भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. Anarock Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक पहुंच सकता है. वहीं, अगले चरण के विस्तार के लिए 300 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत का डेटा सेंटर उद्योग अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है. देश में डेटा की खपत और उत्पादन बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. Anarock Capital की रिपोर्ट ‘डेटा सेंटर: द ब्लूप्रिंट ऑफ द डिजिटल फोर्ट्रेस इन इंडिया’ के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक हो सकता है. 2007 में यह महज 0.6 मिलियन वर्ग फुट था, जो H1 2026 तक बढ़कर करीब 27 मिलियन वर्ग फुट हो गया है. आगामी आपूर्ति और विस्तार को 300 अरब डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताओं से समर्थन मिलने की उम्मीद है.
H1 2026 तक डेटा सेंटर क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, H1 2026 तक भारत में डेटा सेंटर की आईटी क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक हो चुकी है. अगले चार वर्षों में विकासाधीन परियोजनाओं के कारण यह क्षमता 6.7 गीगावाट से अधिक हो सकती है, यानी मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब तीन गुना वृद्धि की संभावना है.
Anarock Capital के सीईओ शोभित अग्रवाल के अनुसार, 101 मिलियन वर्ग फुट का अनुमानित डेटा सेंटर फुटप्रिंट रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े अवसर को दर्शाता है. डेटा सेंटर सामान्य कार्यालय या औद्योगिक परियोजनाओं से अलग होते हैं, क्योंकि इनके लिए बड़े भूखंड, पर्याप्त बिजली क्षमता, आधुनिक कूलिंग सिस्टम, मजबूत कनेक्टिविटी और उच्च स्तर की परिचालन क्षमता जरूरी होती है.
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर का विस्तार केवल अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र की मांग नहीं पैदा करेगा, बल्कि यह रियल एस्टेट, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम पर स्थित एक विशेष एसेट क्लास के रूप में विकसित होगा. इसके साथ रणनीतिक स्थानों पर जमीन, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग एवं निर्माण सेवाओं, फाइबर कनेक्टिविटी और विशेष कूलिंग समाधानों की मांग भी बढ़ेगी.
मुंबई-एमएमआर सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब
भारत में मुंबई-एमएमआर डेटा सेंटर का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. क्षेत्र में 54 परिचालन डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 812 मेगावाट है. इसके बाद चेन्नई का स्थान है, जहां 25 डेटा सेंटर और 298 मेगावाट की क्षमता है.
दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 18-18 परिचालन डेटा सेंटर हैं. इनकी आईटी क्षमता क्रमशः 179 मेगावाट और 137 मेगावाट है. वहीं, हैदराबाद में 12 डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 178 मेगावाट है.
इन डेटा सेंटर क्लस्टर्स के विकास में जमीन और बिजली की उपलब्धता, नेटवर्क कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच और प्रमुख मांग केंद्रों से नजदीकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इससे स्थापित डेटा सेंटर हब के अलावा अन्य शहरों में भी रियल एस्टेट विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
एआई बढ़ाएगा डेटा सेंटर की मांग
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को डेटा सेंटर की मौजूदा और भविष्य की मांग के प्रमुख कारकों में से एक बताया गया है. एआई मॉडल को पारंपरिक डिजिटल एप्लीकेशन की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग पावर, स्टोरेज क्षमता और ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की डिजाइन और इंजीनियरिंग जरूरतें भी बदलेंगी.
पावर, जमीन और कनेक्टिविटी सबसे बड़ी जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर उद्योग के अगले चरण की वृद्धि मुख्य रूप से बिजली, जमीन और कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी. विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, उपयुक्त जमीन, तेज कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता यह तय करेगी कि भविष्य में डेटा सेंटर क्षमता कहां विकसित की जाएगी.
इस विस्तार का असर केवल डेटा सेंटर उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा. रिपोर्ट के अनुसार, इससे भारत के प्रमुख डिजिटल बाजारों में जमीन के इस्तेमाल के तरीके, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और पूरे कमर्शियल रियल एस्टेट परिदृश्य में भी बदलाव आने की संभावना है.
PRAGATI बैठक में प्रधानमंत्री का सख्त निर्देश, 9 राज्यों में चल रही इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर दिया जोर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली छह बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की. उन्होंने परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया. 53वीं PRAGATI बैठक में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी इन परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के निर्देश दिए.
9 राज्यों में फैली परियोजनाओं की समीक्षा
सेवा तीर्थ में हुई बैठक में 9 राज्यों में चल रही छह परियोजनाओं की समीक्षा की गई. इस दौरान परियोजनाओं की समय-सीमा, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और लंबित मुद्दों के समाधान पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं के हर चरण में गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा.
देरी से बढ़ती है लागत, टलते हैं आर्थिक फायदे
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी का असर सिर्फ लागत बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे नागरिकों, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं. उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर प्रो-एक्टिव तरीके से काम करने और हर स्तर पर अधिक जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई.
उन्होंने कहा कि किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के तौर पर नहीं, बल्कि एक एकीकृत परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए. अलग-अलग हिस्सों में हुई प्रगति का अंतिम लक्ष्य पूरी परियोजना को समय पर पूरा कर उसे परिचालन में लाना होना चाहिए.
बड़े प्रोजेक्ट्स में कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर पर जोर
प्रधानमंत्री ने बड़े परिवहन प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव होने पर कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावनाओं का आकलन करने को भी कहा. इससे अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं के लिए बेहतर समन्वित व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है.
एग्रीस्टैक में AI के इस्तेमाल पर जोर
बैठक में एग्रीस्टैक की भी समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इनपुट की योजना बनाने से लेकर कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन में डेटा इकोसिस्टम का बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए. इससे किसानों और अन्य हितधारकों तक सही लाभ पहुंचाने और डेटा आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी.
साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता अभियान बढ़ाने के निर्देश
प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता, शिक्षा और प्रशिक्षण पर लगातार काम करने की जरूरत है. खासतौर पर बुजुर्गों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए लक्षित जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया. उन्होंने साइबर अपराध से निपटने वाले कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग की जरूरत भी बताई, ताकि वे फ्रॉड के बदलते तरीकों की पहचान कर सकें और मामलों पर तेजी से कार्रवाई कर सकें.
जलडमरूमध्य में संकट से खाड़ी देशों से गैस सप्लाई प्रभावित, अगस्त में अमेरिका से 0.62 मिलियन टन LPG और 0.75 मिलियन टन LNG का आयात
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत ने अपनी गैस सप्लाई रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका से LPG और LNG का आयात बढ़ा दिया है. केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की, जबकि LNG के मामले में भी अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन की खरीद हुई. वहीं, कच्चे तेल के मोर्चे पर रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है.
अमेरिका बना LPG का बड़ा सप्लायर
अमेरिका से भारत की LPG खरीद में हाल के महीनों में तेजी आई है. अगस्त में अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की गई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 0.89 मिलियन टन था. केपलर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अमेरिका से हुई LPG खरीद भारत के कुल LPG आयात का 73 फीसदी से अधिक रही. इसके उलट खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है. अगस्त में UAE से भारत को सिर्फ करीब 1.40 लाख टन LPG मिली. कतर से करीब 60 हजार टन की सप्लाई हुई, जबकि सऊदी अरब से जुलाई और अगस्त में कोई सप्लाई नहीं हुई.
LNG सप्लाई में भी बदला समीकरण
LNG के मामले में भी भारत ने अमेरिका की ओर रुख बढ़ाया है. कतर से LNG की सप्लाई अप्रैल में शून्य हो गई थी, जबकि अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन LNG खरीदी. इससे साफ है कि पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत वैकल्पिक स्रोतों से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका से गैस मंगाना पड़ रहा महंगा
खाड़ी देशों की तुलना में अमेरिका से लंबी दूरी से गैस आयात करने का असर लागत पर भी पड़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबी दूरी की समुद्री सप्लाई में मालभाड़ा और बीमा लागत अधिक होती है. इसके अलावा वैश्विक बाजार में गैस की सप्लाई सीमित होने से कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है.
ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन में यह बदलाव तुरंत नहीं होता, क्योंकि ऊर्जा व्यापार में पहले से किए गए दीर्घकालिक अनुबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कच्चे तेल के लिए रूस पर भरोसा कायम
LPG और LNG के लिए अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाने के बावजूद कच्चे तेल के मामले में भारत की रूस पर निर्भरता बनी हुई है. अगस्त में भारत ने रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया. यह मात्रा दूसरे सबसे बड़े सप्लायर UAE से करीब तीन गुना अधिक रही.
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में रूसी कच्चे तेल को पूरी तरह दूसरे स्रोतों से बदलना भारत के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से मुश्किल है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर पाइपलाइन और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण UAE से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई भी काफी हद तक स्थिर बनी हुई है.
वेनेजुएला से भी बढ़ा कच्चे तेल का आयात
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत वेनेजुएला भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है. अगस्त में भारत ने वेनेजुएला से करीब 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया.
वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयोगी माना जाता है. हालांकि, अमेरिकी रिफाइनरियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इसकी उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है.
एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता घटाने की कोशिश
पश्चिम एशिया के संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में सप्लाई स्रोतों का विविधीकरण तेज करने के लिए मजबूर किया है. LPG और LNG के लिए अमेरिका, कच्चे तेल के लिए रूस और UAE तथा अतिरिक्त विकल्प के तौर पर वेनेजुएला से आयात बढ़ाकर भारत एक व्यापक ऊर्जा सप्लाई नेटवर्क तैयार कर रहा है. इससे किसी एक क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए लेनदेन की हुई थी जांच, बीमा कमीशन की सीमा से बचने और शेयरधारकों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की हुई थी पड़ताल
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MFSL), एक्सिस बैंक और अन्य संस्थाओं के खिलाफ 3,911.95 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कार्यवाही खारिज कर दी है. यह मामला मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों से जुड़े लेनदेन से संबंधित था. सेबी ने कहा कि प्रतिभूति धोखाधड़ी, शेयरधारकों को गलत तरीके से निवेश के लिए प्रेरित करने या MFSL के शेयर मूल्य में हेरफेर के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले.
2010 से 2021 तक के लेनदेन की जांच
इस मामले में 2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए कई इक्विटी लेनदेन की जांच की गई थी. नियामक ने यह भी जांच की कि क्या इन लेनदेन की संरचना बीमा कमीशन पर लागू सीमा से बचने के लिए तैयार की गई थी और क्या इससे MFSL के शेयरधारकों को नुकसान हुआ. सेबी की कार्यवाही में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस कैपिटल, एक्सिस सिक्योरिटीज और कंपनियों के कुछ प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों को भी शामिल किया गया था.
IRDAI की कार्रवाई के बाद शुरू हुई थी जांच
सेबी की जांच नवंबर 2022 में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की ओर से मिली जानकारी के बाद शुरू हुई थी. यह जानकारी मैक्स लाइफ के गैर-सूचीबद्ध शेयरों से जुड़े लेनदेन को लेकर दी गई थी. इससे पहले IRDAI ने कुछ लेनदेन में बीमा कमीशन की निर्धारित सीमा से बचने का मामला पाए जाने के बाद एक्सिस बैंक पर 2 करोड़ रुपये और मैक्स लाइफ पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.
मामले के अनुसार, एक्सिस बैंक को मैक्स लाइफ के शेयर 10 रुपये के अंकित मूल्य पर मिले थे. इसके बाद MFSL और उसके साझेदारों ने उचित बाजार मूल्य के आधार पर 54 रुपये से 166 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर इन शेयरों को दोबारा खरीदा था.
सेबी के कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि ये लेनदेन एक्सिस बैंक को बैंकएश्योरेंस साझेदारी के लिए मुआवजा देने वाली एक व्यापक व्यवस्था का हिस्सा थे. इससे MFSL को कथित तौर पर 3,911.95 करोड़ रुपये का नुकसान और एक्सिस समूह की संस्थाओं को लाभ होने का आरोप था.
प्रतिभूति कानून के तहत धोखाधड़ी के सबूत नहीं मिले
सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि बीमा क्षेत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन या उनसे बचने की कोशिश अपने आप में प्रतिभूति कानूनों के तहत धोखाधड़ी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. नियामक को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि शेयरधारकों को गलत जानकारी के आधार पर शेयरों में कारोबार करने के लिए प्रेरित किया गया था या MFSL के शेयर मूल्य में कृत्रिम तरीके से हेरफेर किया गया.
खुलासे से जुड़े आरोप भी खारिज
सेबी ने 2010 और 2015 में किए गए समझौतों से जुड़े पुट और कॉल विकल्पों की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने के आरोपों की भी जांच की. नियामक के अनुसार, शुरुआती कुछ खुलासों में लेनदेन की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, लेकिन उस समय लागू नियमों के आधार पर इसकी समीक्षा की गई.
दिसंबर 2015 से पहले के लेनदेन उस समय लागू लिस्टिंग एग्रीमेंट के तहत आते थे. इसमें बाद में लागू हुए लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों की तरह मात्रात्मक महत्वपूर्णता की सीमा तय नहीं थी.
सेबी ने इन आरोपों से जुड़ी कार्यवाही भी खत्म कर दी. नियामक ने कहा कि कारण बताओ नोटिस में यह स्थापित नहीं किया गया था कि कथित तौर पर छूटी हुई जानकारी का MFSL के कारोबार या शेयर के मूल्य निर्धारण पर क्या प्रभाव पड़ा. मुख्य धोखाधड़ी और खुलासे से जुड़े आरोप साबित नहीं होने के बाद सेबी ने मामले में नामित प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी खारिज कर दी.
वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में कारोबार बढ़ाने और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म मजबूत करने पर करेगी निवेश
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नेक्सएज कैपिटल (Nexedge Capital) ने अपने पहले फंडिंग राउंड में 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 170 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Mirae Asset Venture Investment और Elev8 Venture Partners ने किया. वेल्थ मैनेजमेंट और मल्टी-फैमिली ऑफिस कंपनी Nexedge Capital इस पूंजी का इस्तेमाल भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगी.
टेक्नोलॉजी और वरिष्ठ बैंकर नेटवर्क पर जोर
कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, वरिष्ठ बैंकरों के नेटवर्क का विस्तार करने और देशभर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा कंपनी एनआरआई ग्राहकों के लिए एक समर्पित सेवा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) कारोबार जैसे नए पूरक व्यवसाय भी विकसित करेगी. Nexedge Capital ग्राहकों की जरूरतों और लक्ष्यों के आधार पर वित्तीय निवेश एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन, एस्टेट प्लानिंग, कारोबार विस्तार और वैश्विक मोबिलिटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है.
18 महीने में 3 अरब डॉलर से ज्यादा का AUM
कंपनी के अनुसार, स्थापना के महज 18 महीने में Nexedge Capital का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 3 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. कंपनी करीब 1,300 ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. इसके अलावा कंपनी ने 95 से ज्यादा वरिष्ठ बैंकरों को अपने साथ जोड़ा है, जबकि 2026 में 50-60 और वरिष्ठ बैंकरों के जुड़ने की उम्मीद है. Nexedge Capital के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिरुद्ध तापड़िया ने कहा कि नई पूंजी से कंपनी बैंकरों की नियुक्ति तेज करने, देशभर में वितरण नेटवर्क मजबूत करने और अधिक परिवारों तक अपनी नेट वर्थ एडवाइजरी सेवाएं पहुंचाने में सक्षम होगी.
फरवरी 2025 में हुई थी कंपनी की स्थापना
Nexedge Capital की स्थापना अनिरुद्ध तापड़िया ने फरवरी 2025 में की थी. इससे पहले वह 360 ONE Wealth के सह-संस्थापक और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं. कंपनी के अन्य सह-संस्थापकों में सिद्धार्थ शॉ, विजेता शर्मा और पंकज वालिया शामिल हैं. इनके साथ 15 संस्थापक साझेदारों की टीम भी है, जिनके पास Citibank, Kotak Wealth, 360 One और Standard Chartered जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव है.
भारत के HNI और UHNI बाजार पर नजर
Mirae Asset Venture Investment के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत कुमार ने कहा कि कंपनी Nexedge Capital के ओनरशिप मॉडल को देखते हुए उसमें निवेश कर रही है. वहीं, Elev8 Venture Partners के मैनेजिंग पार्टनर नवीन होनागुड़ी ने कहा कि भारत में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (UHNI) सेगमेंट की संपत्ति लंबे समय तक बढ़ने के दौर की शुरुआत में है.
मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए मजबूत वापसी की. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसला था और निफ्टी भी 24,150 के नीचे खुला था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बाजार में खरीदारी लौटी. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 फीसदी चढ़कर 24,334.55 पर पहुंच गया. आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर मंगलवार की तेजी के बाद बाजार की आगे की दिशा, वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और प्रमुख शेयरों से जुड़े अपडेट पर रहेगी.
सेंसेक्स के 24 शेयरों में तेजी
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि छह शेयरों में गिरावट रही. इंडिगो 2.05 फीसदी की तेजी के साथ 5,220 रुपये पर बंद हुआ और सेंसेक्स का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा. अडाणी पोर्ट्स में 1.19 फीसदी, इंफोसिस में 1.15 फीसदी और ट्रेंट में 1.10 फीसदी की तेजी रही. इसके अलावा टाइटन 0.98 फीसदी, एसबीआई 0.87 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.84 फीसदी, टेक महिंद्रा 0.76 फीसदी, आईटीसी 0.74 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.64 फीसदी चढ़कर बंद हुए.
इन शेयरों में रही गिरावट
दूसरी ओर, इटरनल में 0.85 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. एचसीएल टेक 0.68 फीसदी, पावरग्रिड 0.53 फीसदी, बजाज फिनसर्व 0.29 फीसदी, एचडीएफसी बैंक 0.26 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर 0.15 फीसदी गिरकर बंद हुए.
रुपये में भी दिखी मजबूती
मंगलवार को भारतीय रुपये में भी सुधार देखने को मिला. दोपहर करीब 3:30 बजे रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी मजबूत होकर 95.4075 के स्तर पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.7450 के स्तर पर बंद हुआ था.
आज बाजार की दिशा के लिए अहम होंगे ये संकेत
मंगलवार की तेजी के बाद बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के संकेतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट पर रहेगी. मंगलवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली थी, ऐसे में आज यह देखना अहम होगा कि यह तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार में मुनाफावसूली का दबाव आता है.
इन शेयरों पर रखें नजर
शेयर बाजार में आज कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट के चलते Hindustan Copper, Honasa Consumer, Axis Bank, Canara HSBC Life Insurance, Ather Energy, Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, UCO Bank, Welspun Corp, Cipla, United Breweries और Varun Beverages समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. Hindustan Copper में सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) का ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त 2.9 करोड़ शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए हैं, जिससे OFS का कुल आकार 5.8 करोड़ शेयर यानी करीब 6% हिस्सेदारी हो गया है. Honasa Consumer ने Fluence Pharma में 58% हिस्सेदारी खरीदने की प्रस्तावित डील रद्द कर दी है. Axis Bank, Axis Securities और Axis Capital से जुड़े मामले में SEBI ने कार्यवाही समाप्त कर दी है.
Canara HSBC Life Insurance ने HSBC के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत GIFT City के जरिए बीमा उत्पादों के वितरण को बढ़ावा दिया जाएगा. Ather Energy के बोर्ड ने 16 लाख शेयर ₹1,230 प्रति शेयर और 79 लाख वारंट ₹1,260 प्रति वारंट के भाव पर आवंटित करने को मंजूरी दी है. Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में Ribbit Capital करीब 1.6% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है, जिसका संभावित आकार करीब ₹1,914 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹195 प्रति शेयर है. UCO Bank में वित्त मंत्रालय ने Executive Director राजेंद्र कुमार साबू को MD & CEO का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. Welspun Investments & Commercials और कंपनी के MD & CEO Vipul Mathur Welspun Corp में करीब 63 लाख शेयर यानी लगभग 2.4% हिस्सेदारी बेच सकते हैं, जिसकी संभावित ब्लॉक डील करीब ₹1,417 करोड़ और फ्लोर प्राइस ₹2,250 प्रति शेयर है. Cipla की Pithampur मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में USFDA ने 17 से 25 अगस्त के बीच फॉलो-अप cGMP निरीक्षण किया, जिसके बाद कंपनी को Form 483 में सात टिप्पणियां मिली हैं. United Breweries ने Heineken Silver का विस्तार Kerala, Odisha और Madhya Pradesh में करने की घोषणा की है. वहीं, Varun Beverages ने RTD अल्कोहलिक बेवरेज कारोबार के लिए KIVA Spirits and Company नाम से नई सब्सिडियरी बनाने और Tunisia में एक जॉइंट वेंचर स्थापित करने की घोषणा की है.
कर्नाटक FDA का बड़ा एक्शन, प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट मिलने के बाद उठाया कदम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग को लेकर कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने अमेजन (Amazon), स्विगी-इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और बिगबास्केटस (BigBasket) के फूड लाइसेंस अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिए हैं. यह कार्रवाई इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे (Datura/Thorn Apple) के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट किए जाने और उनकी बिक्री से जुड़ी शिकायतों के बाद की गई है. विभाग ने तीनों प्लेटफॉर्म्स को धतूरे से संबंधित सभी लिस्टिंग और विज्ञापन तत्काल हटाने तथा इसकी खाद्य उत्पाद के तौर पर बिक्री और वितरण रोकने का निर्देश दिया है.
धतूरे की लिस्टिंग पर सरकार सख्त
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक FDA ने तीनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके फूड लाइसेंस सस्पेंड किए हैं. विभाग ने प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सभी लिस्टिंग और विज्ञापन हटाने को कहा है, जिनमें धतूरे के फल या बीजों को इंसानों के खाने के लिए उपलब्ध कराया गया था. FDA के निर्देश के अनुसार, अगले आदेश तक इन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे को खाद्य उत्पाद के रूप में बेचने या वितरित करने की अनुमति नहीं होगी. विभाग ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि ऐसी प्रतिबंधित लिस्टिंग दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न हों.
खाने के लिए प्रतिबंधित है धतूरा
धतूरे को अंग्रेजी में ‘Thorn Apple’ कहा जाता है. यह एक जहरीला पौधा है, जिसके फल और बीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, इसका सेवन विषाक्तता का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है. कर्नाटक FDA के अनुसार, धतूरे के फल और बीजों को इंसानों के खाने के लिए खाद्य पदार्थ के तौर पर रखना, बेचना या वितरित करना प्रतिबंधित है. इसी वजह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसकी खाद्य उत्पाद के रूप में लिस्टिंग को गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघन माना गया है.
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध उत्पादों की निगरानी और उनकी लिस्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. बड़ी संख्या में उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तुओं की पहचान और उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है. कर्नाटक FDA की कार्रवाई इसी निगरानी व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत मानी जा रही है.
गैस कंप्रेशन, बैटरी स्टोरेज और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट; अकेले मिडिल ईस्ट से करीब ₹25,000 करोड़ के ऑर्डर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की दिग्गज इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने महज दो हफ्तों में करीब 40,000 करोड़ रुपये के बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं. कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट मिडिल ईस्ट के बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर तक के लिए मिले हैं. इनमें करीब 25,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिडिल ईस्ट से जुड़े हैं, जबकि अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई में बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का ऑर्डर भी शामिल है. लगातार मिल रहे इन बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स से L&T की ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने के साथ ही वैश्विक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है.
मिडिल ईस्ट में ₹5,000-10,000 करोड़ का बैटरी स्टोरेज ऑर्डर
L&T को मिडिल ईस्ट में तीन Battery Energy Storage System (BESS) प्रोजेक्ट्स के लिए 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. इन परियोजनाओं की कुल स्टोरेज क्षमता 6 GWh होगी. कंपनी इन प्रोजेक्ट्स के लिए पावर ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए सब-स्टेशन और अंडरग्राउंड केबल समेत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेगी. प्रत्येक प्रोजेक्ट में चार घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता होगी.
इन बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल कम मांग के दौरान अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने और पीक डिमांड के समय उसकी आपूर्ति के लिए किया जाएगा. इससे पावर ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने और रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. प्रोजेक्ट्स में लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.
₹15,000 करोड़ से ज्यादा का अल्ट्रा-मेगा गैस प्रोजेक्ट
इससे पहले L&T को खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े क्लाइंट के लिए गैस कंप्रेशन प्रोजेक्ट का अल्ट्रा-मेगा कॉन्ट्रैक्ट मिला था. L&T 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर को अल्ट्रा-मेगा कैटेगरी में रखती है. यह ऑर्डर कंपनी की सब्सिडियरी L&T Energy Hydrocarbon Onshore को मिला है.
इसके तहत कंपनी सॉर गैस की प्रोसेसिंग के लिए नए ऑनशोर इंस्टॉलेशन में गैस कंप्रेशन प्लांट के इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) का काम करेगी. प्रोजेक्ट में गैस इनलेट सुविधाओं, कंप्रेशन सिस्टम, कंडेनसेट और प्रोड्यूस्ड-वॉटर हैंडलिंग सिस्टम तथा प्रोपेन रेफ्रिजरेशन सिस्टम समेत कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
Together AI के लिए बनाएगी भारत की बड़ी AI फैक्ट्री
L&T ने 13 अगस्त को बताया था कि उसे भारत का सबसे बड़ा सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का बड़ा ऑर्डर मिला है. इसके तहत अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए चेन्नई स्थित L&T डेटा सेंटर कैंपस में 10,000 NVIDIA B300 GPU लगाए जाएंगे. इस ऑर्डर की वैल्यू 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये के बीच है.
यह प्रोजेक्ट AI इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में L&T की महत्वपूर्ण एंट्री मानी जा रही है. इस AI फैक्ट्री को L&T की AI इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडियरी LTN Compute विकसित करेगी और इसे Vyoma के चेन्नई डेटा सेंटर कैंपस में स्थापित किया जाएगा.
चेन्नई कैंपस को गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर साइट के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसके पहले चरण को 250 मेगावाट क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें 150 MVA का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है. इससे भविष्य में AI फैक्ट्री की क्षमता को और बढ़ाने की गुंजाइश रहेगी.
ग्लोबल कारोबार में बढ़ रही L&T की पकड़
लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर से साफ है कि L&T की पहुंच पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से आगे बढ़कर एनर्जी स्टोरेज, डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों तक पहुंच रही है. मिडिल ईस्ट में ऊर्जा परियोजनाओं और भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए लंबी अवधि में ऑर्डर बुक और कारोबार की ग्रोथ को मजबूत कर सकते हैं.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे. सरकार का यह कदम देश में निवेश बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
60 दिनों में बदलेंगे नियम
पीयूष गोयल ने टोक्यो में ‘निक्केई एशिया’ के साथ बातचीत में कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की इच्छुक दो बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ हाल में बातचीत हुई है. कंपनियों की ओर से नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को लेकर जताई गई चिंताओं का समाधान किया गया है. सरकार अब अगले दो महीनों में जरूरी नियमों में बदलाव कर उन्हें लागू करेगी, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को किसी तरह की नियामकीय बाधा का सामना न करना पड़े.
BIS की मंजूरी प्रक्रिया होगी आसान
सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मौजूदा फ्रेमवर्क को भी आसान बनाने पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को सरल और तेज करना है. सरकार ऐसे सप्लायर्स से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रही है, जो मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग मानकों के दायरे में आते हैं.
गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग की वास्तविक जरूरतों और निष्पक्ष व्यापार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कंपनियां केवल दूसरे देशों से उत्पाद आयात करने की मांग कर सकती हैं, लेकिन ऐसी मांगों पर फैसला घरेलू उद्योग और निष्पक्ष व्यापार को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.
सेमीकॉन 2.0 से 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है. इसके तहत सरकार की योजना निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अगले डेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और इससे जुड़े उद्योगों में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश शुरू कराने की है.
सरकार का मानना है कि आसान रेगुलेशन, तेज मंजूरी और बड़े निवेश से भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ऑटोमोटिव कंपोनेंट और इससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में भी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन सकता है.
‘प्लस वन’ रणनीति से आगे बढ़ने की कोशिश
भारत अब खुद को केवल कंपनियों के ‘चाइना प्लस वन’ विकल्प के तौर पर सीमित नहीं रखना चाहता. सरकार की कोशिश है कि देश में ऐसी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन तैयार हो, जो वैश्विक कंपनियों को लंबे समय के लिए भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए आकर्षित करे.
पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा पहल के बाद सरकार आगे ‘सेमीकंडक्टर 3.0’ की दिशा में भी बढ़ सकती है.
स्टेनलेस स्टील उत्पाद निर्माता कंपनी का IPO फ्रेश इश्यू और OFS का होगा मिश्रण, बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में इस्तेमाल होगी इश्यू से जुटाई रकम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
स्टेनलेस स्टील उत्पाद बनाने वाली कंपनी MP Steel ने शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए हैं. कंपनी की योजना IPO के जरिए 95 करोड़ रुपये तक जुटाने की है. IPO में 95 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और प्रमोटरों की ओर से 23 लाख से अधिक इक्विटी शेयरों की बिक्री यानी ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल होगा.
कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने में करेगी. यह कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन रणनीति का हिस्सा है. इसके अलावा कुछ रकम बढ़ती वर्किंग कैपिटल जरूरतों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.
बिलेट यूनिट से मजबूत होगा बैकवर्ड इंटीग्रेशन
MP Steel मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बाजार के लिए स्टेनलेस स्टील उत्पाद बनाती है. कंपनी के उत्पाद डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, हार्डवेयर, शिपबिल्डिंग, पोर्ट्स, पावर प्लांट्स और रिफाइनरी समेत कई क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारियों और निर्माताओं को सप्लाई किए जाते हैं.
कंपनी की गुजरात के मेहसाणा में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. घरेलू स्तर पर कंपनी का बिक्री नेटवर्क 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में फैला है. यहां वह ट्रेडर्स और सीधे ग्राहकों के जरिए अपने उत्पाद बेचती है.
21 देशों में करती है निर्यात
MP Steel का कारोबार केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है. कंपनी अपने उत्पादों का निर्यात 21 देशों में करती है. इसके प्रमुख विदेशी बाजारों में UAE, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, ब्राजील और पोलैंड शामिल हैं. कंपनी की योजना नई बिलेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के जरिए उत्पादन प्रक्रिया के एक और हिस्से को अपने नियंत्रण में लाने की है. इससे स्टेनलेस स्टील मैन्युफैक्चरिंग कारोबार के विस्तार के साथ कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन क्षमता भी मजबूत होने की उम्मीद है.
FY26 में 413 करोड़ रुपये रहा राजस्व
वित्त वर्ष 2025-26 में MP Steel ने 413.41 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया. इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 15.81 करोड़ रुपये रहा. IPO के लिए Monarch Networth Capital को एकमात्र बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है, जबकि KFin Technologies इस इश्यू का रजिस्ट्रार है.
त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, उत्पादन अनुमान घटने और वैश्विक कीमतों में उछाल से बढ़ी कीमतें; ISMA ने कहा- देश में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी अस्थायी है और इसे देश में चीनी की कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. ISMA के मुताबिक 2025-26 में भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन रहने की संभावना है. सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान है, जो अगले चीनी वर्ष में भी घरेलू आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है.
ISMA ने कहा कि हाल में चीनी कीमतों में मजबूती कई अस्थायी कारणों के चलते आई है. इनमें शुरुआती अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारों के मौसम में बढ़ी मांग, बाजार की धारणा और अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में तेजी प्रमुख हैं. इन कारणों से कीमतों पर दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन घरेलू बाजार में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं है.
सरकार के कदम एहतियाती और संतुलित
ISMA ने त्योहारों के मौसम में बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का स्वागत किया है. संगठन के मुताबिक 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी आयात की अनुमति, स्टॉक रखने की सीमा, चीनी भंडार का भौतिक सत्यापन, GST जांच के साथ साप्ताहिक स्टॉक खुलासा और 2026-27 के पेराई सीजन को आगे बढ़ाना बाजार में भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. डीलरों के लिए देशभर में 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है. ISMA ने इसे और घटाकर 200 टन करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनुशासन मजबूत हो सके.
ISMA के अनुसार कुछ कारोबारियों की ओर से जमाखोरी और पहले से स्टॉक जमा करने के कारण बड़े थोक खरीदारों ने अपनी 1.5-2 महीने की जरूरत के बराबर चीनी का भंडार बना लिया था. इससे बड़ी मात्रा में चीनी अस्थायी तौर पर बाजार के सर्कुलेशन से बाहर हो गई और पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद कमी जैसी स्थिति का आभास पैदा हुआ.
संगठन ने कहा कि शुल्क-मुक्त आयात मुख्य रूप से अतिरिक्त आपूर्ति का विकल्प है. इसे एहतियाती और बाजार में भरोसा बढ़ाने वाले कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा.
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा, "भारत में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. सरकार और उद्योग त्योहारों की मांग को देखते हुए पहले से कदम उठा रहे हैं. आयात विंडो, स्टॉक से जुड़े उपाय और पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से बाजार में अस्थायी तेजी को संभालने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे."
चीनी की नई घरेलू आपूर्ति जल्द बढ़ेगी
ISMA, NFCSF और चीनी मिलें 2026-27 के पेराई सीजन की शुरुआत 10-15 दिन पहले करने की दिशा में काम कर रही हैं. इसका उद्देश्य त्योहारों के मौसम में घरेलू बाजार में नई चीनी की उपलब्धता जल्द बढ़ाना है.
तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले ही शुरू हो चुकी है. ISMA के मुताबिक पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 4 लाख टन के मुकाबले करीब 10 लाख टन तक पहुंच सकता है. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति मिलेगी.
ISMA के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने कहा कि पेराई सीजन को 10-15 दिन पहले शुरू करने से उस समय अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, जब बाजार को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी. मौजूदा स्टॉक और सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज कोटा के साथ नई घरेलू चीनी की उपलब्धता से मौजूदा दबाव कम होने की उम्मीद है.
इथेनॉल नहीं है चीनी कीमतों में तेजी की वजह
ISMA ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा चीनी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है. संगठन के मुताबिक इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन पेराई सीजन शुरू होने से पहले घरेलू खपत और उपलब्ध चीनी के कुल संतुलन को ध्यान में रखकर तय किया जाता है.
इथेनॉल कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की तस्वीर भी काफी बदल गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 2021-22 में सिर्फ 17 फीसदी थी. वहीं चीनी आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति करीब 1,197 करोड़ लीटर रहने और ब्लेंडिंग दर 20 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
ISMA ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इससे मिलों को किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर करने में मदद मिली है. 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 के करीब 97 फीसदी गन्ना बकाये का भुगतान किया जा चुका था.
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि आंकड़े यह नहीं बताते कि इथेनॉल मौजूदा चीनी कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार है. उनके मुताबिक चीनी डायवर्जन घरेलू जरूरतों और कुल चीनी संतुलन का आकलन करने के बाद ही तय किया जाता है. साथ ही इथेनॉल आपूर्ति में अब अनाज की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी 16 फीसदी से ज्यादा महंगी
वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में तेज उछाल का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा है. ISMA के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत 30 जून 2026 को 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई. यानी करीब दो महीने से भी कम समय में कीमतों में 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी से आयातित चीनी की लागत बढ़ती है, जिससे घरेलू चीनी कीमतों को भी समर्थन मिलता है.
2016-17 जैसी स्थिति नहीं
ISMA ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2016-17 के चीनी सीजन से नहीं करने की सलाह दी है. संगठन के मुताबिक 2016-17 में देश को वास्तविक सूखे के कारण उत्पादन में बड़ी कमी का सामना करना पड़ा था. उस समय चीनी उत्पादन करीब 203 लाख टन रहा था, जबकि घरेलू मांग 245-250 लाख टन के आसपास थी.
इसके मुकाबले मौजूदा स्थिति काफी आरामदायक है. 2025-26 में करीब 279 लाख टन शुद्ध उत्पादन और करीब 35 लाख टन के अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक के साथ घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है. ऐसे में मौजूदा सरकारी कदम किसी संरचनात्मक कमी को दूर करने के बजाय त्योहारों के दौरान बाजार को स्थिर रखने के लिए एहतियाती और संक्रमणकालीन उपाय हैं.
त्योहारों तक पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने की उम्मीद
ISMA ने कहा कि मौजूदा स्टॉक, तमिलनाडु और कर्नाटक में शुरू हुई विशेष पेराई, 2026-27 सीजन की जल्द शुरुआत, सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज और शुल्क-मुक्त आयात की अतिरिक्त सुविधा के कारण घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी.
संगठन के मुताबिक सरकार की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदमों का असर दिखने लगा है और पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में नरमी आई है. त्योहारों की खरीदारी सामान्य होने और नई घरेलू आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी नरमी आने की उम्मीद है. इससे त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.