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इस Power Plant पर आया Adani का दिल, अपना बनाने के लिए चल सकते हैं दांव
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से पहले तक अडानी समूह आक्रामक ढंग से विस्तार की योजना पर काम कर रहा था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
गौतम अडानी (Gautam Adani) की दिलचस्पी जहां अपने NBFC कारोबार को चलाने में कम होती जा रही है. वहीं, वह एक पावर प्लांट को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अडानी संकट में फंसे अनिल अंबानी के कोयले से चलने वाले पावर प्लांट को अपना बनाना चाहते हैं. इस प्लांट की इंडियन बैंकरप्सी कोर्ट की ओर से नीलामी की जा रही है. ये खबर ऐसे समय सामने आई है जब अडानी ग्रुप (Adani Group) ने हाल ही में 2.8 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई है.
पुरानी रणनीति पर लौटेंगे
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि गौतम अडानी पावर प्लांट की नीलामी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, फिलहाल वह किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अडानी इस पर दांव जरूर लगाना चाहेंगे. क्योंकि उनके पास बड़ी पूंजी आई है और उसे वो विस्तार की योजनाओं को अमल में लाने पर खर्च कर सकते हैं. गौरतलब है कि अडानी ग्रुप हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से पहले तक आक्रामक ढंग से अपना कारोबार फैला रहा था. अब जब हिंडनबर्ग का असर काफी हद तक खत्म हो गया है, तो समूह फिर से पुरानी रणनीति पर लौट सकता है.
इस तरह मिलेगा फायदा
यदि अडानी ग्रुप इस नीलामी में शामिल होता है और पावर प्लांट को अपना बना लेता है, तो इससे उसकी कोल पावर प्रोजेक्ट्स की क्षमता बढ़ जाएगी. साथ ही यह डील समूह के कारोबार पर सकारात्मक असर भी डाल सकती है. ये पावर प्लांट विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड (Vidarbha Industries Power Ltd) के हैं, जिसकी प्रमोटर अनिल अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस पावर है. विदर्भ इंडस्ट्रीज मध्य भारत में 600 मेगावाट जनरेशन फैसिलिटीज को ऑपरेट करती है. वहीं, रिलायंस पावर कंपनी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक ऑफर देने पर भी विचार कर रही है.
इसे बेचना चाहते हैं Adani
वहीं, गौतम अडानी समूह नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) अडानी कैपिटल में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है. दरअसल, अडानी इस कारोबारी से बाहर निकलना चाहते हैं, इसलिए अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहे हैं. निजी इक्विटी समूह बेन कैपिटल, कार्लाइल ग्रुप और सेर्बेरस कैपिटल मैनेजमेंट ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. ये तीनों कंपनियां अडानी कैपिटल को खरीदने के लिए अगले कुछ हफ्तों में बोलियां लगाने को तैयार हैं. अडानी कैपिटल की कमान इस समय गौरव गुप्ता के हाथों में है. बतौर सीईओ उन्होंने कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए काफी कुछ किया है. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में लंबा अनुभव रखने वाले गौरव ने 2016 में अडानी समूह जॉइन किया था. अडानी कैपिटल में 90% हिस्सेदारी इसके प्रमोटरों के पास है.
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