना अभी बाकी
बैंकर के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंक फिलहाल इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं. ऐसे में वोडाफोन-आईडिया को उनके साथ अलग से बातचीत करनी होगी. कंपनी को सभी ऋणदाताओं के साथ चर्चा कर पूरे वित्तपोषण को अंतिम रूप देना होगा. इसमें कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक ऋणदाता कितना योगदान देगा. कंपनी को तब तक वित्तपोषण प्रस्ताव आगे बढ़ाने में मुश्किल होगी, जब तक सभी ऋणदाता अपने-अपने हिस्से को मंजूरी नहीं दे देते.
35,000 करोड़ रुपये के नए कर्ज की जरूरत
वोडाफोन-आईडिया ने अगले तीन वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना के लिए 35,000 करोड़ रुपये का नया वित्तपोषण मांगा है. इसमें 25,000 करोड़ रुपये बैंक ऋण के तौर पर और 10,000 करोड़ रुपये क्रेडिट लाइन या अन्य गैर-ऋण सुविधाओं के रूप में जुटाने की योजना है. कंपनी की पूंजीगत व्यय योजना में 17 प्राथमिकता वाले सर्किल में 5G नेटवर्क का विस्तार, EBITDA को बढ़ाना और ग्राहकों की संख्या में इजाफा कर आय को मजबूत करना शामिल है.
पहले ही मिल चुके हैं 6,400 करोड़ रुपये
जून 2026 को समाप्त तिमाही तक वोडाफोन-आईडिया लंबी अवधि की बैंक सुविधा के तहत 6,400 करोड़ रुपये हासिल कर चुकी है. कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी अभिजित किशोर ने 11 अगस्त को तिमाही नतीजों के बाद विश्लेषकों से बातचीत में कहा था कि कंपनी अपने सभी ऋणदाताओं के साथ बातचीत कर रही है और इस दिशा में अच्छी प्रगति हुई है. कंपनी के मुताबिक, ऋणदाताओं में SBI के नेतृत्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के भारतीय बैंक और विदेशी बैंकों का समूह शामिल है.
FY27 के कैपेक्स के लिए बैंक कर्ज अहम
बैंकर के मुताबिक, SBI की शर्तें कंपनी के लिए स्वीकार्य हैं और बैंक अपने हिस्से का ऋण जारी करेगा. हालांकि, दूसरे ऋणदाताओं को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की मंजूरी से गुजरना होगा. वोडाफोन-आईडिया को प्रत्येक ऋणदाता के साथ अलग-अलग बातचीत कर वित्तपोषण को अंतिम रूप देना होगा. कंपनी को उम्मीद है कि SBI के नेतृत्व वाले सरकारी बैंकों के साथ बातचीत जल्द अंतिम रूप लेगी. इसके साथ ही वह दूसरे स्रोतों से भी ऋण जुटाने की कोशिश कर रही है. वित्त वर्ष 2027 में पूंजीगत व्यय बढ़ाने और नेटवर्क विस्तार को गति देने के लिए बैंक ऋण वोडाफोन-आईडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 20.15 अंक चढ़कर 24,252 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर है. शुक्रवार को सेंसेक्स 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 20.15 अंक चढ़कर 24,252 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी इंडेक्स फिलहाल सीमित दायरे में रह सकता है, लेकिन 24,000 के मजबूत सपोर्ट के ऊपर टिके रहने पर शॉर्ट टर्म में रिकवरी की गुंजाइश बनी हुई है. वहीं, 24,350-24,500 के जोन के ऊपर मजबूती बाजार में तेजी का संकेत दे सकती है.
शुक्रवार को कैसी रही बाजार की चाल
शुक्रवार को निफ्टी 53 अंकों की बढ़त के साथ खुला, लेकिन पूरे कारोबारी सत्र में इंडेक्स सीमित दायरे में कारोबार करता रहा. अंत में निफ्टी 20 अंक यानी 0.08 फीसदी की बढ़त के साथ 24,252 पर बंद हुआ. क्लोजिंग ऑक्शन में भी इंडेक्स को करीब 19 अंकों का सहारा मिला. सेक्टोरल स्तर पर मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि ऑटो, मीडिया और आईटी सेक्टर दबाव में रहे. व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया. Nifty Midcap 100 में 0.10 फीसदी और Nifty Smallcap 100 में 0.69 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई.
इस हफ्ते किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर
इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में मानसून की रफ्तार, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और बड़े आर्थिक घटनाक्रम अहम रहेंगे. दो हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद इन संकेतकों के बीच अगर खरीदारी लौटती है, तो निफ्टी में शॉर्ट टर्म रिकवरी देखने को मिल सकती है.
24,000 के नीचे फिसला तो बढ़ सकता है दबाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का मौजूदा ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है. उनका मानना है कि इंडेक्स अगले हफ्ते 24,500-24,600 तक पहुंच सकता है. उन्होंने 24,100 को अहम सपोर्ट बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 और 100 दिन के EMA के ऊपर बना हुआ है, जो करीब 24,200 के आसपास हैं. हालांकि इंडेक्स अभी 20 दिन के EMA यानी 24,300 और 200 दिन के EMA यानी 24,376 से नीचे है. ऐसे में फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव है. उनके मुताबिक 24,000 के नीचे क्लोजिंग होने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. वहीं, 24,400 के ऊपर टिकने पर शॉर्ट टर्म में तेजी की वापसी हो सकती है.
Bank Nifty के लिए 58,200-58,300 अहम
Bank Nifty भी शुक्रवार को करीब 290 अंकों के दायरे में कारोबार करता रहा. 58,200-58,300 का स्तर इंडेक्स के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है. इसके ऊपर निकलने पर Bank Nifty 58,700 और फिर 59,000 तक जा सकता है. वहीं, नीचे की तरफ 57,300-57,200 का स्तर मजबूत सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में NTPC Green Energy, Meesho, Urban Company, Vodafone Idea, Power Grid, Swiggy, Mahindra & Mahindra, Zee Entertainment, Aurobindo Pharma, Lenskart Solutions और Bank of Baroda के शेयर फोकस में रह सकते हैं. इन कंपनियों से जुड़े बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील, फंडिंग, कारोबार विस्तार और नियामकीय अपडेट निवेशकों के लिए अहम हैं. NTPC Green Energy की इकाई को 500 MW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता मिली है, जबकि Meesho में Y Combinator करीब 1.05 फीसदी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकता है. Urban Company और Kent RO के बीच विज्ञापन विवाद को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा है. Vodafone Idea के कैपेक्स प्लान के लिए SBI ने अपने हिस्से के लोन को मंजूरी देने पर सहमति जताई है, वहीं Power Grid को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है. Swiggy के शेयरधारकों ने कंपनी को Indian-Owned and Controlled Company बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. Mahindra & Mahindra नए पिकअप मॉडल के जरिए दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे विदेशी बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रही है. Zee Entertainment ने प्रमोटर ग्रुप को ₹126 प्रति वारंट के भाव पर 20.9 करोड़ फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी किए हैं. Aurobindo Pharma की इकाई AuroPeptides के तेलंगाना प्लांट के US FDA निरीक्षण में एक आपत्ति दर्ज की गई. इसके अलावा, SoftBank Vision Fund II Lenskart Solutions में 2.6 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है, जबकि Bank of Baroda ने 400 मिलियन डॉलर के सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड रेट नोट्स जारी किए हैं.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
कुल मिलाकर बाजार में फिलहाल सतर्क रुख बना हुआ है. निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट और 24,350-24,500 का जोन प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा. 24,000 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि 24,400-24,500 के ऊपर मजबूती आने पर रिकवरी का दायरा बढ़ सकता है. इसलिए अगले हफ्ते निवेशकों की नजर इन तकनीकी स्तरों के साथ FII फ्लो, क्रूड और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
एडवांस डायबेटिक केयर जूस और गिलोय पपीता जूस रहे प्रमुख आकर्षण, 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आयुर्वेद के विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली की वेलनेस जरूरतों से जोड़ने की दिशा में काम कर रही क्यूरा (Cura) ने 21 से 23 अगस्त तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं वेलनेस एक्सपो 2026 में अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया. कंपनी ने एक्सपो में एडवांस डायबेटिक केयर जूस और गिलोय पपीता समेत अपने आयुर्वेद आधारित वेलनेस पोर्टफोलियो को पेश किया.
क्यूरा का फोकस प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्रियों और उद्देश्यपूर्ण आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के जरिए रोजमर्रा की वेलनेस जरूरतों के लिए सरल और सुलभ समाधान विकसित करने पर है. एक्सपो में कंपनी ने अपने उत्पादों की फॉर्मुलेशन प्रक्रिया और आयुर्वेद आधारित दृष्टिकोण को उपभोक्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने रखा.
एडवांस डायबेटिक केयर जूस रहा प्रमुख आकर्षण
एक्सपो में एडवांस डायबेटिक केयर जूस प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा. इसे डायबेटिक वेलनेस के तौर पर उन लोगों के लिए पेश किया गया, जो अपने ब्लड शुगर मैनेजमेंट को अपनी दैनिक वेलनेस दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहते हैं.
कंपनी के अनुसार, करीब 20 प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार इस फॉर्मुलेशन में गुडमर (Gymnema sylvestre) को प्रमुख वनस्पति के रूप में शामिल किया गया है. इसके अलावा करेला, जामुन, नीम, गिलोय, मेथी, शिलाजीत, अश्वगंधा, अर्जुन, आंवला, हल्दी और दालचीनी जैसी सामग्रियां भी इसमें शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक इसका शुगर-फ्री और ट्रिपल-रिफाइंड फॉर्मुलेशन प्राकृतिक सामग्रियों के संयोजन पर आधारित है.
क्यूरा ने गिलोय पपीता जूस को भी एक्सपो में प्रदर्शित किया. कंपनी के अनुसार, इसे बुखार के मौसम, इम्युनिटी और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़ी वेलनेस जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है.
इसमें गिलोय, पपीते की पत्ती और तुलसी के साथ नीम, अश्वगंधा और एलोवेरा जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक फॉर्मुलेशन को इम्युनिटी, स्वास्थ्य लाभ, सूजनरोधी और ज्वररोधी सहायता, प्लेटलेट सपोर्ट तथा दैनिक प्रतिरक्षा सुरक्षा जैसी वेलनेस जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
आयुर्वेद को रोजमर्रा की वेलनेस से जोड़ने पर जोर
क्यूरा आयुर्वेदिक एंड यूनानी के डायरेक्टर आदित्य मीहीर ने कहा, “हमारा उद्देश्य उद्देश्यपूर्ण वेलनेस को सरल और सुलभ बनाना है, साथ ही इसे आयुर्वेद के विज्ञान और विरासत से जोड़कर रखना है. इस एक्सपो ने हमें ऐसे उपभोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों से जुड़ने का अवसर दिया, जो आज तेजी से भरोसेमंद और प्राकृतिक वेलनेस समाधानों की तलाश कर रहे हैं.”
14 करोड़ से अधिक ग्राहकों तक पहुंच का दावा
कंपनी के मुताबिक क्यूरा ने अब तक 14 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दी हैं और 28 से ज्यादा राज्यों में 3,000 से अधिक डॉक्टरों का विश्वास हासिल किया है. कंपनी की गुणवत्ता संबंधी प्रतिबद्धता ISO-GMP प्रमाणित विनिर्माण और NABL प्रयोगशाला प्रमाणन से मजबूत होती है.
क्यूरा के अनुसार, उसके चुनिंदा वेलनेस फॉर्मुलेशन की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उन्हें हर 48 घंटे में SS-ग्रेड केतलियों में ताजा तैयार किया जाता है. कंपनी का दावा है कि ये उत्पाद अर्क-आधारित नहीं हैं, जैसा कि इस श्रेणी के कई उत्पादों में देखने को मिलता है.
20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं वेलनेस एक्सपो क्यूरा के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के दर्शकों, उपभोक्ताओं और उद्योग हितधारकों से जुड़ने का मंच बना. तीन दिवसीय आयोजन में 150 से अधिक वैश्विक प्रदर्शक, 150 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता और 20 से अधिक देशों से 10,000 से ज्यादा व्यापारिक आगंतुक शामिल हुए.
एक्सपो में स्वास्थ्य सेवा, AYUSH, वेलनेस, पोषण, मेडिकल टेक्नोलॉजी और निवारक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. क्यूरा ने इस मंच के जरिए अपने आयुर्वेद आधारित वेलनेस उत्पादों और फॉर्मुलेशन को पेश किया. कंपनी के मुताबिक, एक्सपो में भागीदारी उसके उस दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक सामग्रियों, ताजगी और सोच-समझकर तैयार किए गए फॉर्मुलेशन के जरिए आयुर्वेद आधारित वेलनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का सरल और भरोसेमंद हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
पूरी तरह कन्वर्जन के बाद Zee Entertainment में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 17.9% होगी, शेयरधारकों ने 23.79% हिस्सेदारी को मंजूरी दी थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी मीडिया (Zee Entertainment Enterprises-ZEEL) ने प्रमोटर ग्रुप की इकाई Sunbright Mauritius Investments Ltd को 126 रुपये प्रति वारंट के इश्यू प्राइस पर 20,94,47,805 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं. वारंट का आवंटन 21 अगस्त को शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलने के बाद पूरा हुआ. यह प्रक्रिया सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) की ओर से दी गई अंतरिम राहत के बाद आगे बढ़ी.
659.76 करोड़ रुपये का भुगतान
Sunbright ने इश्यू प्राइस का 25 फीसदी यानी 31.50 रुपये प्रति वारंट की राशि अग्रिम रूप से चुकाई है. यह रकम करीब 659.76 करोड़ रुपये है. बाकी 75 फीसदी यानी 94.50 रुपये प्रति वारंट का भुगतान आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर करना होगा. इसके लिए अंतिम तारीख 21 फरवरी 2028 है.
हर वारंट के कन्वर्जन पर धारक को 1 रुपये फेस वैल्यू का एक इक्विटी शेयर हासिल करने का अधिकार होगा. बाकी भुगतान होने और वारंट के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन तक ZEEL की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होगा.
कन्वर्जन के बाद 17.90 फीसदी होगी हिस्सेदारी
अगर सभी वारंट इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट हो जाते हैं, तो पूरी तरह डायल्यूटेड आधार पर ZEEL में Sunbright की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 17.90 फीसदी हो जाएगी. इससे प्रमोटर ग्रुप को प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का महत्वपूर्ण रास्ता मिलेगा.
शेयरधारकों ने इससे पहले प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाकर 23.79 फीसदी तक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. हालांकि, मौजूदा वारंट के पूरी तरह कन्वर्जन के बाद हिस्सेदारी करीब 17.90 फीसदी तक ही पहुंचेगी.
SAT के आदेश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
यह आवंटन 14 अगस्त को SAT की ओर से दिए गए आदेश के बाद हुआ. ट्रिब्यूनल ने ZEEL और पुनीत गोयनका को प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी. इसके लिए दोनों अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी पेनल्टी जमा करने की शर्त रखी गई थी. ट्रिब्यूनल ने वारंट इश्यू पूरा करने की समयसीमा भी सात दिन बढ़ा दी थी.
SAT ने ZEEL को अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल रोजमर्रा की परिचालन जरूरतों के लिए करने की भी अनुमति दी. हालांकि, इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता. इसमें प्रस्तावित डिविडेंड का भुगतान भी शामिल है.